हिमाचल स्कारपियो-बस वाली यात्रा-01 SANDEEP PANWAR
जय मणिमहेश- जी हाँ दोस्तों
आज से आपको अपनी दूसरी मणिमहेश यात्रा के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। बीते
साल जुलाई माह की बात है, मैंने बाइक से हिमाचल जाने का 10-11 दिन का कार्यक्रम
बनाया हुआ था। मैंने अपने इस कार्यक्रम के बारे में अपने ब्लॉग के सूचना पट "आगामी
यात्रा" कॉलम में कई महीने पहले ही लिख दिया था। मेरा कार्यक्रम कुछ इस प्रकार से था दिल्ली
से चलकर नैना देवी, ज्वाला मुखी देवी, होते हुए ड़लहौजी-खजियार
देखकर चम्बा पहुँचने के बाद मणिमहेश यात्रा के लिये भरमौर-हड़सर तक बाइक से जाने की
तैयारी की गयी थी। उसके बाद दो दिन की मणिमहेश पद यात्रा कर वापसी चम्बा होकर साच-पास
होते हुए उदयपुर होकर चन्द्रताल देखकर लाहौल स्पीति के काजा होकर रिकांगपियो देखते
हुए शिमला रुट से दिल्ली तक की यात्रा का विचार बनाया गया था लेकिन कहते है ना होनी
को कुछ और ही मंजूर था। हमारी यात्रा वापसी में चम्बा आने के बाद अचानक अंतिम पलो में गाड़ी वालों के कारण बदलनी पड़ी। लेकिन असली घुमक्कड़ वही है जो अंतिम पलों में अपनी यात्रा बदल कर कही भी चला जाये। जिस कारण मैं वापसी में हजारों साल पुराने मशरुर मन्दिर देखकर, कांगड़ा छोटी
रेलवे लाइन की सवारी करता हुआ। पालमपुर जा पहुँचा था। पालमपुर चाय के बागान में घूमता हुआ आगे मैंने बैजनाथ
दर्शन कर बीड़ की सैर भी की थी, वहाँ से सुन्दरनगर होते हुए, करसोग घाटी के कई स्थलों
को देखता हुआ। वापसी में चिन्दी, ततापानी, शिमला
होते हुए दिल्ली पहुँचा था।
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यात्रा पर जाने का वाहन |