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सोमवार, 25 फ़रवरी 2013

Mahatma Gandhi Birth Place महात्मा गाँधी का जन्म स्थान

गुजरात यात्रा-07
सुदामा मन्दिर देखने के बाद जैसे ही बाहर आये तो वहाँ पर काफ़ी विशाल खुला स्थान नुमा मैदान देखकर अच्छा लगा था। यहाँ से हमें पहले तो इसी मैदान नुमा जगह से होकर बाजार वाली सड़क पर जाना था, उसके बाद वहाँ से हम सीधे हाथ की ओर मुड़ गये। यदि यहाँ से उल्टे हाथ मुड़ जाये तो फ़िर से उसी सड़क पर पहुँच जाते जहाँ से हम यहाँ तक आये थे। सुदामा मन्दिर से लगभग आधा किमी चलने के बाद एक चौराहा जैसा स्थान आता है। वैसे तो यह चौराहा बड़े-बड़े घरों से घिरा हुआ है। यहाँ आकर यहाँ की सैकड़ों साल पुरानी मकान देखकर लगता है कि पोरबन्दर हमेशा से ही वैभवशाली रहा है इसमें गाँधी का कोई योगदान नहीं है। मैं तो भारत की आजादी में भी गाँधी का योगदान नहीं मानता हूँ। अंग्रेज भारत छोड़ कर गये, इसका सिर्फ़ एक कारण था कि उस समय की भारतीय सेना और पुलिस में अंग्रेजी सम्राज्य के खिलाफ़ आवाज बुलन्द हो रही थी। एक बार बम्बई में नौसेना ने तो विद्रोह कर वहाँ के सभी अंग्रेजों को मार दिया था। उसके बाद आज की आतंकवादी घटनाओं की तरह उस समय के आतंकवादी (अंग्रेजों के अनुसार) जो सिर्फ़ अंग्रेजों को मारते थे। उनके कारण अंग्रेज बहुत ज्यादा ड़रे हुए थे। अरे-अरे छोड़ो यह आजादी का चक्कर, हम सिर्फ़ नाम के आजाद है मुझे तो अंग्रेजी राज ही ज्यादा अच्छा लगता था।

यह गाँधी के घर का संग्रहालय है।

गाँधी के माता-पिता

रविवार, 24 फ़रवरी 2013

Sudama temple Porbandar gujarat गुजरात के पोरबन्दर में है श्रीकृष्ण दोस्त सुदामा मन्दिर

गुजरात यात्रा-06

द्धारका से बस तो हमें मिली नहीं इस कारण हमने कई ट्रकों को रुकने का इशारा किया लेकिन जूनागढ़ कोई नहीं जा रहा था। तभी एक मैजिक वाहन वाला आया हमने उसे हाथ का इशारा भी नहीं किया  था उसने पोरबन्दर की आवाज लगायी तो हमने कहा कि हम तो जूनागढ़ जायेंगे। हमारी बात सुनकर वो बोला कि आपको पोरबन्दर तक मैं छोड़ दूँगा, वहाँ सुदामा मन्दिर गाँधी की जन्म भूमि देखकर आप लोग अंधेरा होने से पहले आराम तक जूना गढ़ पहुँच जाओगे। उसकी बात सुनकर अपने दिमाग का घन्टा टन-टना-टन बोला कि चल जाट देवता चल लगता है श्रीकृष्ण का ही कारनामा है कि मेरा मन्दिर तो देख लिया है मेरे दोस्त सुदामा के मन्दिर को देखे बिना जा रहे हो। हम उस सामान ढ़ोने वाली मैजिक में सवार हो गये। मैं सबसे आगे बैठ गया जबकि बाकि तीनों पीछे पैर फ़ैला कर बैठ गये थे। द्धारका से पोरबन्दर की दूरी 115 किमी के पास है। गुजरात की चकाचक भीड़ रहित सड़कों पर हम मात्र दो घन्टे में ही पोरबन्दर पहुँच गये। मैजिक वाले ने हमें सुदामा मन्दिर के ठीक सामने छोड़ दिया। साथ ही यह भी समझा दिया था कि गाँधी का जन्म स्थान कहाँ है? सुदामा मन्दिर के बाहर एक नारियल वाला बैठा था सबसे पहले हमने एक-एक नारियल पर हाथ साफ़ किया उसके बाद उसकी गिरी खायी, तब कही जाकर हम सुदामा मन्दिर देखने के तैयार हुए।


यही श्री कृष्ण के दोस्त सुदामा का मन्दिर है।

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