गुजरात यात्रा-09
जूनागढ़ से सुबह 5 बजे
वाली बस में सवार होकर हम चारों सोमनाथ के लिये चल दिये। बस पीछे कही और से आ रही
थी इस कारण बस में बहुत भीड़ होने की वजह से हम चारों को सीट नहीं मिल पायी थी।
प्रेम व रावत पहाड़ी को बस में घुसते ही सीट मिल गयी जिस कारण वे दोनों आराम से सोते
हुए सोमनाथ तक पहुँच गये। अब बचे दो मैं और अनिल,
हम दोनों ने
खड़े-खड़े ही यह सफ़र पूरा किया था। अनिल पैदल यात्रा में काफ़ी थक गया था जिस
कारण वह कुछ देर बस में बीच में आने-जाने वाले मार्ग में ही बैठ भी गया था। वेरावल
बस अड़ड़े पर आकर जब बस रुकी तो अधिकतर सवारी बस से उतर गयी, हमने
सोचा कि शायद सोमनाथ के लिये यही उतरना होता है। इसलिये पहले हमने बस कंडैक्टर से
पता किया जब उसने कहा कि अरे सोमनाथ अभी कई किमी बाकि है और वहाँ जाने पर तो बस
पूरी ही खाली हो जायेगी। कुछ देर बाद ही बस वहाँ से सोमनाथ के लिये चल पड़ी। यहाँ
से आगे जाने पर सीधे हाथ समुन्द्र के दर्शन हो गये थे जिससे लगा कि बस अब सोमनाथ
आने ही वाला है। सड़क किनारे एक बहुत बड़ा कब्रिस्तान दिखाई दिया। यहाँ से लगभग एक
किमी आगे जाने के बाद आखिरकार सोमनाथ भी आ ही गया। सभी सवारियों के साथ हम भी
सोमनाथ के बस अड़डे पर उतर गये। सुबह का सात बजे का समय हुआ था। सबसे पहले हमने
मन्दिर की दिशा के बारे में पता किया। बस अड़डे से मन्दिर पश्चिम दिशा में मुश्किल
से 100-150 मीटर की दूरी पर ही है। सोमनाथ आने के लिये
सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन वेरावल Veraval
Railway Station से Somanath लगभग
6 किमी दूरी पर है।
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सवारी की जा रही है। |
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पहली बार समुन्द्र स्नान हो रहा है। |