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शुक्रवार, 28 मार्च 2014

नीमराणा-रानी की बावली-Stepwell of Neemrana, Rani ki Baoli

भानगढ-सरिस्का-पान्डुपोल-यात्रा के सभी लेख के लिंक नीचे दिये गये है।
01- दिल्ली से अजबगढ होते हुए भानगढ तक की यात्रा।
02- भानगढ में भूतों के किले की रहस्मयी दुनिया का सचित्र विवरण
03- राजस्थान का लघु खजुराहो-सरिस्का का नीलकंठ महादेव मन्दिर
04- सरिस्का वन्य जीव अभ्यारण में जंगली जानवरों के मध्य की गयी यात्रा।
05- सरिस्का नेशनल पार्क में हनुमान व भीम की मिलन स्थली पाण्डु पोल
06- राजा भृतहरि समाधी मन्दिर व गुफ़ा राजा की पूरी कहानी विवरण सहित
07- नटनी का बारा, उलाहेडी गाँव के खण्डहर व पहाडी की चढाई
08- नीमराणा की 12 मंजिल गहरी ऐतिहासिक बावली दर्शन के साथ यात्रा समाप्त

BHANGARH-SARISKA-PANDUPOL-NEEMRANA-08                           SANDEEP PANWAR

चलो भोजन तैयार है। पहले भोजन करते है। पूरी सब्जी व खीर की महक घर से बाहर भी आ रही है। भोजन के बाद गाँव के पास वाली पहाडी पर आरोहण करने के साथ यहाँ से प्रस्थान कर दिया जायेगा। आज अशोक भाई के यहाँ से विदाई होनी है इसलिये आज तो और भी लजीज भोजन बनाया गया है। भोजन में पूरी सब्जी के साथ खीर देखकर जीभ ललचाने लगी। भोजन करने से पहले भोजन स्थल का एक फ़ोटो लिया। मेरे बैठने का आसन उस जगह था। जहाँ से रसोई सामने ही दिख रही थी। परिवार के तीन सदस्य रसोई में लगे हुए थे। अशोक भाई ने भोजन परोसने में सहयोग दिया।


बुधवार, 26 मार्च 2014

Natni ka bara and Ulha heri Villege नटनी का बारा व उलाहेडी गाँव

भानगढ-सरिस्का-पान्डुपोल-यात्रा के सभी लेख के लिंक नीचे दिये गये है।
01- दिल्ली से अजबगढ होते हुए भानगढ तक की यात्रा।
02- भानगढ में भूतों के किले की रहस्मयी दुनिया का सचित्र विवरण
03- राजस्थान का लघु खजुराहो-सरिस्का का नीलकंठ महादेव मन्दिर
04- सरिस्का वन्य जीव अभ्यारण में जंगली जानवरों के मध्य की गयी यात्रा।
05- सरिस्का नेशनल पार्क में हनुमान व भीम की मिलन स्थली पाण्डु पोल
06- राजा भृतहरि समाधी मन्दिर व गुफ़ा राजा की पूरी कहानी विवरण सहित
07- नटनी का बारा, उलाहेडी गाँव के खण्डहर व पहाडी की चढाई
08- नीमराणा की 12 मंजिल गहरी ऐतिहासिक बावली दर्शन के साथ यात्रा समाप्त

BHANGARH-SARISKA-PANDUPOL-NEEMRANA-07                           SANDEEP PANWAR

केक खाने के बाद एक बार फ़िर गाडी में सवार हो गये। अब हमें नटनी का बारा नाम से मशहूर हुई जगह देखनी थी। यह जगह सरिस्का से अलवर जाने वाली सडक के किनारे ही है। बताते है कि काफ़ी पहले सडक के साथ बहने वाली नदी को पार करने के लिये एक नटनी नदी किनारे के दोनों पहाडों पर रस्सी बाँध कर आर-पार जाया करती थी। नटनी दोनों पर्वतों के बीच की खाई को प्रतिदिन दो बार पार कर इस ओर से उस ओर आया-जाया करती थी। एक दिन उस नटनी की मौत उसी रस्सी से गिरने से हो गयी। कहते है नटनी को नीचे अपना बच्चा दिखायी दे गया। जिस कारण वह ममता के मोह में फ़ंसने होने से अपना संतुलन सम्भाल नहीं सकी। लगभग अस्सी फ़ुट की ऊँचाई से गिरते के कारण नटनी तत्काल मौत की नीन्द सो गयी। घुडसवार की गिरता है मैदाने जंग में।


सोमवार, 24 मार्च 2014

Bhartari cave and Samadhi temple राजा भृतहरि गुफ़ा व समाधी मन्दिर

भानगढ-सरिस्का-पान्डुपोल-यात्रा के सभी लेख के लिंक नीचे दिये गये है।
01- दिल्ली से अजबगढ होते हुए भानगढ तक की यात्रा।
02- भानगढ में भूतों के किले की रहस्मयी दुनिया का सचित्र विवरण
03- राजस्थान का लघु खजुराहो-सरिस्का का नीलकंठ महादेव मन्दिर
04- सरिस्का वन्य जीव अभ्यारण में जंगली जानवरों के मध्य की गयी यात्रा।
05- सरिस्का नेशनल पार्क में हनुमान व भीम की मिलन स्थली पाण्डु पोल
06- राजा भृतहरि समाधी मन्दिर व गुफ़ा राजा की पूरी कहानी विवरण सहित
07- नटनी का बारा, उलाहेडी गाँव के खण्डहर व पहाडी की चढाई
08- नीमराणा की 12 मंजिल गहरी ऐतिहासिक बावली दर्शन के साथ यात्रा समाप्त

BHANGARH-SARISKA-PANDUPOL-NEEMRANA-06                           SANDEEP PANWAR

भानगढ-सरिस्का-पाण्डुपोल देखने के बाद अब महाराजा वीर विक्रमादित्य के बडे भाई राजा भृतहरि उर्फ़ भरथरी की तपस्या स्थली के दर्शन करने चलते है। विक्रम ने ही विक्रम संवत का शुभारभ कराया था। जहाँ अंग्रेजी नव वर्ष 1 जनवरी को शुरु होता है तो वही विक्रम संवत बोले तो हिन्दू नव वर्ष चैत्र मास के नवरात्र के साथ आरम्भ होता है। मैंने उज्जैन में इन्ही राजा की एक तपस्या स्थली देखी थी। आज अलवर जिले में स्थित इनकी दूसरी तपस्या स्थली की बात हो रही है।



गुरुवार, 20 मार्च 2014

Padu Pole-A big hole in a mountain हनुमान व भीम मिलन स्थल- पाण्डु पोल

भानगढ-सरिस्का-पान्डुपोल-यात्रा के सभी लेख के लिंक नीचे दिये गये है।
01- दिल्ली से अजबगढ होते हुए भानगढ तक की यात्रा।
02- भानगढ में भूतों के किले की रहस्मयी दुनिया का सचित्र विवरण
03- राजस्थान का लघु खजुराहो-सरिस्का का नीलकंठ महादेव मन्दिर
04- सरिस्का वन्य जीव अभ्यारण में जंगली जानवरों के मध्य की गयी यात्रा।
05- सरिस्का नेशनल पार्क में हनुमान व भीम की मिलन स्थली पाण्डु पोल
06- राजा भृतहरि समाधी मन्दिर व गुफ़ा राजा की पूरी कहानी विवरण सहित
07- नटनी का बारा, उलाहेडी गाँव के खण्डहर व पहाडी की चढाई
08- नीमराणा की 12 मंजिल गहरी ऐतिहासिक बावली दर्शन के साथ यात्रा समाप्त

BHANGARH-SARISKA-PANDUPOL-NEEMRANA-05                           SANDEEP PANWAR

हमारी गाडी पान्डु पोल मन्दिर के सामने जा पहुँची। यह वही मन्दिर बताया गया है जहाँ महाबली भीम के मार्ग में श्रीराम भक्त हनुमान जी की पूँछ आ गयी थी। गाडी से उतर कर मन्दिर की ओर बढने लगे। मन्दिर की सीढियों के सामने से होते हुए मन्दिर से आगे निकल गये। कुछ साथी मन्दिर के अन्दर जाने लगे तो अशोक भाई ने उन्हे वापिस बुलाया। अशोक भाई के साथ मेरी बात पहले ही हो चुकी थी। तय हुआ था कि मन्दिर जाने से पहले पाण्डु पोल झरना वाला स्थान देखने जायेंगे। अशोक जी यहाँ कई बार आ चुके है जिसमें एक बार उन्हे पाण्डु पोल तक जाने की अनुमति नहीं मिली थी। जैसे ही हम मन्दिर के आगे से घूमते हुए मन्दिर के पीछे पहुँचे तो देखा कि सामने से कुछ लोग चले आ रहे है।


मंगलवार, 18 मार्च 2014

Sariska wild life sanctuary/National Park सरिस्का अभयारण्य/उद्यान/नेशनल पार्क

भानगढ-सरिस्का-पान्डुपोल-यात्रा के सभी लेख के लिंक नीचे दिये गये है।
01- दिल्ली से अजबगढ होते हुए भानगढ तक की यात्रा।
02- भानगढ में भूतों के किले की रहस्मयी दुनिया का सचित्र विवरण
03- राजस्थान का लघु खजुराहो-सरिस्का का नीलकंठ महादेव मन्दिर
04- सरिस्का वन्य जीव अभ्यारण में जंगली जानवरों के मध्य की गयी यात्रा।
05- सरिस्का नेशनल पार्क में हनुमान व भीम की मिलन स्थली पाण्डु पोल
06- राजा भृतहरि समाधी मन्दिर व गुफ़ा राजा की पूरी कहानी विवरण सहित
07- नटनी का बारा, उलाहेडी गाँव के खण्डहर व पहाडी की चढाई
08- नीमराणा की 12 मंजिल गहरी ऐतिहासिक बावली दर्शन के साथ यात्रा समाप्त

BHANGARH-SARISKA-PANDUPOL-NEEMRANA-04                           SANDEEP PANWAR

हमारी स्कारपियो अजबगढ-भानगढ-नीलकंठ के बाद सरिस्का के प्रवेश दरवाजे पर पहुँच गयी। अशोक जी गाडी से उतरकर टिकट खिडकी पर जा पहुँचे। मैंने गाडी से बाहर निकल कर आसपास के फ़ोटो ले लिये। यहाँ गेट के बाहर ही सरिस्का नेशनल पार्क में प्रवेश करने के बारे में कुछ जरुरी बाते लिखी हुई थी। जिसमें सबसे जरुरी बात बाइक सहित फ़्री में दो दिन सरिस्का वन में जाने वाली लगी। मंगलवार व शनिवार को बिना टिकट प्रवेश करने की सुविधा दी गयी है। अशोक जी को इस बात की पहले से जानकारी थी इसलिये उन्होंने आज का दिन सरिस्का के लिये विशेष तौर पर चुना है।


शुक्रवार, 14 मार्च 2014

Sariska- Neelkanth Mahadev Temple सरिस्का-नीलकंठ महादेव मन्दिर

भानगढ-सरिस्का-पान्डुपोल-यात्रा के सभी लेख के लिंक नीचे दिये गये है।
01- दिल्ली से अजबगढ होते हुए भानगढ तक की यात्रा।
02- भानगढ में भूतों के किले की रहस्मयी दुनिया का सचित्र विवरण
03- राजस्थान का लघु खजुराहो-सरिस्का का नीलकंठ महादेव मन्दिर
04- सरिस्का वन्य जीव अभ्यारण में जंगली जानवरों के मध्य की गयी यात्रा।
05- सरिस्का नेशनल पार्क में हनुमान व भीम की मिलन स्थली पाण्डु पोल
06- राजा भृतहरि समाधी मन्दिर व गुफ़ा राजा की पूरी कहानी विवरण सहित
07- नटनी का बारा, उलाहेडी गाँव के खण्डहर व पहाडी की चढाई
08- नीमराणा की 12 मंजिल गहरी ऐतिहासिक बावली दर्शन के साथ यात्रा समाप्त

BHANGARH-SARISKA-PANDUPOL-NEEMRANA-03                           SANDEEP PANWAR

भानगढ से गाड़ी चलते ही दो साथी भूख लगने की बात कहने लगे तो अशोक भाई बोले, चलो सरिस्का पहुँचकर खाना खायेंगे। भानगढ से सरिस्का में प्रवेश दरवाजे की दूरी 30 किमी है। जबकि हमें उससे पहले नीलकंठ महादेव मन्दिर देखने भी जाना है जिसमें कम से कम दो घन्टे का समय लग जाना है। इसलिये तय हुआ कि हाइवे पर पहुँचते ही बैठने लायक जगह देखकर रुक जायेंगे। हाईवे पर आते ही टहला की ओर मुड़ते ही दो दुकाने बनी है इसलिये गाड़ी किनारे लगा कर भोजन की तैयारी होने लगी। अशोक भाई घर से 30 पराँठे व 6 लीटर छाय लेकर आये थे। गाड़ी से खाना निकाल कर सब लोगों के एक साथ बैठने के लिये बैंच व तख्त एक जगह मिला दिये।



बुधवार, 12 मार्च 2014

Bhangarh-India's most haunted place भानगढ-भारत का सबसे बदनाम भूतहा किला

भानगढ-सरिस्का-पान्डुपोल-यात्रा के सभी लेख के लिंक नीचे दिये गये है।
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02- भानगढ में भूतों के किले की रहस्मयी दुनिया का सचित्र विवरण
03- राजस्थान का लघु खजुराहो-सरिस्का का नीलकंठ महादेव मन्दिर
04- सरिस्का वन्य जीव अभ्यारण में जंगली जानवरों के मध्य की गयी यात्रा।
05- सरिस्का नेशनल पार्क में हनुमान व भीम की मिलन स्थली पाण्डु पोल
06- राजा भृतहरि समाधी मन्दिर व गुफ़ा राजा की पूरी कहानी विवरण सहित
07- नटनी का बारा, उलाहेडी गाँव के खण्डहर व पहाडी की चढाई
08- नीमराणा की 12 मंजिल गहरी ऐतिहासिक बावली दर्शन के साथ यात्रा समाप्त

BHANGARH-SARISKA-PANDUPOL-NEEMRANA-02                           SANDEEP PANWAR

हमारी गाड़ी घाटा व थाना गाजी नामक जगह की ओर से आयी थी। उसके बाद हम अजबगढ के खण्ड़हरों से होते हुए भानगढ तक पहुँचे। आज आपको भानगढ के भूतों वाले किले में घूमाया व इसके बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। जयपुर से सरिस्का/ अलवर जाने वाले मुख्य मार्ग से भानगढ किले की दूरी लगभग 3 किमी हटकर है। इस मोड़ से कोई एक किमी पहले सरिस्का की ओर सारा माता मन्दिर आता है। यहाँ रात ठहरने के ठिकाना मिल जाता है। यह मन्दिर भानगढ से वापिस आते समय सीधे हाथ पड़ता है।


सोमवार, 10 मार्च 2014

Let's go to Bhangarh आओ अजबगढ होकर भानगढ चले

भानगढ-सरिस्का-पान्डुपोल-यात्रा के सभी लेख के लिंक नीचे दिये गये है।
01- दिल्ली से अजबगढ होते हुए भानगढ तक की यात्रा।
02- भानगढ में भूतों के किले की रहस्मयी दुनिया का सचित्र विवरण
03- राजस्थान का लघु खजुराहो-सरिस्का का नीलकंठ महादेव मन्दिर
04- सरिस्का वन्य जीव अभ्यारण में जंगली जानवरों के मध्य की गयी यात्रा।
05- सरिस्का नेशनल पार्क में हनुमान व भीम की मिलन स्थली पाण्डु पोल
06- राजा भृतहरि समाधी मन्दिर व गुफ़ा राजा की पूरी कहानी विवरण सहित
07- नटनी का बारा, उलाहेडी गाँव के खण्डहर व पहाडी की चढाई
08- नीमराणा की 12 मंजिल गहरी ऐतिहासिक बावली दर्शन के साथ यात्रा समाप्त

BHANGARH-SARISKA-PANDUPOL-NEEMRANA-01                           SANDEEP PANWAR
आज एक नई यात्रा की शुरुआत करते है। 28-02-2014 को इस यात्रा की विधिवत शुरुआत हुई थी लेकिन इसकी तैयारी महीने भर पहले से ही शुरु हो चुकी थी। कोई महीना भर 26 जनवरी के आसपास पहले मेरे मोबाइल पर अनसेव नम्बर से एक कॉल आयी। फ़ोन करने वाले ने कहा कि संदीप पवाँर जी मैं नीमराणा, अलवर जिला, राजस्थान से अशोक शर्मा बोल रहा हूँ। अशोक शर्मा नीमराणा कुछ जाना-पहचाना सा नाम लगा। अशोक जी ने बात आगे बढाते हुए कहा। संदीप जी आपको शायद याद होगा कि मैंने पहले भी आपसे बात की है। हाँ, अशोक जी याद तो आ रहा है। लेकिन आपका नम्बर सेव नहीं है इसलिये थोड़ा असंमजस हो गया था। 

अशोक जी बोले, आपसे एक बात कहनी है। मैंने कहा, कहिए। संदीप जी बात ऐसी है कि फ़रवरी के आखिरी सप्ताह में मैं अपने कुछ दोस्तों के साथ भानगढ व सरिस्का जाना चाह रहा हूँ। मैंने आपके ब्लॉग के सब लेख पढे हुए है। जिससे मुझे पता है कि अभी तक आप भानगढ नहीं गये है। हाँ जी, आप सही कह रहे है मैं अभी तक भानगढ नहीं गया हूँ। आप हमारे साथ भानगढ जाना चाहोगे? जरुर जाना चाहूँगा। मैं घूमने का न्यौता कैसे नकार सकता था।


शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2014

Colourful programme in Bikaner stadium बीकानेर स्टेडियम में रंगारंग कार्यक्रम

बीकानेर लडेरा गाँव व स्टेडियम यात्रा के सभी लिंक नीचे दिये गये है।
BIKANER LADERA CAMEL FESTIVAL-03
रात को बीकानेर के करणी सिंह स्टेडियम में लडेरा से सम्बंधित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम है। मैं और राकेश वहाँ जायेंगे तब राघवेन्द्र भाई से मुलाकात होगी। फ़ाटक खुल चुका है चलो पहले राकेश भाई के घर चलते है। घर से बाइक लेकर स्टेडियम जायेंगे। स्टेडियम के कार्यक्रम देखेंगे और वापिस आ जायेंगे। राकेश घर आकर बोला, जाट भाई मैं कल आपके साथ शायद वापिस नहीं जा पाऊँगा? मैं दो-चार दिन बाद जाऊँगा। राकेश के पिताजी गाँव में रहते है। हो सकता है राकेश उनके पास जाना चाहता हो। मेरे व अपना, वापसी का टिकट राकेश ने अपनी आईड़ी से ही बुक किया था। मैंने राकेश से कहा कि अगर तुम कल नहीं जाना चाहते तो मैं आज रात की ट्रेन से ही दिल्ली वापिस जाऊँगा।



गुरुवार, 13 फ़रवरी 2014

Delhi to Bikaner (Ladera camel festival) दिल्ली से बीकानेर (लडेरा गाँव, ऊँट उत्सव)


BIKANER LADERA CAMEL FESTIVAL-01
आज दिनांक 14-01-2014 को बीकानेर के लडेरा गाँव में होने वाले ऊँट उत्सव देखने चलते है। दो साल पहले राजस्थान घूमने गया था। उस यात्रा में जोधपुर, जैसलमेर के साथ बीकानेर के कई स्थल देखे गये थे। उस यात्रा के दौरान कोई उत्सव आदि देखने को नहीं मिला था। बीते वर्ष बीकानेर के रहने वाले राकेश बिश्नोई से ब्लॉग के जरिये मुलाकात हुई, जो आज एक अच्छी खासी दोस्ती में बदल गयी है। वैसे तो मैं ज्यादा दोस्त नहीं बनाया करता, क्योंकि अपने जैसे मिजाज के इन्सान कम ही टकराते है, लेकिन वर्तमान में जितने भी है। सभी घुमक्कड़ है या घुमक्कड़ी को चाहने वाले है। जब राकेश मेरे साथ किन्नर कैलाश की खतरनाक ट्रेकिंग करने गया था तो उसी यात्रा में राकेश ने बताया था कि बीकानेर के पास लडेरा गाँव में रेत के टीलों पर ऊँट उत्सव होता है। 


बुधवार, 26 दिसंबर 2012

Bikaner-Raisar's Colour full evening at dunes बीकानेर- रायसर रेत के टीलों पर एक रंगीन सुहानी मदहोश नशीली शाम


बीकानेर में दिन में हम करणी माता चूहों वाला मन्दिर, जूनागढ़ किला, राजमहल, रिजार्ट, सहित कई सारे होटल देखने के बाद शाम को हमारी बारी बीकानेर की रेत के टीलों पर एक कैम्प में रंगीन नशीली शाम बिताने की देखने की इच्छा हो गयी थी। इस प्रकार की जगह पर लगने वाले कैम्प रात को अंधेरा होने के बाद शुरु होते थे, जिस कारण हम भी अंधेरा होने से पहले ही वहाँ पहुँच गये थे। चलिये आपको भी इसी शानदार मस्त स्थल की सैर करवा देता हूँ।

रायसर कैम्प की ओर बढ़ते ऊंट पर सवार विदेशी मेहमान।

सोमवार, 24 दिसंबर 2012

बीकानेर के कुछ होटल। Bikaner's hotels


आपको पिछले कई लेख से बीकानेर के होटल दिखाये जा रहे है। इसी क्रम में आज आपको यहाँ के कुछ और होटल दिखाये जा रहे है, यहाँ हम लोग रायसर कैम्प की जाते हुए गये थे। बीकानेर से रायसर जाते समय यह सुन्दर-सुन्दर होटल हमारे मार्ग में आ गये थे जिस कारण हमने इन्हें भी देख ड़ाला था। होटलों को दिखाने का अभिप्राय सिर्फ़ इतना ही है कि अगर कोई पाठक इन सुन्दर होटलों में से किसी पर रुकना चाहता है तो रुक सकता है। तो दोस्तों आप होटल देखिए, मैं आपके साथ चलता हूँ।~


शनिवार, 22 दिसंबर 2012

Bikaner heritage - Beautiful Resorts एक विशाल शानदार रिजार्ट बीकानेर हेरिटेज


बीकानेर यात्रा वाले दिन हम सुबह करणी माता का मन्दिर देखकर जूनागढ़ किले को देखने पहुँचे थे, किला देखकर हम वहाँ के मुख्य होटलों की जाँच करने के दौरे पर रवाना हो चुके थे जिसमें से राजाओं के पुराने महल के होटल देख डाले गये थे, इन सबके बाद बीकानेर के रेत के टीले देखने की बारी आ गयी थी। हम अपनी उसी कार में सवार थे जिसमें चूहों वाला मन्दिर देखने गये थे। बीकानेर के रेत के टीले शहर से दूर रायसर नामक गाँव के पास मुख्य सड़क से लगभग 6-7 किमी दूरी पर थे। हम इन्ही रेत के टीलों की ओर चले जा रहे थे कि तभी हमें सीधे हाथ पर एक शानदार रिजार्ट दिखाई दिया। तुरन्त कार चालक से कार इसी ओर मुड्वायी गयी। अब हमने इस शानदार रिजार्ट में क्या-क्या देखा था, चलिये आप भी देख लीजिए। नाम मत पूछना, याद नहीं आ रहा है।

सड़क से देखने पर ऐसा दिखता है।

गुरुवार, 20 दिसंबर 2012

बीकानेर-राजमहल जो अब होटल बना दिया गया है।


राज परिवार का वर्तमान निवास का कुछ भाग आपने पहली वाली पोस्ट में देख ही लिया था। आज इस पोस्ट में इसी महल का दूसरा हिस्सा भी दिखाया जा रहा है। जब जूनागढ़ वाला किला राजाओं को पुराना लगने लगा था तो उन्होंने अपने आराम करने के लिये एक नये महल का निर्माण कराया था। यह राजनिवास जूनागढ़ से थोड़ा सा हटकर है। इस महल के जिस हिस्से में राजपरिवार निवास कर रहा है वहाँ तक बाहरी लोगों का आवागमन वर्जित है। हमें तो गाईड़ ने यह भी बताया था कि वर्तमान में बीकानेर राजपरिवार में सिर्फ़ दो राजकुमारी है और इन दोनों में कोई सी भी यहाँ नहीं रहती है। इसलिये उन्होंने अपने महलों को होटल वालों को लीज पर दे दिया है। इस का फ़ायदा यह है कि राजपरिवार को इससे कुछ नगद नारायण भी मिलता रहता है साथ ही महल की साफ़-सफ़ाई व रख-रखाव भी इसी बहाने होता रहता है।


मंगलवार, 18 दिसंबर 2012

बीकानेर-राज परिवार के शाही निवास का संग्रहालय


जिस गाईड के साथ हम यहाँ आये थे उन्होंने हमें बताया था कि राज परिवार जूनागढ़ के किले को छोड़ कर किसी दूसरी जगह रहने के लिये आ गया था। आज आपको राज परिवार के उसी निवास स्थल के दर्शन कराये जा रहे है। राज परिवार का नये वाला घर भी किसी बड़े महल से कम नहीं था। इस निवास का आधा हिस्सा राज परिवार ने होटल वालों को किराये पर दिया हुआ है। इसी के कुछ कमरों में राजाओं की ढ़ेर सारी यादगार निशानियाँ सम्भाल कर रखी हुई है। तो दोस्तों आप देखिये इस महल को, मैं चलता हूँ आगे की ओर।


रविवार, 16 दिसंबर 2012

बीकानेर-हेरिटज होटल महाराजा गंगा सिंह पैलेस Bikaner-Heritage hotel Maharaja Ganga Singh Palace


बीकानेर यात्रा में आज आपको यहाँ के एक हेरिटेज होटल महाराजा गंगा महल की सैर करायी जा रही है। बताया गया कि यह होटल राजाओं के समय में उनके यहाँ आने वाले मेहमानों के आराम के लिये बनवाया गया था। दूसरे अर्थ में हम कह सकते है यह उस समय का अतिथि भवन था। बीकानेर का जूनागढ़ किला व उसके अन्दर वाले चित्रकारी का खजाना व शस्त्रों का विशाल जखीरा देखने के बाद मैंने अपने गाईड की बाइक सम्भाल ली, कार में बैठे-बैठे यात्रा में अपुन को कुछ स्वाद ही नहीं आ रहा था। कमल भाई व प्रेम सिंह कार से यहाँ पहुँच गये थे। हम बाइक से उनके बाद यहाँ पहुँचे  थे। एक बात यहाँ याद आ रही है कि बीकानेर की अदालत के सामने से होते हुए हम यहाँ आये थे।

आओ चले गंगा महल में

गुरुवार, 13 दिसंबर 2012

बीकानेर-जूनागढ़ किले के संग्रहालय में अनमोल चित्रकारी व शस्त्रों का जखीरा Bikaner-The great painting and old weapon in Junagarh fort


आज आपको बीकानेर के जूनागढ़ किले के अन्दरुनी हिस्से में बनाई गयी अनमोल व लाजवाब पेंटिंग दिखाई जा रही है। आप इन्हें जरा  कुछ ज्यादा ही ध्यान से देखना, क्योंकि इन्हें बने हुए काफ़ी समय बीत चुका है, आज भी देखते समय यह ऐसी लगती है जैसे यह कल की बनी हुई चित्रकारी है। आपको भूमिका में ज्यादा लम्बा ना उलझाते हुए नीचे आपको ढ़ेर सारे चित्र दिखा रहा हूँ। आप चित्र देखिए।


मंगलवार, 11 दिसंबर 2012

Bikaner- Junagarh Fort बीकानेर- जूनागढ़ किला


दशनोक स्थित चूहों वाला मन्दिर देखने के उपरांत हम अपनी उसी कार में सवार होकर वापिस बीकानेर की ओर रवाना हो गये, जिस कार से चूहे वाला मन्दिर देखने गये थे। यह तो पिछले लेख में ही बता दिया गया था कि दशनोक का अपना रेलवे स्टेशन भी है। अत: जो भाई/बन्धु रेल से यहाँ जाने का इच्छुक होगा रेल से चला जायेगा। पिछले लेख में रेल की पटरी का एक फ़ोटॊ लगाया था वह फ़ोटो कार को बीच फ़ाटक में रोक कर लिया गया था। हमारे साथ प्रेम सिंह कार में सवार थे। प्रेम सिंह जी बीकानेर में होटल उद्योग से जुड़े हुए है। प्रेम सिंह जी ने बीकानेर पहुँचने से पहले ही अपने जानकार गाईड़ को फ़ोन कर पहले ही जूनागढ़ किले पर आने के लिये कह दिया था।
यह मत समझना कि मैं आपको कार बता कर बाइक से वहाँ घूम रहा था।

शनिवार, 8 दिसंबर 2012

BIKANER- Desnok Karni Mata's Rats Temple बीकानेर- दशनोक करणी माता का चूहे वाला मन्दिर


रामदेवरा बाबा के यहाँ से जब चले तो शाम का समय हो रहा था। उस समय बीकानेर के लिये कैसी भी मतलब सवारी गाड़ी या तेजगति वाली एक्सप्रेस गाडी भी नहीं मिलने वाली थी। इस कारण हमने बीकानेर जाने के लिये बस से आगे की यात्रा करने की ठान ली। वहाँ से बीकानेर 150 किमी से ज्यादा दूरी पर है। यहाँ आते समय जिस बस अड़डे पर उतरे थे, हम वहीं पहुँच गये, वहाँ जाकर मालूम हुआ कि इस समय यहाँ से बीकानेर की बस मिलनी मुश्किल है अगर आपको बीकानेर जाने वाली बस पकड़नी है तो आपको लगभग एक किमी आगे हाईवे पर जाना होगा। हाईवे से होकर जानेवाली बसे जैसलमेर/पोखरण से सीधी बीकानेर चली जाती है। हम सीधे पैदल ही हाईवे पहुँच गये थे। जैसे ही हम हाईवे पर पहुँचे तो देखा कि तभी एक बस वहाँ आ गयी थी। हम तुरन्त उस बस में सवार हो गये।

सोमवार, 3 दिसंबर 2012

जैसलमेर- बाबा रामदेव/रामदेवरा Baba Ramadevra (Pokhran)


जैसलमेर से रामदेवरा बाबा (रामलीला मैदान व कालाधन देश में वापिस लाने वाले रामदेव बाबा नहीं) जाने के लिये पोखरण होते हुए, जाते समय पोखरण की दूरी कोई 105 किमी के आसपास रही होगी। वहाँ की सडक एकदम चकाचक थी जिस कारण हम मुश्किल से डेढ़ घन्टे में पोखरण पहुँच गये थे। पोखरण से रामदेवरा बाबा की समाधी मात्र दस किमी दूर रह जाती है। यहाँ तक तो पहले लेख में बता दिया गया था। अब आगे चलते है। इस लेख में आपको राजस्थान के भक्ति भगवान के मन्दिरों, मजार, समाधी आदि में सबसे ज्यादा मान्यता प्राप्त/मशहूर बाबा रामदेवरा के दर्शन कराये जा रहे है। अब आपको बिना यहाँ गये बाबा की समाधी के दर्शन हो रहे है तो रामदेवरा बाबा की जय तो बोलनी ही पड़ेगी। आप जय बोलो मैं आगे की यात्रा शुरु करता हूँ।
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