ROOPKUND-TUNGNATH 01 SANDEEP PANWAR
जाना था चीन,
पहुँच गये जापान, हाँ जी हाँ जी हाँ। आप सोच रहे होंगे कि यह जाट भाई को आज क्या हो
गया जो गाना गाना शुरु कर दिया। जी हाँ बात ही ऐसी है कि कई बार यात्रा शुरु करने
से पहले मन में सोचा जाता है कि यहाँ जायेंगे, वहाँ जायेंगे। लेकिन किस्मत का खेल
निराला होता है किसे कब कहां ले जाये कोई नहीं जानता। मैंने इस यात्रा के समय पहले
से ठाना हुआ था कि पंच बद्री, पंच केदार, पंच प्रयाग की यात्रा करके आऊँगा। समय भी
था, बाइक भी, मौसम भी, कहने की बात यह है कि किसी किस्म की कोई परॆशानी नहीं थी,
लेकिन होनी बड़ी बड़ी बलवान है यात्रा की तय तिथि से 3-4 दिन पहले से ही
मेरी कमर व गर्दन में चिनके जैसा दर्द आरम्भ हो गया। मैंने सोचा कि रविवार आने में अभी
तो कई दिन बाकि है तब तक ठीक हो जायेगा। लेकिन जब यात्रा वाले दिन की पूर्व वाली रात में
भी दर्द पूरी तरह ठीक नहीं हो पाया तो यात्रा केंसिल करने के अलावा और कोई चारा
नहीं था। इस बाइक वाली यात्रा में मेरे साथ बाइक वाले महान घुमक्कड़ मनु प्रकाश
त्यागी साथ जाने वाले थे। आखिरकार मनु भाई को मना किया गया जिसके बाद उन्हें अकेले ही यात्रा पर जाना पड़ा।~
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भीमताल |