गंगौत्री से केदारनाथ पदयात्रा-7
सोनप्रयाग में पुल के पास ही कावँर यात्रियों के लिये एक लंगर/भण्डारा
चल रहा था हमने यहाँ भी दो-दो पूरी का प्रसाद ग्रहण किया व कुछ देर आराम
करने के बाद आगे की यात्रा पर चल दिये। यहाँ सोनप्रयाग के पुल के पास कुछ
देर तक खडे होकर नदी की अनवरत बहती धारा का कभी ना भूलने वाला यादगार पल
बिताया गया था। यहाँ से आगे सडक पर हल्की-हल्की चढाई भी शुरु हो गयी थी
लेकिन हम तो एक सप्ताह से ऐसी-ऐसी खतरनाक पैदल उतराई व चढाई से होकर आये थे
कि अब कैसी भी चढाई से हमारा कुछ नहीं बिगडता था।
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भगवान गणेश का सिर शिव शंकर जी ने धड से अलग कर दिया था। |