लेह बाइक यात्रा-
आज सुबह सातवे दिन दिनांक 10 जुलाई 2010 को एक बार फ़िर ठीक छ: बजे चारों तैयार(बाकि दो पल्सर वालों का अब तक कोई पता नहीं था) होकर आज की मंजिल बालटाल के लिये प्रस्थान कर दिया। हमारा मोबाइल तो यहाँ द्रास में काम कर रहा था, लेकिन उनका मोबाइल अभी भी नेटवर्क की पहुँच से बाहर था। लेह के मुकाबले यहाँ ठन्ड ज्यादा थी। अब मार्ग में हरियाली की कोई कमी नहीं थी, पूरे पाँच दिन अद्दभुत/आश्चर्यजनक रेगिस्तान से पाला पडा रहा था। मार्ग बहुत अच्छा था, उतराई-चढाई भी कोई खास नहीं थी, लेकिन ठन्ड बहुत ज्यादा थी, जिससे बाइक की गति 35-40 से ज्यादा नहीं की जा रही थी।
आज सुबह सातवे दिन दिनांक 10 जुलाई 2010 को एक बार फ़िर ठीक छ: बजे चारों तैयार(बाकि दो पल्सर वालों का अब तक कोई पता नहीं था) होकर आज की मंजिल बालटाल के लिये प्रस्थान कर दिया। हमारा मोबाइल तो यहाँ द्रास में काम कर रहा था, लेकिन उनका मोबाइल अभी भी नेटवर्क की पहुँच से बाहर था। लेह के मुकाबले यहाँ ठन्ड ज्यादा थी। अब मार्ग में हरियाली की कोई कमी नहीं थी, पूरे पाँच दिन अद्दभुत/आश्चर्यजनक रेगिस्तान से पाला पडा रहा था। मार्ग बहुत अच्छा था, उतराई-चढाई भी कोई खास नहीं थी, लेकिन ठन्ड बहुत ज्यादा थी, जिससे बाइक की गति 35-40 से ज्यादा नहीं की जा रही थी।
जोजिला टॉप पर धिल्लू के सिर पर सबका भार