जय बद्री विशाल। बद्रीनाथ धाम
के दर्शन मात्र करना ही अपने आप में सम्पूर्ण यात्रा है। यदि बद्रीनाथ के
साथ-साथ, नीलकंठ पर्वत, चरण पादुका, माणा गाँव, नर नारायण पर्वत के दर्शन, वसुधारा
जल प्रपात, भीम पुल, सरस्वती नदी, व्यास गुफा, गणेश गुफा जैसे आसानी से पहुँच
में आने वाले स्थल तो कदापि नहीं छोडने चाहिए। हमने इस बार की यात्रा में महाभारत
काल के पाँच पांडव भाई व उनकी पत्नी (युधिष्टर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव के साथ
इनकी एकमात्र पत्नी द्रौपदी) के स्वर्ग जाने वाले मार्ग का ही अनुसरण किया। इस
यात्रा में हमने स्वर्गरोहिणी पर्वत के दर्शन व सतोपंथ झील में स्नान
करना मुख्य है। यदि आप कभी भी बद्रीनाथ गये हो और उपरोक्त स्थलों को देखे बिना ही
वापिस लौट आये हो तो यकीन मानिये कि आपने अपनी बद्रीनाथ यात्रा में बहुत कुछ छोड
दिया है। कुछ भक्त/ यात्री केवल बद्रीनाथ मन्दिर के दर्शनों को ही महत्व देते है
तो उनके लिये अन्य स्थलों के दर्शन करने का कोई महत्व ही नहीं रह जाता। मुझ जैसे
कुछ घुमक्कड प्राणी भी होते है उनके लिये बद्रीनाथ धाम केवल रात्रि विश्राम व अन्य
आवश्यक सामग्री एकत्र करने के लिये एक आधार मात्र ही होता है। हमारे ग्रुप की
मंजिल (सतोपंथ व स्वर्गरोहिणी पर्वत) इससे (बद्रीनाथ धाम) बहुत आगे पैदल मार्ग पर
तीन दिन की कठिन ट्रैकिंग करने के उपरांत ही आ पाती है। हमारी मंजिल जहाँ होती है
वहाँ तक पहुँचने के लिये ढेरों जल प्रपात व घास के विशाल मैदानों, तीखी फिसलन वाली
ढलानों, बहते नदी-नालों के साथ टूटे हुए पहाड के विशाल पत्थरों (बोल्डर) को पार
करना पडता है। यदि आप ऐसी जगह जाने के लिये मचलते हो तो यह लेख आपके बहुत काम का
है। इस यात्रा का लेखन कार्य कई लेख चरणों में पूरा किया गया है।
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रविवार, 25 दिसंबर 2016
मंगलवार, 14 मई 2013
Vaan to Aadi Badri वाण गाँव की दुकान का ताला तोड़ने के बाद आदि बद्री तक
ROOPKUND-TUNGNATH 07 SANDEEP PANWAR
मनु ने अपनी बाइक वाण गाँव के पोस्टमैन की
दुकान से बाहर निकाल ली। मेरी बाइक कुछ 200 मीटर आगे वाण
गाँव की आखिरी दुकान के सामने लावारिस हालत में खड़ी थी। यहाँ हमारे साथ एक पंगा हो
गया कि मेरी बाइक तो बाहर सड़क पर ही खड़ी थी। लेकिन मैंने अपना कपाल सुरक्षा कवच
जिस दुकान में रखा था व अब बन्द थी। आसपास पता किया लेकिन दुकान वाले का कही
अता-पता नहीं चल पा रहा था कि दोपहर में कहाँ गायब हो गया है? उसकी कोई सूचना ना
मिलती देख उसका इन्तजार करने के अलावा और कोई इलाज सम्भव नहीं था। पोस्ट मैन की
दुकान के ठीक सामने एक टेलर की दुकान है उन्होंने हमारी परेशानी देखते हुए कहा कि
मेरे पास उस दुकान वाले के भाई का मोबाइल नम्बर है। यहाँ हमारे मोबाइल भी काम नहीं
कर रहे थे।
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