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शनिवार, 3 मई 2014

Nainital to Patal bhuvaneshwar Cave नैनीताल झील से पाताल भुवनेश्वर

KUMAUN CAR YATRA-02                                                       SANDEEP PANWAR

इस यात्रा के पहले लेख में आपने दिल्ली से रात भर चलकर सुबह-सुबह भीमताल, नौकुचियाताल व सातताल तक की यात्रा देखी। अब उससे आगे। हम चारों गाडी में सवार होकर नैनीताल के लिये बढ चले। आज दिनांक 13 अप्रैल 2014 की बात है। सातताल से नैनीताल जाने के लिये पहले भवाली पहुँचना होता है। भवाली कस्बे/बाजार से एक सीधा मार्ग अल्मोडा जाता है। जबकि ऊपर चढाई की तरफ़ उल्टे हाथ जाने वाला मार्ग नैनीताल व दिल्ली/काठगोदाम के लिये अलग होता है। इस मार्ग पर लगभग तीन किमी चलने के बाद एक तिराहा आता है यहाँ से दिल्ली वाला मार्ग नीचे की ओर कट जाता है जबकि नैनीताल वाला मार्ग ऊपर चला जाता है। हमें नैनीताल जाना था जाहिर है हम भी ऊपर वाले मार्ग पर चलते गये। यहाँ इस तिराहे से नैनीताल की दूरी मात्र 7 किमी ही रह जाती है। नैनीताल पहुंचते ही सबसे पहले नैनी झील के दर्शन हुए। नैनीताल में हमारा स्वागत बारिश ने किया।
 

शुक्रवार, 25 अप्रैल 2014

Let's go to Kumaun Region आओ उत्तराखण्ड के कुमायू क्षेत्र में घूमने चले।

KUMAUN CAR YATRA-01                                                       SANDEEP PANWAR
सन 2014 अप्रैल माह के शुरुआत की ही बात है। इस माह राजेश जी कई बार फ़ोन कर कह चुके थे कि संदीप जी चलो, कही भी चलो। मेरा मन हिमालय में कही चलने का हो रहा था। जबकि राजेश जी हरिदवार जाने की कह रहे थे। हरिदवार तो मैंने बीसियों बार देखा है। इसलिये वहाँ जाने का मन नहीं था। अजय भाई भी कई बार कह चुके थे कि संदीप भाई जी आपके साथ किसी यात्रा पर जरुर जाना है? दिनांक 8 को गुड फ़्राडे का अवकाश था। उसके अगले दिन शनिवार था। पहले अपनी भी शनिवार को छुट्टी रहा करती थी। लेकिन अब मात्र 6 घन्टे की नौकरी होने से केवल रविवार का ही अवकाश होता है। गुड फ़्राडे से पहले वाले सोमवार को चुनावी लाभ लेने के उद्देश्य से अम्बेडकर जयंती का अवकाश घोषित हो गया। अजय का फ़ोन आया भाई जी चलो कही भी चलो। मेरी तीन दिन की, व आपकी दो दिन की छुट्टी है।




मंगलवार, 17 जुलाई 2012

NAINITAL TO DELHI TRAIN JOURNEY नैनीताल से दिल्ली रेल यात्रा

ताल ही ताल-
जब हम तीनों नैनी ताल झील से नाव भ्रमण करके बाहर आये तो समय देखा, कि अभी तो पाँच बजने वाले है, मेरा अब यहाँ कुछ और देखने का मन नहीं था जिस कारण दिल्ली की ओर चलने का कार्यक्रम बनने लगा, लेकिन अपने दोनों साथी का मूड देखा लो लग रहा था कि ये दोनों अभी यहाँ से चलने वाले नहीं है, इन्होंने अभी अपनी पीने की हसरत पूरी करनी थी जिस कारण यह जाने में आना-कानी कर रहे थे। हम वहाँ खडे-खडॆ सोच ही रहे थे कि क्या करे? कि तभी एक आल्टो वाला हमारे सामने आकर रुक गया और बोला काठगोदाम जाना है क्या? वैसे हमे जाना तो था ही, जिस कारण हम उसकी कार में बैठ गये। थोडी दूर जाने पर हमने उससे किराये के बारे में जानना चाहा तो उससे बताया कि 150 रु एक सवारी के लूँगा। हमने प्रति सवारी सौ रुपये उसको बोले लेकिन सौ पर वह नहीं माना जिस कारण हम एक बार फ़िर वहीं पर उतर गये। सामने ही सरकारी बसों का अडडा था जहाँ से कई जगहों की बसे चलती है। यह बस अडडा नैनीताल झील के सबसे निचले किनारे पर बना हुआ है। यहाँ जाकर मैंने दिल्ली की बस के बारे में पता करना चाहा। लेकिन काफ़ी छानबीन के बाद भी दिल्ली की ओर जाने वाली बस के बारे में सही जानकारी ना मिल सकी। उस समय वहाँ से सिर्फ़ स्थानीय बसे ही चल रही थी।

देख लो।

बुधवार, 4 अप्रैल 2012

NAINITAL LAKE नैनीताल झील


भीमताल देखने के लिये यहाँ क्लिक करे।
                   
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नैना पीक/ चाइना पीक के लिये यहाँ क्लिक करे।

आप सब नैनीताल शहर व इसके आसपास के मुख्य स्थलों की सैर कई लेखों से कर ही रहे है, लेकिन जिस खास नाम के कारण उतराखण्ड के कुमाऊँ क्षेत्र में नैनीताल का बहुत नाम है, देश के प्रमुख पहाडी नगरों में नैनीताल की गिनती भी की जाती है। आज मैं आपको उस स्थल की भी सैर करवा रहा हूँ। नैनीताल में हिमालय का प्राकृतिक सौंदर्य तो भरा हुआ है साथ ही यहां झीलों की भरमार भी है, नैनीताल शहर को झीलों की नगरी तो कहा ही जाता है। यहाँ की शान नैनी झील अति प्रतिष्ठित सुन्दर झील है। जी हाँ आप सही समझे आज आपको नैनी झील की सैर करायी जा रही है। यहाँ आने पर हमने पाया कि नैनीताल झील चारों ओर से पहाडियों से घिरी हुई है। सम्पूर्ण नगर भी इस ताल के चारों ओर ही बसा हुआ है। झील के साथ लगता हुआ हॉकी का मैदान है, मैदान के पीछे ही मस्जिद बनी हुई है। नैनीताल इलाके में पहले कभी 60 ताल हुआ करते थे। आज भी नैनीताल जिले में सबसे अधिक ताल हैं। यहाँ पर 'नैनी ताल' नामक झील जो नैनीताल शहर में ही है, यहाँ का यह मुख्य आकर्षण केन्द्र है। कार से उतरने के बाद हम तीनों ने झील की सैर करने की योजना बनायी। जिस जगह से नाव किराये पर मिलती थी हम तीनों उस जगह की ओर चल दिये। मार्ग में एक जगह एक बन्दा जामुन की बिक्री कर रहा था। जब उससे जामुन का रेट पता किया तो उसने बताया कि 300 रु किलो, उसने बीस-बीस रु के कागज के कप जैसे भी बनाये हुए थे जिसमें रख कर वह जामुन बेच रहा था। अगर मैं अकेला होता तो कभी ना लेता, लेकिन हमारे साथ एक पहुँचे हुए महाराज जो थे वो माने ही नहीं उन्होंने एक कप जामुन ले ही ली, जामुन वाले कि बदमाशी देखिये कि उसने जामुन जिस कागज के कप में दी थी वो देखने में तो चाय पर मिलने वाले कांच के गिलास जितने आकार का था, हमारे दोस्त ने सोचा था कि चलो एक गिलास जामुन चखने के लिये बहुत रहेंगी। लेकिन गजब हो गया, जब उस गिलास में से आधा गिलास भी खाली नहीं हो पाया था तो जामुन समाप्त हो गयी। अपने पहुँचे हुए दोस्त ने आश्चर्य के साथ हमारी ओर देखा, हमने कहा क्या हुआ, जब उसने दिखाया कि यह देखो जामुन वाले की चालाकी इस कागज के गिलास में आधे में कागज भरा हुआ है आधा ही जामुन से भरा हुआ था। उस जामुन वाले की चालाकी देख कर मुझे भी अजीब लगा कि दुनिया में कैसे-कैसे लोग भरे पडॆ है। जामुन के बाद बारी आयी भुट्टा बोले तो कुकडी खाने की। मैंने एक भुट्टा लेकर खाना शुरु कर दिया। भुट्टा पेट में जाता रहा, हम धीरे-धीरे पैदल चलते रहे। 


ऊँचाई से झील का नजारा

शनिवार, 24 मार्च 2012

KILBURY किलबरी (नैनीताल के भ्रमण पर)


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NAINA/ CHINA PEAK से लौटने पर मैं ठीक उसी जगह पर आ बैठा जहाँ से इस जगह की ऊँचाई तीन किमी बाकि रह जाती है। अन्तर सोहिल का फ़ोन आया कि अब हम नैनीताल में झील के पास आ चुके है, इसके जवाब में मैंने कहा कि ठीक है आ जाओ अभी तुम मुझसे कई किमी दूरी पर हो, पैदल आओगे या गाडी से। अन्तर सोहिल ने कहा कि हमने एक इण्डिका नैनीताल घूमने के लिये कर ली है। कार सुनते ही अपना माथा ठनका कि यार ये कैसे मानव है जो ऐसी शानदार जगह पर भी कार में बन्द होकर रह जाना चाहते है। उन्हें एक बार अच्छी तरह समझा दिया कि जो सडक नैनी झील के साथ चलती हुई चढाई पर चढती जाती है आगे जाकर बलखाती हुई यह नैना पीक जाने वाले पैदल मार्ग व किलबरी जाने वाले की ओर चली जाती है तुम्हे उसी पर आना है एक बार कार के चलाने वाले को भी समझा दिया ताकि वो कहीं ओर ले जा कर ना पटक दे। जहाँ मैं बैठा हुआ था वहाँ चाय वाली दुकान के सामने मोड के ठीक सामने सडक पर बैठने लायक एक जुगाड पर मैंने अपना धुना रमा दिया था। मैं सोच रहा था कि ये लोग लगभग आधे घन्टे में आ जायेंगे। लेकिन जब ये पौने घन्टे तक भी ना फ़टके तो अपनी खोपडी घूमने लगी कि लगता है कि किसी और जगह जा पहुँचे है। एक बार फ़िर से फ़ोन लगाया तब जाकर पता लगा कि बस आने ही वाले है।

सामने जो चैक पोस्ट दिखाई दे रहा है, चाय की दुकान पर बैठ कर लिया गया फ़ोटो है।

शनिवार, 17 मार्च 2012

NAINA PEAK / CHINA PEAK नैना पीक / चाइना पीक


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नैनीताल का स्नोव्यू पोइन्ट SNOW VIEW POINT तो देख लिया, जबकि मैं इस स्थल को देखने के लिये नहीं आया था, मैं तो नैना पीक NAINA PEAK इसे चाइना पीक CHINA PEAK भी कहते है इसकी समुन्द्र तल से ऊँचाई 2615 मी है को देखने की इच्छा थी। वापसी में नैना पीक की ओर आते समय सडक किनारे दो तीन लोग एक मोड पर कुकडी यानि कि भूट्टे भून-भून के उस पर काला नमक व नीम्बू लगा कर बेच रहे थे। जिन लोगों ने इस प्रकार के आग में भूने हुए भूट्टे खाये होंगे उनके मुँह में तुरन्त पानी आ गया होगा। मैंने 15 रुपये वाला एक बडा सा भूट्टा देशी भाषा में बोले तो कुकडी खाने के लिये ली। हमारे गाँव में तो इसे कुकडी ही बोले है आप लोगों के यहाँ कुछ और बोलते होंगे। मैं स्वाद ले-ले कर कुकडी खाता रहा, साथ ही पैदल चलने में भी लगा रहा। मुश्किल से दो किमी भी नहीं चला था कि एक मोड पर एक बोर्ड दिखाई दिया जिस पर लिखा था कि नैना देवी पैदल मार्ग दूरी मात्र तीन किमी। अरे केवल तीन किमी जबकि मैं समझा था कि नैना देवी अभी 5-6 किमी तो होगा ही। जहाँ से यह पैदल मार्ग शुरु होता है ठीक वही पर उल्टे हाथ की ओर एक चाय की दुकान है, मैंने कुछ देर उस दुकान पर बैठने की सोची। दुकान वाले ने मुझसे पूछा कि नैना पीक जाओगे। मैंने कहा हाँ क्यों मार्ग बन्द है क्या? मैंने मार्ग बन्द होने के बारे में इसलिये कहा क्योंकि मुझे वहाँ बैठे-बैठे लगभग आधा घन्टा हो गया था लेकिन कोई भी उस पैदल मार्ग से जाना वाला दिखाई नहीं दिया था। चाय वाले ने बताया कि आज मौसम साफ़ नहीं है इसलिये आज अभी तक दो तीन लोग ही ऊपर गये है। चाय वाले ने बातों बातों में बताया कि यह पैदल मार्ग यहाँ से नहीं बल्कि नीचे से ही यहाँ तक आया है। जब मैंने कहा कि मैं भी नीचे से ही पैदल ही आया हूँ तो वो मानने को तैयार नहीं था जब उसको कैमरे से फ़ोटो दिखाये तो उसकी बोलती बन्द। एक जवान फ़ौजी अपनी नई नवेली फ़ौजन के साथ वहाँ आया, फ़ौजी तो नैना पीक जाना चाहता था लेकिन फ़ौजन को तीन किमी की पैदल चढाई के नाम से ही साँप सा सूंघ गया था।

चाय की दुकान व सडक के मोड के किनारे बोर्ड।

शनिवार, 10 मार्च 2012

NAINITAL SNOW VIEW POINT नैनीताल शहर के भ्रमण पर


भीमताल, नौकुचियाताल, सातताल ये तीनों ताल भीमताल के ओशो आश्रम में रहते हुए आराम से देख डाले थे। पहले दिन में भीमताल व नौकुचियाताल दोनों एक साथ देख लिये गये थे दूसरे दिन सातताल देख लिया गया था। इन तीनों तालों को देखने के लिये मैंने तो पैदल ही भ्रमण किया था। लेकिन सभी लोग ऐसा नहीं कर पाते है अत: जिसे जैसा अच्छा लगे वो उसी प्रकार इन स्थलों पर जरुर घूम कर आये। यह तो मैंने पहले ही बता दिया था कि ओशो आश्रम वालों ने जब यह कहा था कि बिना गाऊन पहने कोई सभा में नहीं आयेगा। अपुन ठहरे घुमक्कड प्रजाति के प्राणी ओशो के भक्त-वक्त तो थे नहीं जिससे कि मेरे ऊपर उनके प्रवचन का तनिक मात्र भी कुछ प्रभाव पडता। ले दे के जाटॊं के एकमात्र देव है महादेव अत: जब कभी मौका मिलता है तो उनके कुछ आसान से (मेरे लिये आसान है सभी के लिये नहीं) ठिकाने पर मैं जयराम जी की करने चला जाता हूँ।
                                    इस यात्रा की शुरुआत देखने के लिये यहाँ चटका लगाये

मार्ग में एक घर की छत के बीच से निकला हुआ पेड है।

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