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गुरुवार, 9 जनवरी 2014

Let's go to Kashmir by air आओ हवाई मार्ग से कश्मीर चले

श्रीनगर सपरिवार यात्रा के सभी लेख के लिंक नीचे दिये गये है।

01- हवाई यात्रा की तैयारी, हवाई अड़ड़े पर उड़ान रद्द होने की घोषणा।

02- राष्ट्रीय रेल संग्रहालय (चाणक्यपुरी)

SRINAGAR BY AIR YATRA-01

सरकारी कर्मचारी होने का सबसे बड़ा लाभ तब पता लगता है जब उन्हे लम्बे अवकाश के साथ-साथ प्रत्येक चार वर्ष के अन्तर पर पूरे भारत में किसी एक जगह सपरिवार घुमक्कड़ी करने के लिये आने-जाने का किराया मिलता है। चार साल में सरकारी किराया मिलने वाली सुविधा लगभग सभी राज्यों में उपलब्ध है। कुछ राज्य तो अपने कर्मचारियों को बिना यात्रा पर जाये नगद भुगतान कर देते है। सरकारी कर्मचारियों में अफ़सरों को हवाई जहाज से जाने की सुविधा शुरु से ही मिलती है तो अन्य श्रेणी के कर्मचारी रेलवे के दूसरी या तीसरी श्रेणी के वातानुकुलित डिब्बे में यात्रा करने के पात्र होते है। 


सोमवार, 25 मार्च 2013

Katra to Vaishno Devi to Delhi कटरा से वैष्णों देवी से दिल्ली यात्रा वर्णन

अमृतसर-अमरनाथ-श्रीनगर-वैष्णों देवी यात्रा-06                                                     SANDEEP PANWAR


वैष्णों देवी यात्रा पर जाने के लिये सबसे जरुरी चीज वो पर्ची होती है जिसके बिना आपको यात्रा से वापिस लौटना पड़ जायेगा। हम सुबह ठीक साढ़े 5 बजे पर्ची की लाइन में गये थे, जिस कारण सुबह 6 बजे हमारे हाथ में वैष्णों देवी यात्रा पर ऊपर जाने के लिये कटरा के पर्ची केन्द्र से पर्ची मिल चुकी थी। अगर हम शाम को यहाँ आते तो रात में ही यह पद यात्रा आसानी से हो जाती। हम कुल मिलाकर 6 लोग थे। सभी के सभी जवान ही थे जो एक दो बुजुर्ग की श्रेणी में आते थे उन्होंने कल ही हमारा साथ छोड़ दिया था। यह भी अच्छा ही हुआ कि वे हमारा साथ छोड़ गये। नहीं तो वे हमें इस यात्रा में तंग करते। चूंकि यह मेरी पहली वैष्णों देवी यात्रा थी इसलिये मैं मजबूरी में सबके साथ चल रहा था। मैंने मजबूरी इसलिये कही है कि पहाड़ की उतराई हो या चढ़ाई उससे अपनी गति पर कोई फ़र्क नहीं पड़ता है। अपनी प्रतिदिन साईकिल चलाने की आदत के कारण पहाड़ की उतराई व चढ़ाई से अपुन को कुछ फ़र्क नहीं पड़ता है। हमारे ग्रुप में यह अच्छा रहा कि सभी जवान ही थे जिस कारण सभी की सोच भी मेल खा रही थी। 
यह फ़ोटो इस यात्रा का नहीं है।

शनिवार, 16 मार्च 2013

Jammu to Vaishno Devi and back to delhi जम्मू से वैष्णों देवी तक, व दिल्ली तक की यात्रा का विवरण

पहली हिमाचल बाइक यात्रा-05                                                                              SANDEEP PANWAR


जहाँ पठानकोट तक आते-आते हम भीगे हुए थे, उसके विपरीत जम्मू आते-आते हमारे कपड़े पूरी तरह सूख चुके थे। जम्मू में सतावरी चौक के पास ही विशेष मलिक के चाचा सपरिवार रहते थे। अगले तीन दिन तक हम इन्ही के यहाँ ठहरने वाले थे। जिस दिन हम जम्मू पहुँचे उस दिन हमने घर से बाहर कदम नहीं रखा था। अरे हाँ घर की छत पर ताजे-ताजे कच्चे-पक्के आम लगे हुए थे। हम छत पर जाकर आम खाने में मशगूल हो चुके थे। शाम को खाना खा पीकर हमने टीवी पर समाचार देखकर कई दिनों बाद दीन दुनिया का सूरते हाल जाना था। हमने अगले दिन अमरनाथ जाने की योजना बनानी चाही थी लेकिन जहाँ से अमरनाथ यात्रा आरम्भ होती है वहाँ पर लगे काऊँटर से हमने अमरनाथ यात्रा पर जाने के लिये पता किया, उन्होंने बताया कि बिना यात्रा पर्ची के आप बालटाल व पहलगाँव से आगे नहीं जा सकते है। हमने कहा कि पर्ची बना दो, उन्होंने कहा अपने पहचान पत्र दिखाओ, हमने वो भी दिखा दिये। लेकिन इसके बाद उन्होंने कहा कि हमारे पास 20 दिन बाद की पर्ची बची हुई है। बीस दिन हम वहाँ क्या करते? इसलिये हमने अमरनाथ AMARNATH YATRA जाने की योजना बन्द कर वैष्णों देवी दर्शन करने की योजना बना ड़ाली थी। इसके बाद हम वापिस जम्मू विशेष के चाचा के घर लौट आये। वैष्णों देवी जाने के लिये हमने अगले दिन सुबह 4:30 मिनट पर अपनी बाइक पर सवार होकर हवा से बाते करना शुरु किया।

ये मौसम भीगा-भीगा है।

हिमाचल की इस पहली लम्बी बाइक यात्रा के सभी लेख के लिंक नीचे दिये गये है।

भाग-01 दिल्ली से कुल्लू मणिकर्ण गुरुद्धारा।
भाग-02 रोहतांग दर्रा व वापसी कुल्लू तक
भाग-03 रिवाल्सर झील, चिंतपूणी मन्दिर, ज्वाला जी मन्दिर, कांगड़ा मन्दिर।
भाग-04 चामुंण्ड़ा से धर्मशाला पठानकोठ होकर जम्मू तक।
भाग-05 जम्मू से वैष्णों देवी व दिल्ली तक की बाइक यात्रा का वर्णन।
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भैरों मन्दिर में

बुधवार, 1 जून 2011

LEH LADAKH BIKE TOUR बाइक से लाल किला से लेह-लद्दाख (आखिरी भाग) 11, KATRA, JAMMU, AMBALA, DELHI

लेह बाइक यात्रा-
पहले दिन सवा चार सौ किलोमीटर बाइक चलाने के बाद भी, रात में माता के दर्शन पैदल किये, उसके बाद भी सिर्फ़ तीन घंटे सोये, हम सब घर जाने के लिये उतावले थे। सब नहा धोकर, सुबह साढे नौ बजे अपने प्यारे घर की और चल दिये। आज उस मार्ग से नहीं जाना था जिससे कल आये थे। आधे घंटे बाद हम जम्मू-श्रीनगर हाइवे पर आ गये थे। जम्मू की ओर जाते समय, हमें जम्मू बाईपास से जाना था, लेकिन मेरे दोनों बाइक वाले साथी कुछ ज्यादा ही तेजी से जा रहे थे, बाईपास को देखा ही नहीं, और घुस गये जम्मू सिटी की भीड में, जबकि मैं बाईपास से होता हुआ सीधा सांबा जा निकला, व यहाँ एक भंडारे पर भोले का प्रसाद दाल मखनी व तंदूरी रोटी ग्रहण किया। जब तक उन दोनों ने जम्मू पार ही किया था। अब तय हुआ कि कठुआ या पठानकोट पार करने के बाद उस मोड पर मिलंगे, जहाँ से एक मार्ग चम्बा, धर्मशाला, मण्डी की ओर जाता है व दूसरा जालंधर, लुधियाना, अम्बाला, दिल्ली की ओर, लेकिन पठानकोट में फ़िर गडबड हो गयी। ये चारों पठानकोट से जालंधर वाले मार्ग पर ना आकर, सीधे हाथ अमृतसर की ओर चले गये।
हम जब भी घर से बाहर होते है, तो हमेशा इस बोर्ड पर लिखी बात ध्यान में रखते है। आप भी रखो,

इस यात्रा के सभी भाग के दर्शन करने के लिये  नीचे लिखे उसी भाग पर क्लिक करे 
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