हिमाचल स्कारपियो-बस वाली यात्रा-03 SANDEEP PANWAR
नैना देवी मन्दिर में मुख्य मूर्ति के दर्शन करने के उपरांत अपना काफ़िला ज्वाला जी ओर चल दिया। बाइक वाले दोस्त एक घन्टा पहले ही आगे की मंजिल के लिये प्रस्थान कर गये थे। हमने भी वहाँ ज्यादा समय ना लगाते हुए ज्वाला जी के लिये प्रस्थान कर दिया। नैना देवी के पहाड़ पर चढ़ते ही सतलुज नदी पर बना बांध के कारण रुका हुआ पानी दिखायी देने लगता है। यहाँ एक बात स्पष्ट कर रहा हूँ कि बोलने में तो सभी भले ही भाखड़ा-नांगल बांध बोलते हो लेकिन भाखड़ा और नांगल दो अलग-अलग बांध है जिसमें से नांगल बांध नीचे बना है और भाखड़ा बांध इससे 13-14 किमी ऊपर बना हुआ है। यहाँ आने से पहले तो मेरे लिये दोनों बांध एक ही हुआ करते थे। भाखड़ा बांध को ही गोविन्द सागर झील कहा जाता है। हिमाचल में ही एक अन्य बांध पोन्ग बांध भी देखने घूमने लायक स्थान है। पोन्ग बांध को महाराणा प्रताप सागर बान्ध कहा जाता है। नैना देवी के ऊपर पहाड़ से ही भाखड़ा बांध के दर्शन होने आरम्भ हो जाते है। इसलिये हम इसी बान्ध के साथ-साथ चलते हुए चले आ रहे थे।
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अति सुन्दर |
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देखा |