हम दोनों गोविन्दघाट से अपनी बाइक पर सवार होकर जोशीमठ की ओर चल दिये। आगे बढ़ने से पहले हम जोशीमठ का वह मठ देखना चाहते थे, जिसके कारण इस जगह का नाम जोशीमठ पड़ा। यहाँ पर बद्रीनाथ भगवान (विष्णु के अवतार) के भारत में चार धाम में से सर्वोत्तम धाम बद्रीनाथ के कारण इसका महत्व कुछ ज्यादा हो जाता है। जैसा कि भारत के चार कोनों में चार मठ व चार धाम बनाये गये है। पहला तो उत्तर भारत में यह बद्रीनाथ धाम है ही, इसके अलावा पश्चिम में द्धारकाधीश गुजरात में समुन्द्र किनारे, पूर्वी भारत में उड़ीसा में समुन्द्र किनारे जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में समुन्द्र किनारे रामेश्वरम धाम है। रामेश्वरम धाम ऐसा धाम है जो 4 धाम में भी गिना जाता है और 12 ज्योतिर्लिंग में भी शामिल होता है। मैंने इनमें से सिर्फ़ पुरी के दर्शन नहीं किये है लेकिन आगामी 14 व 15 मार्च को पुरी में उपस्थित रहने के कारण यह कार्य भी सम्पन्न हो जायेगा। 11 ज्योतिर्लिंग पहले ही पूरे हो चुके है। जल्द ही 12 के 12 भी पूरे हो जायेंगे। हमने अपनी बाइक जोशीमठ के मठ के ठीक सामने खड़ी कर, पैदल ही मठ में भ्रमण करने के लिये चल दिये। वहाँ हमने बहुत सारे साधु महात्मा देखे। उस समय वहाँ के बगीचे के पेड़ पर नाशापाति लगी हुई थी। एक साधु ने एक नाशपाति खाने के लिये मुझे भी दी। मेरा इस मठ में आने का असली कारण यहाँ पर शहतूत का वह पेड़ देखना था जिसको कल्पवृक्ष के नाम से पुकारा जाता है। इस पेड़ का तना एक कमरे के आकार के बराबर है। इसकी पेड़ की उम्र लगभग 2000-2500 वर्ष बातयी जाती है। असलियत क्या है? मैं नहीं जानता। लेकिन इसके तने का आकार देखकर यह अंदाजा लगाना आसान हो जाता है कि इतना मोटा पेड़ होने के लिये हजार साल का समय तो लगता ही है।
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अब चलते है केदारनाथ ज्योतिर्लिंग की पहली बाइक यात्रा पर। |