GANGA लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
GANGA लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 1 अगस्त 2017

BRIJ GHAT, GARH GANGA ब्रजघाट, गंगा में स्नान



दोस्तों कैसे हो, आज आपको गढ़-गंगा की सैर कराता हूँ। हापुड जिले में स्थित ब्रजघाट, गढ़ गंगा दिल्ली के सबसे नजदीक ऐसा स्थान है। जहां पर गंगा स्नान किया जाता है। हरिद्वार जैसे स्थान के उत्तराखन्ड राज्य में चले जाने के बाद ब्रजघाट, गढ-गंगा को विकसित करने के लिये उत्तर प्रदेश सरकार प्राथमिकता दे रही है। इसका कारण यह है कि कुछ समय पहले तक जब उत्तराखंड उत्तर प्रदेश का भाग हुआ करता था तो हरिद्वार गंगा स्नान का मुख्य स्थल हुआ करता था। एक दिन 3:00 बजे ड्यूटी से घर पहुंचा तो बताया कि चलो गंगा नहाने जा रहे है। शनि मंदिर मथुरा वाले जो महानुभाव मुझे वहां लेकर गए थे। उन्हीं की टेंपो ट्रेवलर एक दिन ब्रजघाट, गढ गंगा जाने के लिए तैयार थी। गाड़ी चलने से मुश्किल से 15 मिनट पहले मुझे खबर मिली। गाड़ी में कई सीट खाली है। गंगा स्नान चलना हो वो भी केवल सौ रु खर्च में, तो कौन छोडना चाहेगा? ठीक है, चलता हूँ। मैं भोजन तो कर लूँ। लौटते हुए देर रात हो जायेगी, सुबह से कुछ खाया भी नहीं है। छोडो खाना-पीना, सब तैयार है। गंगा जी पहुँचकर खाना-पीना वही कर लेना।   
उत्तर प्रदेश का नया हरिद्वार, गढ गंगा। New Haridwar, Brij Ghat, Garh Ganga    
जय गंगे मैया
            

गुरुवार, 14 फ़रवरी 2013

Ganga bridge Lata, Belak, Budhakedar, to bhairav chatti गंगा पुल से बेलक, बूढ़ा केदार होते हुए भैरव चट्टी तक।

गोमुख से केदारनाथ ट्रेकिंग/पद यात्रा-4

भटवारी होते हुए हम रात में लाटा गाँव पहुँच गये थे। हमने यही रात्रि विश्राम भी किया। इसी गांव से केदारनाथ  पैदल जाने वाले यात्री, गंगा नदी पर बने झूला पुल को पार करते हुए 15 किलोमीटर दूर कठिन चढाई पर बेलक नाम के छोटे से बुग्याल में पहुंच कर दोपहर में आराम करते है। हमने भी यह झूला पार कर बेलक के लिये प्रस्थान कर दिया था। कुछ दूर तक तो मार्ग ठीक-ठाक चढ़ाई वाला था, लेकिन उसके बाद जो चढ़ाई शुरु होती है, उसकी पूछो मत, सबकी हवा खराब थी, हर कोई पसीने से तर बतर हो गया था। रही सही कसर खून पीने वाली जौंक ने कर दी थी। जैसे ही जौंक वाला इलाका शुरु हुआ, वैसे ही सभी की चलने की गति अप्रत्याशित रुप से तेज हो गयी थी। किसी तरह बेलक तक पहुँचे थे। बेलक पहुँचने से पहले एक जगह खिचड़ी वाला भण्ड़ारा लगा हुआ था, पहले उस भण्ड़ारे जम कर खिचड़ी खायी गयी थी।

ये ही वो झूला पुल है

बुधवार, 13 फ़रवरी 2013

Sukhi Top-Gangnani-Bhatwari to Lata Ganga Bridge सुक्खी टॉप से गंगनानी, भटवारी होते हुए लाटा गंगा पुल तक

गोमुख से केदारनाथ पद यात्रा-3

रात को अंधेरा होते-होते हम लोग झाला गाँव पहुँचे थे। यह गाँव गंगौत्री जाते समय हर्षिल से कई किमी पहले पड़ता है। यहाँ पर एक पुल से गंगा नदी पार करते ही रात में ठहरने के लिये बहुत सारे होटल आदि बने हुए है। मैं कई बार बाइक से यहाँ से होकर गया हूँ लेकिन कभी गंगौत्री से उत्तरकाशी के बीच रात में नहीं रुका था। आज पहला मौका मिल रहा था जो मैं झाला में रुक रहा था। अगर हम गंगौत्री से सुबह जल्दी चले होते तो आज की रात गंगनानी में ठहरने की योजना बना ड़ालते। सुबह उठते ही नहा धोकर चलने की तैयारी करने लगे। हम तो नहा धोकर अपनी सही समय 6 बजे तैयार हो गये थे\ लेकिन हमारे ग्रुप में कुछ दो-तीन बुढ़्ढे थे। वे सुबह चलने में बहुत ढ़ीले थे। जिस कारण पहले दिन गंगौत्री से चलने में दोपहर करायी थी। अब यहाँ से चलने में भी सात से ज्यादा बजा दिये थे। इनके साथ मेरी यह पहली व आखिरी यात्रा थी इनके ऐसे रवैये के बाद मैंने इनके साथ दुबारा कभी यात्रा नहीं की थी।  


इन थके हुए को मत देखो, इनके पीछे गंगा की गहराई देखो
गंगा की धार देखो।

मंगलवार, 12 फ़रवरी 2013

Gangotri to Harsil गंगौत्री से हर्षिल, झाला ट्रेकिंग तक

गोमुख से केदारनाथ ट्रेकिंग यात्रा-2

 दूसरे दिन अपने ग्रुप के बूढ़े यात्रा सुबह बजे सो कर उठे थे। जबकि अपना नियम है कि जल्दी उठोजल्दी चलोजल्दी रुको। लेकिन हमारे इस ग्रुप में अनसट उठने में ढीले थे। हमारी यात्रा तो एक दिन पहले ही शुरु हो गयी थीलेकिन नासपीटों/ नौरत्नों की यात्रा आज से शुरु होनी थी। हम कल ही 40 किमी ट्रेकिंग कर आये थे। सुबह के 11 बजे गंगोत्री मंदिर पर नहाने धोने के लिये पहुँच गए। एक गजब देखा था कि सारे के सारे नौरत्न, पक्के नास्खेत थे, गंगौत्री मंदिर में अन्दर जाकर दर्शन भी ना किये। जब बात आयी नहाने की तो सब के सब पानी के ठन्डे होने की बात कह कर चुप बैठे रहे तो जाट देवता से नहीं रहा गयासबसे पहले जा कर हाथ मुहँ धोये। 

यहाँ इस तरह आराम से खड़ा होने के लिये दमदार जिगर होना चाहिए, जो ऐसे गेरे नत्थू खेरे में नहीं पाया जाता।

गंगौत्री में गंगा जल की तूफ़ानी गति

सोमवार, 4 जुलाई 2011

संगम (प्रयाग) से काशी(बनारस) तक पद यात्रा भाग 3, VARANSAHI, BANARAS KE GHAT, GANGA

प्रयाग काशी पद यात्रा-
कमरा किराये पर लेकर,उसमें सामान रख, ताला लगा कर, हम गंगा किनारे घूमने के लिये आ गये कि तभी मन में ख्याल आया कि कल तो महाशिवरात्रि है भीड का बुरा हाल रहेगा, मंदिर में तसल्ली से दर्शन होने सम्भव नहीं है, अत: आज तसल्ली पूर्वक दर्शन किये जाये। अपना कमरा जिस जगह पर था उस गली से एक रास्ता सीधा मंदिर में जाता था, दूरी लगभग 150 मीटर ही थी। 

लो जी यहाँ से करो घाट के दर्शन, पूरे दो किलोमीटर तक घाट ही घाट है,

गुरुवार, 30 जून 2011

संगम (प्रयाग) से काशी(बनारस) तक पद यात्रा भाग 2, SANGAM, ALLAHABAD, VARANASHI, GANGA

प्रयाग काशी पद यात्रा-
आज हमारी पैदल यात्रा का तीसरा दिन शुरु हो गया था, दिनांक थी 27 फ़रवरी 2011, पहले दिन हम चले 20-22 किलोमीटर, दूसरे दिन चले 40-42 किलोमीटर के आसपास, हम ठीक छ: बजे नहा धो कर आज के अपने सफ़र पर चल पडे, ये तो मैं पहले ही बता चुका हूँ कि जिस जगह हम रुके हुए थे, उस के ठीक सामने एक बोर्ड था जिस पर लिखी दूरी से साफ़ हो रहा था, कि हम दिल्ली व कोलकत्ता से एक समान दूरी पर खडे थे। 

ये देखो ट्रक पर क्या जा रहा है, पहिया गिन सकते हो।

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...