पालमपुर स्टेशन पर ट्रेन से उतरकर कुछ दूर जाने पर पालमपुर जाने वाली सड़क मिल गयी। इस स्टेशन से पालमपुर शहर कई किमी दूरी पर था। हमें सबसे पहले रात्रि विश्राम हेतू पालमपुर शहर पहुँचना था। सड़क से पालमपुर जाने के लिये बस आटो/जुगाड़ आदि के इन्तजार में खड़े हो गये। 10-15 मिनट बाद जाकर एक बस आयी हम उस बस में सवार होकर पालमपुर पहुँच गये। बस ने हमें पालमपुर के बस अड़ड़े पर उतार दिया। पालमपुर का विशाल बस अड़ड़ा देखकर मैं दंग रह गया। इतना बड़ा बस अड़ड़ा वो भी पहाड़ों में मिलना एक करिश्में जैसा लग रहा था। कमरा देखने के पहले बस अड़ड़े पर एक चाऊमीन की दुकान पर पहुँचे, दुकान वाला दुकान बन्द करने की तैयारी करने लगा था। हमने उसे चाउमीन बनाने के लिये कहा तो वो तैयार हो गया। थोड़ी देर में ही दुकान वाले ने गर्मागर्म चाउमीन बनाकर हमारे सामने पेश कर दी। हमने बड़े सुकून से चटखारे ले ले कर चाउमीन का रात्रि भोजन किया। जब चाउमीन खाकर दुकान वाले को पैसे देने लगे तो लगे हाथ दुकान वाले से रात में रुकने का बढ़िया उचित दर की कीमत वाला ठिकाना मालूम कर लिया। दुकान वाले ने बताया था कि बस अड़ड़े से बाहर निकलते ही आपको एक गेस्ट हाऊस दिखायी देगा उसमें कमरे व डोरमेट्री में आपको आसानी सही कीमत में स्थान मिल जायेगा।
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शनिवार, 27 अप्रैल 2013
Palampur Tea garden पालमपुर के चाय के बागान में घुमक्कड़ी
हिमाचल की कांगड़ा व करसोग घाटी की यात्रा 04 SANDEEP PANWAR
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