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शुक्रवार, 19 जुलाई 2013

Tirumal- Tirupati Balaji Temple त्रिरुमला पर्वत पर त्रिरुपति बालाजी मन्दिर देवस्थानम

LTC-  SOUTH INDIA TOUR 06                                                                           SANDEEP PANWAR
रामेश्वरम स्टेशन से सप्ताह में एक बार चलने वाली ओखा-रामेश्वरम ट्रेन से हमने अपने टिकट त्रिरुपति तक बुक किये थे। हमारी ट्रेन रात को 8:30 मिनट पर जाने वाली थी, हम स्टेशन लगभग 6:30 बजे ही जा पहुँचे थे। दो घन्टे बैठकर प्लेटफ़ार्म पर ट्रेन लगने का इन्तजार किया। ठीक आठ बजे ट्रेन प्लेटफ़ार्म पर लगा दी गयी। अपनी-अपनी सीट देखकर उस पर अपना डेरा जमा दिया। जब हमने इस ट्रेन के टिकट बुक किये थे तो उस समय हमारी वेटिंग चल रही थी जो मात्र 2/3 ही थी इसलिये यात्रा वाले दिन से पहले ही हमारी टिकट पक्की हो चुकी थी। लेकिन इस ट्रेन में शयनयान के टिकट हमने बुक किये थे।

This is not my photo.

रविवार, 14 जुलाई 2013

Information- Leave Travel Concession (LTC) journey पहली सरकारी यात्रा LTC पर जाने की तैयारी व जानकारी।

LTC-  SOUTH INDIA TOUR 01                                                                           SANDEEP PANWAR
यह यात्रा सन 2009 के दिसम्बर माह में की थी। सरकारी कर्मचारी को चार वर्ष में एक बार पूरे भारते में से किसी एक जगह सपरिवार आने-जाने का किराया मिलता है। अपने जैसे सिरफ़िरे यदि इन सरकारी योजनाओं के चक्कर में पड़ने लगे तो फ़िर तो हो ली घुमक्कड़ी। सरकारी यात्रा चार साल में एक बार हो सकती है जबकि हम जैसे तो साल में कम से कम 6/7 यात्रा तो कर ही ड़ालते है कुछ ऐसे भी मिल जायेंगे जो हर माह किसी ना किसी यात्रा पर निकल पड़ते है। बस या रेल में किसी जगह होकर आना ही यात्रा नहीं कहलाता है किसी स्थान पर जाकर वाहन चाहे कोई भी हो (बस, रेल आदि) यदि उस स्थान के स्थल नहीं देखे तो क्या खाक यात्रा की गयी? ऐसी यात्रा तो दैनिक यात्रा करने वाले वेतन भोगी कर्मचारी व सामान बेचने वाले भी कर लेते है।

अपुन की जोडीदार


शनिवार, 15 जून 2013

Sri Sailam Mallikaarjun Swami Jyotirlinga Temple श्रीशैल मल्लिकार्जुन स्वामी ज्योतिर्लिंग मन्दिर

EAST COAST TO WEST COAST-12                                                                   SANDEEP PANWAR
श्रीशैलम मल्लिकार्जुन मन्दिर पहुँचने से पहले सभी बसे मुख्य मार्ग से हटकर बने एक नगर से होकर वापिस आती है। जब हमारी बस मन्दिर के नजदीक पहुँची तो मेरे सामने वाली सीट पर बैठा बन्दा बोला कि अब जैसे ही बस मुडेगी तो हमें यही उतरना होगा, क्योंकि यहाँ से मन्दिर की पैदल दूरी सबसे नजदीक रहती है। जैसे ही वह मोड़ आया और बस चालक ने बस रोकी तो मैं भी उसी व्यक्ति के साथ वहीं उतर गया। बस से बाहर आते ही वहाँ का माहौल देखकर समझ आने लगा कि यह वीराना सा दिखायी देने वाला कस्बा ज्यादा भीड़भाड़ लिये हुए नहीं है। मैंने अपने साथ वाले बन्दे से मालूम किया कि बस अड़ड़ा यहाँ से कितनी दूरी पर है तो उसने बताया कि बस अड़्ड़ा यहाँ से लगभग पौने किमी के आसपास है। वह व्यक्ति भी मन्दिर में ही दर्शन करने के इरादे से ही जा रहा था, चूंकि वह स्थानीय व्यक्ति था इसलिये उसके पास सामान आदि के नाम पर मन्दिर में भगवान को अर्पित करने वाली पूजा सामग्री के अलावा और कुछ नहीं था।


मंगलवार, 11 जून 2013

Narsingh Temple नरसिंह मन्दिर

EAST COAST TO WEST COAST-11                                                                   SANDEEP PANWAR
अरकू घाटी की बोरा गुफ़ा देखने के बाद इस यात्रा में विशाखापट्टनम की ओर लौटते समय नारायण जी बोले, "अभी हमारे पास एक घन्टा अतिरिक्त है अगर सम्भव हुआ तो नरसिंह भगवान वाला मन्दिर भी देखते हुए घर चलते है। मन्दिर देखने के बाद श्री शैल मल्लिकार्जुन जो कि भगवान भोले नाथ को समर्पित बारह ज्योतिर्लिंग में से एक है, के लिये प्रस्थान किया जायेगा। विशाखापट्टनम शहर की आबादी में घुसने के बाद उल्टे हाथ पर एक मार्ग पहाड़ के ऊपर चढ़ता जाता है यह मार्ग नरसिंह मन्दिर पहुँचकर ही समाप्त होता है। यह नरसिंह मन्दिर वही मन्दिर है जो हिन्दू धर्म में होलिका दहन और भक्त प्रहलाद के कारण प्रहलाद के पिता को मारने के लिये आधे नर व आधे सिंह वाले अवतार रुप में इस पृथ्वी पर अवतरित हुए और प्रहलाद के पिता हिरण्यकश्यप का साँयकाल के समय संहार किया। हिरण्यकश्यप भी कमाल का प्राणी था जो भगवान से ऐसा वरदान ले आया था कि वह ना दिन में मरेगा, ना रात में, ना आदमी से मरेगा, ना जानवर/पशु से। इस अत्याचारी पिता को मौत के हाथों में सौपने के लिये भगवान को आधा शरीर मानव का व आधा शरीर शेर का धारण करना पड़ा, वरदान अनुसार दिन छिपते समय का चुनाव किया गया था ताकि अंधेरा होने से पहले ही उसका काम तमाम हो सके।


शुक्रवार, 7 जून 2013

Borra Caves, Araku Valley बोरा गुफ़ा, अरकू घाटी,

EAST COAST TO WEST COAST-10                                                                   SANDEEP PANWAR
अरकू घाटी का रेलवे स्टेशन देखने के बाद हम वहाँ से बोरा गुफ़ा देखने के लिये चल दिये। बोरा गुफ़ा विशाखापट्टनम से लगभग 90 किमी दूरी पर है अरकू यहाँ से 37 किमी दूरी पर पड़ता है जो रेल अरकू घाटी होकर जाती है वही रेल बोरा गुफ़ा के ठीक ऊपर होकर चलती है। सड़क मार्ग से यहाँ जाने पर मुख्य सड़क से कई किमी हटकर बोरा गुफ़ा के लिये जाना पड़ता है। हम अरकू पहाड़ी स्थल से वापसी में विशाखापट्टनम की ओर लौटते समय मस्ती से आ रहे थे। नारायण जी को कार का जीपीएस यंत्र चालू करने को कहा, जब नारायण जी ने कार का जीपीएस यंत्र चालू किया तो यंत्र के कुछ देर बाद ही अंतरिक्ष में सेटलाइट के जरिये हमारी ऊँचाई बतानी आरम्भ कर दी। जब हमने यंत्र आरम्भ किया था तो उस समय हमारी ऊँचाई हजार मीटर से भी काफ़ी ज्यादा थी। जैसे-जैसे हम विशाखापट्टनम की ओर बढ़ते जा रहे थे हमारी ऊँचाई लगातार घटती जा रही थी।




गुरुवार, 6 जून 2013

Araku Railway Station अरकू रेलवे स्टेशन

EAST COAST TO WEST COAST-09                                                                   SANDEEP PANWAR
अरकू घाटी में अरकू का अपना रेलवे स्टेशन है यह अलग बात है कि यहाँ पर दिन भर में विशाखापट्टनम से एक ही ट्रेन आती है व यही ट्रेन आगे किसी स्टेशन तक पहुँचने के बाद यही से होकर वापिस भी जाती है इसके एकमात्र ट्रेन के अलावा यहाँ कोई अन्य रेल नहीं आती है। यह एकमात्र रेल एक्सप्रेस रेल सेवा ना होकर पैसेंजर गाड़ी है लेकिन सबसे बड़ा शुक्र यह है कि इसमें दो डिब्बे में सीट आरक्षित होती है ताकि बाहर से आने वाले पर्यटक/घुमक्कड़ भीड़ से बचते हुए आसानी से यहाँ पहुँच सके। यही ट्रेन विशाखापट्टनम से बोरा गुफ़ा होकर आती है। बोरा गुफ़ा के ठीक ऊपर वहाँ का स्टेशन बना हुआ है उसके लिये भी ज्यादा नहीं चलना पड़ता है। कार पार्किंग में लगाकर मैंने कैमरा उठाया और स्टेशन के अन्दर जाकर फ़ोटो लेने लगा। यहाँ के स्टेशन पर भीड़ की ज्यादा मारामारी नहीं थी, साफ़ सुथरा स्टेशन था जिस कारण देखने में भी अच्छा लग रहा था। स्टेशन के बाहर निकलते ही एक दीवार पर अरकू घाटी में देखने लायक स्थलों का एक नक्शा बनाया हुआ है नीचे दिये गये फ़ोटो में दो हिस्से में वह नक्शा दिखाया गया है। अरकू स्टेशन देखकर हमें बोरा गुफ़ा निकलना था।

बुधवार, 5 जून 2013

Araku Valley- Chaaparai fall अरकू वैली का छापाराई झरना

EAST COAST TO WEST COAST-08                                                                   SANDEEP PANWAR
अरकू घाटी का पदमपुरम गार्ड़न देखने के बाद हम वहाँ से 15 किमी आगे छापाराई नामक एक झरने तक चलने की तैयारी करने लगे। गार्ड़न से बाहर आकर मुख्य सड़क पर आने के बाद सीधे हाथ उसी दिशा में चलते रहे जहाँ पर विशाखापट्टनम से आते समय जा रहे थे। अरकू गाँव से आगे निकलते ही एक बन्दे से उस झरने के बारे में पता किया तो उसने कहा कि आगे जाने पर उल्टे हाथ एक मार्ग आयेगा जो उस झरने के आगे से होकर जायेगा। यह झरना अरकू से 25 किमी दूरी पर है इसलिये हमारी कार उस दिशा में तेजी से दौड़ती चली गयी। अरकू वाली सड़क से जब हमारी कार उल्टे हाथ वाले मार्ग पर मुड़ी तो मार्ग की चौड़ाई कम होने के कारण कार की गति सीमित करनी पड़ी। यह सड़क मात्र एक वाहन चलने लायक ही बनायी गयी है। दो कार एक साथ आ जाये तो उन्हें एक-एक पहिया सड़क से नीचे उतारना पड़ जाता है।




Padampuram Garden- Araku valley (Hill station) पदमपुरम गार्ड़न, अरकू वैली/घाटी, विशाखापट्टनम

EAST COAST TO WEST COAST-07                                                                   SANDEEP PANWAR
घर पहुँचते-पहुँचते घनघोर अंधेरा हो गया था इसलिये सड़कों गलियों में बिजली की लाईटे अपनी भरपूर रोशनी से शहर को जगमगा रही थी। रात में नारायण जी के घर पहुंचे, नारायण जी का घर हाईवे से ज्यादा दूरी पर नहीं है लेकिन बाई पास उनके घर से कई किमी दूरी पर है। अपने यहाँ उत्तर भारत में एक परम्परा है कि किसी दोस्त-जान पहचान वाले के यहाँ पहली बार जाते समय कुछ मीठा साथ ले जाना अच्छा माना जाता है ताकि मेजबान और जजमान में मिठास बढ़ती रहे। शायद आंध्रप्रदेश में मीठे की रस्म थोड़ा हटकर है इसलिये नारायण जी से घर घुसने से पहले ही इस बात को बता दिया गया था अब नारायण जी ने एक नई मुश्किल बता दी कि उन्हें उनकी अर्धांगिनी को मधुमेह है जिससे वे मीठे से परहेज करते है। खैर रस्म अदायगी रुप में वहां की थोड़ी सी मिठाई लेकर नारायण जी के घर पहुँचे। अगली सुबह अरकू घाटी देखने जाना था।



सोमवार, 3 जून 2013

Kursura Submarine, Kali temple, Ramakrishna mission Ashrama कुरसुरा पनडुब्बी, काली मन्दिर, रामाकृष्णा मिशन आश्रम,

EAST COAST TO WEST COAST-06                                                                   SANDEEP PANWAR
भीमली से विशाखापट्टनम लौटते समय हमने एक पनडुब्बी देखने की कोशिश की थी लेकिन जाते समय भी यह बन्द थी तो वापसी में भी हमें यह बन्द ही मिली। जहाँ इस सबमेरीन देखने के टिकट मिलते है वहाँ एक छोटे से बोर्ड़ पर नजर गयी, जिस पर लिखा था कि सोमवार को पनडुब्बी दर्शकों के लिये बन्द रहती है। अरे आज तो सोमवार ही तो है कल मंगलवार को पूरा दिन वोरा गुफ़ा व अरकू वैली देखने में लग जायेगा। इसलिये कल भी इसे देखने का मौका हाथ नहीं आने वाला। वैसे कल रात की बस पकड कर श्री शैल के लिये निकल जाना है अत: इस पनडुब्बी को देखने का मौका इस बार तो गया काम से। खैर कोई बात नहीं, यहाँ दुबारा आने के लिये कोई ना कोई तो बहाना चाहिए ना, इसलिये कुछ ना कुछ तो देखने से छूटना ही चाहिए। इसलिये यह पनडुब्बी हमसे रह गयी।


Bheemili, Visakhapatnam, Andhra Pradesh भीमली, विशाखापटनम, आंध्रप्रदेश (भीम-बकासुर युद्ध-स्थल)

EAST COAST TO WEST COAST-05                                                                   SANDEEP PANWAR
भीमली का कब्रगाह देखने के बाद सामने ही समुन्द्र किनारे दिखायी दे रहे शानदार नजारे हमें अपनी ओर आकर्षित कर रहे थे। हम भी उनके आकर्षण में बंधकर समुन्द्र किनारे खिचे चले गये। कुछ देर तक समुन्द्र किनारे टहलते रहे। आगे जाने पर कई मूर्तियाँ दिखायी दे गयी। समुन्द्र को उसके हाल पर छोड़कर मूर्तियाँ देखने निकल पड़े। समुन्द्र किनारे जो मूर्तियाँ थी वो बेहद ही बुरी अवस्था में थी किसी का हाथ किसी की मुन्ड़ी, किसी की टाँग, और किसी की कुछ ना कुछ टूटी हुई थी। यहाँ एक दो दुकाने भी लगी हुई थी जहाँ समुन्द्र किनारे मिलने वाली वस्तुएँ से बनने वाली सामग्री बिक्री के लिये उपलब्ध थी। इसके बाद हम लाइट हाऊस की ओर बढ़ चले। वैसे तो यह लाइट हाउस अब बन्द हो चुका है लेकिन इस लाइट हाउस ने सैकड़ों वर्षों तक अपनी सेवा पानी के जहाजों को दी होगी। लाइट हाउस के आगे से होते हुए हम आगे चलते रहे।


गुरुवार, 30 मई 2013

Visakhapatnam-Ramanaidu Film studio विशाखापटनम का रामानायड़ू फ़िल्म स्टूड़ियों

EAST COAST TO WEST COAST-03                                                                   SANDEEP PANWAR
कैलाश-गिरी पर्वत के बाद हमारी कार समुन्द्र किनारे भागी जा रही थी। नारायण जी अगले साल रिटायर होने वाले है लेकिन उनका जोश-जिगर देखकर नहीं लगता है कि अगले साल रिटायर कैसे? गजब की ड्राईविंग करते है, चूंकि मैं स्वयं कार चलाना भी जानता हूँ और पहाड़ों पर सपिवार कार चलाकर यात्रा की हुई है, इसलिये नारायण जी की हिम्मत देखकर आनन्द के साथ हिम्मत बढ़ती है कि अरे हम तो अभी 40 के भी नहीं हुए है। अचानक नारायण ने कार रोक कर पूछा, संदीप भाई फ़िल्म सिटी देखी है। मैंने कहा कि मैं फ़िल्मे ही कम देखता हूँ फ़िल्म सिटी वाले शहर में अभी तक सिर्फ़ नौएड़ा ही देखा है बोम्बे अब आपके यहाँ से जाऊँगा। लेकिन वहाँ फ़िल्म सिटी देखने नहीं जाऊँगा। नारायण जी बोले तो चलो आज विशाखापट्टनम की मशहूर फ़िल्म सिटी दिखाता हूँ। हमारी कार समुन्द्र किनारे वाली मुख्य सड़क छोड़कर फ़िल्म सिटी की ओर चढ़ चली। आधे किमी की ऊँचाई पर कई घुमावदार मोड़ पार करने के बाद रामानायडू फ़िल्म सिटी आई। टिकट लेकर नारायण जी ने मुझे अन्दर चलने को कहा। आप भी चलिये, देखिए सचित्र रामानायडू फ़िल्म सिटी।


बुधवार, 29 मई 2013

Visakhapatnam- Kailash giri parvat विशाखापट्टनम का कैलाश गिरी पर्वत

EAST COAST TO WEST COAST-02                                                                   SANDEEP PANWAR
विशाखापटनम को विजाग भी कहा जाता है मुझे इस बात का पता ही नही था। हम स्टेशन से समुन्द्र की ओर चल पड़े। नारायण जी बोले, संदीप भाई विजाग में कहाँ-कहाँ घूमना चाहोगे? मैंने कहा, मैं आज दोपहर से लेकर कल शाम तक पूरे ड़ेढ़ दिन तक आपके साथ हूँ आपके नजरिये से जो देखने लायक कुदरती स्थल है उन्हे ही दिखा दिजिएगा। इस तरह शहर के टेड़े मेड़े मार्गों से होते हुए हम समुन्द्र किनारे जा पहुँचे थे। अगर आज मुझे अकेले को स्टेशन से समुन्द्र किनारे उसी जगह जाने को कह दिया जाये तो पता नहीं कितने झमेले झेलने पड़ेंगे? तब जाकर मैं समुन्द्र किनारे पहुंच पाऊँगा। समुन्द्र किनारे पहुँचने से पहले नारायण जी ने एक जगह अपनी कार रोकी और बताया कि सड़क किनारे जो छोटा सा मन्दिर दिखायी दे रहा है यहाँ इस मन्दिर में अधिकतर वही लोग आते है जो नई गाड़ियाँ खरीदते है। हम कह सकते है कि वह नन्हा सा मन्दिर विजाग में खरीदी जानी वाली गाड़ी के लिये आशीर्वाद प्रदान करता है कि जा बच्चा, सुरक्षित रहेगा, यदि सीमित गति में वाहन दौडायेगा।


मंगलवार, 28 मई 2013

Delhi to Vishakapattnam (Vizag) दिल्ली से विशाखापटनम

EAST COAST TO WEST COAST-01                                                                   SANDEEP PANWAR
इस साल की शुरुआत से ही तीन लम्बी-लम्बी कई हजार किमी की रेल यात्राएँ करने को मिल चुकी है। पहली लम्बी यात्रा गोवा की थी जिसके बारे में आपको बता ही दिया गया है, इसके बाद इस यात्रा की बारी आयी थी। इस यात्रा के बारे में पहले से कुछ तय नहीं था ना ही कुछ सोचा गया था। हुआ ऐसा कि कुरुंदा गाँव, नान्देड़ के पास रहने वाले अपने बाइक वाली घुमक्कड़ साथी की लड़की व लड़के दोनों की ही एक ही दिन, एक ही मंड़प के अन्दर फ़रवरी में उनके गाँव में ही शादी थी। जब उन्होंने मुझे शादी में शामिल होने का निमन्त्रण दिया तो मैंने लगे हाथ बोम्बे घूमने का कार्यक्रम भी बना ड़ाला। वैसे बोम्बे एक बार पहले गया तो था लेकिन भीमाशंकर से ही वापिस चला आया था। इस बार बोम्बे जाने का असली मकसद माथेरान की ट्राय ट्रेन की सवारी करने का था। पिछली बार अक्टूबर में गया था तो मानसून के चक्कर में वह छोटी रेल भी बन्द थी।




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