बुधवार, 21 अगस्त 2013

Bhedaghat Dhuandhaar water fall भेड़ाघाट का धुआँधार जलप्रपात

UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-13                              SANDEEP PANWAR
जब मैं धुआँधार जल प्रपात के ठीक सामने पहुँचा तो वहाँ का नजारा देख मेरे आश्चर्य का ठिकाना ही नहीं रहा। मेरी आँखों के सामने वह झरना था जिसके बारे में मैं अभी तक सुनता आया था अब मुझे इसे देखने से कोई नहीं रोक सकता था। इस प्रपात का नाम धुआँधार क्यों पड़ा? इसे देख कर यह अंदाजा लगाना आसान है कि पानी जिस भयंकर मात्रा में ऊँचाई से गिरता है उस हालत में यहाँ पर पानी के दवाब का असर ही है जो पानी नीचे गिरने पर धुआँ-धुआँ होने लगता है। पानी की धार ऊँचाई से गिरने पर धुआँ का रुप धारण कर लेती है इसलिये इसे धुआँधार कहते है। दूर से देखने पर ऐसा लगता था जैसे कि नदी किनारे किसी ने आग लगाई हो और उस आग से धुआ उठ रहा हो। जहाँ खड़े होकर मैंने फ़ोटो लिये थे वहाँ ज्यादा देर खड़े रहना मुश्किल हो रहा था क्योंकि धुएँ के रुप में उड़ता पानी मुझे भिगोने के लिये मेरी ओर उड़कर चला आता था।



सबसे पहले मैंने नदी किनारे खड़े होकर से देखता रहा, उसके बाद मैं आगे बढ़ते हुए इस प्रपात के मुहाने तक जा पहुँचा था। सुबह का समय होने से बहुत ज्यादा भीड़भाड़ नहीं थी लेकिन जैसे-जैसे समय बीत रह था वैसे ही लोगों का आगमन आरम्भ होने लग गया था। मैं इस झरने पर लगभग 3 घन्टे रुका था। इस बीच मैंने वहाँ आसपास घूम-घूम कर हर कोण से इस झरने को अच्छी तरह देखा था। यह झरना व इसका विकराल रुप देखकर ड़र लगने लगता है। जब पानी ऊपर से नीचे गिरता है और उसके तुरन्त बाद जब पानी ऊपर उठता है तो यह नजारा देखने लायक होता है। यदि गलती से कोई यहाँ गिर जाये तो उसका बचना लगभग नामुमकिन है।

झरने में गिरने से पहले पानी काफ़ी शांत दिखायी देता है जबकि झरने में गिरते ही वही पानी दूधिया रंग में बदल जाता है। पानी की नदी दूध की नदी में बदल जाती है। इससे पहले मैंने उतराखन्ड़ के चकराता में टाईगर फ़ॉल नामक झरने का भयंकर रुप देखा था। इस झरने को जहाँ ऊपर खड़े होकर देखा जाता है वही उस झरने को उसके नीचे जाकर देखना पड़ता है। दोनों झरने अपनी-अपनी जगह खतरनाक है जहाँ धुआँधार एक पूरी नदी नर्मदा के गिरने से बनता है तो टाईगर फ़ॉल एक छोटी सी जल की धारा के गिरने से बनता है। नीचे गिरने के बाद पानी एक पतली गली नुमा मार्ग से होकर तेजी से आगे बढ़ जाता है।

धीरे-धीर सूर्य महाराज ने अपनी गर्मी वहाँ फ़ैलानी आरम्भ कर दी। गर्मी के कारण नहाने का मन हो आया। नहाने से पहले नदी का पानी छू कर देखा गया कि कितना ठन्ड़ा है? पानी ठन्ड़ा तो था लेकिन बहुत ज्यादा भी नही। मैं तो अब तक कई बार इतने ठन्ड़े पानी से नहा चुका हूँ कि उसके सामने नर्मदा के पानी को ठन्ड़ा कहना ही गलत होगा। मैं अब तक दो बार मणिमहेश झील में, एक बार हेमकुन्ठ साहिब की झील में, गंगौत्री में, अमरनाथ यात्रा में पंचतरणी में, अत्यधिक ठन्ड़े पानी में नहा चुका हूँ अब तक इन सभी जगहों पर स्नान करने वाले कुछ गिने चुने बन्दों ने ही मेरा ब्लॉग देखा होगा। यदि कोई है तो अपना नाम अवश्य बताये।

नर्मदा में स्नान करने के लिये सबसे उपयुक्त जगह वह थी जहाँ लिखा हुआ था कि यहाँ स्नान करना मना है। जहां यह बोर्ड़ लगा हुआ था उसके ठीक सामने नदी का पानी नीचे गिरता है। मैंने नहाने के इरादे से अपने कपड़े उतार दिये। यहाँ मैं एक ऐसे बन्दे के इन्तजार में था जो नहाते हुए मेरा फ़ोटो ले सके। मैंने पास में बैठे हुए एक बन्दे से कहा कि आप मेरे मोबाइल से मेरी फ़ोटो ले सकोगे। वह बोला मुझे मोबाईल चलाना नहीं आता है। 

उसकी मासूमियत पर मैं मुस्कुराकर रह गया। मैंने उसको मोबाइल से कई फ़ोटो लेकर समझाये। पानी में घुसने से पहले कई बार उसको फ़ोटो लेने दिये ताकि मैं पानी में घुसू तो वह कोई गड़बड़ी ना करे लेकिन जब मैं पानी में घुसा तो उसने फ़ोटो लेने की बजाय मोबाइल का कोई और बटन टच कर दिया जिससे मोबाइल से फ़ोटो वाला आप्शन गायब हो गया। वह मुझसे बोला कि इसमें तो कुछ नहीं दिख रहा है। आखिरकार काफ़ी मशक्कत के बाद उसने मेरे कई फ़ोटो लिये जिसमें से सबसे अच्छा फ़ोटो यहाँ लगाया गया है।
नर्मदा के पानी में घुसते ही पता लग गया कि यहाँ खड़ा रहना आसान नहीं है। नदी के पानी में उबड़-खाबड़ बडे-बडे पत्थर भरे पड़े थे। जिन पर खड़े होना भी मुश्किल काम था। मैंने कई बार कोशिश की लेकिन हर बार फ़िसल जाता था। इसलिये मैंने किनारे पर रहना ही उचित समझा। बे फ़ातलू में गोड़ा-गाड़ा तुड़ाने से कोई लाभ तो है नहीं। नहाना धोना तो हो लिया, बिना नहाये अपुन को वैसे भी चैन कोनी आती। नहा धोकर कुछ देर कपड़े सूखने के लिये वही सामने पत्थरों पर ड़ाल दिये। धीरे-धीरे लोगों का जमावड़ा बढ़ता ही चला जा रहा था। यहाँ आने वाले अधिकतर लोग-लुगाई स्नान करने के इरादे से ही आ रहे थे।

अब तक स्नान वाली जगह पर नर्मदा किनारे में निकलने वाला हल्के प्रकार का कच्चा संगमरमर से मूर्ति बनाने वाले लोग/कारीगर वहाँ आने लग गये थे। उन लोगों ने वही रखे पत्थरों से पत्थर तोड़कर कई प्रकार की सुन्दर-सुन्दर मूर्तियाँ बनानी आरम्भ कर दी। उन लोगों की कलाकारी देखकर दांतों तले उंगली दबाने को जी चाहता था लेकिन कही अंगुली ज्यादा दब ना जाये इस ड़र से मैंने अपने मुँह में अंगुली ड़ालने से दूर ही रखी।

नहाते समय व फ़ोटो लेते समय मेरा ध्यान यकायक नीचे बहते पानी में चला गया था जहाँ मुझे के विशेष प्रकार की आकृति दिखायी दे रही थी। जिस प्रकार हिमालय के रुपकुन्ड़ में मानव खोपड़ी बिखरी हुई है उसी प्रकार यहाँ पर नर्मदा के पानी में मुझे एक मानव खोपड़ी से मिलती जुलती शक्ल दिखायी दी थी। यह ड़रावनी सी दिखने वाली आकृति दिखते ही मैंने अपना मोबाइल फ़िर से निकाल लिया। इस आकृति का फ़ोटो मैंने इसलिये लगाया है कि देखते है कि कितने लोगों ने धुआँधार में इसे देखा होगा? मुझे नहीं लगता है कि इसे किसी और ने भी देखा होगा? अगर किसी ने यह आकृति देखी है तो बताये कि यह धुआँधार में कहाँ पर है?

कोई घन्टा भर बाद देखा कि अपना तौलिया सूखने के बिल्कुल नजदीक पहुँच चुका है अत: मैंने अपना तौलिया उठाया और नर्मदा के साथ-साथ ऊपर धारा के विपरीत दिशा में कुछ दूर तक घूम कर आने के इरादे से चलना आरम्भ कर दिया। मैं जितना आगे बढ़ता जा रहा था नर्मदा का कपाट उतना ही चौड़ा होता चला जा रहा था। इस क्षेत्र में पत्थर काफ़ी मात्रा में है जिस कारण नर्मदा का पानी उछल-उछल कर आगे बढ़ता जा रहा था। (जबलपुर यात्रा अभी जारी है)

जबलपुर यात्रा के सभी लेख के लिंक नीचे दिये गये है।

















नर्मदा के पानी में एक आकृति 


जाट के पाप माइनस में चल रहे है। और माइनस बढ़ गया। हा हा हा

तेरे पाप तो धुल गये।




9 टिप्‍पणियां:

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

क्या बात है दोस्त अभी हाल फिलाल नियाग्रा प्रपात इस मर्तबा न्युयोर्क (बफलो )की तरफ से देखा ,पूर्व में कनाडा की तरफ से देखा था। ऐसा ही है वह भी। हमारा दुर्भाग्य एक मर्तबा जबलपुर गए थे ,अमन अवसाद ग्रस्त था भेड़ा घात कुछ लोग हमारे ही गए हमारा मन ही न हुआ अब लगता है जात देवता हम भी होते।

Ajay Kumar ने कहा…

Sandeep Bhai Ji, pathhar mein aakriti bani hui hai... or pani to bahut hi saaf dikhayi de raha hai... enjoooooooyyyyyyyyyyyyyyyyyyy..........

SACHIN TYAGI ने कहा…

धुआधर फाल के फोटोअचछे आए है। ओर सनदीप जी एक बार आप ने शायद मनीमहेश की याञा मे ठणडे पानी मे डुबकी लगाने की शरत लगाई थी ओर चार डुबकी लगाई थी जो सबसे अधीक भी थी।

प्रवीण कुमार गुप्ता-PRAVEEN KUMAR GUPTA ने कहा…

संदीप जी राम राम , भेड़ाघाट के फोटो बहुत सुंदर हैं. खोपड़ी वाला फोटो तो यूनीक हैं...

Anila Patel ने कहा…

Aapane bahut achchha bayan kiya hai aur aapake photogrphs to lajavaab hai.is ek hi lekhko padhat muje aisa lagataa aapake sabhie lekh muje padhane chahie. photo dekhaneseto man kudaratme rat ho gaye.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

भारतीय नियाग्रा फाल्स. आगे नौका विहार किया या नहीं.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

दुग्धधवल अद्भुत दृश्य

Rohitkalyana ने कहा…

photo dekh kar lagta h ki Narmada jeewit ho gyi h....maja aa gya...kbi time nikalkar jarur jayenge is jagah...

mahendra mishra ने कहा…

भेडाघाट पर सुन्दर फोटो और बढ़िया यात्रा विवरण ...

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