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बुधवार, 5 फ़रवरी 2014

Pahalgam-A beautiful valley पहलगाम की सुन्दर घाटी

श्रीनगर सपरिवार यात्रा के सभी लेख के लिंक नीचे दिये गये है।
01- दिल्ली से श्रीनगर तक की हवाई यात्रा का वर्णन।
02- श्रीनगर की ड़ल झील में हाऊस बोट में विश्राम किया गया।
03- श्रीनगर के पर्वत पर शंकराचार्य मन्दिर (तख्त ए सुलेमान) 
04- श्रीनगर का चश्माशाही जल धारा बगीचा
05- श्रीनगर का मुगल गार्ड़न-निशात बाग
06- श्रीनगर का मुगल गार्ड़न-शालीमार बाग
07- श्रीनगर हजरतबल दरगाह (पैगम्बर मोहम्मद का एक बाल सुरक्षित है।)
08- श्रीनगर की ड़ल झील में शिकारा राइड़ /सैर
09- अवन्तीपोरा स्थित अवन्ती स्वामी मन्दिर के अवशेष
10- मट्टन- मार्तण्ड़ सूर्य मन्दिर  व ग्रीन टनल
11- पहलगाम की सुन्दर घाटी
12- कश्मीर घाटी में बर्फ़ीली वादियों में चलने वाली ट्रेन की यात्रा, (11 किमी लम्बी सुरंग)
13- श्रीनगर से दिल्ली हवाई यात्रा के साथ यह यात्रा समाप्त

SRINGAR FAMILY TOUR- 11
दिनांक 03-01-2014, आज के दिन सबसे पहले अवन्तीपोरा मन्दिर के खण्ड़हर देखे, उसके बाद मटटन का मार्तण्ड़ सूर्य मन्दिर देखा। अन्त में पहलगाम पहुँच ही गये। पहलगाम के टैक्सी स्टैन्ड़ से पहले ही बर्फ़ के कारण वाहनों की लाईन लगी थी, जिस कारण हम भी कार से उतर गये। चालक से कह दिया कि तुम कार खड़ी करने लायक जगह देखकर रुक जाओ। हम तीन दिन से बर्फ़ ही बर्फ़ देखते घूम रहे थे। इतनी बर्फ़ देख ली थी कि बर्फ़ से मन भरने लगा था। आगे बढने की बजाय हमने लिददर नदी पार कर, वहाँ के नजारे देखने का निर्णय लिया। सड़क छोड़ते ही थोड़ा ढलान पर उतरना होता है जिस कारण आधी-अधूरी बनी सड़क पर पड़ी बर्फ़ पर फ़िसलने के ड़र से थोड़ा सम्भल कर उतर रहे थे। ढलान अभी समाप्त हुई भी नहीं थी कि पीठ पीछे से एक जीप आ गयी। जीप वाला बार-बार होर्न देने लगा। उस मार्ग पर इतनी भी जगह नहीं बची थी कि पैदल यात्री उस गाड़ी से बच सके। गाड़ी को आगे निकलने के लिये हमें बर्फ़ में घुसना पड़ा। 


शुक्रवार, 31 जनवरी 2014

Awantipora-Avanti Swamin temple अवन्तीपोरा मन्दिर अवशेष

श्रीनगर सपरिवार यात्रा के सभी लेख के लिंक नीचे दिये गये है।
01- दिल्ली से श्रीनगर तक की हवाई यात्रा का वर्णन।
02- श्रीनगर की ड़ल झील में हाऊस बोट में विश्राम किया गया।
03- श्रीनगर के पर्वत पर शंकराचार्य मन्दिर (तख्त ए सुलेमान) 
04- श्रीनगर का चश्माशाही जल धारा बगीचा
05- श्रीनगर का मुगल गार्ड़न-निशात बाग
06- श्रीनगर का मुगल गार्ड़न-शालीमार बाग
07- श्रीनगर हजरतबल दरगाह (पैगम्बर मोहम्मद का एक बाल सुरक्षित है।)
08- श्रीनगर की ड़ल झील में शिकारा राइड़ /सैर
09- अवन्तीपोरा स्थित अवन्ती स्वामी मन्दिर के अवशेष
10- मट्टन- मार्तण्ड़ सूर्य मन्दिर  व ग्रीन टनल
11- पहलगाम की सुन्दर घाटी
12- कश्मीर घाटी में बर्फ़ीली वादियों में चलने वाली ट्रेन की यात्रा, (11 किमी लम्बी सुरंग)
13- श्रीनगर से दिल्ली हवाई यात्रा के साथ यह यात्रा समाप्त

SRINGAR FAMILY TOUR- 09
आज दिनांक 02-01-2014 को पूरा दिन श्रीनगर शहर के बाग देखने के बाद अंधेरा होने से पहले ही हाऊसबोट पहुँच गये थे। शिकारा राइड़ हमने ठन्ड़ के कारण बीच में ही छोड़ दी थी। हाऊसबोट पहुँचते ही बच्चों ने टीवी चालू कर दिया। हाऊसबोट में काम करने वाले मुददसर को कहा कि कमरा गर्म करने के लिये हीटर कितनी देर में चलाया जायेगा? मुददसर बोला बस अभी चालू कर देता हूँ। हाऊसबोट में शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक कमरा गर्म करने के लिये गैस से चलने वाला हीटर चलाया जाता है। हाऊसबोट के सभी कमरों में घरेलू गैस से चलने वाले हीटर रखे हुए थे। गैस सिलेन्ड़र हाऊसबोट के बाहर फ़टटे के किनारे पर लोहे की जंजीर से बान्धे हुए थे। अरे मुददसर, सिलेन्ड़र को जंजीर से क्यों बान्धा हुआ है? क्या यहाँ भी चोरी हो जाती है? उसने कहा, जी सरजी, रात को कोई नाव से आयेगा तो हमें पता भी नहीं लगेगा। ऐसा पहले कई लोगों के साथ हो चुका है।

गुरुवार, 9 जनवरी 2014

Let's go to Kashmir by air आओ हवाई मार्ग से कश्मीर चले

श्रीनगर सपरिवार यात्रा के सभी लेख के लिंक नीचे दिये गये है।

01- हवाई यात्रा की तैयारी, हवाई अड़ड़े पर उड़ान रद्द होने की घोषणा।

02- राष्ट्रीय रेल संग्रहालय (चाणक्यपुरी)

SRINAGAR BY AIR YATRA-01

सरकारी कर्मचारी होने का सबसे बड़ा लाभ तब पता लगता है जब उन्हे लम्बे अवकाश के साथ-साथ प्रत्येक चार वर्ष के अन्तर पर पूरे भारत में किसी एक जगह सपरिवार घुमक्कड़ी करने के लिये आने-जाने का किराया मिलता है। चार साल में सरकारी किराया मिलने वाली सुविधा लगभग सभी राज्यों में उपलब्ध है। कुछ राज्य तो अपने कर्मचारियों को बिना यात्रा पर जाये नगद भुगतान कर देते है। सरकारी कर्मचारियों में अफ़सरों को हवाई जहाज से जाने की सुविधा शुरु से ही मिलती है तो अन्य श्रेणी के कर्मचारी रेलवे के दूसरी या तीसरी श्रेणी के वातानुकुलित डिब्बे में यात्रा करने के पात्र होते है। 


सोमवार, 25 मार्च 2013

Katra to Vaishno Devi to Delhi कटरा से वैष्णों देवी से दिल्ली यात्रा वर्णन

अमृतसर-अमरनाथ-श्रीनगर-वैष्णों देवी यात्रा-06                                                     SANDEEP PANWAR


वैष्णों देवी यात्रा पर जाने के लिये सबसे जरुरी चीज वो पर्ची होती है जिसके बिना आपको यात्रा से वापिस लौटना पड़ जायेगा। हम सुबह ठीक साढ़े 5 बजे पर्ची की लाइन में गये थे, जिस कारण सुबह 6 बजे हमारे हाथ में वैष्णों देवी यात्रा पर ऊपर जाने के लिये कटरा के पर्ची केन्द्र से पर्ची मिल चुकी थी। अगर हम शाम को यहाँ आते तो रात में ही यह पद यात्रा आसानी से हो जाती। हम कुल मिलाकर 6 लोग थे। सभी के सभी जवान ही थे जो एक दो बुजुर्ग की श्रेणी में आते थे उन्होंने कल ही हमारा साथ छोड़ दिया था। यह भी अच्छा ही हुआ कि वे हमारा साथ छोड़ गये। नहीं तो वे हमें इस यात्रा में तंग करते। चूंकि यह मेरी पहली वैष्णों देवी यात्रा थी इसलिये मैं मजबूरी में सबके साथ चल रहा था। मैंने मजबूरी इसलिये कही है कि पहाड़ की उतराई हो या चढ़ाई उससे अपनी गति पर कोई फ़र्क नहीं पड़ता है। अपनी प्रतिदिन साईकिल चलाने की आदत के कारण पहाड़ की उतराई व चढ़ाई से अपुन को कुछ फ़र्क नहीं पड़ता है। हमारे ग्रुप में यह अच्छा रहा कि सभी जवान ही थे जिस कारण सभी की सोच भी मेल खा रही थी। 
यह फ़ोटो इस यात्रा का नहीं है।

रविवार, 24 मार्च 2013

Kashmir- Dal Lake, Shalimar Bagh, Nishat Bagh कश्मीर- ड़लझील, शालीमार बाग व निशात बाग की सैर

अमृतसर-अमरनाथ-श्रीनगर-वैष्णों देवी यात्रा-05                                                   SANDEEP PANWAR


सूमो वाले ने हमें श्रीनगर ड़लझील के सामने नत्थू मिठाई वाले के नाम से मशहूर दुकान के सामने उतार दिया था। मेरे साथ दिल्ली के चार लोग और भी थे। रात में रुकने के लिये सभी की यही राय थी कि रात तो ड़लझील के किसी हाउस बोट में ही बितायी जायेगी। झील में हाउस बोट सड़क से काफ़ी हटकर पानी ने बीचोबीच बनाये गये है। इसलिये हाउस बोट तक पहुँचने के लिये पहले तो एक शिकारे की आवश्यकता थी। सड़क किनारे को छोड़कर जब हम झील की ओर आये तो देखा कि वहाँ पर झील में आने-जाने के लिये बहुत सारे शिकारे तैयार खड़े है। हमने शिकारे वाले से कहा कि हमें रात में ठहरने के लिये एक हाउस बोट पर रुकना है इसलिये तुम हमें चार-पाँच हाउसबोट पर ले चलो। शिकारे वाला हमें अपनी नाव पर लाधकर झील में अन्दर चल पड़ा। यह ड़लझील में मेरी पहली सैर थी। कुछ ही देर में शिकारे वाला हमें बहुत सारे हाउस बोटों के बीच से होता हुआ एक खाली सी जगह पर खड़े हुए हाउस बोट तक पहुँचा कर बोला कि इनमें से जिसमें आपका मन करे उस हाउस बोट में रात ठहरने की कीमत तय कर लीजिए। यहाँ काफ़ी सौदेबाजी के बाद भी हाउसबोट Houseboat वाला हम 5 बन्दों के 1500 रुपये से कम पर नहीं मान रहा था। हमने उसे 1250 कह कर वापिस शिकारे में बैठकर चलने लगे तो हाउसबोट मालिक के हमें आवाज देकर कहा ठीक है आ जाओ, 1250 रुपये ही दे देना। हमारे शिकारे वाले ने हमें फ़िर से उस हाउसबोट पर उतार दिया। हमने शिकारे वाले से कहा कि हमें ड़लझील में घूमना है इसलिये एक घन्टा रात में आ जाना और एक घन्टा सुबह के समय ड़लझील में घुमा देना।

संदीप आर्य श्रीनगर की ड़लझील में शिकारे की सैर करते हुए।

शनिवार, 23 मार्च 2013

Amarnath Cave yatra अमरनाथ गुफ़ा तक व बालटाल तक यात्रा वर्णन

अमृतसर-अमरनाथ-श्रीनगर-वैष्णों देवी यात्रा-04                                                     SANDEEP PANWAR

रात को पंचतरणी में मजबूरी में रुकना पड़ा था। हम रात में जहाँ ठहरे थे वहाँ पर हमें सोने के लिये मोटे-मोटे कम्बल दिये गये थे। मैं रात में नौ बजे सू-सू करने के लिये टैन्ट से बाहर आया, बाहर आकर पाया कि वहाँ का तापमान माइनस में चला गया था। मैं फ़टाफ़ट जरुरी काम कर वापिस टैंट की ओर भागा। इतनी देर में ही मुझे ठन्ड़ ने जबरदस्त झटका दे दिया था। मेरी कम्बल में घुसते समय ऐसी हालत हो गयी थी जैसे मैं अभी-अभी ठन्ड़े पानी के कुंड़ से नहाकर बाहर निकला हूँ। किसी तरह कम्बल में घुसकर राहत की साँस पायी। जब मैं घुसा था तो मेरे दाँत दे दना-दन बजते जा रहे थे। मेरे साथी ने मुझसे पूछा क्या हुआ? मैंने उससे कहा, बेटे एक बार बाहर जाकर घूम फ़िर पूछना क्या हुआ? खैर थोड़ी देर बाद जाकर कम्बल में गर्मायी गयी थी। रात में ठीक-ठाक नीन्द गयी थी। सुबह अपने सही समय 5 बजे उठकर अमरनाथ गुफ़ा जाने की तैयारी शुरु कर दी। यहाँ पर मुझे भण्ड़ारे वालों ने आधी बाल्टी गर्म पानी दे दिया था। जिससे मैंने नहाने में प्रयोग कर दिया था। मेरा साथी यहाँ पर बहने वाली पाँच धाराओं में जाकर नहाकर आया था। नहा-धोकर हम उस जगह पहुँच गये थे जहाँ पर सेना के जवान पगड़न्ड़ी वाले मार्ग की अत्याधुनिक औजारों से तलाशी ले रहे थे। आतंकवादियों कच्चे मार्ग में रात को माइन्स दबा देते है। जिससे कि सुबह यदि जिस यात्री का पैर उस पर पड़ जाये तो वह माइन्स के साथ उड़ जायेगा। जब सेना के जवान मार्ग के सही सलामत होने की हरी झन्ड़ी हिलाते है तो यात्रियों को आगे जाने की अनुमति दे दी जाती है। यात्रियों को बताया जाता है कि मार्ग से हटकर ना चले।

कर लो अमरनाथ गुफ़ा के दर्शन

गुरुवार, 21 मार्च 2013

Pahal gaon to Sheshnag lake पहलगाँव, चन्दनवाड़ी से शेषनाग झील होकर अमरनाथ गुफ़ा की ओर

अमृतसर-अमरनाथ-श्रीनगर-वैष्णों देवी यात्रा-03                                                    SANDEEP PANWAR

जब एक फ़ौजी ने हमारी बस को रोका तो हमें लगा कि रात में कोई आतंकवादी वारदात हुई है जिस कारण सेना के जवान वाहन चैंकिग कर रहे है। हमारी बस सड़क के एक तरफ़ लगा दी गयी थी। एक फ़ौजी ने हमारी बस के चालक से कहा कि आपने आगे वाले शीशे पर जो  पेपर चस्पा किया हुआ है। वह केवल अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले वाहनों पर ही लगाया जाता है। बस चालक ने बताया कि हमारी बस पिछले सप्ताह अमरनाथ यात्रा पर होकर आयी थी। इसलिये हमारी बस पर यह स्टीकर लगा हुआ है। सेना के जवान ने हमारी बस से वह स्टीकर उतरवा दिया। जम्मू से अमरनाथ यात्रा के दिनों में सेना की छत्रछाया में प्रतिदिन सुबह वाहनों का काफ़िला पहलगाँव व बालटाल के लिये चलता है। सेना प्रतिदिन वाहनों के शीशे पर पहचान का एक पेपर लगाती है ताकि कोई अवांछित वाहन अमरनाथ यात्रा के समूह में मिल कोई आतंकवादी गतिविधि ना दोहरा जाये। इसके बाद हमारी बस अपनी मंजिल पहलगाँव की ओर बढ़ चली। हमारे मार्ग में पत्नीटॉप नामक सुन्दर व शानदार जगह भी आयी। चूंकि हमारे ग्रुप की यह पहली अमरनाथ यात्रा थी इस कारण सभी बन्धु मार्ग में आने वाले प्रत्येक नजारे का लुत्फ़ उठाते जा रहे थे। मार्ग में बहुत सारे शानदार लुभावने नजारे थे, मैं उनका ज्यादा जिक्र नहीं कर रहा हूँ नहीं तो यात्रा ज्यादा लम्बी हो जायेगी। मैं आपको सीधे अमरनाथ यात्रा पर लिये चलता हूँ। 
यही तालाब/झील शेषनाग कहलाती है।

बुधवार, 1 जून 2011

LEH LADAKH BIKE TOUR बाइक से लाल किला से लेह-लद्दाख (आखिरी भाग) 11, KATRA, JAMMU, AMBALA, DELHI

लेह बाइक यात्रा-
पहले दिन सवा चार सौ किलोमीटर बाइक चलाने के बाद भी, रात में माता के दर्शन पैदल किये, उसके बाद भी सिर्फ़ तीन घंटे सोये, हम सब घर जाने के लिये उतावले थे। सब नहा धोकर, सुबह साढे नौ बजे अपने प्यारे घर की और चल दिये। आज उस मार्ग से नहीं जाना था जिससे कल आये थे। आधे घंटे बाद हम जम्मू-श्रीनगर हाइवे पर आ गये थे। जम्मू की ओर जाते समय, हमें जम्मू बाईपास से जाना था, लेकिन मेरे दोनों बाइक वाले साथी कुछ ज्यादा ही तेजी से जा रहे थे, बाईपास को देखा ही नहीं, और घुस गये जम्मू सिटी की भीड में, जबकि मैं बाईपास से होता हुआ सीधा सांबा जा निकला, व यहाँ एक भंडारे पर भोले का प्रसाद दाल मखनी व तंदूरी रोटी ग्रहण किया। जब तक उन दोनों ने जम्मू पार ही किया था। अब तय हुआ कि कठुआ या पठानकोट पार करने के बाद उस मोड पर मिलंगे, जहाँ से एक मार्ग चम्बा, धर्मशाला, मण्डी की ओर जाता है व दूसरा जालंधर, लुधियाना, अम्बाला, दिल्ली की ओर, लेकिन पठानकोट में फ़िर गडबड हो गयी। ये चारों पठानकोट से जालंधर वाले मार्ग पर ना आकर, सीधे हाथ अमृतसर की ओर चले गये।
हम जब भी घर से बाहर होते है, तो हमेशा इस बोर्ड पर लिखी बात ध्यान में रखते है। आप भी रखो,

इस यात्रा के सभी भाग के दर्शन करने के लिये  नीचे लिखे उसी भाग पर क्लिक करे 

रविवार, 22 मई 2011

बाइक से लाल किला से लेह-लद्दाख यात्रा भाग 10, PATNI TOP, VAISNHO DEVI TEMPLE

लेह बाइक यात्रा-
आखिरकार पल्सर वाले भी हमारे साथ आ गये। इनसे पूछा गया कि रात में कहाँ थे तो इन्होंने बताया कि हम रात को बारह बजे बाल्टाल आये थे। जिस कारण सुबह जल्दी आँख नहीं खुली, रही बात मोबाइल की तो वो तो चार्ज ही नहीं था, तो मिलता कैसे, नेटवर्क भी सिर्फ़ बी.एस.एन.एल. का ही था। उनका सिम एयरटेल का था। अब हम जहाँ पर है, पटनी टाप नाम है इस जगह का, पत्नी टाप बोलते है ज्यादातर लोग, वैसे है, बडी शानदार जगह, हरियाली तो कूट-कूट कर भरी हुई लगती है। जाडॆ में यहाँ जमकर बर्फ़बारी का मजा लिया जाता है, लेकिन हम ऐसी बर्फ़बारी से होकर आये है, कि अब तो हमें बर्फ़बारी के नाम से ही ठण्ड लगने लगने लगती है। यहाँ के कई फ़ोटो खींचे, हर तरफ़ हरा-हरा नजर आता है
ये नज़ारे है पटनी टॉप के

रविवार, 15 मई 2011

बाइक से लाल किला से लेह-लद्दाख यात्रा भाग 9, DAL LAKE, JAWAHAR TUNNEL

लेह बाइक यात्रा-
अमरनाथ जी के दर्शन व जाट देवता से परमात्मा का मिलन तो कल हो गया था, आज आठवे दिन बारी थी श्रीनगर शहर व आसपास के इलाकों की, हमारा अब तक का सफ़र बडा शानदार रहा है। हमने भारत के सभी टाप दर्रों को आसानी से पास कर लिया था, हाँ बर्फ़बारी की वजह से चार सबसे ऊँचे दर्रों खर्दुन्गला, चांग ला, बारालाचा ला, गाट्टा लूप के बाद, पर थोडी-घनी सी परेशानी अवश्य आयी थी, वो अब बीती बात बन चुकी है, आज ऐसा कुछ नहीं है।
बाल्टाल के पास का नजारा

रविवार, 8 मई 2011

बाइक से लाल किला से लेह-लद्दाख यात्रा भाग 8, ZOJILA Pass, BAL TAAL, AMARNATH YATRA

लेह बाइक यात्रा-
आज सुबह सातवे दिन दिनांक 10 जुलाई 2010 को एक बार फ़िर ठीक छ: बजे चारों तैयार(बाकि दो पल्सर वालों का अब तक कोई पता नहीं था) होकर आज की मंजिल बालटाल के लिये प्रस्थान कर दिया। हमारा मोबाइल तो यहाँ द्रास में काम कर रहा था, लेकिन उनका मोबाइल अभी भी नेटवर्क की पहुँच से बाहर था। लेह के मुकाबले यहाँ ठन्ड ज्यादा थी। अब मार्ग में हरियाली की कोई कमी नहीं थी, पूरे पाँच दिन अद्दभुत/आश्चर्यजनक रेगिस्तान से पाला पडा रहा था। मार्ग बहुत अच्छा था, उतराई-चढाई भी कोई खास नहीं थी, लेकिन ठन्ड बहुत ज्यादा थी, जिससे बाइक की गति 35-40 से ज्यादा नहीं की जा रही थी।
जोजिला टॉप पर धिल्लू के सिर पर सबका भार  

रविवार, 24 अप्रैल 2011

बाइक से लाल किला से लेह-लद्दाख यात्रा भाग 7, Fotula-Jalebi band-Kargil-Drass

लेह बाइक यात्रा-
सामने साँप की तरह ऊपर जाती हुई, बलखाती सडक दिखाई दे रही है, यहाँ से शुरु हुई फ़ोतूला टाप की वो चढाई, जिसे देख कर साँप सूंघ जाता है, जो सबका सब कुछ फ़ाड दे, अगाडी-पिछाडी, अंदर से बाहर से गाडी हो या इंसान सबका बुरा हाल था, इस चढाई को देखकर। ऐसी चढाई पर इंसान की बोलती तो बंद व गाडी की बोलती शुरु हो जाती है। लगे चढाई चढने बाईक का जोर एक बार फ़िर सारा लग गया, बाइक की स्पीड पूरे जोर लगाने पर भी 20 ज्यादा नहीं हो पा रही थी। खैर किसी तरह ये चढाई चढी, कुल तीन-चार किलोमीटर बाद कुछ हल्की चढाई का मार्ग आ गया, सबको बडी राहत मिली। ऊपर जा कर कई बार इस सडक का फ़ोटो खींचा, आप भी देखो। ये चढाई रोहतांग से भी भारी पडी(ज्यादा), लेकिन यहाँ बर्फ़ का नामोनिशान दूर तक भी नहीं था। इस 20-25 किलोमीटर के मार्ग में रंगबिरंगे सुनहरे स्वर्ण रंग रुप के पर्वत आते रहे हम फ़ोटो खींचते रहे, चलते रहे, आप भी देखो।
बस-बस-बस हम भी ऐसे ही देख रहे थे, फर्क इतना है, हम नीचे थे, 

इस चढाई को देख कर कुछ-कुछ हो रहा है, या बहुत कुछ, देखी है ऐसी चढाई

बुधवार, 20 अप्रैल 2011

बाइक से लाल किला से लेह-लद्दाख यात्रा भाग 6, MAGNETIC HILL, PATHAR SAHIB GURUDWARA

लेह बाइक यात्रा-
बीते चार दिन लगातार हमारा सामना बर्फ़बारी से हुआ था। आज हमारी यात्रा का छ्टा दिन शुरु हो चुका था। हमारे गिरोह (डाकू बदमाशों से भी ज्यादा हिम्मत दिखाई थी) के तीन सदस्यों ने अब से पहले बर्फ़ तो बहुत देखी थी, परन्तु किसी का सामना ऐसी बर्फ़बारी से नहीं हुआ था। दो महाराष्ट्र (नान्देड) वालों ने तो बर्फ़ भी पहली बार ही देखी थी, वो भी ऐसी देखी, कि जीवन भर याद भी रहेगी और दूसरों को कहेंगे, बेटे लेह को छोड दूसरे पहाड पर  मत जाना,  इस पूरे सफ़र में बर्फ़ के माहौल की सबसे बुरी जगह रात में बारालाचा ला लगी व दिन की सबसे खूबसूरत जगह भी बारालाचा ला लगी।
ये रास्ता है जिन्दगी, जो थम गये वो कुछ नहीं, ऐसे ही मार्ग है,

सोमवार, 11 अप्रैल 2011

बाइक से लाल किला से लेह-लद्दाख यात्रा भाग 5 Chang la- Pangong tso/lake

लेह बाइक यात्रा-
अभी तक आप मेरे साथ घूम चुके हो, दिल्ली से मनाली, रोहतांग दर्रा(13050), बार्रालाचा दर्रा(16500), सरचू, पाँग, तंगलंगला दर्रा(17582), उपशी, लेह, खर्दूंगला दर्रा(18380), अब बारी है, चाँगला दर्रा(17586)

आज पाँचवे दिन सुबह आराम से उठे, सब नहा धो, मेकप-सेकप कर, आज की मंजिल पेंन्गोंग सो (लद्दाखी लोग झील/लेक को सो के नाम से पुकारते है) की ओर चल दिये। उपशी से 15 किलोमीटर चलते ही, लेह से 35 किलोमीटर पहले, कारु नामक जगह आती है। यहाँ से दाये/सीधे हाथ की ओर एक रास्ता शक्ति नाम की जगह पहुँच जाता है, कारु से यहाँ तक ठीक-ठाक 15 फुट का मार्ग है, भीड के नाम पर कभी-कभार ही एक-आध इन्सान व गाडी नजर आ जाती थी।

तिडके का सड़क किनारे एक बोर्ड के सामने का फोटो,

मंगलवार, 5 अप्रैल 2011

बाइक से लाल किला से लेह-लद्दाख यात्रा भाग 4 Pang-Tanglang la pass-Upsi-Khardung la Pass, World highest motarable road

लेह बाइक यात्रा-
ट्रक ड्राइवर हमारी ही उम्र का एक मस्त इन्सान रहा। जिस अनाम जगह हम रुके थे, वहाँ से तंगलंग ला (दर्रा) नजर आ रहा था। टैंट वाले ने हमें बताया कि तंगलंग ला ऊंचाई में बारालाचा ला (पहाड़ी लोग दर्रे को ला भी कहते है) से भी ऊंचा है, किन्तु यहाँ बर्फ़ बारालाचा दर्रे के मुकाबले 10% भी नहीं है। ऐसा होने की वजह तंगलंगला दर्रा में चलने वाली तेज हवाये है, जिससे यहाँ बर्फ़ ज्यादा दिनों तक नहीं टिक पाती हैं। हम ऐसी जगह पर थे, जहाँ से हमें 20-25 किलोमीटर तक का मार्ग ऊपर जाता हुआ दिखाई दे रहा था। ट्रक वाले ने भी जमकर ट्रक भगाया, यहाँ से चलते ही जबरदस्त धूल मिली, क्योंकि रास्ते में कार्य चल रहा था। किसी तरह धूल पार की, तो आ गई चढाई, जिस पर आसानी से ट्रक का पीछा नहीं किया जा रहा था। ट्रक लगभग खाली ही था, ट्रक में मात्र दो टन आटा ही था। वो मोडों पर भी स्पीड में मोड रहा था, जिससे हमें डर लग रहा था, कि तभी एक मोड पर चार ट्रक लाइन में मैट्रो की तरह जाते हुए मिले, ये चारों वजन से लदे हुए थे, जिससे इनकी स्पीड भी कम थी। हमारी बाइक तो बराबर में से आगे निकल गयी, पर हमारे साथ वाला ट्रक पीछे रह गया। हमने इन्हें कहा, कि कोई जल्दी नहीं है, आराम से आओ।

सामने ही हम लोग रुके हुए थे, 

मंगलवार, 29 मार्च 2011

बाइक से लाल किला से लेह-लद्दाख यात्रा भाग 3 Sarchu-Gata loops-Pang

लेह बाइक यात्रा- 
दूसरा दिन तो बीत गया। दिन तो मजेदार था, किन्तु आज की रात हमारी ज़िंदगी की सबसे बुरी रात बन गयी। नाम की भरतपुर सिटी कुल मिलाकर 8 टैन्ट थे। पक्के मकान के नाम पर हमें ढूंढने पर भी कुछ ना मिल सका, सडक व पत्थर के सिवा। एक टैंन्ट में पन्द्रह-बीस लोग आसानी से सो सकते है। एक बंदे का किराया 100 रुपये था। पहाड पर चारों ओर बर्फ़ ही बर्फ़ थी, टैन्ट से 30-40 मीटर की दूरी पर ही तो थी। बडे मजे से खाना खाया, नमकीन चावल बडे स्वादिष्ट जो बने थे।

 बर्फ़ीला मार्ग इसे कहते है,स्वर्ग।


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