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गुरुवार, 5 सितंबर 2013

Kapil Muni Dhara Water Fall कपिल धारा में स्नान व एक प्रशंसक से सम्भावित मुलाकात

UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-2     SANDEEP PANWAR  अमरकंटक के उस चौराहे पर जाकर रुका जहाँ से सीधे हाथ बस अड़ड़ा पहुँच जाते है पीठ पीछे अमरकंटक से तो मैं आया ही था। उल्टे हाथ वाला मार्ग छत्तीसगढ़ व यही मार्ग आगे सीधे चलकर कपिल मुनी धारा जलप्रपात के लिये चला जाता है। चलिये स्नान करने की बहुत जल्दी हो रही है पहले कपिल धारा चलते है जो लगभग 40 मीटर की ऊँचाई से गिरता हुआ जल प्रपात है। कपिल धारा इस चौराहे से मुश्किल से 7-8 किमी दूरी पर ही है। यहाँ तक पहुँचाने के लिये ऑटो जैसी गाडियाँ आसानी से मिलती रहती है आप इन्हे अपनी इच्छा अनुसार प्रति सवारी या फ़िर पूरी गाड़ी किराये पर तय करके ले जा सकते हो। मैंने जल प्रपात तक का किराया पूछा तो बताया कि 10 रुपये लगेंगे। मैंने कहा कि कितनी सवारी भरने के बाद चलोगे? उसने कहा कि कम से कम दस सवारियाँ लेकर जाऊँगा, लेकिन जब काफ़ी देर 7 सवारी से ज्यादा ना हुई तो वह इतनी सवारी लेकर ही आगे चल दिया।


बुधवार, 21 अगस्त 2013

Bhedaghat Dhuandhaar water fall भेड़ाघाट का धुआँधार जलप्रपात

UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-13                              SANDEEP PANWAR
जब मैं धुआँधार जल प्रपात के ठीक सामने पहुँचा तो वहाँ का नजारा देख मेरे आश्चर्य का ठिकाना ही नहीं रहा। मेरी आँखों के सामने वह झरना था जिसके बारे में मैं अभी तक सुनता आया था अब मुझे इसे देखने से कोई नहीं रोक सकता था। इस प्रपात का नाम धुआँधार क्यों पड़ा? इसे देख कर यह अंदाजा लगाना आसान है कि पानी जिस भयंकर मात्रा में ऊँचाई से गिरता है उस हालत में यहाँ पर पानी के दवाब का असर ही है जो पानी नीचे गिरने पर धुआँ-धुआँ होने लगता है। पानी की धार ऊँचाई से गिरने पर धुआँ का रुप धारण कर लेती है इसलिये इसे धुआँधार कहते है। दूर से देखने पर ऐसा लगता था जैसे कि नदी किनारे किसी ने आग लगाई हो और उस आग से धुआ उठ रहा हो। जहाँ खड़े होकर मैंने फ़ोटो लिये थे वहाँ ज्यादा देर खड़े रहना मुश्किल हो रहा था क्योंकि धुएँ के रुप में उड़ता पानी मुझे भिगोने के लिये मेरी ओर उड़कर चला आता था।


मंगलवार, 20 अगस्त 2013

Jabalpur to Bhedagath जबलपुर से भेड़ाघाट धुआँधार जलप्रपात तक

UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-12                              SANDEEP PANWAR
ट्रेन में रात सोते हुए कब बीती? पता ही नहीं लग पाया! सुबह जब आँख खुली और खिड़की से बाहर झाँक कर देखना चाहा कि कौन सा स्टेशन आने वाला है? घड़ी के हिसाब से तो अपना स्टेशन अभी नही आया था। लेकिन जैसे ही तेज गति से भागती ट्रेन से भेड़ाघाट नामक स्टेशन पीछे छूटता दिखायी दिया तो आँखे चौकन्नी हो गयी। मैंने साथ बैठी सवारियों से पूछा कि क्या भेड़ाघाट स्टेशन से धुआँधार झरने तक पहुँचने में आसानी है या यह भेड़ाघाट कोई और स्टॆशन का नाम है? मेरे पास बैठे एक महोदय ने बताया कि यही भेड़ाघाट का मुख्य स्टेशन है लेकिन यहाँ सिर्फ़ सवारी/लोकल रेल ही रुकती है लम्बी दूरी वाली रेलगाडियाँ यहाँ नहीं रुकती है। लेकिन अगर किसी को भेड़ाघाट जाना हो तो वो क्या करेगा? उसके लिये उसे मदन-महल नामक स्टेशन पर उतरना होगा। मदन महल क्यो? जबलपुर क्यों नहीं? मैंने उनसे सवाल किया। उन्होंने कहा कि जबलपुर से कई किमी पहले मुख्य स्टेशन मदन महल है जहाँ लम्बी दूरी की लगभग सभी रेल गाडियाँ रुकती है। यहाँ से भेड़ाघाट जाना नजदीक पड़ता है जबकि जबलपुर से भेड़ाघाट जाने वाला सड़क मार्ग भी मदन महल से होकर ही गुजरता है।


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