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सोमवार, 6 फ़रवरी 2017

Havelock island, Dolphin resort beach & Kala Pathar beach हैवलाक द्वीप, डाल्फिन रिजार्ट व काला पत्थर बीच

हैवलाक द्वीप के सुन्दर से तट पर अठखेलियाँ करते जाट देवता


उत्तरी अंडमान के अंतिम छोर डिगलीपुर में अंडमान की सबसे ऊँची चोटी सैडल पीक की सफल यात्रा के बाद वापिस पोर्टब्लेयर लौट आये। इससे पहले वाले लेख में आपने सेल्यूलर जेल की सैर की थी। अब अंडमान के एक सुन्दर से टापू हैवलाक द्वीप पर चलते है। यदि आप अंडमान की इस यात्रा को शुरु से पढना चाहते हो तो यहाँ माऊस से चटका लगाये और पूरे यात्रा वृतांत का आनन्द ले। इस लेख की यात्रा दिनांक 25-06-2014 को की गयी थी।
अंडमान निकोबार द्वीप समूह DOLPHIN RESORT & KALA PATHAR BEACH, RADHA NAGAR BEACH, HAVELOCK ISLAND, PORT BLAIR, ANDAMAN & NIKOBAR ISLANDS
हैवलाक कब किस मौसम में व कैसे पहुँचा जाये? How to reach Havelock
सेल्लुलर जेल में अंग्रेजों का वहसीपन देखने के बाद होटल लौटने से पहले हैवलाक द्वीप पहुँचने का जुगाड भी करना था। हैवलाक द्वीप सडक मार्ग से नहीं जुडा है। यह द्वीप अंडमान की मुख्य भूमि से 67 किमी दूरी पर है। पूरा का पूरा समुन्द्री मार्ग ही है। यहाँ पहुँचने के दो ही साधन है। एक हवाई जहाज का व दूसरा समुन्द्री जहाज वाला। हवाई जहाज वाला थोडा महँगा पडता है। इसलिये हमने दूसरा वाला, समुन्द्री जहाज से यात्रा करने का तय किया। सबसे पहले हमने फीनिक्स जेट्टी पहुँचकर टिकट बुक किये। हम अंडमान जून के महीने में गये थे। जून में यहाँ बारिश का सीजन आरम्भ हो होता है इसलिये इन दिनों यहाँ पर्यटकों के लिये आफ-सीजन रहता है। यहाँ आने का सबसे बढिया सीजन ठन्ड का होता है। दीवाली से लेकर होली के बीच यहाँ आने का बेस्ट सीजन होता है। इसके बाद अप्रैल में गर्मी होने से ज्यादा मुश्किल होने लगती है।

बुधवार, 1 फ़रवरी 2017

TRAVEL TO CELLULAR JAIL सेल्युलर जेल (कारागार)-काले पानी की कठोर सजा

सेल्यूलर जेल में वीर सावरकर की कोठरी की सलाखों से दिखता नजारा


उत्तरी अंडमान के अंतिम छोर डिगलीपुर में यहाँ की सबसे ऊँची चोटी सैडल पीक तक पहुँचकर वापिस पोर्टब्लेयर लौट आये। सुबह सबसे पहले कार्बनकोव बीच व गाँधी पार्क की यात्रा में आप मेरे साथ रहे। अब इस यात्रा वृतांत पर आगे सेल्यूलर जेल की ओर बढ चलते है। यदि आप अंडमान की इस यात्रा को शुरु से पढना चाहते हो तो यहाँ माऊस से चटका लगाये और पूरे यात्रा वृतांत का आनन्द ले। इस लेख की यात्रा दिनांक 25-06-2014 को की गयी थी।
 
अंडमान निकोबार की सेल्युलर जेल, CELLULAR JAIL, PORT BLAIR
चाथम टापू पर, लकडी काटने वाला एशिया का सबसे बडा आरा मिल देखने के बाद, एक बार फिर एक तिपहिया में सवार होकर सेल्युलर जेल देखने पहुँच गये। जेल के ठीक सामने एक सुन्दर सा पार्क बना हुआ है पार्क का नाम वीर सावरकर पार्क है। यह जेल अंग्रेजों के निर्दयी अत्याचार का जीता जागता सबूत है। अंग्रेजी साम्राज्य के बारे में एक कहावत तो आपने सुनी ही होगी कि अंग्रेजी राज्य में कभी सूरज नहीं डूबता था। इस कहावत को  कहने वाले अंग्रेज का नाम अर्नेस्ट जोंस था। यहाँ इस जेल में आने वाले कैदी के बारे में कहा जाता था कि यहाँ आना वाला जीवित लौट कर नहीं जाता था। जेल में प्रवेश करने के लिये टिकट लेना पडता है। हमने भी लिया। टिकट की कीमत केवल 10 रु थी। हमारे पास कैमरे भी थे। कैमरे के साथ 25 रु का शुल्क अलग से देना पडा। इस जेल के लिये यदि हमें एक हजार रुपये भी देने पडते तो भी मैं दे देता। देश के लिये मर मिटने वाले शहीदों की यादगार देखने के मुकाबले 25 रु की क्या बिसात? वीडियो कैमरे के लिये 100 रु शुल्क लिया जा रहा था। हमारे कैमरे से वीडियो बनायी जा सकती है लेकिन यह वीडियो कैमरे की श्रेणी मे नहीं आता है।

सोमवार, 23 जनवरी 2017

Chatham saw mill, Biggest saw mill of Asia चाथम- एशिया की सबसे बडी आरा मिल





उत्तरी अंडमान के अंतिम छोर डिगलीपुर में यहाँ की सबसे ऊँची चोटी सैडल पीक फतह कर बस यात्रा करते हुए पोर्टब्लेयर वापिस लौट आये। लौटते ही कार्बनकोव बीच व गाँधी पार्क की यात्रा में आप साथ चलते रहे। अब इस यात्रा वृतांत पर आगे चलते है। यदि आप अंडमान की इस यात्रा को शुरु से पढना चाहते हो तो यहाँ माऊस से चटका लगाये और पूरे यात्रा वृतांत का आनन्द ले। इस लेख की यात्रा दिनांक 25-06-2014 को की गयी थी।
अंडमान निकोबार GOVERNMENT SAW MILL, CHATHAM, PORT BLAIR, ANDAMAN
अब हम अंडमान की सबसे बडी लकडी काटने की आरा मिल देखने चलते है। जो चाथम नामक द्वीप में बनी हुई है। यहाँ तक हम बस से आये थे। यह जगह मुख्य बस अडडे से मात्र 4 किमी दूर है। हम गाँधी पार्क से यहाँ तक सीधी बस में बैठ कर आये थे। चाथम द्वीप तक पहुँचने के लिये समुन्द्र के ऊपर बने सीमेंटिड पुल को जब हमारी बस पार कर रही थी तो मैने सोचा कि इस पुल पर उतर कर आसपास के फोटो लेने चाहिए। पुल के ऊपर से चाथम जेट्टी भी दिखायी दे रही थी। जेट्टी में पानी के बडे वाले समुद्री जहाज खडे हुए थे। पुल पार करते ही उल्टे हाथ मुडकर बस रुक गयी। परिचालक बोला चाथम का लकडी वाला आरा मिल आ गया है। बस अभी और आगे जायेगी। बस से उतर कर देखा वहाँ मिल जैसा कुछ नहीं था। एक स्थानीय बंदे ने बताया कि यह बस स्टैंड है आपको यहाँ से सौ मीटर पीछे जाना पडेगा। सौ मीटर पीछे जाते ही पुल का किनारा भी आ गया। पुल के ठीक सामने चाथम मिल का प्रवेश द्वार बना है।

मंगलवार, 17 जनवरी 2017

KORBYN KOVE BEACH, PORT BLAIR कार्बाइन्सज कोव बीच, पोर्टब्लेयर



उत्तरी अंडमान के अंतिम छोर डिगलीपुर पहुँचकर आपने कालीपुर तट पर कछुओं का प्रजनन स्थल देखा इसके बाद यहाँ की सबसे ऊँची चोटी सैडल पीक की ट्रेकिंग भी आपने मेरे साथ ही की है। अब आगे के यात्रा वृतांत की ओर चलते है। यदि आप अंडमान की इस यात्रा को शुरु से पढना चाहते हो तो यहाँ माऊस से चटका लगाये और पूरे यात्रा वृतांत का आनन्द ले। इस लेख की यात्रा दिनांक 24-06-2014 को की गयी थी।
अंडमान निकोबार KORBYN KOVE BEACH, PORT BLAIR, कोरबायन कोव बीच
अंडमान की सबसे ऊँची पर्वत चोटी सैडल पील की सफल ट्रैकिंग के उपरांत हमारा वहाँ कुछ और देखने का मन नहीं था। ऐसा नहीं है इसके अलावा वहाँ और कुछ नहीं था। डिगलीपुर में अभी भी बहुत स्थल देखने बाकि थे जिसे रोमियो-जूलियट टापू व मड वेलकिनो (MUD VERKENO) तो हमें भी देखने थे लेकिन बारिश के मौसम में वहाँ जाने के लिये वाहन नहीं मिल पाया। हम पोर्टब्लेयर वापिस आने के लिये सुबह सवेरे ही होटल छोड निकल पडे। कालीपुर वाले होटल से डिगलीपुर आने  के लिये जो स्थानीय/ लोकल बस चलती है वह भी समय की बडी पाबन्द है। हम 25 किमी दूर से आये है। पोर्टब्लेयर वाली बस के चलने से आधा घंटा पहले डिगलीपुर पहुँच गये थे। सुबह का समय थोडा नाश्ता पानी करना भी आवश्यक था। हमारी बस दिन भर में 325 किमी की यात्रा करेगी। दोपहर में कम से कम एक दो बार कही न कही भोजन के लिये भी रुकेगी। हम होटल से भी बिना खाये पीये ही चले थे। जहाँ हमारी बस खडी थी उसके ठीक सामने कई ढाबे व होटल थे। हल्का-फुल्का नाश्ता कर वापिस अपनी सीट पर विराजमान हो गये।

सोमवार, 16 जनवरी 2017

Trekking to Saddle peak, Highest peak of Andaman Islands अंडमान की सबसे ऊंची सैडल पीक की ट्रेकिंग

ANDAMAN, PORTBLAIR YATRA-09                   SANDEEP PANWAR



उत्तरी अंडमान के अंतिम छोर डिगलीपुर पहुँचकर सबसे पहले कालीपुर तट पर कछुओं का प्रजनन स्थल वाला बीच देखा। इस लेख में आपको अंडमान निकोबार द्वीप समूह की सबसे ऊँची चोटी सैडल पीक की ट्रेकिंग वाली यात्रा करायी जायेगी। यदि आप अंडमान की इस यात्रा को शुरु से पढना चाहते हो तो यहाँ माऊस से चटका लगाये और पूरे यात्रा वृतांत का आनन्द ले। यह यात्रा दिनांक 23-06-2014 को की गयी थी।
अंडमान निकोबार LAMIA BAY, NATURE TRAIL TO SADDLE PEAK NATIONAL PARK, DIGLIPUR
हमारे होटल TURTLE RESORT, KALIPUR के सामने वाली सडक डिगलीपुर से शुरु होकर होटल से 5 किमी आगे तक जाती है। होटल डिगलीपुर से 25 किमी आगे आता है। जहाँ यह सडक समाप्त होती है। वहाँ से आगे अंडमान की सबसे ऊँची चोटी सैडल पीक तक पहुँचने के लिये 8 किमी की ट्रैंकिंग करनी पडती है। आज हम सैडल पीक की ट्रैकिंग करने जा रहे है। अपना सामान तो हमने होटल में छोड रखा है। हमें आज की रात भी इसी होटल में ही रुकना है।

गुरुवार, 12 जनवरी 2017

TRAVEL TO MAYABANDAR & KALIPUR TURTLE BEACH of DIGLIPUR



उत्तरी अंडमान के अंतिम छोर डिगलीपुर जाते समय रंगत से कुछ आगे मैंग्रोव जंगल व मनमोहक समुन्द्र तट देखने के बाद मायाबन्दर व डिगलीपुर के कालीपुर तट पर कछुओं के प्रजनन स्थल का यात्रा वृतांत इस लेख में दिया गया है। यदि आप अंडमान की इस यात्रा को शुरु से पढना चाहते हो तो यहाँ चटका लगाये और पूरे यात्रा वृतांत का आनन्द ले। यह यात्रा दिनांक 22-06-2014 को की गयी थी।
अंडमान निकोबार TRAVEL TO MAYABANDAR KALIPUR TURTLE BEACH, DIGLIPUR, मायाबन्दर तट व डिगलीपुर का कालीपुर तट
रंगत से सीधे डिगलीपुर की बस में बैठना सही होगा। यहाँ HOW BILL NEST होटल से डिगलीपुर की बस में सीट मिलना तो असम्भव है ही। बस यहाँ रुके ही, यह कहना भी मुश्किल है। इसलिये आटो वाले को पहले ही बोल दिया था कि हमें वापसी में रंगत बस अडडे छोडना है। आटो वाला हमें रंगत बस अड्डे छोड आया। रंगत से डिगलीपुर तक सीधी बस भी मिल जायेगी लेकिन हमें आज सीधे डिगलीपुर नहीं जाना है। डिगलीपुर से पहले मायाबन्दर नामक शहर आता है पहले वहाँ तक ही जाना है। रंगत से मायाबन्दर की दूरी 70 किमी है। मायाबन्दर में 1 घन्टा रुककर एक जगह देखनी है। उसके बाद आगे डिगली पुर जायेंगे। कुछ देर में एक बस आ गयी। यह बस मायाबन्दर तक ही जा रही है अच्छी बात है यदि आगे डिगलीपुर वाली बस मिलती तो उसमें ज्यादा भीड होती। हमें तो पहले मायाबन्दर तक ही तो जाना है। यहाँ कुछ देर रुककर आसपास का भ्रमण कर लेंगे। बस में ज्यादा सीट खाली नहीं थी। हम तीनों को अलग-अलग सीट मिल गयी। कल रंगत आते हुए तो कई घंटे खडे होकर बस यात्रा करनी पडी थी। आज भी हमारी बस ने समुन्द्र किनारे होते हुए अधिकतर यात्रा की थी। आखिर में मायाबन्दर पहुँचकर यह बस खाली हो गयी। मायाबन्दर भी समुन्द्र के किनारे ही बसा हुआ है।

शुक्रवार, 6 जनवरी 2017

Portblair- Chidiya tapu पोर्ट ब्लेयर, चिडिया टापू

चिडिया टापू जाने वाला मार्ग


अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पोर्ट ब्लेयर टापू पर स्थित चिडिया टापू एक सुन्दर स्थान है। चलिये आज उसी ओर चलते है। इस यात्रा को शुरु से यहाँ क्लिक करके ढना आरम्भ करे।

अंडमान निकोबार का चिडिया टापू व उसका सूर्यास्त
आज हमारे पास कई घन्टे का समय खाली है तब तक क्या करे। तीन घन्टे में चिडिया टापू नामक छोटी  लेकिन सुन्दर सी जगह देखी जा सकती है। आज चिडिया टापू का सूर्यास्त देखकर आते है। चिडिया टापू की हमारे होटल से 25 किमी की दूरी थी। जिस ऑटो में हम यहाँ आये थे उससे यह अंदाजा तो हो गया था कि अंडमान में लोकल में घूमना है तो आटो सबसे अच्छा रहेगा। हमने चिडिया टापू तक आने-जाने का आटो 600 रु में तय किया। एक घंटा वहाँ ठहरने का भी शामिल था। हमारा होटल पोर्ट ब्लेयर में था जबकि चिडिया टापू वहाँ से 25 किमी दूर दक्षिण दिशा में समुन्द्र किनारे पर है। हम तीनों आटो में बैठ समुन्द्र किनारे से होते हुए चिडिया टापू चलते है। चिडिया टापू तक पहुँचने वाला मार्ग दिल को खुश कर देता है। सडक ज्यादा चौडी नहीं थी। यदि सामने से एक बस भी आ जाये तो आटो को नीचे उतरना पडेगा। आटो नीचे उतारने की जरुरत ही नहीं पडती होगी। कारण, यहाँ की सडकों पर अपने दिल्ली व अन्य बडे शहरों वाली किच-किच मार धाड नहीं है। नारियल के पेड समुन्द्र किनारे की शोभा तो बढा ही रहे थे। समुन्द्र किनारे मार्ग होने से बम्बई जैसा मरीन ड्राइव जैसा अनुभव हो रहा था। समुन्द्र की लहरे सडक पर ना आये उसे रोकने के लिये एक दीवार भी बनायी गयी थी। जहाँ भी बढिया सा सीन दिखता वही आटो रुकवा दिया जाता। तीनों आटो से बाहर निकल कर कुछ देर टहलते उसके बाद आगे की यात्रा पर चल देते। यदि यहाँ बस में होते तो यह आनन्द उठाने से वंचित रहना पडता। बस अडडे से चिडिया टापू की सीधी बस सेवा है जो प्रत्येक एक घंटे के अंतराल पर चलती है।

गुरुवार, 5 जनवरी 2017

Port Blair- Marina Park, Param Vir Chakra Memorial पोर्ट ब्लेयर- मरीना पार्क-परमवीर चक्र मैमौरियल

समुन्द्र में प्लास्टिक पार्क


अंडमान और निकोबार द्वीप समूह यानि “काला पानी” की धरती पर हम पहुँच चुके है। अब काला पानी में हमने क्या-क्या देखा था उसकी यात्रा करायी जायेगी। इस यात्रा को शुरु से यहाँ क्लिक करके ढना आरम्भ करे।
अंडमान निकोबार में पोर्ट ब्लेयर से यात्रा का आरम्भ (मरीना पार्क का परम वीर चक्र मैमोरियल स्थल)-
पोर्ट ब्लेयर के आसमान से यहाँ की हवाई पटटी देखी, जो ज्यादा बडी नहीं थी। हवाई अडडा समुन्द्र तट के नजदीक ही है। हमारा हवाई जहाज समुन्द्र की ओर से हवाई पटटी पर उतरा। हवाई अडडे से बाहर निकल कर होटल के लिये एक आटो 150 रु में तय किया। हमें यहाँ की ज्यादा जानकारी नहीं थी। हम तीनों ही यहाँ पहली बार आये थे। होटल की ओर जाते समय आटो वाले को, कुछ देर पर्यटक विभाग के कार्यालय रुकने की बात उसको तय करने से पहले ही बोल दी गयी थी। पर्यटक कार्यालय से हमें आगे की डिगलीपुर तक ककई दिन की यात्रा के लिये होटल बुक करने थे। होटल बुक करने के लिये मनु भाई ने 10% की अग्रिम राशि पहले ही online जमा की हुई थी। यदि हमारी यह यात्रा किसी कारणवश नहीं हो पाती तो यह राशि (1500 रु) बेकार चली जाती। होटल के अलावा हमने इस पूरी यात्रा में कोई राशि अग्रिम जमा नहीं की थी। जिस होटल में हम ठहरे थे वो भी मनु भाई ने आनलाइन ही बुक किया था। होटल में कुछ देर आराम करने के बाद अंडमान की सबसे लम्बी बस यात्रा के टिकट बुक करने CENTRAL BUS STAND MOHANPURA पहुँच गये। बस टिकट बुक करने के लिये होटल से 6 किमी दूर जाना पडा। 

शुक्रवार, 13 सितंबर 2013

Puri beautiful sea beach पुरी का खूबसूरत समुन्द्र तट

UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-29         SANDEEP PANWAR
जगन्नाथ पुरी के मुख्य मन्दिर से पुरी का समुन्द्र तट जहाँ मैं पहुँचा था वह लगभग 3-4 किमी की दूरी पर है। मैंने एक रिक्शे वाले से बात की उसने 50 रुपये माँग लिये। एक ऑटो वाले को रोका उसने भी 50 रुपये कहे। पचास रुपये फ़्री में तो आते नहीं है मेरे पास समय की कोई कमी थी ही नही, इसलिये मैंने पैदल ही पुरी के समुन्द्र तट की ओर चलना आरम्भ किया। चिल्का से रिक्शा में आते समय जिस चौक पर मैं रिक्शा से उतरा था वह मुझे अच्छी तरह याद था। मैं सीधा उसी तरफ़ चल दिया। रथ यात्रा मार्ग काफ़ी चौड़ा है जिससे भीड़-भाड़ होने की गुंजाइस समाप्त हो जाती है। चौराहे तक आते हुए मैंने यहाँ के बाजार को अच्छी तरह देख ड़ाला था। एक जगह गन्ने का रस बेचा जा रहा था अपुन तो मीठे व आइसक्रीम के दीवाने जन्म से ही है अत: रस के दो गिलास ड़कारने के बाद आगे चलना शुरु किया। चौराहे तक पहुँचने तक सूर्य महाराज सिर पर विराजमान हो चुके थे। अब यहाँ से समुन्द्र तट की ओर जाने वाले कालेज नामक मार्ग पर चलना शुरु कर दिया।



मंगलवार, 10 सितंबर 2013

CHILIKA LAKE चिल्का झील में एक टापू की यात्रा

UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-26           SANDEEP PANWAR 
बस से उतरने के बाद मैंने सामने दिखायी दे रही सड़क की ओर चलना शुरु कर दिया। यह सड़क 200-300 बाद चिल्का झील किनारे जाकर समाप्त हो जाती है जहाँ यह सड़क समाप्त होती है ठीक वही से चिल्का के अन्दर बने टापुओं तक तक आने-जाने के एकमात्र साधान बडी व छोटी मोटर बोट चलनी आरम्भ होती है। जिस समय मैं किनारे पर पहुँचा था ठीक उसी समय बड़ी नाव चिल्का के किसी टापू पर जाने के लिये तैयार खड़ी थी मेरे नाव में चढ़ते ही नाव का सायरन बज गया। नाव वालों ने नाव का लंगर उठा दिया और नाव चिल्का झील में स्थित किसी टापू की सैर कराने के लिये रवाना हो गयी। नाव में चढ़ने से पहले ही मुझे बस में पास बैठी सवारियों से काफ़ी जानकारी मिल चुकी थी। बड़ी नाव में किसी टापू तक जाने का भाड़ा मात्र 6 रुपये ही था। जबकि जिस टापू तक हम जा रहे थे उसकी दूरी ही कम से कम 8 किमी के आसपास तो रही होगी। बड़ी नाव शुरु में तो थोड़ी धीमे-धीमे चली लेकिन उसके बाद नाव ने तेजी से चलते हुए अपनी यात्रा जारी रखी।

वो दूर उस टापू पर जाना है?

सोमवार, 15 जुलाई 2013

Trivendrum/Thiruvananthapuram (Kovalam Light house Beach) त्रिवेन्द्रम- कोवलम लाइट हाऊस समुन्द्र किनारा/बीच

LTC-  SOUTH INDIA TOUR 02                                                                           SANDEEP PANWAR
ठीक 10 बजे स्टेशन पहुँचने के लिये हम घर से घन्टा भर पहले ही एक ऑटो से निकल पड़े थे। दिल्ली के ट्रेफ़िक जाम का कोई भरोसा नहीं होता। इसलिये समय पहले घर से निकलना ही सही रहता है। सुनील रावत का घर तो स्टेशन के सामने भोगल में ही था जिस कारण वह तो ट्रेन चलने से मात्र 15-20 मिनट पहले ही आया था। इस यात्रा के समय मेरे पास रील वाला कैमरा था। सुनील ने कहा कि वह अपने साले का नया डिजीटल कैमरा लेकर आयेगा। सुनील के चक्कर में मैं अपना कैमरा घर पर ही छोड़कर आया था। सुनील के आने से पहले ही हम दोनों अपना समान अपनी सीट पर रख चुके थे। मुझे बराबर वाली दो सीट सबसे अच्छी लगती है सोने में थोड़ी सी परेशानी तो आती है लेकिन दिन भर बाहर के नजारे देखने में इससे बेहतर स्थान कोई दूसरा नहीं होता है।


बुधवार, 27 फ़रवरी 2013

Somnath Temple's beach सोमनाथ मन्दिर के पास चौपाटी

गुजरात यात्रा-09
जूनागढ़ से सुबह 5 बजे वाली बस में सवार होकर हम चारों सोमनाथ के लिये चल दिये। बस पीछे कही और से आ रही थी इस कारण बस में बहुत भीड़ होने की वजह से हम चारों को सीट नहीं मिल पायी थी। प्रेम व रावत पहाड़ी को बस में घुसते ही सीट मिल गयी जिस कारण वे दोनों आराम से सोते हुए सोमनाथ तक पहुँच गये। अब बचे दो मैं और अनिल, हम दोनों ने खड़े-खड़े ही यह सफ़र पूरा किया था। अनिल पैदल यात्रा में काफ़ी थक गया था जिस कारण वह कुछ देर बस में बीच में आने-जाने वाले मार्ग में ही बैठ भी गया था। वेरावल बस अड़ड़े पर आकर जब बस रुकी तो अधिकतर सवारी बस से उतर गयी, हमने सोचा कि शायद सोमनाथ के लिये यही उतरना होता है। इसलिये पहले हमने बस कंडैक्टर से पता किया जब उसने कहा कि अरे सोमनाथ अभी कई किमी बाकि है और वहाँ जाने पर तो बस पूरी ही खाली हो जायेगी। कुछ देर बाद ही बस वहाँ से सोमनाथ के लिये चल पड़ी। यहाँ से आगे जाने पर सीधे हाथ समुन्द्र के दर्शन हो गये थे जिससे लगा कि बस अब सोमनाथ आने ही वाला है। सड़क किनारे एक बहुत बड़ा कब्रिस्तान दिखाई दिया। यहाँ से लगभग एक किमी आगे जाने के बाद आखिरकार सोमनाथ भी आ ही गया। सभी सवारियों के साथ हम भी सोमनाथ के बस अड़डे पर उतर गये। सुबह का सात बजे का समय हुआ था। सबसे पहले हमने मन्दिर की दिशा के बारे में पता किया। बस अड़डे से मन्दिर पश्चिम दिशा में मुश्किल से 100-150 मीटर की दूरी पर ही है। सोमनाथ आने के लिये सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन वेरावल Veraval Railway Station से Somanath लगभग 6 किमी दूरी पर है।

सवारी की जा रही है।

पहली बार समुन्द्र स्नान हो रहा है।

सोमवार, 28 जनवरी 2013

Benaulim beach-Colva beach बेनाउलिम बीच और कोलवा बीच पर जमकर धमाल व केन्सोलिम की ओर ट्रेकिंग

गोवा यात्रा-10
गोवा की इस यात्रा में अभी तक आपने दिल्ली से ट्रेन का मुसीबत वाला सफ़र देखा, उससे आगे मडगाँव से लेकर मीरामार बीच तक का भी देखा है। अब आप देख रहे है गोवा का सबसे लम्बा व सबसे खूबसूरत बीच जिस पर वो भी एकदम अपनी स्टाइल में पूरे दो दिन तक पैदल चलते गये चलते गये कुदरती चीज देखनी है तो वाहन में बैठकर क्या मजा, कार-बस में बैठकर तो पर्यटक देखा करते है, हम जैसे तो जन्मजात(इसकी भी एक कहानी है बताऊँगा कभी) ही घुमक्क्ड़ ठहरे। घुमक्कड़ कुछ फ़क्कड़ (इसे यहाँ मंगते मत समझ लेना) किस्म के होते है। शुरु के दो दिन तक तो हम पर्यटक जैसे हालात में ही रहे, लेकिन जब अपनी वाली बात (ट्रेकिंग) आयी तो अपुन अपनी फ़ुल फ़ॉर्म में आ गये थे।  आज से मैं अपने लगाये फ़ोटो में बार्डर का प्रयोग किया करुँगा। आपको अच्छा लगा तो सुभान अल्लू, बुरा लगा तो भी बार्ड़र लगाऊँगा। 
बीच पर उड़ाने का जुगाड़।

शुक्रवार, 25 जनवरी 2013

Goa- Beer & swimming pool, Camp fire गोवा की बीयर, तरणताल, ट्रेकिंग पर रवाना

गोवा यात्रा-भाग-08:
दोपहर में दोना/डोना पाउला (दो सच्चे प्रेमी,) बीच देखने के बाद वापिस मुख्य कैम्प में लौट आये थे। अब हमारे पास कई घन्टे आराम करने के नाम पर रिक्त थे, लेकिन हम जैसे ऊँत खोपड़ी वाले प्राणी/जन्तु को आराम करने का विचार भी दिन में नहीं आ पाता था। मन में हमेशा एक सनक रहती थी कि चलो आसपास कुछ और देख आये, इसी चक्कर में हम कैम्प के ठीक पीछे समुन्द्र किनारे जा पहुँचे थे, यहाँ कमल अपने साथ अपना लैप-टॉप वाला छोटा थैला भी ले आया था, टैन्ट में अकेले किसके भरोसे छोड़ते? लेकिन इस बैग में कमल भाई अपने लिये कुछ माल मसाला भी लाये थे। जिसे उदर में ड़कारने से पहले अनिल ने उसके साथ एक फ़ोटो खिचवा लिया था। वहाँ एकदम सुहानी-मस्तानी ठन्डी पुरवायी चल रही थी, जिस कारण हमारे वहाँ दो घन्टे कब बीत गये? हमें पता ही नहीं लग पाया था।

अनिल का बीयर पीने का स्टाइल

मंगलवार, 22 जनवरी 2013

गोवा ट्रेकिंग, मीरामार बीच Goa trekking, Miramar beach

गोवा यात्रा-भाग-06
यह तो हमें पहले से पता था कि आज हमारा ग्रुप चार-पाँच किमी की ट्रेकिंग करने दोना-पोला बीच तक जाने वाला है। जिसमें सबको अपने बैग साथ ले जाने है, अत: सब अपना-अपना बैग अपने कंधे पर लादकर गेट के पास पहुँच जाये। हम तो यहाँ ट्रेकिंग करने के लिये ही आये थे। ट्रेकिंग के बहाने, किसी तरह गोवा में घूमने का मौका लगे तो सही, हम सब पाँच-पाँच की लाईन में एक साथ खड़े हो गये, जहाँ पर सबसे पहले गिनती शुरु हुई, जिसके बाद हम छोटी सी समुन्द्री ट्रेकिंग पर रवाना हो गये थे।
Total members

शुक्रवार, 18 जनवरी 2013

Youth Hostels Camp, Campal, Panji, Goa यूथ हॉस्टल कैम्प, कैम्पल, मीरमार, पणजी, गोवा

गोवा यात्रा-04
हम तीनों ने एक साथ ही गोवा के यूथ हॉस्टल के कैम्प में प्रवेश किया, प्रवेश मार्ग के ठीक बाये हाथ पर ही यूथ हॉस्टल का टैंट नुमा कार्यालय बना हुआ था। हम तीनों ने इसमें अन्दर प्रवेश कर अपनी रिपोर्टिंग का कार्य करना शुरु किया। जो महिला कार्यक्रमी हमारा रिपोर्टिंग कर रही थी, उसने हमें दो-दो फ़ार्म दिये थे, जिन्हे भरकर हमने उसे वापिस कर दिये थे, यूथ हॉस्टल कैम्प के बाद समाप्त होने के बाद जो प्रमाण पत्र दिया जाता है, वह इन्ही फ़ार्म को देखकर भरा जाता है, अत: अपनी रिपोर्टिंग कराते समय दिये जाने वाले फ़ार्म बेहद सावधानी से भरने चाहिए, नहीं तो मेरी तरह बाद में नाम की स्पेलिंग सही कराने जाओगे तो आपको यह फ़ार्म दिखाकर बता दिया जायेगा कि इसमें हमारी कोई गलती है। आपने फ़ार्म में जो लिखा था इसमें वही लिखा है। कमल ने मेरा फ़ार्म भरा था जिस कारण पवाँर panwar की जगह पवार pawar हो गया था। शुक्र रहा कि पावर नहीं हुआ। फ़ार्म भरते समय हमें वहाँ रहते समय कुछ सावधानियाँ बरतने की हिदायत दी गयी। क्योंकि उस महिला कर्मी ने कमल को बताया दिया था तुम्हारी आँखे बता रही है तुम कुछ गड़बड करके यहाँ आये हो।

YOUTH HOSTEL CAMP GOA

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