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बुधवार, 4 जनवरी 2017

Travel plan to Andaman Nikobar islands अंडामान निकोबार यात्रा की तैयारी



अंडमान और निकोबार द्वीप समूह जिसे आजादी के समय काला पानी की सजा के नाम से जाना जाता था। जी हाँ, अब आपको उसी काले पानी की यात्रा करायी जायेगी। अंडमान द्वीप समूह भारत भूमि से लगभग 1200 किमी की दूरी पर स्थित है। कलकत्ता से  किमी, चैन्नई से किमी, विशाखापटनम (विजाग) से किमी दूरी पर है। यहाँ जाने के लिये तमिलनाडु के चैन्नई (मद्रास) 1190 किमी, पश्चिम बंगाल का कोलकत्ता 1255 किमी, व आंध्रप्रदेश का विशाखापट्टनम (विजाग) 1200 किमी है इस तरह देखा जाये तो अंडमान इन तीनों जगहों से लगभग एक जैसी दूरी पर पडता है। यहाँ जाने के लिये दो मार्ग है पहला व सस्ता मार्ग समुन्द्री यात्रा है। दूसरा वाला हवाई मार्ग महंगा तो है लेकिन समय बचाने वाला हवाई यात्रा मार्ग यहाँ जाने के लिये सबसे उपयुक्त साधन है। कुदरत ने अंडमान को जी भर के खूबसूरती प्रदान की हुई है। जिसे यहाँ के लोगों के रहन-सहन ने अभी तक बचाया हुआ है। यहाँ की आबादी करीब 5 लाख है जिस कारण यहाँ की कुदरती सुन्दरता अभी तक बची हुई है। बम्बई, चैन्नै, दिल्ली या कोलकत्ता की तरह यहाँ की आबादी करोड तक जाने दीजिए फिर देखिये यहाँ सब कुछ कबाडा होते देर नहीं लगेगी। जैसा कि मैंने बताया कि कुदरत ने यहाँ सब कुछ जी भर के दिया है तो उसे देखने के लिये कम से कम 10-15 दिन यहाँ के लिये अवश्य लेकर जाना चाहिए। हमने भी इस यात्रा की योजना 10 दिन के अनुसार बनायी थी। यह यात्रा भारत भूमि से दूर होने के कारण थोडी महंगी पड जाती है इसलिये आमतौर पर अधिक संख्या में घुमक्कड यहाँ नहीं आ पाते है। पर्यटकों को यहाँ बहुतायत संख्या में देखा जा सकता है। यदि यहाँ के लिये आना-जाना थोडा सस्ता पड जाये तो भारत से कई गुणी संख्या में यात्री यहाँ आने के लिये तैयार हो जायेंगे।
अंडमान निकोबार यात्रा की तैयारी व प्रस्थान-
हवाई जहाज के अन्दर ऐसा दिखता है।

गुरुवार, 12 सितंबर 2013

Jagannath temple and Rath Yatra road पुरी जगन्नाथ मन्दिर व रथ यात्रा मार्ग

UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-28         SANDEEP PANWAR
पुरी बस स्टैन्ड़ से उतर कर फ़िर से उसी दुकान पर आ गया जहाँ चिल्का जाते समय बड़े व मटर की सब्जी खायी थी। दोपहर होने जा रही थी इसलिये पहले यहाँ से पेट पूजा करनी उचित लगी, उसके बाद शाम तक कुछ मिले ना मिले उसकी फ़िक्र नहीं रहेगी। यहाँ से खा पी कर मन्दिर की ओर चल दिया। यहाँ से ही रथयात्रा वाला चौड़ा मार्ग शुरु हो जाता है। बस स्टैन्ड़ से मन्दिर तक ऑटो मिलते रहते है लेकिन मेरा मन पैदल चलने का था। ट्रेकिंग करना मेरा जुनून है इसलिये मैं अपनी दैनिक जिन्दगी में साईकिल का प्रयोग अधिकतर कार्यों के लिये करता हूईँ ताकि हमेशा फ़िट रहू। अब तो बेचारी मेरी नीली परी भी महीने में एक दो बार ही स्टार्ट होती है। पैदल चलता हुआ मन्दिर की ओर बढ़ता रहा। आधा घन्टा भी नहीं लगा होगा कि मैं मन्दिर के सामने पहुँच गया। वैसे मन्दिर काफ़ी दूर से ही दिखायी देने लग गया था। 


मंगलवार, 13 अगस्त 2013

4 Chaar Dhaam mandir-Ujjain उज्जैन का चार धाम झाकियों वाला मन्दिर

UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-06                              SANDEEP PANWAR
चार धाम मन्दिर देखने के लिये सबसे पहले मन्दिर के बाहर बनी दुकान पर जूते-चप्पल उतार कर आगे बढ़े। हम इस मन्दिर को देखते भी नहीं यदि इस मन्दिर के बाहर लगे बोर्ड़ पर यह लिखा ना होता कि विधुत चलित झाँकियाँ का दर्शन करे। चार धाम मन्दिर के प्रांगण में घुसते ही सीधे हाथ पर हरा-भरा छोटा सा मैदान है। अगर हमें कही और ना जाना होता तो इस पार्क में बैठा जा सकता था। मन्दिर देखने के लिये आगे बढ़ चले। मुख्य मन्दिर तक पहुँचे ही थे कि वहाँ पर लगे एक बोर्ड़ से पता लगा कि यहाँ कि झाकियाँ देखने के लिये थोड़ा सा खर्च करना पडेगा। एक बार तो सोचा, छोड़ो झाकियाँ-वाकियाँ। इन मन्दिरों वालों ने कमाई का जरिया बनाया हुआ है। लेकिन फ़िर सोचा चलो 5 रुपये की ही तो बात है। अगर कुछ अच्छा मिला तो 5 रुपये वसूल भी हो जायेंगे।


गुरुवार, 18 जुलाई 2013

Rameshwaram Temple and Ram Setu रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग व राम सेतू

LTC-  SOUTH INDIA TOUR 05                                                                           SANDEEP PANWAR
सुबह उठकर रामेश्वरम के लिये निकलना था। इसलिये सुबह पाँच उठकर नहा धोकर तैयार भी हो गये। बस वाले ने सुबह 6 बजे का समय दिया था। लेकिन जब सवा 6 बजे तक भी हमें लेने कोई नहीं आया तो मन में खटका हुआ कि हमें यही छोड़कर तो नहीं भाग गये? लेकिन शुक्र रहा कि ठीक 6:30 पर हमें लेने के लिये एक बन्दा आया हम उसके साथ बस तक चले गये। जिस बस से कन्याकुमारी से मदुरै तक आये वह बस मदुरै से ही वापिस कन्याकुमारी चली जाती है यहाँ से दूसरी बस में बैठकर रामेश्वरम के लिये निकलने की तैयारी होने लगी। दूसरी बस कल वाली बस से बड़ी थी या यह कहे कि आज वाली बस है कल वाली मिनी बस थी। 
दिन में

गुरुवार, 7 मार्च 2013

Mana-Bheem Pul to Ghangaria (Base of Vally of flower) भारत के अंतिम गाँव माणा में भीम पुल से घांघरिया तक

बद्रीनाथ-फ़ूलों की घाटी-हेमकुन्ठ साहिब-केदारनाथ यात्रा-02

बद्रीनाथ मन्दिर के नजदीक कमरा लेने के बाद दर्शन करने के उपराँत हम भारत की सीमा का अंतिम गाँव माणा देखने के लिये निकल पड़े। होटल वाले से माणा के मार्ग की थोड़ी भी ले ली थी। उसने बताया था कि माणा यहाँ से केवल 3 किमी दूरी पर स्थित है। बाइक से जाने में वहाँ कोई समस्या नहीं है लेकिन बीच-बीच में कई झरने आते है जहाँ पर बिना भीगे वे नाले पार नहीं किये जा सकते है। हमने जूते पहने हुए थे पहले सोचा कि चलो बैग से चप्पल निकाल कर पहन ली जाये। लेकिन वहाँ की ठन्ड़ को देखते हुए यही फ़ैसला हुआ कि चलो देखा जायेगा अगर जरुरत पड़ी तो जूते निकाल कर नाला पार कर लिया जायेगा। तीन किमी के मार्ग में कुल चार नाले मिले थे जिनमे से दो नाले तो थोड़े से शरीफ़ निकले, जिन्होंने हमें बिना किसी परेशानी के आगे जाने दिया। आखिरी के दो नाले तो जबरदस्त थे जिन्हे पार करने से पहले बाइक रोककर यह तय किया गया था कि इन्हे पार कैसे करना है? मैंने अपने साथी को इन दोनों नालों पर बाइक से उतार दिया था। बाइक इन पर पार करते समय बेहद सावधानी से पार करनी पड़ती थी। जब मैं पहले नाले को पार कर रहा था तो अगले पहिया के आगे एक पत्थर आ गया, जिसके कारण पहिया हिलने से बाइक का संतुलन बिगड़ने से मुझे अपना एक पैर पानी में रखना पड़ गया था। यह सब इतनी  तेजी से हुआ था कि कब बाइक अटकी, कब पार हुई और कब जूते को पानी ने छु लिया, तेजी से बदलते घटनाक्रम ने बाइक यात्रा के रोमांच से हमें सरोबार कर दिया था। नाला पर करके पहले तो अपना पैर देखा कि कितना भीगा है जब लगा कि अरे बस इतना ही गीला हुआ, तो जान में जान आयी। जूता सिर्फ़ पंजे की ओर से भीगा था। इसके बास एक और नाला आया, यहाँ पर दुबारा से जूते गीले ना हो इस बात पर विचार किया गया। इसका सिर्फ़ एक ही समाधान निकला कि.......

यह माणा गाँव से आगे भीम पुल नाम की जगह है।

बुधवार, 6 मार्च 2013

Badrinath 4 Dham Temple बद्रीनाथ मन्दिर- हिन्दुओं के चार 4 धाम में से एक

बद्रीनाथ-फ़ूलों की घाटी-हेमकुन्ठ साहिब-केदारनाथ यात्रा-01

सन 2006 में अगस्त माह की शुरुआत ही हुई थी कि मन में विचार आया कि चलो काफ़ी दिन हो गये है बाइक उठाकर कही घूम आया जाये। इसलिये मैंने अपनी नई बाइक Ambition 135 cc से पहाड़ की एक यात्रा करने का प्लान बनाया। मेरे कार्यालय के सभी सहकर्मी जानते थे कि यह बन्दा हर दूसरे-तीसरे माह कही ना कही घूमने निकल जाता है। मेरी बद्रीनाथ, फ़ूलों की घाटी, हेमकुन्ठ साहिब, केदारनाथ यात्रा के बारे में जैसे ही कार्यालय वालों को पता लगा तो साथ में काम करने वाला एक बन्दा बाइक यात्रा के बारे में सुनकर मेरे साथ जाने की कहने लगा। पहले तो मैंने उसे समझाया कि देख भाई हम बाइक पर जा रहे है। बाइक यात्रा के बारे सुनते ही आधे लोगों की फ़ूँक तो वैसे ही सरक जाती है, और जिसकी थोड़ी बहुत हवा निकले बिना रह जाती है उसकी कसर उसके घरवाले/घरवाली उसकी वालबोड़ी खोल कर रही सही कसर पूरी कर देते है। अत: भाई अगर तुम्हे बाइक पर जाना है तो पहले अपनी हवा के बारे में पक्का प्रबन्ध कर ले, कही तुम उसी दिन, जिस दिन हम जाने वाले होंगे, मुझे कहोगे कि मम्मी नी मान रही है, बहिन को लेकर जाना है, भाई को छुट्टी नहीं मिली घर पर रहने वाला कोई नहीं है। आदि-आदि बहाने लोग बनाते है मुझे इन बहानों की आदत पड़ गयी है। इसलिये पहले अपने घर से हाँ करवा लो तब मुझे हाँ करना।

Jatdevta Sandeep Arya (Panwar) बद्रीनाथ मन्दिर में

गुरुवार, 28 फ़रवरी 2013

Gujarat- Somnath Temple सोमनाथ मन्दिर, जो कई बार तहस नहस हुआ।

गुजरात यात्रा-10

आज आपको सोमनाथ मन्दिर में महाशिवरात्रि वाले दिन दर्शन करने की मजेदार घटना के बारे में बताता हूँ-

महाशिवरात्रि वाले दिन हम सुबह चार बजे ही उठ गये थे, नहा धोकर मन्दिर की ओर चल पड़े। वैसे हमारा कमरा मन्दिर से मात्र 100 मी की दूरी पर ही था, लेकिन हम बनारस में महाशिवरात्रि के दिन होने वाली भीड़ देख चुके थे इसलिये हम दिन निकलने से पहले ही मन्दिर में प्रवेश कर लेना चाहते थे। बनारस वाली यात्रा में मेरे साथ प्रेम सिंह था जो इस यात्रा व गौमुख से केदारनाथ पद यात्रा में साथ ही चला था। जैसे ही हम मन्दिर के बाहरी प्रवेश दरवाजे पर पहुँचे तो देखा कि अरे बाप रे इतनी सुबह-सुबह 5 बजे भी लोग लाईन में लग गये है। जब तक हम लाईन में पहुँचे तो हमारे से पहले लगभग 100 लोग वहाँ पहले से ही मौजूद थे। हमने पहले वहाँ का जायजा लिया उसके बाद पता लगा कि अभी लाईन वाइन नहीं लगी हुई है। गेट खुलने का समय सुबह ठीक साढ़े पाँच बजे का था। इसलिये हमें ज्यादा देर वहाँ खड़ा भी नहीं रहना था। यहाँ पर मन्दिर का बाहरी दरवाजा शिवलिंग से लगभग 200 मीटर की दूरी पर है। शिवलिंग से कोई 50 मीटर पहले एक और दरवाजा है वहाँ से आगे सभी को नंगे पैर जाना पड़ता है। हम कल शाम को यहाँ के तौर तरीके देख आये थे कि कहाँ चप्पल निकालनी है। किधर से जाना है किधर से आना है। चूंकि हमारा कमरा मन्दिर के सामने ही था इसलिये हम चारों बिना चप्पल के ही मन्दिर तक चले आये थे। 
सूर्योदय वाले स्थान से मन्दिर

सोमनाथ का नवनिर्मित मन्दिर

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