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सोमवार, 4 नवंबर 2013

Indian Hill Railway-Shimla Toy Train भारतीय पहाड़ी रेल- शिमला कालका (नैरोगेज/ खिलौना गाड़ी) यात्रा

किन्नर कैलाश यात्रा के सभी लेख के लिंक नीचे दिये गये है।

KINNER KAILASH TREKKING-12                                         SANDEEP PANWAR

शिमला की खिलौना रेल में शिमला से कालका तक की इस यात्रा में मैंने जी भर कर फ़ोटो लिये है। शिमला स्टेशन से दोपहर बाद 02:30 मिनट पर कालका के लिये एकमात्र पैसेंजर सवारी गाड़ी चलने का समय निर्धारित है। मैं ट्रेन चलने से कोई सवा घन्टे पहले ही स्टेशन पहुँच चुका था। इस सवारी गाड़ी में आरक्षित डिब्बे भी होते है। मुझे इसकी जानकारी नहीं थी। शिमला से कालका तक का किराया मात्र 20 रु है जबकि बस से कालका तक जाने में 90 रु का टिकट लेना पड़ता है। अगर कालका का बस स्टैन्ड़ कालका के रेलवे स्टेशन के नजदीक होता तो मैं कभी भी बस से शिमला आना या जाना पसन्द नहीं करुँगा। मैंने टिकट लेना चाहा, लेकिन टिकट खिड़की तो एक घन्टा पहले ही खुलने वाली थी। सवारी गाड़ी का टिकट लेने वालों की काफ़ी भीड़ जमा हो चुकी थी। स्टेशन पर प्लेटफ़ार्म पर खड़ी ट्रेन में भी काफ़ी सीटों पर सवारियाँ कब्जा जमा चुकी होगी। सीजन के दिनों में सवारी गाड़ी में जाने वालों की काफ़ी भीड़ होती है जिस कारण seat मिलने की सम्भावना कम हो जाती है।

शिमला से चले कालका

सोमवार, 24 जून 2013

Neral to Matheran Journey by Toy Train नेरल से माथेरान तक ट्राय ट्रेन की सवारी

EAST COAST TO WEST COAST-21                                                                   SANDEEP PANWAR
नेरल स्टेशन पर पहले पहुँचने की जल्दबाजी में मैं और विशाल बिना प्लेटफ़ार्म वाली दिशा में कूद गये और सबसे पहले टिकट काऊँटर पर पहुँच गये। नेरल से माथेरान वाली पहाड़ी पर जाने वाली ट्राय ट्रेन के टिकट नेरल के प्लेटफ़ार्म पर एक कोने में बने काऊँटर पर ही मिलते है। नेरल से माथेरान के लिये वैसे तो कई ट्रेन है लेकिन सबसे पहली ट्रेन के चलने का समय सुबह 6:45 मिनट का बताया गया था जिस पहली ट्रेन से हम यहाँ पहुँचे थे उसके यहाँ पहुँचने का समय सुबह 6:25 का है। इसलिये हम टिकट की जल्दबाजी कर रहे थे कि कही टिकट की लम्बी लाईन लग गयी तो फ़िर अगली ट्रेन से जाना होगा। यहाँ इस ट्रेन में टिकट अग्रिम आरक्षित नहीं कराये जा सकते है। ऊटी (उदगमण्ड़लम) शिमला, व दार्जीलिंग वाली कुछ ट्रेनों में आरक्षण की व्यवस्था दी हुई है जिससे दूर से आने वाले यात्री पहले से ही अपने टिकट बुक करा कर ही आते है।

शनिवार, 22 जून 2013

Train Journey- Nanded to Mumbai/Bombay (Neral) नान्देड़ से नेरल (मुम्बई/बोम्बे) तक ट्रेन यात्रा

EAST COAST TO WEST COAST-20                                                                   SANDEEP PANWAR
मैंने एक मौका लेने की सोचकर ट्रेन के साथ भागना आरम्भ किया, मुझे ट्रेन के साथ भागते देख कई लोग बोले छोड़ दे, अगली ट्रेन से चले जाना, पूरी ताकत लगाकर मैं भागा था मुझे दरवाजे के नजदीक आते देख, दरवाजे पर खड़े बन्दे वहाँ से पीछे हट गये। भागते-भागते मेरा ध्यान दरवाजे के पाइप के साथ सुरक्षा पर भी था। एक हाथ से खिड़की का पाइप पकड़कर मैंने कुछ कदम तय किये जब यह उम्मीद हुई कि अब सुरक्षित रुप से दरवाजे में प्रवेश किया जा सकता है तो मैंने अपने आप को दरवाजे से अन्दर धकेल दिया। दरवाजे से अन्दर घुसते समय मेरे सामने आगरा कैन्ट की एक घटना घूम गयी थी मुझे याद है जब मैं पहली बार ताजमहल देखने गया था तो वहाँ स्टेशन पर एक दुर्घटना घटित हुई थी जिसमें एक महिला ग्वालियर या झांसी नौकरी करने जाया करती थी, एक दिन ठीक मेरी तरह उसकी ट्रेन चल चुकी थी उस औरत ने ट्रेन पकड़ने के लिये ट्रेन के साथ दौड़कर दरवाजे का पाइप तो पकड़ लिया था लेकिन बदकिस्मती से वह दरवाजे में पैर रखते समय चूक गयी, जैसे ही उसने दरवाजे में पैर रखा तो उसका पैर फ़िसल गया। अगर उसने उसी समय दरवाजे पर पकड़ा हुआ पाइप छोड़ दिया होता तो वह प्लेटफ़ार्म पर गिर जाती लेकिन होनी-अनहोनी के आगे किसी की नहीं चलती। पाइप पकड़ने के कारण वह महिला ट्रेन के साथ घिसटती चली गयी जिससे वह ट्रेन व प्लेटफ़ार्म के बीच पिसती चली गयी। जब तक ट्रेन ने प्लेटफ़ार्म पार किया उस महिला की दर्दनाक दयनीय हालत हो चुकी थी। खैर ट्रेन कोई बस तो है नहीं जो चिल्लाने से रुक जाये जब गार्ड़ ने दुर्घटना देखी तो उसने ट्रेन रुकवायी लेकिन उस औरत की इतनी बुरी हालत हो चुकी थे कि वह कुछ देर में ही दम तोड़ गयी।




शनिवार, 27 अप्रैल 2013

Pathankot-Kangra-Jogindernagar narrow gauge Toy/hill Train पठानकोट-कांगड़ा-जोगिन्द्रनगर की नैरो गेज वाली रेलवे लाइन की यात्रा।

हिमाचल की कांगड़ा व करसोग घाटी की बस यात्रा 03                                                SANDEEP PANWAR

नगरोटा सूरियाँ नामक गाँव में बस व छोटी रेल दोनों ही आती है। नगरोटा नाम से हिमाचल में दो जगह है एक का नाम नगरोटा है दूसरे का नाम नगरोटा सूरियाँ है। हमने बस वाले से कहा "देख भाई हमें नगरोटा से छोटी  रेल में बैठकर पालमपुर व बैजनाथ की ओर जाना है। इसलिये हमें ऐसी जगह उतार देना जहाँ से रेलवे स्टेशन नजदीक पड़ता हो। पीर बिन्दली से नगरोटा तक का सफ़र छोटी-मोटी सूखी सी पहाडियाँ के बीच होकर किया गया था। फ़ोटॊ खेचने के लिये एक भी सीन ऐसा नहीं आया जिसका फ़ोटॊ लेना का मन किया हो। जैसे ही नगरोटा में बस दाखिल हुई तो हमने एक बार फ़िर बस कंड़क्टर को याद दिलाया कि भूल मत जाना। कंड़क्टर भी हमारी तरह मस्त था बोला कि आपको तसल्ली बक्स उतार कर स्टॆशन वाला मार्ग बताकर आगे जायेंगे। थोड़ा सा आगे चलते ही कंड़क्टर ने हमें खिड़की पर पहुँचने को कहा। जैसे ही बस रुकी तो देखा कि हमारी बस एक पुल के ऊपर खड़ी है, मैंने सोचा कि यहाँ कोई नदी-नाला होगा, जिसका पुल यहाँ बना हुआ है। जब कंड़क्टर ने कहा कि यह पुल रेलवे लाईन के ऊपर बना हुआ है। आप इस पुल के नीचे उतर कर उल्टे हाथ आधे किमी तक पटरी के साथ-साथ चले जाना आपको स्टेशन मिल जायेगा।

जाट देवता कांगड़ा नैरो गेज की यात्रा पर है।

रविवार, 14 अप्रैल 2013

kangra vally to Dalhousie कांगड़ा घाटी से ड़लहौजी मार्ग पर सड़क पर बिखरे मिले खूब सारे पके-पके आम।

हिमाचल की स्कार्पियो-बस वाली यात्रा-05                                                                 SANDEEP PANWAR
ज्वाला जी मन्दिर में जलती हुई ज्वाला रुपी ज्योत के दर्शन कर, वापिस उसी स्थान पर आ गये, जहाँ मराठों की बाइक पार्किंग में खड़ी थी। अब आगे की यात्रा लगभग साथ ही करनी थी इसलिये हम भी उनके साथ ही गाड़ी में चलते रहे। कुछ आगे जाने पर मनु-विधान-विपिन- व संदीप को बाइक पर यात्रा करने की सनक सवार हो गयी। आगे जाकर बाइक वालों को रुकवाकर गाड़ी में बैठाया गया। अब हम चारों ने बाइक पर कब्जा जमा लिया। दो दिन से गाड़ी में अन्दर घुसकर बैठे थे इसलिये घुटन सी महसूस होने लगी थी। बाइक चलाने के दो महारथी बाइक चलाने लगे, मेरे पीछे विपिन बाइक का लगभग अनाड़ी सवार था जबकि मनु के पीछे बाइक चालक विधान सवार हो चुका था। हमने लगभग 100 किमी की बाइक यात्रा उस दिन की होगी। बाइक चलाने के लिये यह पठानकोट-मंड़ी वाला हाईवे पहाड़ पर सर्वोत्तम मार्ग है। इस मार्ग के किनारे पर गहरी खाई कभी कभार ही आती है। इस सडक पर अंधे मोड़ भी मुश्किल से ही दिखाये देते है। ज्यादा ऊँचा नीचा भी नहीं होता कि अब चढ़ाई आयी अब उतराई। इतना कुछ होने के बाद भी हरियाली के मामले में यह किसी भी अन्य पहाड़ी मार्ग से कम सुन्दर दिखायी नहीं देता है। चूंकि मैंने इस मार्ग पर पहले भी अपनी बाइक से यात्रा की हुई है इसलिये मुझे इस मार्ग के बारे में काफ़ी मालूम था।

बाथू खड़ नामक स्थल पर पहली बार इतने नजदीक सड़क व रेल आती है।

लगता है रेल अभी नहीं आयेगी

मंगलवार, 26 मार्च 2013

Delhi-Bombay(Dadar)-Narel-Khandas दिल्ली-दादर-नेरल-खंड़स तक।

महाराष्ट्र के भीमाशंकर-नाशिक-औरंगाबाद की यात्रा-01                                            SANDEEP PANWAR


बीते साल 2012 में जुलाई माह की बात है मुम्बई में रहने वाला दोस्त विशाल राठौर कई बार भीमाशंकर ट्रेकिंग की बात करता रहता था। पहले तो मन में वहाँ जाने का विचार ही नहीं बन रहा था लेकिन विशाल के बार-बार बुलाने के कारण मैंने रेल से बोम्बे जाने के लिये गोल्ड़न टेम्पल मेल से अपना टिकट बुक कर ही दिया था। दिल्ली से बोम्बे तक पहुँचने में कोई खास घटना नहीं घटी थी इसलिये उसका कोई विवरण नहीं दे रहा हूँ। यह ट्रेन सुबह 5 बजे दादर रेलवे स्टेशन पहुँच जाती है। यहाँ पर जैसे ही ट्रेन प्लेटफ़ॉर्म पर रुकी तो विशाल अपने कोच के ठीक सामने खड़ा दिखायी दिया। पहले तो गले मिलकर एक दूसरे का स्वागत किया गया। इसके तुरन्त बाद हम दोनों वहाँ से बम्बई लोकल ट्रेन में बैठने के लिये फ़ुटओवर ब्रिज पार कर दूसरी ओर लोकल वाली लाईन पर पहुँच गये। यहाँ पर विशाल ने अपने कार्ड़ से हम दोनों का दादर से नेरल तक जाने का टिकट ले लिया था। 
जाटदेवता के कदम बोम्बे में पड़ ही गये।

बोम्बे लोकल अपनी गति से दौड़ी जा रही है।

इस यात्रा के समय ही मेरे पहली बार बोम्बे की भूमि पर कदम पड़े थे। तो जाहिर है कि बोम्बे लोकल में भी पहली बार सवारी हो रही थी। सुबह का समय होने के कारण बम्बई की जीवन रेखा/ life line कही जाने वाली लोकल रेल में ज्यादा भीड़भाड़ नहीं थी। एक दिन पहले ही बोम्बे का गणपति उत्सव समाप्त हुआ था जिस कारण थोड़ी बहुत भीड़ भी 10-15 किमी तक ही दिखायी दी थी। शुरु में हमें दादर स्टेशन से सीट नहीं मिल सकी थी, लेकिन इस रुट पर नजारे देखने की इच्छा के कारण सीट मिलने का लालच भी नहीं हो रहा था। शुरु-शुरु में विशाल ने मुझे कई बार टोका कि तुम दरवाजे पर खड़े हो, सावधानी से खड़े रहो। गिर जाओगे। बैग को सम्भाल कर पकड़ो। मुझे कई बार विशाल पर आश्चर्य भी हुआ कि अरे यह बन्दा क्या मुझे अनाड़ी समझ रहा है। लेकिन विशाल की चिंता अपनी जगह सही थी, बोम्बे में गेट पर लटकने के कारण हर साल सैंकड़ों हादसे होते रहते है। बिना किसी परेशानी के अपना सफ़र चलता रहा।

कोई बात नहीं इस बार ना सही अगली बार यात्रा करनी ही है।

मंगलवार, 5 मार्च 2013

MHOW Railway पातालपानी से कालाकुंड PATALPANI TO KALAKUND


दोस्तों आज आपको रतलाम, उज्जैन, इन्दौर, महू, पातालपानी, कालाकुन्ड होकर अकोला, Ratlam, MHOW, Patalpani, Kalakund, Akola Railway Trek तक जाने वाली मीटर गेज वाली रेल यात्रा के बारे में बताया जायेगा। मैंने इस पूरे ट्रेक पर सिर्फ़ दो बार ही यात्रा की है, लेकिन इन्दौर से पातालपानी होते हुए कालाकुन्ड़ तक कई बार यात्रा कर चुका हूँ इस रुट में पातालपानी से कालाकुन्ड स्टेशनों के बीच की ही यात्रा सबसे यादगार यात्रा रहती है इस कारण मैं मौका लगने पर इन दो स्टॆशन के बीच की यात्रा अवश्य कर लेता हूँ अभी आखिरी यात्रा मैंने जून 2012 में की थी। जब मैं सिर्फ़ इन्ही दो स्टॆशन के बीच यात्रा कर वापिस चला आया था। आप सोच रहे होंगे कि इन्ही दो स्टेशन की बीच यात्रा करने की कोई खास वजह तो होगी ही, चलिये बताता हूँ 

अपनी गाड़ी का फ़ोटो

सुरंग में घुसने की तैयारी

पातालपानी स्टॆशन

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