लेह बाइक यात्रा-
सामने साँप की तरह ऊपर जाती हुई, बलखाती सडक दिखाई दे रही है, यहाँ से शुरु हुई फ़ोतूला टाप की वो चढाई, जिसे देख कर साँप सूंघ जाता है, जो सबका सब कुछ फ़ाड दे, अगाडी-पिछाडी, अंदर से बाहर से गाडी हो या इंसान सबका बुरा हाल था, इस चढाई को देखकर। ऐसी चढाई पर इंसान की बोलती तो बंद व गाडी की बोलती शुरु हो जाती है। लगे चढाई चढने बाईक का जोर एक बार फ़िर सारा लग गया, बाइक की स्पीड पूरे जोर लगाने पर भी 20 ज्यादा नहीं हो पा रही थी। खैर किसी तरह ये चढाई चढी, कुल तीन-चार किलोमीटर बाद कुछ हल्की चढाई का मार्ग आ गया, सबको बडी राहत मिली। ऊपर जा कर कई बार इस सडक का फ़ोटो खींचा, आप भी देखो। ये चढाई रोहतांग से भी भारी पडी(ज्यादा), लेकिन यहाँ बर्फ़ का नामोनिशान दूर तक भी नहीं था। इस 20-25 किलोमीटर के मार्ग में रंगबिरंगे सुनहरे स्वर्ण रंग रुप के पर्वत आते रहे हम फ़ोटो खींचते रहे, चलते रहे, आप भी देखो।