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शुक्रवार, 25 अप्रैल 2014

Let's go to Kumaun Region आओ उत्तराखण्ड के कुमायू क्षेत्र में घूमने चले।

KUMAUN CAR YATRA-01                                                       SANDEEP PANWAR
सन 2014 अप्रैल माह के शुरुआत की ही बात है। इस माह राजेश जी कई बार फ़ोन कर कह चुके थे कि संदीप जी चलो, कही भी चलो। मेरा मन हिमालय में कही चलने का हो रहा था। जबकि राजेश जी हरिदवार जाने की कह रहे थे। हरिदवार तो मैंने बीसियों बार देखा है। इसलिये वहाँ जाने का मन नहीं था। अजय भाई भी कई बार कह चुके थे कि संदीप भाई जी आपके साथ किसी यात्रा पर जरुर जाना है? दिनांक 8 को गुड फ़्राडे का अवकाश था। उसके अगले दिन शनिवार था। पहले अपनी भी शनिवार को छुट्टी रहा करती थी। लेकिन अब मात्र 6 घन्टे की नौकरी होने से केवल रविवार का ही अवकाश होता है। गुड फ़्राडे से पहले वाले सोमवार को चुनावी लाभ लेने के उद्देश्य से अम्बेडकर जयंती का अवकाश घोषित हो गया। अजय का फ़ोन आया भाई जी चलो कही भी चलो। मेरी तीन दिन की, व आपकी दो दिन की छुट्टी है।




सोमवार, 5 मार्च 2012

SATTAL or SAT TAL सात ताल


भीमताल, नौकुचियाताल, देखने के लिये यहाँ क्लिक करे।

पहले लेख में मैंने बताया था कि अब सातताल मुश्किल से 200 मी की दूरी पर ही है, अब वहाँ से आगे। यहाँ से सडक के किनारे सीधे हाथ की ओर एक पैदल मार्ग नीचे की ओर जाता दिखाई दे रहा था। जबकि सडक दूसरी ओर मुड गयी थी चूंकि पहाडों में ऐसा होता ही है कि पैदल मार्ग सडक मार्ग के मुकाबले काफ़ी छोटा होता है अत: यहाँ भी मैंने सडक छोड कर पैदल मार्ग पर चलना शुरु किया ही था कि मुझे एक ऊँचे से पत्थर पर कुछ लोग रस्सी बांधकर चढने में लगे हुए थे। यहाँ पर राक क्लाईमिंग की जा रही थी। कुछ देर तक उनको देखने के बाद, मैंने फ़िर से अपनी मंजिल की ओर चलना शुरु कर दिया था। यह पैदल मार्ग मुझे एक बैरियर के किनारे ले आया था। यहाँ बैरियर से इस स्थान पर आने वाले वाहनों से शुल्क लिया जा रहा था। मेरे पास तो वाहन था ही नहीं अत: मैं तो अपनी ग्यारह नम्बर की गाडी से आगे की ओर चलता रहा। अरे हाँ एक बात तो रह ही गयी थी कि इस बैरियर पर आते ही मैं सातताल झील के किनारे आ गया था। यहाँ बैरियर से ही सडक झील के किनारे-किनारे ही होकर आगे जा रही है। कुछ आगे जाने पर मैंने देखा कि कोई 20-25 स्कूल/कालेज या किसी संस्थान के युवक-युवती इस झील में अपनी-अपनी नाव लेकर झील की सैर करने की तैयारी करने में लगे थे। मैं कुछ दूर तक इन्हें देखता रहा उसके बाद मैं आगे की ओर चलता रहा।

रविवार, 12 फ़रवरी 2012

SATTAL or SAT TAL सात ताल की ओर


भीमताल, नौकुचियाताल, देखने के लिये यहाँ क्लिक करे।

भीमताल, नौकुचियाताल देखने के बाद आज सातताल देखने की बारी थी। वैसे तो सातताल व भीमताल में पहाडों के पैदल मार्ग से कोई खास दूरी नहीं है दूरी यानि 5-6 किमी ही है लेकिन फ़िर भी ज्यादातर अरे! ज्यादातर क्या लगभग सारे के सारे ही वाहनों में आराम करते हुए लम्बे मार्ग से भीमताल से सातताल देखने के लिये जाते है पूरे सीजन में मुश्किल से कोई 30-40 लोग ही पैदल मार्ग मार्ग का प्रयोग करते होंगे। जब मैंने पैदल मार्ग से जाने के बारे में ओशो आश्रम वालों से बताया तो उन्होंने कहा कि वैसे तो कोई समस्या नहीं है लेकिन आपको मार्ग में शायद ही कोई मिले, अगर आप मार्ग भटकते है तो आपको बताने वाला कोई नहीं मिलेगा। जब मैंने पूछा कि ऐसा क्यों? तो उन्होंने कहा कि उस मार्ग पर कोई गाँव नहीं पडता है जिस वजह से सडक बन जाने पर अब उस मार्ग से कभी-कभार ही कोई आवागमन करता है। मैंने उनसे अच्छी तरह मार्ग के बारे में समझ लिया ताकि मार्ग भटकने की कोई आशंका ही ना रहे।

भीमताल से चलने के बाद ऐसा दृश्य।

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