पिछले भाग में आपने
पढ़ा कि हम दोनों गोदावरी नदी का उदगम बिन्दु स्थल देखने के उपराँत पैदल टहलते हुए त्रयम्बक
ज्योतिर्लिंग की ओर चले आये थे। जब हमने अपनी चप्पल जूता घर में जमा करा कर मन्दिर
के प्रांगण में प्रवेश किया तो सबसे पहला झटका हमें वहाँ की भीड़ देखकर लगा। इसके बाद
अगला झटका हमें दरवाजे पर खड़े मन्दिर के सेवकों की निष्पक्ष भावना देखकर हुआ। जब हमने
वहाँ पर मन्दिर दर्शन के लिये भक्तों की लम्बी घुमावदार लाइन देखी और हम भौचक्के से
वहाँ खड़े के खड़े रह गये तो हमें लम्बी लाईन के कारण अचम्भित खड़ा देख मन्दिर के सेवक
बोले, “क्या आप बिना लाईन के जल्दी दर्शन करना चाहे हैं? हमने पूछा आप इस सेवा के बदले
क्या फ़ीस लेते हो। तो उसने कहा था कि आपको 100 रुपये में हम बिना
लाईन के मन्दिर दर्शन करा लायेंगे। हमने उनकी बात नकारते हुए उस लम्बी लाईन में लगना
स्वीकार कर लाईन में लग गये।
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शुक्रवार, 5 अप्रैल 2013
Tyimbak- Trimbakeshwar 12 Jyotirlinga Shiva Temple त्रयम्बकेश्वर/त्र्यम्बकेश्वर 12 ज्योतिर्लिंग मन्दिर के दर्शन।
भीमाशंकर-नाशिक-औरंगाबाद यात्रा-11 SANDEEP PANWAR
गुरुवार, 4 अप्रैल 2013
Sant Gyaneshwar's elder brother Nivartinath Samadhi सन्त ज्ञानेश्वर के बड़े भाई और उनके गुरु श्री निवृत्ति का समाधी स्थल
भीमाशंकर-नाशिक-औरंगाबाद यात्रा-10 SANDEEP PANWAR
हम बारिश से बचते हुए किसी तरह राम तीर्थ स्थल तक तो पहुँच गये, लेकिन राम तीर्थ आते ही जिस जोरदार बारिश से हमारा सामना हुआ वो शब्दों में ब्यान नहीं किया जा सकता है। हम भारी बारिश से बचने के लिये एक चाय की बन्द दुकान के छप्पर में घुस गये। यहाँ बैठने के लिये बहुत सारी जगह थी इसलिये हम आराम से वहाँ बैठे रहे। बारिश का जोश देखकर लग रहा था कि आज की रात बारिश रुकेगी नहीं। हमें वहाँ उस भयंकर बारिश में बैठे-बैठे 10 मिनट ही हुई होंगी कि सीढियों पर एकदम से जोरदार आवाज करता हुआ पानी का सैलाब आता हुआ दिखायी दिया। मैंने पानी का सैलाब विशाल को दिखाया और कहा ये देखो कुदरत का कहर, क्या पानी की इतनी भारी मात्रा में इन सीढियों पर कोई उतर पायेगा। विशाल का जवाब था नहीं। जब हमें वहाँ बैठे-बैठे आधा घन्टा हो गया तो हमें अंधेरा होने की चिंता सताने लगी। यह शुक्र रहा कि बारिश आधे घन्टे तक पूरे शबाब के साथ बरसने के साथ एकदम अचानक से बेहद ही धीमी हो गयी। यह धीमी बारिश हमारे लिये एक शुभ संकेत था कि बच्चों यदि यहाँ से निकलना है तो यह बिल्कुल सही समय है निकल भागो यहाँ से, नहीं तो पूरी रात यही जागरण करते रहना। मैंने विशाल की आँखों में देखा और इशारों ही इशारों में वहाँ से चलने की हाँ कर दी। सीढियों पर बरसात का पानी अभी पूरे जोश-खरोश से बहता जा रहा था। इसलिये हमने अत्यधिक सावधानी पूर्वक सीढियों से नीचे उतरना आरम्भ कर दिया। सीढियाँ पानी की वजह से काफ़ी खतरनाक हो चली थी, पानी में फ़िसलकर कर हमारे हाथ-पैर या कोई अन्य हड़ड़ी ना टूटे, इसलिये हम उन पर तिरछे पैर रख उतरने में लगे पड़े थे।
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समाधी मन्दिर की मुख्य मूर्ति |
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समाधी मन्दिर में जाने का प्रवेश मार्ग। |
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