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सोमवार, 25 नवंबर 2013

Bhagsu Naag भागसू नाग में स्नान व दिल्ली वापसी

करेरी-कांगड़ा-धर्मशाला यात्रा के लिंक नीचे दिये है।

01- आओ करेरी झील धर्मशाला देखने चले।
02- धर्मशाला से करेरी गाँव की ट्रेकिंग भयंकर बारिश के बीच।
03- करेरी गाँव के शानदार नजारे, और भूत बंगला
04- धर्मशाला की ड़ल लेक।
05- धर्मशाला के चाय बागान के बीच यादगार घुमक्कड़ी।
06- कुनाल पत्थरी माता मन्दिर, शक्ति पीठ माता के 52 पीठ में से एक।
07- नगरकोट कांगड़ा का मजबूत दुर्ग / किला
08- मैक्लोड़गंज के भागसूनाग स्विमिंग पुल के ठन्ड़े पानी में स्नान  Back to Delhi

KARERI-KANGRA-DHARAMSHALA-07

धर्मशाला स्थित राकेश के कमरे से अपना सभी सामान लेकर मैक्लोडगंज जाने के लिये तैयार हो गये। आज का अन्तिम कार्यक्रम भागसूनाग स्विमिंग पुल में जमकर नहाना था। कमरे से बाहर निकलते ही हल्की-हल्की बून्दाबान्दी शुरु हो गयी। हमने भी सोचा कि आज इन्द्र देवता कितना भी जोर लगा ले, हम नहाये बिना मानने वाले नहीं है। भागसू नाग जाने से पहले हमने अपना सभी सामान उसी भोजनालय में रख दिया जहाँ हमने दो बार खाना खाया था। धर्मशाला से बस में बैठकर मैक्लोड़गंज पहुँचे।

गुरुवार, 21 नवंबर 2013

Dharamshala- Kunal Pathri Mata Shaktipeeth Temple कुनाल पत्थरी शक्ति पीठ मन्दिर-धर्मशाला

करेरी-कांगड़ा-धर्मशाला यात्रा के लिंक नीचे दिये है।

01- आओ करेरी झील धर्मशाला देखने चले।
02- धर्मशाला से करेरी गाँव की ट्रेकिंग भयंकर बारिश के बीच।
03- करेरी गाँव के शानदार नजारे, और भूत बंगला
04- धर्मशाला की ड़ल लेक।
05- धर्मशाला के चाय बागान के बीच यादगार घुमक्कड़ी।
06- कुनाल पत्थरी माता मन्दिर, शक्ति पीठ माता के 52 पीठ में से एक।
07- नगरकोट कांगड़ा का मजबूत दुर्ग / किला
08- मैक्लोड़गंज के भागसूनाग स्विमिंग पुल के ठन्ड़े पानी में स्नान  Back to Delhi

KARERI-KANGRA-DHARAMSHALA-06

हिमाचल के खूबसूरत शहर धर्मशाला के बेहद नजदीक माता का शक्तिपीठ मन्दिर होगा। ऐसा मैंने कभी पढा होगा, याद नहीं आ रहा है। हम पैदल ही यहाँ के चाय बागान देखते हुए आगे बढ़ते गये तो एक मोड़ पर इस मन्दिर का प्रवेश द्वार दिखायी दिया। वैसे राकेश हमारे साथ था जिसने पहले भी इस मन्दिर में कई बार दर्शन किये हुए है। मन्दिर के बाहर कुछ गाय बैठी हुई थी जिनके फ़ोटो मैंने इससे पहले वाले लेख में लगाये थे। मन्दिर प्रागंण में घुसते ही एक बोर्ड़ पर नजर गयी।


बुधवार, 20 नवंबर 2013

Dharamshala- Tea Garden धर्मशाला के मनमोहक चाय बागान

करेरी-कांगड़ा-धर्मशाला यात्रा के लिंक नीचे दिये है।

01- आओ करेरी झील धर्मशाला देखने चले।
02- धर्मशाला से करेरी गाँव की ट्रेकिंग भयंकर बारिश के बीच।
03- करेरी गाँव के शानदार नजारे, और भूत बंगला
04- धर्मशाला की ड़ल लेक।
05- धर्मशाला के चाय बागान के बीच यादगार घुमक्कड़ी।
06- कुनाल पत्थरी माता मन्दिर, शक्ति पीठ माता के 52 पीठ में से एक।
07- नगरकोट कांगड़ा का मजबूत दुर्ग / किला
08- मैक्लोड़गंज के भागसूनाग स्विमिंग पुल के ठन्ड़े पानी में स्नान  Back to Delhi


KARERI-KANGRA-DHARAMSHALA-05

धर्मशाला में दोपहर का भोजन करने के उपराँत शहर से 6 किमी नीचे राकेश के कमरे पर पहुँच गये। अब तक बारिश लगभग रुक चुकी थी। कमरे पर पहुँचते ही हमने अपने-अपने बैग को उतार फ़ैंका। इस यात्रा में सबसे ज्यादा तंग टैन्ट के कारण हुए थे। टैन्ट की पूरी कीमत राकेश ने चुकायी थी। टैन्ट का वजन 6 किलो का था, जिसे टैन्ट लाधकर चलना पड़ता था उसकी नानी याद आती थी। लेकिन अपनी टोली भी पक्की हिम्मत वाली वाली थी कोई हार मानने को तैयार नहीं होता था। वो अलग बात है कि जब तक सिर ओखली में नहीं दिया जाता था तब तक ही ड़र लगता था। कमरे पर पहुँचने के बाद मनु व उसका दोस्त धर्मशाला के चाय बागान देखने निकल गये। उन्होंने हमें बहुत कहा कि चलो लेकिन मैंने मना कर दिया कि नहीं मैंने पालमपुर के चाय बागान देखे है, जाओ तुम जाओ। वे दोनों बागान देखने चले गये।


बुधवार, 13 नवंबर 2013

Dharamshala to Bridge धर्मशाला से करेरी मार्ग वाले पुल तक

करेरी-कांगड़ा-धर्मशाला यात्रा के लिंक नीचे दिये है।

01- आओ करेरी झील धर्मशाला देखने चले।
02- धर्मशाला से करेरी गाँव की ट्रेकिंग भयंकर बारिश के बीच।
03- करेरी गाँव के शानदार नजारे, और भूत बंगला
04- धर्मशाला की ड़ल लेक।
05- धर्मशाला के चाय बागान के बीच यादगार घुमक्कड़ी।
06- कुनाल पत्थरी माता मन्दिर, शक्ति पीठ माता के 52 पीठ में से एक।
07- नगरकोट कांगड़ा का मजबूत दुर्ग / किला
08- मैक्लोड़गंज के भागसूनाग स्विमिंग पुल के ठन्ड़े पानी में स्नान  Back to Delhi


KARERI-KANGRA-DHARAMSHALA-02

करेरी गाँव धर्मशाला शहर से लगभग 20-25 किमी दूर है। करेरी गाँव सड़क से जुड़ चुका है। लेकिन वाहन मिलने की सभावना नहीं के बराबर होती है। यदि धर्मशाला से करेरी तक की दूरी वाहन से तय की जाये तो यही दूरी बढकर 40 किमी तक पहुँच सकती है। बस से धर्मशाला उतरने के बाद राकेश बोला, जाट भाई हम चार लोग है जहाँ तक पक्की सड़क है वहाँ तक कार कर लेते है। ना भाई कार वाला ज्यादा पैसे माँगेगा। एक बार पता कर लेते है। मैंने कहा "तुम्हे कार में जाने की ज्यादा इच्छा है तुम्ही कार का किराया पता कर आओ।" राकेश और मनु टैक्सी वालों के पास बात करने चले गये। मनु का दोस्त और मैं वही लेंटर के नीचे खड़े रहे। कार वाले ने उस जगह तक पहुँचाने के 1500 रु माँग लिये, जहाँ तक गाड़ी जा सकती थी। यह दूरी यदि किसी ऑटो या बस से तय की जाये तो मुश्किल से 200 रु भी नहीं लगने वाले। मैंने कहा, यहाँ से शेयरिंग आधार पर चलने वाली सूमो या अन्य छोटी गाडियाँ उस ओर जरुर चलती होगी, जहाँ से ट्रेकिंग शुरु होती है। चलो उसका पता करते है।



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