मंगलवार, 28 मई 2013

Delhi to Vishakapattnam (Vizag) दिल्ली से विशाखापटनम

EAST COAST TO WEST COAST-01                                                                   SANDEEP PANWAR
इस साल की शुरुआत से ही तीन लम्बी-लम्बी कई हजार किमी की रेल यात्राएँ करने को मिल चुकी है। पहली लम्बी यात्रा गोवा की थी जिसके बारे में आपको बता ही दिया गया है, इसके बाद इस यात्रा की बारी आयी थी। इस यात्रा के बारे में पहले से कुछ तय नहीं था ना ही कुछ सोचा गया था। हुआ ऐसा कि कुरुंदा गाँव, नान्देड़ के पास रहने वाले अपने बाइक वाली घुमक्कड़ साथी की लड़की व लड़के दोनों की ही एक ही दिन, एक ही मंड़प के अन्दर फ़रवरी में उनके गाँव में ही शादी थी। जब उन्होंने मुझे शादी में शामिल होने का निमन्त्रण दिया तो मैंने लगे हाथ बोम्बे घूमने का कार्यक्रम भी बना ड़ाला। वैसे बोम्बे एक बार पहले गया तो था लेकिन भीमाशंकर से ही वापिस चला आया था। इस बार बोम्बे जाने का असली मकसद माथेरान की ट्राय ट्रेन की सवारी करने का था। पिछली बार अक्टूबर में गया था तो मानसून के चक्कर में वह छोटी रेल भी बन्द थी।





मैंने दिल्ली से नान्देड़ के लिये सचखन्ड़ एक्सप्रेस का टिकट घर से ही बुक कर दिया। नान्देड़ में शादी के लिये दो दिन बहुत थे, सो वहाँ से दो दिन बाद का एक खटारा सी गाड़ी का टिकट बोम्बे के लिये बुक कर दिया गया था। यह गाड़ी सुबह नागपुर से चलकर शाम के पाँच बजे नान्देड़ पहुँचती है। पूरी रात चलने के बाद सुबह सवेरे बोम्बे पहुँचा देती है। बोम्बे में घूमने के लिये एक दिन माथेरान के नाम का छोड़ दिया, दूसरा दिन बोम्बे की कुछ जानी-पहचानी जगहों को देखने के लिये रख लिया था। बोम्बे के गोरे गाँव में रहने वाले घुमक्कड़ दोस्त विशाल राठौर माथेरान व बोम्बे भ्रमण में मेरा साथ निभाने वाले थे। भीमाशंकर जाते समय हम दोनों माथेरान जाने के इच्छुक जरुर थे लेकिन ट्रेन के ना चलने की वजह से वहाँ नहीं जा पाये थे। इस यात्रा में वह इच्छा भी पूरी हुई थी। इसी यात्रा में हमने माथेरान को दिन भर घूम-घूम कर देखा भी था।

जब सब कुछ पक्का हो गया तो एक दिन जीमेल चैटिंग के जरिये अपने जानकार ज्ञानी वरिष्ट घुमक्कड़ डी एल नारायण से बातों बातों में इस यात्रा के बारे में बताया तो उन्होंने कहा संदीप भाई आप विजाग (विशाखापट्टनम) भी आ जाईये ना। नारायण जी घुमक्कड़ प्राणी होने के साथ-साथ चलते-फ़िरते कम्पयूटर भी है। नारायण का निमन्त्रण मिलने से मुझे अपने कार्यक्रम पर थोड़ा सा विचार करना पड़ा। इस बारे में नारायण जी ने सलाह दी कि आप नान्देड़ से आगे का कार्यक्रम तो ऐसे ही रहने दे। दिल्ली से विजाग व विजाग से अरकू घाटी देखकर नान्देड़ चले जाना। मैंने सोचा जब विजाग तक का कार्यक्रम बन ही रहा है तो लगे हाथ श्रीशैल मल्लिकाअर्जुन देखते हुए क्यों ना आया जाये। मैंने विजाग से श्रीशैल तक पहुँचने के साधन के बारे में नारायण जी से पता किया तो उन्होंने कहा कि विजाग से श्रीशैल के लिये एक दैनिक बस सेवा है जो रात भर चलकर सुबह आपको श्रीशैल पहुँचा देगी। अब नारायण जी यहाँ एक जिम्मेदारी और ले ली कि जिस बस से आप श्रीशैल जाओगे उसमें आरक्षण होता है उसे मैं करा दूँगा। अब अपुन को कोई चिंता नहीं थी।

इस तरह मैंने दिल्ली से विजाग का रेल टिकट बुक कर दिया। विजाग दो दिन घूमने के बाद अगले दिन श्रीशैल देखने के लिये छोड़ दिया। उस दिन का रात को हैदराबाद से नान्देड़ के रेल का टिकट बुक कर दिया गया। बाकि सब पहले से ही बुक हो चुका था। इस तरह इस यात्रा का आगमन हुआ। दिल्ली से 9 फ़रवरी की रात को ग्यारह बजे ट्रेन में बैठकर विशाखापट्टनम के लिये प्रस्थान कर दिया। अपनी ट्रेन मथुरा-आगरा-ग्वालियर-झाँसी-भोपाल होते हुए आगे बढ़ती रही। जिस डिब्बे में मैं बैठा हुआ था उसमें काफ़ी सारे फ़ौजी भी सवार थे जो अपने-अपने घर जा रहे थे। पहली रात तो सोते सोते ही बीत गयी थी, अगली सुबह मध्यप्रदेश पहुँचकर दिन निकल आया था। भोपाल से आगे जाने पर हौशंगाबाद जंक्शन जाने पर जबलपुर वाले रुट की याद आयी जिसके टिकट अगले महीने के लिये बुक किये हुए थे। नागपुर पहुँचते-पहुँचते दिन छिपने को आ गया था।

जिस ट्रेन में हम सवार थे जागपुर से आगे एक स्टेशन पर जाकर इस ट्रेन के कई डिब्बे काटकर अलग कर दिये जाते है। जो हैदराबाद की ओर चले जाते है। हमारी ट्रेन रात भर कहाँ –कहाँ से दौड़ती रही, मुझे पता नहीं चला, सुबह विजयवाड़ा जाकर आँख खुली। विजयवाड़ा स्टेशन के इड़ली-वड़े बहुत फ़ेमस है मैंने भी सुबह के नाश्ते के रुप में इनका सेवन किया था। विजयवाड़ा से चलने के बाद विशाखापट्टनम पहुँचने में ट्रेन को 5 घन्टे लग जाते है। नारायण जी को फ़ोन कर अपने आने की सूचना दे दी गयी। नारायण जी ने कहा कि संदीप भाई मैं आपको स्टेशन पर मिल जाऊँगा। जैसे ही ट्रेन विशाखापट्टनम स्टेशन पहुंची तो मैंने अपना बैग उठाया और डिब्बे से बाहर निकल आया। डिब्बे से बाहर आते ही नारायण जी मुझे खड़े मिल गये। पहले तो गले मिलकर जीवन में पहली बार दो घुमक्कड़ों ने मिलने की खुशी मनायी उसके बाद स्टेशन से बाहर आये। स्टेशन के बाहर दो-तीन फ़ोटो लेने के बाद नारायण जी की कार में सवार होकर हम फ़ुर्र हो गये। (क्रमश:)

विशाखापटनम-श्रीशैल-नान्देड़-बोम्बे-माथेरान यात्रा के आंध्रप्रदेश इलाके की यात्रा के क्रमवार लिंक नीचे दिये गये है।
15. महाराष्ट्र के एक गाँव में शादी की तैयारियाँ।
16. महाराष्ट्र की ग्रामीण शादी का आँखों देखा वर्णन।
17. महाराष्ट्र के एक गाँव के खेत-खलिहान की यात्रा।
18. महाराष्ट्र के गाँव में संतरे के बाग की यात्रा।
19. नान्देड़ का श्रीसचखन्ड़ गुरुद्धारा
20. नान्देड़ से बोम्बे/नेरल तक की रेल यात्रा।
21. नेरल से माथेरान तक छोटी रेल (जिसे टॉय ट्रेन भी कहते है) की यात्रा।
22. माथेरान का खन्ड़ाला व एलेक्जेन्ड़र पॉइन्ट।
23. माथेरान की खतरनाक वन ट्री हिल पहाड़ी पर चढ़ने का रोमांच।
24. माथेरान का पिसरनाथ मन्दिर व सेरलेक झील।
25. माथेरान का इको पॉइन्ट व वापसी यात्रा।
26. माथेरान से बोम्बे वाया वसई रोड़ मुम्बई लोकल की भीड़भरी यात्रा।
विशाखापटनम-श्रीशैल-नान्देड़-बोम्बे-माथेरान यात्रा के बोम्बे शहर की यात्रा के क्रमवार लिंक नीचे दिये गये है।
27. सिद्धी विनायक मन्दिर व हाजी अली की कब्र/दरगाह
28. महालक्ष्मी मन्दिर व धकलेश्वर मन्दिर, पाताली हनुमान।
29. मुम्बई का बाबुलनाथ मन्दिर
30. मुम्बई का सुन्दरतम हैंगिग गार्ड़न जिसे फ़िरोजशाह पार्क भी कहते है।
31. कमला नेहरु पार्क व बोम्बे की बस सेवा बेस्ट की सवारी
32. गिरगाँव चौपाटी, मरीन ड्राइव व नरीमन पॉइन्ट बीच
33. बोम्बे का महल जैसा रेलवे का छत्रपति शिवाजी टर्मिनल
34. बोम्बे का गेटवे ऑफ़ इन्डिया व ताज होटल।
35. मुम्बई लोकल ट्रेन की पूरी जानकारी सहित यात्रा।
36. बोम्बे से दिल्ली तक की यात्रा का वर्णन




















कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग के आने वाले सभी या किसी खास लेख में आप कुछ बाते जुडवाना चाहते है तो अवश्य बताये,

शालीन शब्दों में लिखी आपकी बात पर अमल किया जायेगा।

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...