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शुक्रवार, 6 सितंबर 2013

अमरकंटक से भुवनेश्वर जाते समय ट्रेन में चोर ने मेरा बैग खंगाल ड़ाला

UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-23          SANDEEP PANWAR 
अमित शुक्ला पर गुस्सा तो बहुत आ रहा था लेकिन चलती बाइक व जंगलों में कम से कम मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध होने के कारण सम्पर्क ना हो पाना एक मुख्य वजह बन गयी थी। वैसे जीप चल चुकी थी चूंकि अभी मेरी बात अमित से हो ही रही थी अचानक मन में सोचा कि यार जो दो बन्दे 150 से ज्यादा किमी दूर से बाइक पर चलकर मुझसे मिलने आये है मैं सिर्फ़ दो घन्टे देरी होने से उनसे मिले बिना आगे निकल जाऊँ। मेरे अपने दिल ने कहा नहीं, चाहे 10 मिनट ही सही, लेकिन मिले बिना जाना बहुत गलत बात रहेगी। अभी तक वह मेरा ब्लॉग ही तो पढ़ता है आज एक प्रशंसक से एक दोस्त बनाकर जाऊँगा। मैंने अमित को कहा कि मैं बस अड़ड़े पर उस किनारे खड़ा हूँ जहाँ से पेन्ड़्रारोड़ वाली सड़क निकलती है। मैं जीप में सबसे आगे वाली सीट पर ही बैठा था जीप वाले ने मेरी बात सुनी ही थी इसलिये मेरे यह कहते ही जीप रोक दी थी कि मेरा दोस्त भी आने वाला है अब तो उसके साथ ही जाऊँगा। अगर यह फ़ोन 5-10 मिनट बाद आता तो शायद यह मुलाकात सम्भव नहीं हो पाती क्योंकि तब तक जीप कम से कम 4-5 किमी आगे निकल गयी होती! फ़िर इतनी दूर से कौन वापिस आता?


गुरुवार, 5 सितंबर 2013

Kapil Muni Dhara Water Fall कपिल धारा में स्नान व एक प्रशंसक से सम्भावित मुलाकात

UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-2     SANDEEP PANWAR  अमरकंटक के उस चौराहे पर जाकर रुका जहाँ से सीधे हाथ बस अड़ड़ा पहुँच जाते है पीठ पीछे अमरकंटक से तो मैं आया ही था। उल्टे हाथ वाला मार्ग छत्तीसगढ़ व यही मार्ग आगे सीधे चलकर कपिल मुनी धारा जलप्रपात के लिये चला जाता है। चलिये स्नान करने की बहुत जल्दी हो रही है पहले कपिल धारा चलते है जो लगभग 40 मीटर की ऊँचाई से गिरता हुआ जल प्रपात है। कपिल धारा इस चौराहे से मुश्किल से 7-8 किमी दूरी पर ही है। यहाँ तक पहुँचाने के लिये ऑटो जैसी गाडियाँ आसानी से मिलती रहती है आप इन्हे अपनी इच्छा अनुसार प्रति सवारी या फ़िर पूरी गाड़ी किराये पर तय करके ले जा सकते हो। मैंने जल प्रपात तक का किराया पूछा तो बताया कि 10 रुपये लगेंगे। मैंने कहा कि कितनी सवारी भरने के बाद चलोगे? उसने कहा कि कम से कम दस सवारियाँ लेकर जाऊँगा, लेकिन जब काफ़ी देर 7 सवारी से ज्यादा ना हुई तो वह इतनी सवारी लेकर ही आगे चल दिया।


बुधवार, 4 सितंबर 2013

Amarkantak fair अमरकंटक नर्मदा के स्नान घाट और मेला

UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-21                              SANDEEP PANWAR
अमरकंटक का नर्मदा उदगम स्थल देखने के बाद स्नान करने की इच्छा बलवत हो उठी, लेकिन पहले सोचा कि बढ़ी हुई दाढ़ी बनवा ली जाये। इसलिये पहले दाढ़ी बनवाई गयी। दाढ़ी बनवाने के बाद कुछ देर तक वहाँ के मेले में घूमता रहा। सुबह का समय था इसलिये आम जनता अपने निजी कार्यों में व्यस्त दिखायी दे रही थी। मेले को बीच में छोड़ कर पहले स्नान घाट जा पहुँचा। स्नान घाट नर्मदा उदगम स्थल के ठीक सामने बना हुआ है। यहाँ पर नर्मदा मन्दिर से निकलने वाला जल वहाँ से निकलकर इस स्नान घाट में प्रवेश करता है। यहाँ जल जिस मार्ग से होकर आता है उसका आकार एक गाय के मुँह जैसा बनाया हुआ है। लेकिन जिस समय मैं यहाँ पर था उस गाय की मूर्ति के मुँह से पानी की एक बून्द भी नहीं निकल रही थी।


सोमवार, 2 सितंबर 2013

Group of ancient temples-Amarkantak अमरकंटक का प्राचीन मन्दिर समूह

UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-19                              SANDEEP PANWAR
नर्मदा उदगम स्थल के ठीक बराबर में बने हुए प्राचीन मन्दिर समूह को देखने के लिये पहुँच गया। इस मन्दिर के प्रवेश द्धार के बाहर ही लिखा हुआ था कि मन्दिर में प्रवेश करने का समय सुबह सूर्योदय से लेकर शाम को सूर्यास्त तक है। चूंकि मैं तो सूर्योदय के बाद पहुँचा था अत: मुझे मन्दिर समूह में प्रवेश दिये जाने से कोई परेशानी नहीं हुई। इस मन्दिर में जाने का टिकट लगता है या नहीं ऐसा कोई बोर्ड़ तो वहाँ दिखायी नहीं दिया था मैंने गार्ड़ से टिकट के बारे में पता किया भी था लेकिन उसने कहा कि महाशिवरात्रि के मेले के दौरान टिकट व्यवस्था बन्द कर दी जाती है। चलिये आपको मन्दिर के इतिहास की जानकारी देते हुए इसका भ्रमण भी करा देता हूँ।


शुक्रवार, 30 अगस्त 2013

अमरकंटक की एक निराली सुबह की झलक A rare morning in Amarkantak

UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-18                              SANDEEP PANWAR
हमारी बस पेन्ड़्रा रोड़ से चलते समय कुछ दूरी तक तो शहरी आबादी से होकर चलती रही, जिस कारण बिजली वाले बल्बों के उजाले के कारण अंधेरे का पता ही नहीं लग पाया था कि बस कहाँ-कहाँ से होकर आगे बढ़ती रही। मार्ग में अंधेरा भले ही था लेकिन जब बस बलखाती नागिन की तरह झूमती हुई आगे बढ़ने लगी तो समझ में आने लगा कि बस किसी पहाड़ पर चढ़ने लगी है। जब बस मुड़ती थी तो उसकी आगे वाली हैड़ लाईट की रोशनी में इतना नजर  रहा था कि जिससे यह पता चलने लगा था कि अब सीधी सड़क नहीं है पहाड़ आरम्भ हो गये है। अगर सीधी सड़क पर इस तरह गाडी बलखाती हुई चलने लगे तो सड़क पर चलने वाले आम लोग सड़क छोड़ कर भाग खड़े होंगे।


गुरुवार, 29 अगस्त 2013

Bhedaghat to Amarkantak भेड़ाघाट से अमरकंटक

UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-17                              SANDEEP PANWAR
धुआँधार से भेड़ाघाट आते समय ऑटो वाले ने जिस चौराहे पर उतारा था वहाँ से धुआँधार की दूरी लगभग 7 किमी रह जाती है जबलपुर वहाँ से सीधे हाथ 17 किमी दूर है। उल्टे हाथ वाला मार्ग पीपरिया/पंचमढ़ी के लिये चला जाता है। अब बचा चौथा मार्ग यह छोटा सा ग्रामीण मार्ग जरुर है लेकिन पक्की काली सड़क सीधे भेड़ाघाट स्टेशन के लिये चली जाती है। मेरे साथ ऑटो में दो लोग और भी थे जो भेड़ाघाट स्टेशन पर जाना चाहते थे लेकिन उन्हे भूख लगी थी इसलिये वे वही तिराहे/चौराहे पर कुछ खाने के लिये रुक गये। मैंने अकेले ही स्टेशन की ओर चलना शुरु कर दिया। यह तो पहले ही पता लग चुका था कि यहाँ से भेड़ाघाट का स्टेशन लगभग दो किमी दूरी पर है अत: मैं अपनी धुन में पैदल चलता चला गया। पैदल चलते हुए मुझे एक साईकिल पर सामान बेचने वाला एक बन्दा दिखायी दिया। उसके पास खाने के लिये मीठे व मूँगफ़ली को मिलाकर बनायी गयी कुछ स्वादिष्ट वस्तु थी। 10 रु की मीठी सामग्री लेकर मैं आगे बढ़ चला। 


बुधवार, 28 अगस्त 2013

Dhuandhaar boating point with Jain Muni भेड़ाघाट के नौका विहार स्नान घाट के दर्शन

UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-16                              SANDEEP PANWAR
भेड़ाघाट के तहस-नहस किये गये चौसट योगिनी मूर्तियाँ वाले मन्दिर को देखने के बाद वहाँ के घाट देखने के लिये चल दिया। मुख्य सड़क पर ढ़लान की दिशा में आगे बढ़ते समय सड़क पर ठीक सामने एक मन्दिर जैसा भवन दिखायी दे रहा था। मैंने सोचा कोई मन्दिर-वन्दिर होगा। लेकिन उसके पास जाकर मालूम हुआ कि यह कोई मन्दिर नहीं, बल्कि किसी की याद में बनायी जाने वाली कोई छतरी है। इसके पास ही यहाँ का एकमात्र सरकारी गेस्ट हाऊस भी है। यदि वहाँ गेस्ट हाऊस का बोर्ड़ ना लगा हो तो कोई यह अंदाजा भी नहीं लगा सकता है कि यहाँ कोई गेस्ट हाऊस भी हो सकता है। धुआँधार विश्राम गृह में मुझे कोई काम नहीं था इसलिये मैं सीधा नौका विहार वाले मार्ग पर चलता रहा।

शनिवार, 24 अगस्त 2013

Chaunsath 64 yogini temple चौसट योगिनी मन्दिर

UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-15                              SANDEEP PANWAR
भेड़ाघाट के रेस्ट हाऊस की ओर चलते हुए सडक पर 64 योगिनी नामक मन्दिर का बोर्ड दिखायी देता है। सड़क से देखने पर पहली नजर में मन्दिर तो मन्दिर मन्दिर का कोई अंश भी दिखायी नहीं देता। मन्दिर ऊपर कही पहाड़ी पर बना होगा। जहाँ तक पहुँचाने के लिये पत्थर की बनी हुई पक्की सीढियाँ दिखायी दे रही थी। मैंने उन सीढियों से ऊपर पहाड़ी पर चढ़ना शुरु कर दिया। जैसे-जैसे ऊपर की ओर जाता जा रहा था शरीर कहने लगता कि रुक जा जरा साँस तो ले ले, ऐसी क्या जल्दी है जो दे दना-दना भागे जा रहा है। साँस फ़ूलने की समस्या तो चढ़ाई पर आती ही है अब चढ़ाई चाहे श्रीखन्ड़ की हो या मणिमहेश की या 64 योगिनी मन्दिर की ही क्यों ना रही हो। मुझे साँस सामान्य करने के लिये बीच में एक बार रुकना पड़ा।


गुरुवार, 22 अगस्त 2013

Dhuandhaar water fall to 64 Yogini Temple धुआँधार प्रपात से चौसट योगिनी मन्दिर तक

UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-14                              SANDEEP PANWAR
धुआँधार जलप्रपात देखकर व नहाने के उपराँत मैंने नर्मदा के साथ-साथ नदी के जल की धारा के विपरीत दिशा में चलने का फ़ैसला कर लिया। सुबह से यहाँ बैठे हुए कई घन्टे बीत चुके थे। जैसे-जैसे मैं आगे बढ़ता जा रहा था नर्मदा भी उछल कूद मचाती हुई मेरी ओर चली आ रही थी। मैं नर्मदा के पानी से दूरी बनाकर चल रहा था अन्यथा नर्मदा मुझे पकड़ लेती। यहाँ नदी की धारा का बहाव काफ़ी तेज है जिस कारण पानी काफ़ी तेजी से नीचे की ओर भागता चला जाता है। पानी तेजी से लुढ़कने के कारण नदी में पानी काफ़ी धमालचौकड़ी मचाता हुआ उछल-उछल कर आगे चलता रहता है। पानी उछलने का मुख्य कारण तेज ढ़लान व नदी के बीच में बड़े पत्थर का होना है। थोड़ा आगे जाने पर एक मैदान आता है जहाँ पर कुछ लोग नहा धोकर अपने कपड़े सुखाने में लगे पड़े थे। यही नदी की धारा के साथ किनारे पर पड़े हुए पत्थरों में बने डिजाइन को देखकर मुझे कुछ मिनट वही ठहरना पड़ा, क्योंकि नदी किनारे पड़े पत्थरों पर वैसे ही आकृति बनी हुई थी जैसी आकृति समुन्द्र किनारे के खारे पानी की मार के कारण वहाँ की चट्टानों की हो जाती है।


बुधवार, 21 अगस्त 2013

Bhedaghat Dhuandhaar water fall भेड़ाघाट का धुआँधार जलप्रपात

UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-13                              SANDEEP PANWAR
जब मैं धुआँधार जल प्रपात के ठीक सामने पहुँचा तो वहाँ का नजारा देख मेरे आश्चर्य का ठिकाना ही नहीं रहा। मेरी आँखों के सामने वह झरना था जिसके बारे में मैं अभी तक सुनता आया था अब मुझे इसे देखने से कोई नहीं रोक सकता था। इस प्रपात का नाम धुआँधार क्यों पड़ा? इसे देख कर यह अंदाजा लगाना आसान है कि पानी जिस भयंकर मात्रा में ऊँचाई से गिरता है उस हालत में यहाँ पर पानी के दवाब का असर ही है जो पानी नीचे गिरने पर धुआँ-धुआँ होने लगता है। पानी की धार ऊँचाई से गिरने पर धुआँ का रुप धारण कर लेती है इसलिये इसे धुआँधार कहते है। दूर से देखने पर ऐसा लगता था जैसे कि नदी किनारे किसी ने आग लगाई हो और उस आग से धुआ उठ रहा हो। जहाँ खड़े होकर मैंने फ़ोटो लिये थे वहाँ ज्यादा देर खड़े रहना मुश्किल हो रहा था क्योंकि धुएँ के रुप में उड़ता पानी मुझे भिगोने के लिये मेरी ओर उड़कर चला आता था।


मंगलवार, 20 अगस्त 2013

Jabalpur to Bhedagath जबलपुर से भेड़ाघाट धुआँधार जलप्रपात तक

UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-12                              SANDEEP PANWAR
ट्रेन में रात सोते हुए कब बीती? पता ही नहीं लग पाया! सुबह जब आँख खुली और खिड़की से बाहर झाँक कर देखना चाहा कि कौन सा स्टेशन आने वाला है? घड़ी के हिसाब से तो अपना स्टेशन अभी नही आया था। लेकिन जैसे ही तेज गति से भागती ट्रेन से भेड़ाघाट नामक स्टेशन पीछे छूटता दिखायी दिया तो आँखे चौकन्नी हो गयी। मैंने साथ बैठी सवारियों से पूछा कि क्या भेड़ाघाट स्टेशन से धुआँधार झरने तक पहुँचने में आसानी है या यह भेड़ाघाट कोई और स्टॆशन का नाम है? मेरे पास बैठे एक महोदय ने बताया कि यही भेड़ाघाट का मुख्य स्टेशन है लेकिन यहाँ सिर्फ़ सवारी/लोकल रेल ही रुकती है लम्बी दूरी वाली रेलगाडियाँ यहाँ नहीं रुकती है। लेकिन अगर किसी को भेड़ाघाट जाना हो तो वो क्या करेगा? उसके लिये उसे मदन-महल नामक स्टेशन पर उतरना होगा। मदन महल क्यो? जबलपुर क्यों नहीं? मैंने उनसे सवाल किया। उन्होंने कहा कि जबलपुर से कई किमी पहले मुख्य स्टेशन मदन महल है जहाँ लम्बी दूरी की लगभग सभी रेल गाडियाँ रुकती है। यहाँ से भेड़ाघाट जाना नजदीक पड़ता है जबकि जबलपुर से भेड़ाघाट जाने वाला सड़क मार्ग भी मदन महल से होकर ही गुजरता है।


सोमवार, 19 अगस्त 2013

Ujjain leaving after meeting with suresh chiplunkar सुरेश चिपचूलनकर जी से मुलाकात व जबलपुर प्रस्थान

UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-11                              SANDEEP PANWAR
उज्जैन के सभी दर्शनीय स्थलों को दिखाने के बाद हमारा गाड़ी वाला हमें लेकर उज्जैन रेलवे स्टेशन की ओर चल दिया। संदीपनी आश्रम से वापसी में जिस मार्ग का प्रयोग हमने किया था वहाँ से इन्दौर मात्र 60 किमी व देवास तो केवल 39 किमी दूर था। अपने साथी कल ही तो इन्दौर से उज्जैन आये थे। कुछ देर में ही हमारा चालक हमें लेकर रेलवे स्टेशन पहुँच गया। स्टेशन से पहले ही मैंने अपने गाड़ी चालक से सुरेश चिपलूनकर जी की कालोनी के बारे में पता किया था उसने कहा था कि आप यहाँ से उस कालोनी में जाने वाली दूसरी सवारी पकड़ लेना। यहाँ से स्टेशन कितना दूर है? जब चालक ने कहा कि मुश्किल से 300 मीटर, अरे फ़िर तो पहले स्टेशन छोड़ दो क्योंकि सुबह से कुछ खाया नहीं था। अत: पहले स्टेशन के आसपास मिलने वाले किसी भोजनालय से भोजन करते है उसके बाद आगे देखते है। 


शनिवार, 17 अगस्त 2013

Sandeepnai Aashram, The school of Lord Krishna, Ujjain श्रीकृष्ण-बलराम-सुदामा की शिक्षा स्थली संदीपनी आश्रम, उज्जैन

UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-10                              SANDEEP PANWAR
उज्जैन का अन्तिम व महत्वपूर्ण पर्य़टन स्थल संजीवनी आश्रम देखने के लिये हम मंगलनाथ मन्दिर से सीधी सड़क पर चलते हुए कुछ ही देर में संजीवनी आश्रम पहुँच गये। आज से कई हजार लगभग 5000 साल पहले यहां इसी आश्रम में भगवान श्रीकृष्ण व उनके भाई बलराम और उनके गरीब दोस्त सुदामा ने यहाँ शिक्षा प्राप्त की थी। आज से कुछ सौ वर्ष पहले तक गुरुकुल पद्धति से पढ़ाई होती थी लेकिन अंग्रेजों के भारत आने के बाद कान्वेन्ट ने गुरुकुल की जगह हथिया ली। आजकल गुरुकुल मुश्किल से ही दिखायी देते है जबकि निजी स्कूल हर गली मोहल्ले में दिखाती दे जाता है। गुरुल में रहते समय छात्र को अपने जीवन यापन के लिये भोजन भी गांव से माँग कर लाना होता था। जबकि स्कूलों में जमकर लूट मची हुई है। चलिये स्कूलों के चक्कर में ना पड़ते हुए संदीपनी आश्रम देखने चलते है।



शुक्रवार, 16 अगस्त 2013

Kal Bhairav Temple शराब पीने वाले काल भैरव मन्दिर- उज्जैन

UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-09                              SANDEEP PANWAR
दारु पीने वाली मूर्ति के बारे में सुनते ही मुझे दिल्ली के पुराने किले के साथ लगा हुआ भैरो मन्दिर याद आ गया। दिल्ली के भैरो मन्दिर में शराब चढ़ाई जाती है। उज्जैन की सेन्ट्रल/केन्द्रीय जेल के सामने से होते हुए हम लोग श्रीकाल भैरव मन्दिर जा पहुँचे। इस मन्दिर की विशेष महिमा बतायी गयी है कि इस मन्दिर की मूर्ति को जितना जी करे उतनी शराब पिला दो, मूर्ति भी पक्की पियक्कड़ ठहरी जो बोतल मुँह से लगाते ही बोतल खाली होनी शुरु हो जाती है। पहली बार तो मुझे अपने वाहन चालक की बातों पर विश्वास ही नहीं हुआ था लेकिन मन्दिर के बाहर बिक्री के लिये उपलब्ध शराब देखकर मेरा माथा ठनका कि  कुछ ना कुछ गड़बड़ तो जरुर है।


गुरुवार, 15 अगस्त 2013

Gadh Kalika Temple-Ujjain गढ़ कालिका मन्दिर-उज्जैन

UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-08                              SANDEEP PANWAR
हमारी गाड़ी आगे बढ़ते हुए जिस स्थान पर पहुँची उसे गढ़कालिका मन्दिर कहा जाता है। जिस समय हम यहाँ पहुँचे उस समय दोपहर की आरती चल रही थी। आरती में कई आरती बोली जाती है जिस कारण मैं आरती समाप्त होने के समय ही आरती के पास जाता हूँ। मैंने मन्दिर के चारों ओर घूम-घूम कर मन्दिर को अच्छी तरह देख ड़ाला था। यह मन्दिर भी मराठा शैली का बना हुआ मिला। मराठों के शासन काल में ही इस मन्दिर का निर्माण किया गया होगा। इस मन्दिर को महाशिवरात्रि के कारण फ़ूलों से इतना अच्छी तरह सजाया गया था कि मैं उस सजावट को देखता ही रह गया था।  मन्दिर की आरती समाप्त होने के बाद हमारे साथियों ने वहाँ से आगे चलने का इरादा किया। एक भक्त यहाँ भी मन्दिर में ही कही अटका हुआ था। उसे लेने के लिये फ़िर से एक बन्दा भेजा गया।


मंगलवार, 13 अगस्त 2013

4 Chaar Dhaam mandir-Ujjain उज्जैन का चार धाम झाकियों वाला मन्दिर

UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-06                              SANDEEP PANWAR
चार धाम मन्दिर देखने के लिये सबसे पहले मन्दिर के बाहर बनी दुकान पर जूते-चप्पल उतार कर आगे बढ़े। हम इस मन्दिर को देखते भी नहीं यदि इस मन्दिर के बाहर लगे बोर्ड़ पर यह लिखा ना होता कि विधुत चलित झाँकियाँ का दर्शन करे। चार धाम मन्दिर के प्रांगण में घुसते ही सीधे हाथ पर हरा-भरा छोटा सा मैदान है। अगर हमें कही और ना जाना होता तो इस पार्क में बैठा जा सकता था। मन्दिर देखने के लिये आगे बढ़ चले। मुख्य मन्दिर तक पहुँचे ही थे कि वहाँ पर लगे एक बोर्ड़ से पता लगा कि यहाँ कि झाकियाँ देखने के लिये थोड़ा सा खर्च करना पडेगा। एक बार तो सोचा, छोड़ो झाकियाँ-वाकियाँ। इन मन्दिरों वालों ने कमाई का जरिया बनाया हुआ है। लेकिन फ़िर सोचा चलो 5 रुपये की ही तो बात है। अगर कुछ अच्छा मिला तो 5 रुपये वसूल भी हो जायेंगे।


सोमवार, 12 अगस्त 2013

Harsiddhi Temple सम्राट विक्रमादित्य की आराध्य देवी मन्दिर

UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-05                              SANDEEP PANWAR
सम्राट वीर विक्रमादित्य के नवरत्न दरबार के एकदम नजदीक ही सीधे हाथ पर हरसिद्धी देवी का मन्दिर है। इस देवी मन्दिर को राजा विक्रम की आराध्य कुल देवी भी कहा जाता है। यह मन्दिर देखने में भी काफ़ी शानदार है लेकिन पहली नजर में यह मन्दिर बहुत पुराना नहीं लगता है हो सकता है कि इस मन्दिर का पुननिर्माण कराया गया हो। मन्दिर के बाहर लगे एक शिला पट से पता चलता है कि यह मन्दिर सन 1447 में मराठों ने बनवाया था। मन्दिर के अन्दर बने दीप स्तम्भ भी मराठा शैली के बारे में ही इंगित कर रहे है। तांत्रिक परम्परा में इस हरसिद्धी मन्दिर का विशेष महत्व बताया गया है। हो सकता है कि इसी मन्दिर के योगी ने राजा विक्रम को अपने तंत्रजाल में फ़ँसाकर भूत बेताल को पकड़ लाने का आदेश दिया हो। खैर इतिहास कुछ भी रहा हो, आप यहाँ की यात्रा फ़ोटो के जरिये करते रहिये।


Vikram and Betal (ghost)-Vikram Tekri विक्रम और बेताल भूत वाले राजा विक्रम का दरबार स्थल-विक्रम टेकरी

UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-04                              SANDEEP PANWAR
राजा विक्रम का दरबार स्थल विक्रम टेकरी पहुँचने के बाद कुछ देर आराम किया। इसके बाद वहाँ काफ़ी देर तक अच्छी तरह राजा विक्रम का नवरत्न दरबार स्थल देखते रहे। यहाँ लिखे गये बोर्ड़ से यह जाना कि राजा विक्रम भारत के महान राजा क्यों माने गये है। यह वही राजा जिनके नाम पर भारत का अपना तिथि कैलेन्ड़र चलाया गया था। विक्रम संवत के नाम से जाने जाने वाला कैलेन्ड़र दुनिया का सबसे पहला कैलेन्ड़र है। आज वर्तमान दौर में हम जिस अंग्रेजी कैलेन्ड़र के बारे में जानते है उसका आगमन तो इन राजा के कैलेन्ड़र के बहुत सालों बाद हुआ था। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है आज विक्रम संवत का  2070 वर्ष चल रहा है। जबकि अंग्रेजी कैलेन्ड़र में अभी सन 2013 ही चल रहा है।


शनिवार, 10 अगस्त 2013

Omkareshwar Jyotirlinga Temple ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मन्दिर

UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-03                              SANDEEP PANWAR
आज के लेख में ओमकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की यात्रा करायी जा रही है वैसे मैं इस जगह कई साल पहले जा चुका हूँ लेकिन अपने दोस्त यहाँ पहली बार गये थे। जैसा कि आपको पहले लेख में पता लग ही चुका है कि प्रेम सिंह अपने साथियों के साथ महाशिवरात्रि से दो दिन पहले ही दिल्ली से इन्दौर के बीच चलने वाली इन्टर सिटी ट्रेन से यहाँ पहुँच गये थे। इन्दौर तक उनकी रेल यात्रा मस्त रही। दोपहर के एक बजे उनकी ट्रेन इन्दौर पहुँच गयी थी। यहाँ स्टेशन से बाहर निकलते ही उन्होंने सबसे पहले पेट पूजा करने के लिये केले व समौसा का भोग लगाया, उसके बाद स्टेशन के बाहर से ही ओमकारेश्वर जाने वाली मिनी बस में बैठकर ओमकारेश्वर पहुँच गये। मैंने उन्हे कहा था कि अगर तुम्हे इन्दौर से बड़वाह पातालपानी होकर ओमकारेश्वर रोड़ की ओर अकोला तक जाने वाली मीटर गेज वाली छोटी ट्रेन मिल जाती है तो यह सुनहरा मौका मत छोड़ना, लेकिन अफ़सोस उन्हे वह रेल नहीं मिल पायी। 


शुक्रवार, 9 अगस्त 2013

Mahakaal Jyotiringa Temple-Ujjain महाकालेश्वर-महाकाल मन्दिर उज्जैन

UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-02                              SANDEEP PANWAR
मन्दिर के आसपास बहुत ज्यादा भीड़ थी, उसमें उन्हे कहाँ तलाश करता? सोचा उन्हे फ़ोन ही लगा दूँ कि मैं मन्दिर के सामने वाली गली में ही हूँ। प्रेम सिंह ने फ़ोन पर कहा कि हम भी इसी गली में बनी दुकानों से सामान खरीद रहे है। मन्दिर की तरफ़ आते समय उल्टे हाथ वाली लाईन में हम मिल जायेंगे। मैं उन्हे देखता हुआ मन्दिर की ओर बढ़ता गया। मन्दिर से 100 मीटर पहले ही प्रेम सिंह एन्ड़ पार्टी वहाँ दिखायी दी। उनके माथे पर लगे लम्बे तिलक को देखकर मैं समझ गया कि यह सभी मन्दिर होकर आ चुके है। लेकिन फ़िर भी मैंने कहा कि मन्दिर में दर्शन करके आये कि नहीं। उन्होंने कहा कि हमने तो रात को भी आराम से दर्शन किये थे। सुबह भी पहले ही लाइन में लग गये थे जिससे जल्दी दर्शन हो गये। 


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