गोमुख से केदारनाथ ट्रेकिंग यात्रा-2
दूसरे दिन अपने ग्रुप के बूढ़े यात्रा सुबह 9 बजे सो कर उठे थे। जबकि अपना नियम है कि जल्दी उठो, जल्दी चलो, जल्दी रुको। लेकिन हमारे इस ग्रुप में 4 अनसट उठने में ढीले थे। हमारी यात्रा तो एक दिन पहले ही शुरु हो गयी थी, लेकिन नासपीटों/ नौरत्नों की यात्रा आज से शुरु होनी थी। हम कल ही 40 किमी ट्रेकिंग कर आये थे। सुबह के 11 बजे गंगोत्री मंदिर पर नहाने धोने के लिये पहुँच गए। एक गजब देखा था कि सारे के सारे नौरत्न, पक्के नास्खेत थे, गंगौत्री मंदिर में अन्दर जाकर दर्शन भी ना किये। जब बात आयी नहाने की तो सब के सब पानी के ठन्डे होने की बात कह कर चुप बैठे रहे तो जाट देवता से नहीं रहा गया, सबसे पहले जा कर हाथ मुहँ धोये।
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यहाँ इस तरह आराम से खड़ा होने के लिये दमदार जिगर होना चाहिए, जो ऐसे गेरे नत्थू खेरे में नहीं पाया जाता। |
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गंगौत्री में गंगा जल की तूफ़ानी गति |