वैसे तो हम पिछले लेख में ही लंका पति महाराज रावण की ससुराल अथवा रावण की पत्नी मन्दोदरी का मायका मण्डौर पहुँच गये थे। लेकिन लेख ज्यादा लम्बा होने के कारण रावण की ससुराल नहीं दिखाई गयी थी, चलिये दोस्तों आज आपको मन्डौर के दर्शन भी कराये जा रहे है। रामायण काल को बीते हुए कई हजार साल हो चुके है अत: उस काल की कोई असली निशानी मिलने की उम्मीद तो हमको बिल्कुल भी नहीं थी। लेकिन जितना कुछ हमें दिखाई दिया उसने हमारा दिल गार्डन-गार्डन कर दिया था। मैंने बाग-बाग की जगह गार्डन-गार्डन इसलिये लिखा है कि यहाँ जिस स्थल को रावण की ससुराल कहा जाता है उसे आजकल मण्डौर गार्डन के नाम से पुकारा जाता है। पहले इसे माण्डव्यपुर कहा जाता था। यहाँ चौथी शातब्दी के एक किले के खण्डहर बचे हुए है। अब इस स्थल का चित्रमय विवरण झेलने के लिये तैयार रहे।
मन्दोदरी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
मन्दोदरी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
गुरुवार, 15 नवंबर 2012
सदस्यता लें
संदेश (Atom)