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शुक्रवार, 9 मई 2014

Bageshwar to Delhi Via Almora बागेश्वर से अल्मोडा होते हुए दिल्ली तक

KUMAUN CAR YATRA-04                                                      SANDEEP PANWAR
पाताल भुवनेश्वर देखने के लिये जाते समय एक दुकान पर खीरे का रायता बोल कर गये थे। वापसी में उस दुकान से रायता पीकर ही आये। रायते के साथ आलू की चाट भी थी जिससे स्वाद कई गुणा बढ गया। जब तक राजेश जी ने गाडी मोडी। तब तक मैंने सडक किनारे के होटलों पर कमरों के दाम के बारे में पता किया। उन्होंने बताया कि 500 रु तक में कमरा मिल जायेगा। मेरे गाडी में बैठते ही राजेश जी गाडी लेकर चल दिये। वापसी में राई आगर के उसी होटल पर आइसक्रीम की पेट भर दावत खाने की बात तय हुई थी जहाँ रात को ठहरे थे। राई आगर पहुँचते ही आइसक्रीम का 5 लीटर वाला डिब्बा ले लिया। 

शनिवार, 3 मई 2014

Nainital to Patal bhuvaneshwar Cave नैनीताल झील से पाताल भुवनेश्वर

KUMAUN CAR YATRA-02                                                       SANDEEP PANWAR

इस यात्रा के पहले लेख में आपने दिल्ली से रात भर चलकर सुबह-सुबह भीमताल, नौकुचियाताल व सातताल तक की यात्रा देखी। अब उससे आगे। हम चारों गाडी में सवार होकर नैनीताल के लिये बढ चले। आज दिनांक 13 अप्रैल 2014 की बात है। सातताल से नैनीताल जाने के लिये पहले भवाली पहुँचना होता है। भवाली कस्बे/बाजार से एक सीधा मार्ग अल्मोडा जाता है। जबकि ऊपर चढाई की तरफ़ उल्टे हाथ जाने वाला मार्ग नैनीताल व दिल्ली/काठगोदाम के लिये अलग होता है। इस मार्ग पर लगभग तीन किमी चलने के बाद एक तिराहा आता है यहाँ से दिल्ली वाला मार्ग नीचे की ओर कट जाता है जबकि नैनीताल वाला मार्ग ऊपर चला जाता है। हमें नैनीताल जाना था जाहिर है हम भी ऊपर वाले मार्ग पर चलते गये। यहाँ इस तिराहे से नैनीताल की दूरी मात्र 7 किमी ही रह जाती है। नैनीताल पहुंचते ही सबसे पहले नैनी झील के दर्शन हुए। नैनीताल में हमारा स्वागत बारिश ने किया।
 

शुक्रवार, 3 मई 2013

Haldwani and Almora हल्द्धानी व अल्मोड़ा तक बाइक यात्रा

ROOPKUND-TUNGNATH 01                                                                             SANDEEP PANWAR

जाना था चीन, पहुँच गये जापान, हाँ जी हाँ जी हाँ। आप सोच रहे होंगे कि यह जाट भाई को आज क्या हो गया जो गाना गाना शुरु कर दिया। जी हाँ बात ही ऐसी है कि कई बार यात्रा शुरु करने से पहले मन में सोचा जाता है कि यहाँ जायेंगे, वहाँ जायेंगे। लेकिन किस्मत का खेल निराला होता है किसे कब कहां ले जाये कोई नहीं जानता। मैंने इस यात्रा के समय पहले से ठाना हुआ था कि पंच बद्री, पंच केदार, पंच प्रयाग की यात्रा करके आऊँगा। समय भी था, बाइक भी, मौसम भी, कहने की बात यह है कि किसी किस्म की कोई परॆशानी नहीं थी, लेकिन होनी बड़ी बड़ी बलवान है यात्रा की तय तिथि से 3-4 दिन पहले से ही मेरी कमर व गर्दन में चिनके जैसा दर्द आरम्भ हो गया। मैंने सोचा कि रविवार आने में अभी तो कई दिन बाकि है तब तक ठीक हो जायेगा। लेकिन जब यात्रा वाले दिन की पूर्व वाली रात में भी दर्द पूरी तरह ठीक नहीं हो पाया तो यात्रा केंसिल करने के अलावा और कोई चारा नहीं था। इस बाइक वाली यात्रा में मेरे साथ बाइक वाले महान घुमक्कड़ मनु प्रकाश त्यागी साथ जाने वाले थे। आखिरकार मनु भाई को मना किया गया जिसके बाद उन्हें अकेले ही यात्रा पर जाना पड़ा।~
भीमताल
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