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गुरुवार, 18 जुलाई 2013

Rameshwaram Temple and Ram Setu रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग व राम सेतू

LTC-  SOUTH INDIA TOUR 05                                                                           SANDEEP PANWAR
सुबह उठकर रामेश्वरम के लिये निकलना था। इसलिये सुबह पाँच उठकर नहा धोकर तैयार भी हो गये। बस वाले ने सुबह 6 बजे का समय दिया था। लेकिन जब सवा 6 बजे तक भी हमें लेने कोई नहीं आया तो मन में खटका हुआ कि हमें यही छोड़कर तो नहीं भाग गये? लेकिन शुक्र रहा कि ठीक 6:30 पर हमें लेने के लिये एक बन्दा आया हम उसके साथ बस तक चले गये। जिस बस से कन्याकुमारी से मदुरै तक आये वह बस मदुरै से ही वापिस कन्याकुमारी चली जाती है यहाँ से दूसरी बस में बैठकर रामेश्वरम के लिये निकलने की तैयारी होने लगी। दूसरी बस कल वाली बस से बड़ी थी या यह कहे कि आज वाली बस है कल वाली मिनी बस थी। 
दिन में

शनिवार, 23 फ़रवरी 2013

Nageshwar jyotirlinga temple dwarka द्धारका का नागेश्वर ज्योतिलिंग मन्दिर

गुजरात यात्रा-5
द्धारकाधीश मन्दिर से रुक्मिणी देवी मन्दिर देखते हुए हम सौराष्ट्र के दारुकावन स्थित नागेश्वर Nageshwara Jyotirlinga ज्योतिर्लिंग पहुँच चुके थे। इस मन्दिर में घुसने से पहले ही दूर से भोलेनाथ की एक विशाल मूर्ति  दिखायी दे रही थी जैसे ही हम चारों ने मन्दिर के प्रांगन में प्रवेश किया तो हम सबसे पहले इस मूर्ति के पास ही जा पहुँचे। मूर्ति के पास जाकर पाया कि यह मूर्ति तो लगभग 40-50 फ़ीट ऊंचाई लिये हुए है।  इतनी विशाल मूर्ति बनाने में बड़ी समस्या पेश आती है।  मूर्ति देखकर हम मन्दिर के अन्दर प्रवेश करने के लिये आगे बढ़े ही थे कि गेट पर मौजूद कर्मचारी ने हमें चेताया कि मन्दिर में फ़ोटो लेना मना है। अपने कैमरा व मोबाइल अपनी जेब में घुसेड़ कर अन्दर की चल पडे।  मैं मन्दिर में कभी भी पूजा-पाठ करने के चक्कर में नहीं जाता हूँ। मैं तो मूर्ति को एक पल देखकर ही संतुष्ट होने वाला प्राणी हूँ। दुनिया में आपको ऐसे-ऐसे लोग मिलेंगे जो मूर्ति से चिपक जायेंगे। मैं तो मानता हूँ कि जो जितना बड़ा पापी होता है उतना ज्यादा ढ़ोंग करता है। असली भक्त तो पहाड़ों में गुफ़ाओं में निवास करते है हम जैसे किस खेत की मूली है?

जय हो भोले नाथ

मन्दिर का प्रवेश द्धार

शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2013

Dwarka- Lord Sri Krishna's wife Rukmini Devi temple श्रीकृष्ण की धर्मपत्नी रुकमणी देवी का मन्दिर

गुजरात यात्रा-4
द्धारका dwarka में हम जिस तीन बत्ती नामक चौराहे के पास रुके थे उससे कुछ दूरी पर ही यहाँ की नगर पालिका Dwarka Nagar Palika की उस बस का कार्यालय है जो उस समय मात्र 60 रुपये में ही वहाँ के कई स्थानों के दर्शन कराया करती थी। आज हो सकता है कि यह किराया कुछ बढ़ गया हो। यह बस सुबह 8 बजे चलकर दोपहर  2 बजे वापस आती है। इसके रुट में Nageshwar Jyotirlinga, Gopi Talab, Bet Dwarka, Rukmani Devi Temple जैसे स्थान आते है। भद्रकाली रोड़ पर ही भद्रकाली मन्दिर में इसका कार्यालय है। हमें केवल रुकमणी देवी मन्दिर व नागेश्वर ज्योतिर्लिंग ही देखने थे जिस कारण हम इस बस में नहींण गये थे। हाँ पहले दिन ही इसकी बुकिंग करवा लेनी सही रहेगी। नहीं तो पता लगा कि टिकट है ही नहीं, फ़िर क्या करोगे?

यह रुकमणी देवी मन्दिर है, कुछ इसे राधा मन्दिर भी कहते है।

सोमवार, 18 फ़रवरी 2013

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग धाम दर्शन Kedarnath jyotirling

गंगौत्री से केदारनाथ पदयात्रा-8
केदारनाथ जाकर दर्शन करने के बाद, वापिस भी आज ही आना था। हम दोनों ठीक सुबह 4 बजे उठ गये थे, केदार जाने से पहले गौरीकुन्ड में गर्मागर्म पानी का स्नान किया जाता है। हमने भी खूब स्नान किया था उस समय अंधेरा था, हमारे अलावा दो बन्दे और थे। महिलाओं व पुरुषों के लिए यहां पर अलग-अलग स्नानकुन्ड बनाए गए है। यहां गौरीकुंड के अलावा नजदीक में ही दो कुंड और बने हुए हैं, ब्रह्मकुंड और सूर्यकुंड। लेकिन मुझे तलाशने पर भी नहीं मिले। बताते है कि गौरी कुंड का जल रामेश्वरम् में चढ़ाया जाता है तथा रामेश्वरम् से जल लाकर बद्रीनाथ पर चढ़ाते हैं। गौरी कुंड में सेतुबंध(लंका पुल) की मिट्टी समर्पित की जाती है। आराम से नहा धो कर वापिस कमरे पर आये थे। अपना सारा सामान हमने एक थैले में कर दिया था अपने साथ सिर्फ़ गौमुख से पैदल यात्रा करके लाया गया गंगा जल व वर्षा से बचने के लिये छतरी ले ली थी। हमारे साथ वाले बन्दे आराम से सो रहे थे उनसे पूछा तो जवाब मिला हम आज की रात केदारनाथ में ही रुकेंगे, अत: हम 9-10 बजे यहाँ से जायेंगे। 
केदारनाथ के द्धार पर आ पहुँचे है।



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