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गुरुवार, 6 जुलाई 2017

Humayun's tomb हुमायूँ का मकबरा, मुगलों का कब्रिस्तान



कुतुबमीनार उर्फ विष्णु स्तंभ की सैर करने के बाद हमारा काफिला “मुगलों का कब्रिस्तान” उर्फ हुमायूँ का मकबरे पहुँच चुका है। इस जगह की सैर कराने से पहले आपको इस स्थल की राम कहानी बता देता हूँ। शुरुआत करता हूँ, यहाँ पहुँचा कैसे जाये? यहाँ पहुँचना बहुत ही आसान है। दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के बिल्कुल पास में ही है। निजामुद्दीन से यहाँ पहुँचने के लिये पैदल दूरी ही है जो आसानी से टहलते हुए पार की जा सकती है। यहाँ से दिल्ली का चिडियाघर (Zoological park of Delhi) भी ज्यादा दूर नहीं रह जाता है। दोनों के बीच में सिर्फ एक किमी का ही फासला रह जाता है। यहाँ का नजदीकी मैट्रो स्टेशन जवाहर लाल नेहरु मैट्रो स्टेशन है। हम कुतुबमीनार से जिस बस में सवार हुए थे वह बस मोरीगेट जा रही थी जो इसके सामने से होकर जाती है। सडक पार करते ही पूर्व दिशा की ओर एक लाल रंग का बोर्ड दिखाई देता है। जिस पर हुमायूँ का मकबरा लिखा हुआ था। यह मुगल परिवार का एक शाही कब्रिस्तान (मुर्दाघर अलग चीज है) है। बोले तो (मुगलों का शाही कब्रिस्तान)। इस ईमारत में मुगलों के परिवार के सैकडों सदस्यों की कब्र बनी हुई है। इसलिये मैंने इसके लिये शाही कब्रिस्तान शब्द का उपयोग किया है।
Humayun’s Tomb हुमायूँ का मकबरा (मुगलों का कब्रिस्तान graveyard of Mugal)

बुधवार, 5 जुलाई 2017

Qutub Minar कुतुबमीनार या विष्णु स्तम्भ


कुतुबमीनार उर्फ विष्णु स्तंभ, जी हाँ दोस्तों, आज आपको भारत के दिल कहे जाने वाली दिल्ली के एतिहासिक स्मारक कुतुबमीनार की सैर कराते है। कुछ वर्षों पहले तक दिल्ली को दिलवालों का शहर कहा जाता था लेकिन वर्तमान में यह भिखमंगों का शहर सा लगता है। ऐसा नहीं है कि सभी भिखमंगे है, अधिकतर मेहनतकश लोग है जो मेहनत की रोटी खाना पसन्द करते है। भिखमंगे वाली बात राजनीति की ओर मुड जायेगी। जो मैं नहीं चाहूँगा। वैसे तो मैं इससे पहले भी कई बार कुतुबमीनार देख चुका हूँ। पहले की तीन यात्राओं में से, दो में तो मैंने फोटो लिये ही नहीं थे। दो बार की यात्रा में यहाँ के फोटो लिये थे। जो पुराने फोटो अभी मेरे पास है। वो इक्के-दुक्के ही है। वो भी कागज वाले। आजकल तो डिजीटल कैमरे आ गये है। कुछ वर्ष पहले ऐसा न था। पहले हम रील वाले कैमरा उपयोग करते थे जिसमें 36 फोटो हुआ करते थे। उसमें से आधे फोटो किसी न किसी कारण खराब हो जाया करते थे। यह लेख वैसे भी लम्बा होने जा रहा है। 2,800 शब्दों व 30 से ज्यादा फोटो तो इसी लेख में हो गये है। ऊपर से मैं यह फोटो वाला किस्सा शुरु में ही घुसा बैठा। चलो फोटो वाले किस्से को यही दफन करते हुए, आगे कुत्ता बीमार! अरे कुतुब मीनार की ओर बढते है। इस यात्रा में मेरा पूरा परिवार साथ गया था। पूरा परिवार बोले तो मियाँ बीबी बच्चों समेत। इस यात्रा में बम्बई नगरी में रहने वाला अपना इकलौता दोस्त विशाल राठौर भी साथ आने वाला था।
World heritage monument site... Qutub Minar, Mehrauli कुतुब मीनार, महरौली

सोमवार, 10 फ़रवरी 2014

Srinagar to New Delhi by air श्रीनगर से दिल्ली तक हवाई यात्रा

श्रीनगर सपरिवार यात्रा के सभी लेख के लिंक नीचे दिये गये है।
01- दिल्ली से श्रीनगर तक की हवाई यात्रा का वर्णन।
02- श्रीनगर की ड़ल झील में हाऊस बोट में विश्राम किया गया।
03- श्रीनगर के पर्वत पर शंकराचार्य मन्दिर (तख्त ए सुलेमान) 
04- श्रीनगर का चश्माशाही जल धारा बगीचा
05- श्रीनगर का मुगल गार्ड़न-निशात बाग
06- श्रीनगर का मुगल गार्ड़न-शालीमार बाग
07- श्रीनगर हजरतबल दरगाह (पैगम्बर मोहम्मद का एक बाल सुरक्षित है।)
08- श्रीनगर की ड़ल झील में शिकारा राइड़ /सैर
09- अवन्तीपोरा स्थित अवन्ती स्वामी मन्दिर के अवशेष
10- मट्टन- मार्तण्ड़ सूर्य मन्दिर  व ग्रीन टनल
11- पहलगाम की सुन्दर घाटी
12- कश्मीर घाटी में बर्फ़ीली वादियों में चलने वाली ट्रेन की यात्रा, (11 किमी लम्बी सुरंग)
13- श्रीनगर से दिल्ली हवाई यात्रा के साथ यह यात्रा समाप्त

SRINGAR FAMILY TOUR- 13
आज दिनांक 05-01-2014 को श्रीनगर यात्रा समाप्त हो रही थी। सुबह जल्दी निकल कर खीर भवानी मन्दिर जाया जा सकता था। खीर भवानी मन्दिर मैंने अभी तक देखा नहीं है। इस मन्दिर परिसर में पेड़ों का झुन्ड़ है वहाँ आसमान में देखने पर भारत का नक्शा बना हुआ दिखायी देता है। बताते है कि यह नक्शा सालों से ऐसा ही है। पेडों की टहनियाँ, इस नक्शे वाली जगह नहीं बढ पाती है। इस मन्दिर को देखने के लिये श्रीनगर के तुल्लामुला में जाना पड़ता है। यह मन्दिर रंगने देवी का बताया जाता है। इस मन्दिर में मई-जून महीने में आने वाले ज्येष्ठ अष्टमी को वार्षिक मेला लगता है। 



सोमवार, 13 जनवरी 2014

Delhi to Sringar by air दिल्ली से श्रीनगर पहली हवाई यात्रा

श्रीनगर सपरिवार यात्रा के सभी लेख के लिंक नीचे दिये गये है।
01- दिल्ली से श्रीनगर तक की हवाई यात्रा का वर्णन।
02- श्रीनगर की ड़ल झील में हाऊस बोट में विश्राम किया गया।
03- श्रीनगर के पर्वत पर शंकराचार्य मन्दिर (तख्त ए सुलेमान) 
04- श्रीनगर का चश्माशाही जल धारा बगीचा
05- श्रीनगर का मुगल गार्ड़न-निशात बाग
06- श्रीनगर का मुगल गार्ड़न-शालीमार बाग
07- श्रीनगर हजरतबल दरगाह (पैगम्बर मोहम्मद का एक बाल सुरक्षित है।)
08- श्रीनगर की ड़ल झील में शिकारा राइड़ /सैर
09- अवन्तीपोरा स्थित अवन्ती स्वामी मन्दिर के अवशेष
10- मट्टन- मार्तण्ड़ सूर्य मन्दिर  व ग्रीन टनल
11- पहलगाम की सुन्दर घाटी
12- कश्मीर घाटी में बर्फ़ीली वादियों में चलने वाली ट्रेन की यात्रा, (11 किमी लम्बी सुरंग)
13- श्रीनगर से दिल्ली हवाई यात्रा के साथ यह यात्रा समाप्त

SRINGAR FAMILY TOUR- 01

दिल्ली से श्रीनगर जाना भी एक समस्या बन गया। कल साल 2013 का आखिरी दिन था सोचा था कि नया साल ड़ल झील में घूमकर बितायेंगे, लेकिन कहते है ना किस्मत में जो लिखा होता है वही होता है। मुझे तो श्रीनगर जाना ही था इसलिये हवाई अड़ड़े पर आज के लिये लिखवा कर ही कल घर आये थे। एयरलाईन्स वालों ने कहा था कि अपने कल के टिकट को कस्टमरकेय़र पर फ़ोन कर पता कर लेना। सुबह घर से निकलने से पहले ही टिकट कन्फ़र्म हुआ या नहीं, इस बात को पक्का करने के लिये जब कस्टमरकेयर पर फ़ोन लगाया तो उन्होंने कहा कि आपको काऊँन्टर पर जाकर ही टिकट के बारे में पता लगेगा। अब ड़र सताने लगा कि यदि हम आज भी हवाई अड़ड़े से घर वापिस आ गये तो मौहल्ले में मजाक का विषय बन जायेगा। कि चले थे हवाई जहाज में घूमने।


शुक्रवार, 10 जनवरी 2014

National Rail museum राष्ट्रीय रेल संग्रहालय (चाणक्यपुरी)

श्रीनगर सपरिवार यात्रा के सभी लेख के लिंक नीचे दिये गये है।

01- हवाई यात्रा की तैयारी, हवाई अड़ड़े पर उड़ान रद्द होने की घोषणा।

02- राष्ट्रीय रेल संग्रहालय (चाणक्यपुरी)

SRINAGAR BY AIR YATRA-02

दिल्ली हवाई अड़ड़े पर बनाये गये विशेष काऊंटर पर कल जाने के लिये अपना टिकट नम्बर लिखवा दिया। दूर से आने वाले यात्रियों को रहने के लिये एयरलाईन की ओर से होटल में कमरे उपलब्ध करा दिये गये। श्रीनगर जाने वाली फ़्लाइट में दो विदेशी महिलाएँ भी थी। विदेशी महिलाओं के साथ कर्मचारियों ने काफ़ी सहानुभूति दिखायी। एयर लाइन्स वाले कर्मचारी एक साथ इतनी भीड़ देखकर हड़बड़ी में थे। दो महिला कर्मी उन लोगों के टिकट नम्बर नोट करने में लगी थी जिन्होंने कल श्रीनगर जाने की इच्छा जतायी थी। एक महिला उन यात्रियों के नाम व टिकट नोट करने में लगी थी जिन्हे होटल में रुकने के लिये मैनेजर लिखता जा रहा था। 


सोमवार, 23 सितंबर 2013

INDIA GATE इन्डिया गेट

TOURIST PLACE IN NEW DELHI-03                                                   SANDEEP PANWAR 
दोपहर से पहले लाल किला देखा, दोपहर बाद लोटस मन्दिर देखा। अब घर चलने की बारी थी लेकिन हमारे पास अभी भी दिन छिपने में कई घन्टे बाकि थे इसलिये सोचा कि जब घर से घूमने के लिये आये ही है तो लगे हाथ एक स्थान और देख लेते है। पहले सोचा कि कुतुब मीनार देखने चलते है लेकिन कुतुब मीनार जाने के लिये घर से और भी दूर जाना पड़ता, इसलिये कुतुब मीनार को अगले अवकाश के लिये बचा कर रख लिया। निकट भविष्य में छतरपुर मन्दिर के साथ कुतुब मीनार को भी देखा जायेगा। दोनों के मध्य मुश्किल से एक-दो किमी का फ़ासला है। चलिये अब घर की ओर चलते है बीच में इन्डिया गेट नामक जगह आयेगी वहाँ समय भी ज्यादा नहीं लगेगा। वहाँ बच्चों के खेलने के लिये एक Children Park भी है। लोटस मन्दिर से आनन्द विहार जाने वाली बस में सवार हो गये। यह बस ओखला निजामुददीन सराय काले खाँ होते हुए जाती है। 


गुरुवार, 19 सितंबर 2013

Lotus Temple बहाई धर्म- कमल का मन्दिर

TOURIST PLACE IN NEW DELHI-02                                                   SANDEEP PANWAR 
दिल्ली की यात्रा में आज बहाई धर्म के पूजा स्थल कमल मन्दिर की ओर चलते है। लाल किला देखने के बाद कालकाजी मन्दिर की ओर जाने वाली वातानूकुलित बस की इन्तजार करते हुए कई मिनट बीत गये लेकिन लाल वाली AC bus नहीं आयी। बदरपुर वाले रुट पर जाने वाली कई लाल बस निकल चुकी थी। आखिरकार हम भी बदरपुर जाने वाला एक लाल रंग की बस में सवार हो गये। पूरे दिन टिकट लेने की आवश्यकता तो थी ही नहीं क्योंकि हमने सुबह ही 50 वाला बस पास बनवाया लिया था। DTC की बसों में कन्ड़क्टर अधिकतर तो टिकट लेने के लिये टोकते ही नहीं है यदि टोकते भी है तो पास कहने के बाद दुबारा कुछ नहीं कहते है। हमारी बस दिल्ली गेट, आई टी ओ(बाल भवन भी यही नजदीक ही है।) प्रगति मैदान, उच्च न्यायालय(सुप्रीम कोर्ट), पुराना किला, चिडियाघर, हुमायूँ का मकबरा, निजामुददीन होते हुए मथुरा रोड़ पर चलती रही। 


बुधवार, 18 सितंबर 2013

Red fort दिल्ली का लाल किला /लाल कोट

TOURIST PLACE IN NEW DELHI-01                                                   SANDEEP PANWAR 
दिल्ली का लाल किला तो मैंने बहुत बार देखा हुआ है सपरिवार देखने का कार्यक्रम पहले भी एक बाद बन चुका था लेकिन उस दिन दशहरा होने के कारण लाल किले में जाने वालों की इतनी ज्यादा भीड़ थी कि टिकट की लाईन ही 200 मीटर लम्बी मिली। उस दिन लाल किला छोड़ दिया गया। अभी अगस्त में चिरमिरी छत्तीसगढ़ के रहने वाले अपने प्रशंसक कम दोस्त अमित शुक्ला जी दिल्ली भ्रमण पर आये हुए थे। उनसे अमरकंटक में पहले ही वायदा कर दिया गया था आप जब भी दिल्ली अपनी बड़ी बहिन के यहाँ आओगे तो एक दिन हम दोनों सपरिवार दिल्ली के किसी स्थल पर घूमने चलेंगे। इसी तय शुदा क्रम में जब अमित जी दिल्ली आये तो मैं अपने परिवार को बस में लेकर अमित की बड़ी बहिन के यहाँ पहुँच गया। 



शनिवार, 14 सितंबर 2013

Puri to Delhi पुरी से दिल्ली तक

UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-30         SANDEEP PANWAR
पुरी से दिल्ली की पुरुषोत्तम एक्सप्रेस ट्रेन रात के नौ बजे की थी इस तरह मेरे पास कई घन्टे खाली थे। सबसे पहले एक खाली प्लेटफ़ार्म देखकर उस पर मोबाइल चार्जिंग का ठिकाना तलाश किया। अब दो रात+एक दिन तक ट्रेन में ही रहना था इसलिये मोबाइल चार्ज करना बहुत जरुरी था। जहाँ मैं बैठा हुआ था उसके सामने ट्रेन से आया हुआ काफ़ी सारा सामान पड़ा हुआ था। घन्टे भर बाद उस सामान को उठाने वाले लड़के वहाँ पहुँच गये। रेलवे में अपना सामान भेजते समय लोग सोचते होंगे कि हमारा सामान सुरक्षित पहुँच जायेगा। मैंने यहाँ लोगों के सामान की दुर्दशा होते हुए देखी। सबसे पहले सामान ढ़ोने वालों ने कुछ पेटियाँ वहाँ से हटायी, ये लोग इतनी लापरवाही से सामान पटक रहे थे कि उनमें से दो पेटियाँ वही उधेड़ दी। उन पेटियों में मेडिकल चिकित्सक काम मॆं आने वाले इन्जेक्सन रखे थे। ऐसा ही वाक्या इन्होंने एक मन्दिर की घन्टा बजाने वाली मशीन के साथ किया। बीच में जब इन्हे खाली समय मिलता था तो मैंने एक बन्दे से कहा कि इतनी लापरवाही से लोगों का सामान क्यों पटकते हो? उसने टका सा जवाब दिया कि यह सामान भुवनेश्वर तक जाना है रेलवे वाले इसे हमें तंग करने के लिये पुरी उतरवाते है यहाँ से दुबारा दूसरी ट्रेन में भरकर भुवनेश्वर वाली गाड़ी में लादना पड़ता है। जब लोग सामान टूटने की शिकायत करेंगे तो उनका सामान यहाँ नहीं आयेगा।


शनिवार, 13 जुलाई 2013

Bombay to Delhi by Indian Railway बोम्बे से दिल्ली तक ट्रेन यात्रा

EAST COAST TO WEST COAST 36                                                                   SANDEEP PANWAR
विशाल के साथ दो दिन से यात्रा कर रहा था इससे पहले भी एक बार कई दिनों की यात्रा में हम साथ घूम चुके है। विशाल की आदत लगभग अधिकतर मिलती-जुलती सी है सबसे बड़ी आदत यह है कि विशाल भी हर हालत में अपने आप को ढाल लेता है। यात्रा में खर्चे तो दोस्ती पक्की लेकिन अपने-अपने वाला नियम रहता ही है इसका अपुन की तरह विसाल भी पूरा पालन करता पाया गया। विशाल के पास पहले भी एक-दो घुमक्कड़ दोस्त बोम्बे घूमने के लिये आ चुके है। शायद कोई ऐसी बात उनके बीच हुई थी कि जिसे बताने से विशाल बचता रहा। पहले तो मैं कोशिश की कि शायद बता दे लेकिन जब कई बार टटोलने पर भी वह बात को टाल गया तो मैंने भी बात आयी-गयी कर दी।



शनिवार, 2 मार्च 2013

Delhi- Qutub Minar, Red Fort, Rajghat, Iron Bridge दिल्ली में कुतुब मीनार, राजघाट, लाल किला, लोहे का पुल

Delhi-
दोस्तों यह तो आपको पता ही है कि मैं दिल्ली के एक कोने में ही रहता हूँ। मेरे ब्लॉग पर आपने अभी तक दिल्ली की एक आध ही पोस्ट देखी है। एक कहावत तो आपने सुनी ही होगी कि घर की मुर्गी दाल बराबर होती है। दिल्ली वालों के यही दिल्ली दाल बराबर होती है। जिन ऐतिहासिक आलीशान ईमारते देखने के लिये लोग पर्यटक घुमक्कड़ हजारों लाखों किमी दूर से दौड़े चले आते है। उन्ही खूबसूरत ईमारतों को देखने के लिये अधिकांश दिल्ली वालों के पास समय ही नहीं है। दोस्तों मुझे आलसी दिल्ली वालों में मत समझ लेना। मैं आपको बताता हूँ कि दिल्ली की कौन सी ईमारत मैंने कितने बार देखी है? सबसे पहले बात करते है पहले फ़ोटो वाली कुतुब मीनार को ले लीजिए। आज तक मैंने कुतुब मीनार को छ या सात बार देखा है। 


शनिवार, 12 जनवरी 2013

Let's go Goa आओ गोवा चले।

गोवा यात्रा-भाग-01
GOA-गोवा-गोवा-गोवा। गोवा जाने का भूत कई महीनों से सिर चढ़कर बोल रहा था इस साल गोवा जरुर जाना है इस कारण कई महीने पहले से ही यहाँ जाने के लिये पक्का विचार बनाया हुआ था। अब गोवा जाना हो और दिल्ली की ठन्ड से बचने का अवसर भी साथ हो तो इससे बेहतरीन बात और क्या हो सकती थी? गोवा जाने और वहाँ जाकर ठहरने के लिये कौन सा साधन सस्ता व उचित रहेगा, पहले इस बात पर विचार किया गया तो सब मिलाकर यह  पाया गया कि YHAI यूथ हास्टल ऐसोसिएसन इन्डिया के पैकेज के अन्तर्गत गोवा घूमने का अवसर सबसे उचित लग रहा था। जिसे बुक करने के लिये कमल को गोवा यात्रा अग्रिम बुकिंग के लिये दी जाने वाली राशि कई महीने पहले ही सम्पूर्ण राशि अग्रिम दे दी गयी थी। लेकिन जिस बात का ड़र था आखिरकार वही हुआ। मैंने गोवा को साईकिल पैकेज से देखने का सोचा हुआ था। जबकि कमल ने उसे बुक करने के लिये इतनी देर कर दी कि उसकी बुंकिग ही बन्द हो गयी। आखिरकार दिसम्बर माह की पहली तारीख को जाकर कमल ने गोवा यात्रा का दूसरा पैकेज बुक कर दिया, लेकिन यहाँ भी एक गड़बड हो गयी कि कमल ने जो पैकेज बुक किया था वह पैकेज साइकिलिंग का ना होकर ट्रेंकिग वाला था। ट्रेकिंग से अपुन को तो कोई समस्या नहीं थी। इससे एक बात पर असर पड रहा था कि साइकिल से हम उतने ही दिनों में ज्यादा गोवा देख सकते थे जबकि ट्रेकिंग करते समय उतना गोवा देखना मुमकिन नहीं था।
दिल्ली की बस का दोपहर में एक फ़ोटो।

रविवार, 7 अक्टूबर 2012

Delhi-Dehradun-mussoorie-kampty fall bike trip दिल्ली से देहरादून-मसूरी-कैम्पटी फ़ॉल बाइक यात्रा


एक कहावत है कि पूत के पॉव पालने में दिख जाते है लेकिन मैं कहता हूँ कि पालना भी तो ऐसा हो जिसमें हाथ पैर चले ताकि दिखे तो सही। चलिये कहावत को मारो गोली। आज आप सबको लेकर चलता हूँ पहाड की लगभग हजार किमी लम्बी बाइक यात्रा पर घुमा कर लाता हूँ जिसमें मेरे साथ मेरी माताजी घूमने गयी थी। क्यों क्या कहते हो? ऐसा नहीं हो सकता। चलिए इस बात का प्रमाण दिखाने के लिये एक फ़ोटो भी लगा देता हूँ नीचे देख लो। यात्रा शुरु होती है सन 2001 के फ़रवरी माह के आखिरी सप्ताह की बात है देहरादून के भन्डारी बाग में रहने वाले मेरे मामाजी चौ० हरवीर सिंह तोमर की बडी लडकी की शादी का अवसर था। हमारा परिवार सहित बुलावा आना ही था, लेकिन उस समय तक हमारा परिवार ज्यादा बडा नहीं था, हमारे परिवार में मात्र तीन प्राणी थे। मैं, मेरा छोटा भाई और हमारी माताजी, भाई तो उस समय भी उतरकाशी जनपद में तैनात था। पहले तो हम दोनों ने देहरादून में शादी समारोह के लिये बस से यात्रा करने की सोची थी, लेकिन भाई ने कहा कि नई बाइक किस काम आयेगी? बाइक लेकर शादी में आ जाओ ताकि शादी के बाद बाइक से ही आगे उतरकाशी तक आ जाना। यह बात मुझे पसन्द आ गयी थी। अत: मैने शादी में बाइक से जाने की बात माताजी को बतायी तो उन्होंने कहा कि मैं भी तुम्हारे साथ बाइक से ही जाऊँगी। उस समय हमारे पास पैसन बाइक थी जो आज भी हमारे पास है। इस बाइक ने लगभग डेढ लाख किमी से ज्यादा दूरी नाप रखी है।

सोमवार, 6 अगस्त 2012

DELHI TO DEHRADUN चले देहरादून की ओर


दोस्तों नई यात्राएँ तो होती ही रहेंगी, लेकिन कई पुरानी यात्राएं भी है जिनका जिक्र करना जरूरी है अगर नई-नई यात्रा का विवरण ही बताता रहा तो पुरानी का नम्बर कभी भी नहीं आयेगा क्योंकि जिस गति से अपनी नई-नई यात्राओं की संख्या बढती जा रही है उससे तो ऐसा नहीं लगता कि यह सिलसिला जीते जी कभी रुकने वाला भी है। पुरानी यात्राओं में वैसे तो मैंने सबसे पहले देहरादून के पास सह्रसधारा की यात्रा की थी। उसके बाद देहरादून के पास के लगभग सारे स्थान मैंने साईकिल पर ही छानमारे थे। मंसूरी, धनौल्टी, चम्बा, सुरकन्डा देवी, बाइक पर उतराखण्ड के चार धाम गंगौत्री-यमुनौत्री-केदारनाथ-बद्रीनाथ, फ़ूलों की घाटी, हेमकुंठ साहिब, चोपता, रोहतांग, मणिकर्ण, ज्वालामुखी आदि-आदि न जाने कितनी यात्राएँ अभी बाकि है? अबकी बार मैं आपको उन्ही सब पुरानी यात्राओं में से कुछ के बारे में बताने जा रहा हूँ, मेरी कोशिश क्रमवार यात्रा विवरण बताने की रहेगी। समय काफ़ी बीत चुका है जिस कारण सब यात्राओं का समय तो ठीक-ठीक याद नहीं है लेकिन फ़िर भी जितना हो सका, उतना इन्साफ़ जरुर करने की कोशिश जरुर करूँगा। इन यात्राओं में मैंने लगभग सभी साधन प्रयोग किये है जैसे कि साईकिल, बस, रेल, ट्रक, कार आदि तो आज आपको दिल्ली से सहारनपुर तक की रेल यात्रा के बारे में बताने जा रहा हूँ।


मंगलवार, 6 दिसंबर 2011

DEHRADOON TO DELHI देहरादून से दिल्ली

हर की दून बाइक यात्रा-
चकराता से देहरादून तक आने में पूरे 3 घन्टे लग गये थे। देहरादून के स्टेशन पर ठीक 11 बजे पहुँचे, वहाँ रेलवे आरक्षण केन्द्र पर भीड देखकर सांगवान के होश ही उड गये। फ़िर भी उसने प्रयत्न जारी रखा कि कैसे भी बात बने, लेकिन पूरे एक घन्टा बीत जाने पर भी जब किसी तरह भी उम्मीद नहीं रही कि अब काऊंटर बाबू तक पहुँचने में अभी घन्टा और लग जायेग, तो सांगवान बाहर आ गया, मैं भी घन्टे भर से अपनी बाइक पर बैठा-बैठा सांगवान को मन ही मन में उल्टी-सीधी बके जा रहा था कि बडा आया पैसे बचाने के लिये अब 12 बजने वाले है लगता है कि अब शाम 7:50 बजे की राजधानी भी निकल जायेगी। राजधानी का टिकट तो तत्काल में कराया गया था उसके तो टिकट वापसी में कुछ भी नहीं मिलने वाला था। अब सांगवान ने वो टिकट वहाँ के पार्किंग वाले को मुफ़्त में देने की कोशिश की, लेकिन उसने भी यह कहकर टिकट नहीं लिया कि इतनी भीड में कौन लाईन में लगेगा। आखिर सांगवान ने गुस्से में वो टिकट वहीं फ़ाड दिया, टिकट फ़ाडा यानि पूरे 450 रु गये काम से। 

देहरादून स्टेशन के बाहर का फ़ोटो है, ठीक 12 बजे लिया गया था।

रविवार, 10 जुलाई 2011

काशी (बनारस)/ सारनाथ से घर वापसी,SARNATH, VARANASHI TO DELHI

प्रयाग काशी पद यात्रा-
इस सफ़र में सारा कुछ जो भी घर से सोच कर आये थे, प्रयाग, शहीद चन्द्रशेखर पार्क, आनन्द भवन, संगम तट, व काशी तक का पैदल मार्ग, काशी के सारे घाट, सारनाथ अब कुछ नहीं बचा था। दोनों खत्म समय भी, व देखने लायक जगह भी, अत: अब बारी थी घर की ओर कूच करने की,
इसके बाद हम यहाँ से एकदम फ़्री हो गये थे। शाम के चार बजने वाले थे। पता चला, कि यहाँ का रेलवे स्टेशन आधा किलोमीटर दूरी पर ही हैतो रेलवे स्टेशन देखने के लिये चल दिये। जब स्टेशन पहुँचे, तो देखा कि एक ट्रेन खडी थीपता किया तो मालूम हुआ कि कि ये ट्रेन काशी/बनारस/वाराणसी, हण्डिया होते हुएइलाहाबाद तक जायेगी। बस फ़िर क्या थाले लिये तीन-तीन रुपये के तीन टिकट और जा बैठे ट्रेन के अंदर डिब्बे मेंडिब्बे के अंदर से ही स्टेशन के नाम वाला फ़ोटो भी खींचा था। दस पंद्रह मिनट बाद ही ट्रेन चल पडी। कोई आधा घंटा लिया होगाहमें वाराणसी सिटी तक लाने मेंवाराणसी सिटी पर जब ट्रेन को खडे हुए डेढ घंटा हो गया तो सब्र खत्म होने लगा, बातों बातों में मालूम हुआ कि यह ट्रेन यहाँ पर तीन-चार घंटे तक खडी रहती है, फ़िर भी हम छ: बजे तक इस ट्रेन के चलने का इंतजार कियाइसके बाद हम आटो से अगले स्टेशन जो कि वाराणसी कैण्ट के नाम से हैजा पहुँचे।
ये फ़ोटो ट्रेन के डिब्बे के अन्दर से लिया था

बुधवार, 1 जून 2011

LEH LADAKH BIKE TOUR बाइक से लाल किला से लेह-लद्दाख (आखिरी भाग) 11, KATRA, JAMMU, AMBALA, DELHI

लेह बाइक यात्रा-
पहले दिन सवा चार सौ किलोमीटर बाइक चलाने के बाद भी, रात में माता के दर्शन पैदल किये, उसके बाद भी सिर्फ़ तीन घंटे सोये, हम सब घर जाने के लिये उतावले थे। सब नहा धोकर, सुबह साढे नौ बजे अपने प्यारे घर की और चल दिये। आज उस मार्ग से नहीं जाना था जिससे कल आये थे। आधे घंटे बाद हम जम्मू-श्रीनगर हाइवे पर आ गये थे। जम्मू की ओर जाते समय, हमें जम्मू बाईपास से जाना था, लेकिन मेरे दोनों बाइक वाले साथी कुछ ज्यादा ही तेजी से जा रहे थे, बाईपास को देखा ही नहीं, और घुस गये जम्मू सिटी की भीड में, जबकि मैं बाईपास से होता हुआ सीधा सांबा जा निकला, व यहाँ एक भंडारे पर भोले का प्रसाद दाल मखनी व तंदूरी रोटी ग्रहण किया। जब तक उन दोनों ने जम्मू पार ही किया था। अब तय हुआ कि कठुआ या पठानकोट पार करने के बाद उस मोड पर मिलंगे, जहाँ से एक मार्ग चम्बा, धर्मशाला, मण्डी की ओर जाता है व दूसरा जालंधर, लुधियाना, अम्बाला, दिल्ली की ओर, लेकिन पठानकोट में फ़िर गडबड हो गयी। ये चारों पठानकोट से जालंधर वाले मार्ग पर ना आकर, सीधे हाथ अमृतसर की ओर चले गये।
हम जब भी घर से बाहर होते है, तो हमेशा इस बोर्ड पर लिखी बात ध्यान में रखते है। आप भी रखो,

इस यात्रा के सभी भाग के दर्शन करने के लिये  नीचे लिखे उसी भाग पर क्लिक करे 

बुधवार, 23 फ़रवरी 2011

बाइक से लाल किला से लेह-लद्दाख यात्रा (भाग 1) Bike Trip- Delhi To Manali

लेह-लद्दाख यात्रा-
 मोटर बाईक से लाल किला से लेह-लद्दाख यात्रा सुनने में ही कठिन लगने वाला शब्द वास्तव में हकीकत में साकार हो गया। जब हम छ बन्दे तीन बाइक पर लाल किले से लेह तक घूम कर आये। लाल किले से लेह तक जाने वाले एक साल में 50 से ज्यादा सनकी(लोग) नहीं होते। लाल-किला से लेह की दूरी वाया मनाली लगभग 1025 किलोमीटर है। लाल-किला से लेह की दूरी वाया श्रीनगर लगभग 1425 किलोमीटर है। हमने दोनों मार्गो का प्रयोग किया।

इस यात्रा का पहला फ़ोटो अम्बाला पार करने के बाद लिया गया था।

सोमवार, 14 फ़रवरी 2011

दिल्ली का जंगल, Forest in Delhi


मैं ड्यूटी पर दोपहर में लंच करके बैठा ही था। कि सोचा चलो आज सामने वाले वन में घूम कर आते हैं। जबकि मैं यहां पर पांच साल से काम कर रहा हूं, लेकिन कभी यहां जाने का ख्याल ही मन में नहीं आया | मेरा कैमरा हाथ में देख कर मेरे साथी बोले "अरे भाई किधर चले" मैं बोला चलो आज कुछ दिखा कर लाता हूं। वे बोले पहले ये बताओ कि कितना समय व पैसा लगेगा मैंने कहा "कंजूस के साथ हो तो पैसा की चिन्ता काहे करते हो" तथा बात रही समय की तो सिर्फ़ एक घंटा लगेगा इतना सुनकर मेरे साथ तीन  साथी भी चल दिये। मैं उन्हे लेकर २०० मीटर दूर जंगल कम पार्क में ले गया। यह जंगल हिंदुराव अस्पताल के एकदम बराबर में हैं।

पहला फोटो हमारे कार्यालय का है।

यह फोटो हिंदुराव अस्पताल जाने वाली सडक का हैं।

ये आ गया जंगल का प्रवेश द्वार।

लो जी पडोस के जंगल के नजारे।

अरे यहां तो एक झील भी हैं।

ये लो जंगल है तो जंगली जानवर भी हैं।

पानी का स्रोत भी है।

चल भाई पेड पर चढ़ जा।

मैं बन्दर का फोटो खीचना चाहता था पर बन्दर खिचवाना  ही ना चाह रहा  था। मैं पीछे-पीछे बन्दर आगे-आगे।  मैं भी फोटो खीच कर ही माना ।

ये देखो 25 फुट का केक्टस हमने पहली बार देखा है |



  (फोटो सारे डिलीट हो गए थे ये मोबाइल से खीचे है, जब भी मौका मिला फिर खींच लाऊंगा )

                                            





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