UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-23 SANDEEP PANWAR
अमित शुक्ला पर गुस्सा तो बहुत आ रहा था लेकिन चलती बाइक व जंगलों में कम से कम मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध होने के कारण सम्पर्क ना हो पाना एक मुख्य वजह बन गयी थी। वैसे जीप चल चुकी थी चूंकि अभी मेरी बात अमित से हो ही रही थी अचानक मन में सोचा कि यार जो दो बन्दे 150 से ज्यादा किमी दूर से बाइक पर चलकर मुझसे मिलने आये है मैं सिर्फ़ दो घन्टे देरी होने से उनसे मिले बिना आगे निकल जाऊँ। मेरे अपने दिल ने कहा नहीं, चाहे 10 मिनट ही सही, लेकिन मिले बिना जाना बहुत गलत बात रहेगी। अभी तक वह मेरा ब्लॉग ही तो पढ़ता है आज एक प्रशंसक से एक दोस्त बनाकर जाऊँगा। मैंने अमित को कहा कि मैं बस अड़ड़े पर उस किनारे खड़ा हूँ जहाँ से पेन्ड़्रारोड़ वाली सड़क निकलती है। मैं जीप में सबसे आगे वाली सीट पर ही बैठा था जीप वाले ने मेरी बात सुनी ही थी इसलिये मेरे यह कहते ही जीप रोक दी थी कि मेरा दोस्त भी आने वाला है अब तो उसके साथ ही जाऊँगा। अगर यह फ़ोन 5-10 मिनट बाद आता तो शायद यह मुलाकात सम्भव नहीं हो पाती क्योंकि तब तक जीप कम से कम 4-5 किमी आगे निकल गयी होती! फ़िर इतनी दूर से कौन वापिस आता?