शुक्रवार, 16 अगस्त 2013

Kal Bhairav Temple शराब पीने वाले काल भैरव मन्दिर- उज्जैन

UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-09                              SANDEEP PANWAR
दारु पीने वाली मूर्ति के बारे में सुनते ही मुझे दिल्ली के पुराने किले के साथ लगा हुआ भैरो मन्दिर याद आ गया। दिल्ली के भैरो मन्दिर में शराब चढ़ाई जाती है। उज्जैन की सेन्ट्रल/केन्द्रीय जेल के सामने से होते हुए हम लोग श्रीकाल भैरव मन्दिर जा पहुँचे। इस मन्दिर की विशेष महिमा बतायी गयी है कि इस मन्दिर की मूर्ति को जितना जी करे उतनी शराब पिला दो, मूर्ति भी पक्की पियक्कड़ ठहरी जो बोतल मुँह से लगाते ही बोतल खाली होनी शुरु हो जाती है। पहली बार तो मुझे अपने वाहन चालक की बातों पर विश्वास ही नहीं हुआ था लेकिन मन्दिर के बाहर बिक्री के लिये उपलब्ध शराब देखकर मेरा माथा ठनका कि  कुछ ना कुछ गड़बड़ तो जरुर है।


मेरा भारत महान यहाँ नेता तो नेता भगवान की मूर्ति भी दारु पी जाये। मन्दिर के बाहर मिलने वाली शराब एकदम सील पैक अंग्रेजी की ही थी, मैंने दुकानों के फ़ोटो इसलिये ही लगाये है कि ताकि आप लोग ध्यान से देख सके कि मैं सच कह रहा हुँ। हमने सोचा कि चलो मन्दिर के अन्दर चल कर देखते है कि माजरा क्या है? लेकिन मन्दिर के प्रवेश करने वाले मुख्य दरवाजे पर लगी लम्बी लाईन देखकर हमारी हिम्मत ही नहीं पड़ी कि हम इस पियक्कड़ मूर्ति वाले देव के दर्शन कर सके। मूर्ति भी सोच रही होगी कि यह जाट देवता और इसकी टोली मुझे शराब पीता देखकर भक्ति में तो आने से रही उल्टे मेरा मजाक बनायेगी। इसलिये उस देवता ने इस जाट देवता को अन्दर आने से रोकने के लिये पहले ही पक्का प्रबन्ध कर लिया था।

मैंने सोचा हम जैसे फ़क्कड़ तो चाय भी नहीं पीते है और यहाँ देखो मूर्तियाँ दारु भी पीती है। जय हो भारत भूमि की। जिसके बारे में सोचा ना गया हो वह यहाँ सम्भव हो सकता है। मूर्ति के दारु पीने वाली घटना के बारे में पता लगा कि इस मूर्ति के बारे में जब अंग्रेजों ने सुना तो वे अपने वैज्ञानिकों को लेकर यहाँ पहुँचे, इस मूर्ति के चारों ओर से गहराई तक खोदकर देखा लेकिन उन्हे यह पता नहीं चला कि आखिर मूर्ति जिस दारु को पीती है वह कहाँ जाती है? सबसे बड़ कमाल तो यह मिला था कि मूर्ति के चारों की मिट्टी खुदाई के दौरान एकदम शुष्क मिली थी। इस घटना के बाद अंग्रेजों ने कभी दुबारा इस मन्दिर को हाथ तक नहीं लगाया था।

भैरव मन्दिर देखने के बाद हमारी अगली मंजिल संदीपनी आश्रम थी जहाँ भगवान श्रीकुष्ण, बलराम और उनके गरीब दोस्त सुदामा ने शिक्षा प्राप्त की थी। चलिये हम एक बार फ़िर गाड़ी में सवार हो रहे है। यहाँ से कई किमी दूर संदीपनी आश्रम देखने चलते है। जेल के आगे से होते हुए हम संदीपनी आश्रम की ओर बढ़ने लगे। अरे यह क्या एक बार फ़िर हमने क्षिप्रा नदी पार करनी पड़ी। अबकी बार नदी पार करते हुए हमें नदी पार एक अन्य मन्दिर दिखायी दे रहा था।

नदी पार जो मन्दिर दिख रहा था उसका नाम मंगलनाथ मन्दिर है। मंगलगृह के दोष निवारण का सबसे अच्छा स्थान इस मन्दिर को बताया गया है। हम गाड़ी से उतर कर इस मन्दिर की ओर बढ़े तो यहाँ लगी लम्बी लाईन देखकर हमारे होश उड़ गये। जिस प्रकार आधा किमी लम्बी लाईन काल भैरव मन्दिर के बाहर लगी थी ठीक वैसी ही लाईन यहाँ भी लगी पड़ी थी। हिन्दू धर्म में यही तो कमाल है कि हिन्दू लोग प्रतिदिन अपने ईष्ट को याद करेंगे नहीं लेकिन जैसे ही कोई त्यौहार आयेगा तो जमकर भगवानों के पीछे नहाधोकर पड़ जायेंगे। अब बेचारा भगवान भी क्या करे। उसे भी रोज-रोज भक्तों से मिलने की आदत रही नहीं, इसलिये भगवान भी सोचता होगा कि ये लो आ गये लालची लोग?

मंगलनाथ मन्दिर की लम्बी भीड़ देखकर हमने बाहर से अन्दर वाले भगवान की मूर्ति को राम-राम प्रणाम आदि कर लिया। जो यह कहता होगा कि मन्दिर के बाहर से भगवान को राम-राम करने के कुछ लाभ नहीं होता। उसके लिये बता देता हूँ कि मुझे भगवान से कभी कुछ नहीं माँगना होता है। मैं मन्दिर में सिर्फ़ और सिर्फ़ मूर्ति को राम-राम करने जाता हूँ। जहाँ हमारी गाड़ी खड़ी थी वहाँ एक पुलिस वाला आया होगा जिसने हमारी गाड़ी वहाँ से हटवा दी, मैं मन्दिर के फ़ोटो लेने गया था जब मैंने वापिस आकर वहाँ से गाड़ी गाय़ब पायी तो मुझे लगा कि लगता है कि मुझे छोड़ कर भाग गये। 

मैं उन्हे तलाशता हुआ मन्दिर से बाहर मंगलनाथ रोड़ पर पुल के पास पहुँच गया। यहाँ नदी के कई फ़ोटो लेने के बाद मैंने अपनी गाड़ी की तलाश करने की बजाय प्रेम सिंह को फ़ोन मिलाना उचित समझा। प्रेम सिंह बोला हम पुल से आगे पुराने बरगद के नीचे खड़े हुए है। वहाँ से क्यों चले आये? एक ससुरा पुलिस वाला आया उसने हमें वहाँ से भगा दिया था कि चलो पार्किंग में जाओ। अच्छा यहाँ पार्किंग भी बनायी हुई है।

उज्जैन यात्रा के सभी लेख के लिंक नीचे दिये गये है।

05हरसिद्धी शक्ति पीठ मन्दिर, राजा विक्रमादित्य की आराध्य देवी।
06- उज्जैन का चार धाम मन्दिर व बिजली से चलने वाली झाकियाँ।
07- राजा भृतहरि की गुफ़ा/तपस्या स्थली।
08- गढ़कालिका का प्राचीन मन्दिर
09- शराब/दारु पीने वाले काल भैरव का मन्दिर
10- श्रीकृष्ण, सुदामा, बलराम का गुरुकुल/स्कूल संदीपनी आश्रम।
11- उज्जैन की महान विभूति सुरेश चिपलूनकर जी से मुलाकात व उज्जैन से जबलपुर प्रस्थान



















7 टिप्‍पणियां:

  1. रोचक स्थान, संदीपन मुनि के आश्रम में अभी भी कान्हा के स्पंद हैं कि नहीं।

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  2. भई मजा आ गया इस याञा मे।भैरव जी के दार् पर तो ठेके खुले हुए है।कया यह सरकार की अनुमती से खुले हे या वैसे ही।आप ने पता तो करा होगा ही या नही।

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  3. उज्जैन का यह मंदिर बहुत फेमस है ..मैंने भी यहाँ अपनी आँखों से मूर्ति को शराब पीते हुये देखा है ...पहले यहाँ सिर्फ 'दुबारा' नामकी शराब ही चढती थी आजकल अंग्रेजी शराब चढने लगी है ..यहाँ की मान्यता है की भेरों बाबा को चढाई हुयी शराब यदि कोई पियक्कड़ पि ले, तो वो अपनी शराब छोड़ देता है ...और यह आजमाया हुआ भी है; लोग आधी शराब चढाते है और आधी घर ले जाते है और प्रशाद के रूप में पीते है ...
    मंगलनाथ मंगल शांति मंदिर भी अन्य मंदिर की तरह ही है ... टाईम का सदपयोग किया न जाकर ....

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  4. मैनें भी काल भैरव बाबा को शराब 🍸 पिलाई हैं
    हैं
    मैंने खुद बाबा को अपनी अांखौ से शराब पीते देखा हैं।

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  5. kya ye kisi chamatkar se kam h. ki barav baba madirapan karte h. to kya apne hindustan ke ek aastray ko word ke any aachrayo me samil nahi karna cahiy ??????????????

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  6. barav baba ka ye madira pan karna kya kisi chamskar se kam h. ? kya word ke mhan aacharyo me ese samil nahi karna cahiy??????

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