गुजरात यात्रा-08
पोरबन्दर से आते समय जो बस हमें
मिली थी उसने हमें जूनागढ़ के बस अड़ड़े पर उतार दिया था। यहाँ से गिरनार पर्वत की
तलहटी तक जाने के लिये हमें अभी लगभग 6-7 किमी यात्रा और करनी थी। जिस बस
में हम यहाँ तक आये थे उसी बस के कई यात्री गिरनार मेले में भागीदारी करने जा रहे
थे। उन्हीं से हमें पता लग गया था कि जूनागढ़ के बस अड़डे से ही आपको गिरनार पर्वत के
आधार तक जाने के लिये दूसरी बस मिल जायेगी। हम पोरबन्दर वाली बस से उतर कर बस
अड़ड़े में ही गिरनार जाने वाली बस के बारे में पता कर, उसकी और बढ़ चले। मेले के दिनों
में गिरनार जाने के लिये बहुत भीड़ रहती है जिस कारण यहाँ पर गिरनार वाली बस के
लिये एक अलग से काऊँटर बनाया गया होता है। पहले जाकर टिकट लेनी होती है उसके बाद
बस में बैठने वाली लाईन में लगना होता है। जैसे ही बस की सीट फ़ुल हो जाती है वैसे
ही वह बस चल देती है उसकी जगह दूसरी बस आ जाती है। हम चारों भी एक बस में सवार
होकर जूनागढ़ के गिरनार पर्वत के लिये चल दिये। जब हम गिरनार की ओर बढ़ रहे थे तो
मार्ग में मिलने वाली भीड़ देखकर हम समझ गये कि यहाँ रात रुकने के लिये आसानी से
जगह मिलने वाली नहीं है। बस से उतर कर हमने रात ठहरने के लिये कई जगह कोशिश की
लेकिन कही भी जगह नहीं मिल पायी। रात के साढ़े सात बज चुके थे इसलिये पहले हमने
पेट पूजा करने के लिये एक ढ़ाबे के यहाँ ड़ेरा ड़ाल दिया था।
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भीड़ की मारामारी |
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चारों और बुरा हाल |