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सोमवार, 4 जुलाई 2011

संगम (प्रयाग) से काशी(बनारस) तक पद यात्रा भाग 3, VARANSAHI, BANARAS KE GHAT, GANGA

प्रयाग काशी पद यात्रा-
कमरा किराये पर लेकर,उसमें सामान रख, ताला लगा कर, हम गंगा किनारे घूमने के लिये आ गये कि तभी मन में ख्याल आया कि कल तो महाशिवरात्रि है भीड का बुरा हाल रहेगा, मंदिर में तसल्ली से दर्शन होने सम्भव नहीं है, अत: आज तसल्ली पूर्वक दर्शन किये जाये। अपना कमरा जिस जगह पर था उस गली से एक रास्ता सीधा मंदिर में जाता था, दूरी लगभग 150 मीटर ही थी। 

लो जी यहाँ से करो घाट के दर्शन, पूरे दो किलोमीटर तक घाट ही घाट है,

गुरुवार, 30 जून 2011

संगम (प्रयाग) से काशी(बनारस) तक पद यात्रा भाग 2, SANGAM, ALLAHABAD, VARANASHI, GANGA

प्रयाग काशी पद यात्रा-
आज हमारी पैदल यात्रा का तीसरा दिन शुरु हो गया था, दिनांक थी 27 फ़रवरी 2011, पहले दिन हम चले 20-22 किलोमीटर, दूसरे दिन चले 40-42 किलोमीटर के आसपास, हम ठीक छ: बजे नहा धो कर आज के अपने सफ़र पर चल पडे, ये तो मैं पहले ही बता चुका हूँ कि जिस जगह हम रुके हुए थे, उस के ठीक सामने एक बोर्ड था जिस पर लिखी दूरी से साफ़ हो रहा था, कि हम दिल्ली व कोलकत्ता से एक समान दूरी पर खडे थे। 

ये देखो ट्रक पर क्या जा रहा है, पहिया गिन सकते हो।

रविवार, 26 जून 2011

संगम (प्रयाग) से काशी(बनारस) तक पद यात्रा भाग 1, SANGAM, ALLAHABAD,

प्रयाग काशी पद यात्रा-
पैदल यात्रा के लिये जरुरी सामान लेकर हम तीनों संगम की ओर चल दिये, यहाँ सामने ही हनुमान जी का  मन्दिर है। किले के एकदम किनारे सटा हुआ है। शनिवार का दिन होने के कारण श्रद्धालु बहुत बडी संख्या में यहाँ मौजूद थे। हमने भी हनुमान जी को प्रणाम किया, व सीधे संगम की ओर चले गये, इस मन्दिर से यमुना नदी नजदीक है हम सीधे यमुना के किनारे जा पहुँचे, यमुना जी का फ़ोटो भी खींचा था। आप भी देख लो। आज दिनांक थी 26 फ़रवरी 2011 
यमुना नदी की धारा का अन्त यही हो जाता है, मैंने इस नदी के दोनों छोर देख लिये है।

शनिवार, 11 जून 2011

मिंटो पार्क, चन्द्रशेखर आजाद पार्क, प्रयाग, MINTO PARK, PARYAG, SANGAM

प्रयाग काशी पद यात्रा-
केदारनाथ से वापस आते समय ही बनारस का कार्यक्रम बना लिया था। कुल छ: बंदे जाने के लिये तैयार थे। बस यह रह गया था कि जाना कब है, अब शिव का घर हो और महाशिवरात्रि का मौका हो, इससे बडी बात और क्या हो सकती थी। वैसे तो अगस्त में ही ये कार्यक्रम बन गया था कि महाशिवरात्रि के मौके पर यहाँ जाना है, जो कि 2 मार्च 2011 को आनी थी अब यहाँ पर बाइक वाली बात मेरे अलावा किसी ने नहीं मानी। अत: मैं भी उनके साथ ही हो लिया।

लो जी आ गये इलाहाबाद यानी प्रयाग

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