ROOPKUND-TUNGNATH 07 SANDEEP PANWAR
अंधेरा होते-होते
हम वाण पहुँच चुके थे। मनु भाई का पोर्टर कम गाईड़ कुवर सिंह काफ़ी पहले ही आगे भेज
दिया गया था। उसे सामान बचा हुआ सामान वापिस करने के लिये कह दिया था। जैसे ही हम
पोस्ट मास्टर गोपाल बिष्ट जी के यहाँ पहुँचे तो देखा कि कुवर सिंह सारे सामान सहित
वही जमा हुआ है। मनु भाई गोपाल जी के यहाँ एक रात रुककर रुपकुन्ड़ के लिये गये थे।
गोपाल जी यहाँ के ड़ाकिया Postman भी है। इसके साथ
वह एक दुकान स्वयं चलाते है जो वाण स्टेशन के कच्चे सड़क मार्ग के एकदम आखिरी में
ही आती है। मनु भाई ने तो अपनी बाइक भी इन्ही की दुकान में पार्क की हुई थी।
इन्होंने हमसे 50 रुपये प्रति बन्दे ठहरने
के व 50
रुपये प्रति थाली भोजन के
लिये थे। कमरे पर आते ही गोपाल जी को हाथ मुँह धोने के लिये थोड़ा सा गर्म पानी
करने के लिये व एक घन्टे में भोजन बनाने के लिये भी लगे हाथ कह दिया था।