बुधवार, 4 सितंबर 2013

Amarkantak fair अमरकंटक नर्मदा के स्नान घाट और मेला

UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-21                              SANDEEP PANWAR
अमरकंटक का नर्मदा उदगम स्थल देखने के बाद स्नान करने की इच्छा बलवत हो उठी, लेकिन पहले सोचा कि बढ़ी हुई दाढ़ी बनवा ली जाये। इसलिये पहले दाढ़ी बनवाई गयी। दाढ़ी बनवाने के बाद कुछ देर तक वहाँ के मेले में घूमता रहा। सुबह का समय था इसलिये आम जनता अपने निजी कार्यों में व्यस्त दिखायी दे रही थी। मेले को बीच में छोड़ कर पहले स्नान घाट जा पहुँचा। स्नान घाट नर्मदा उदगम स्थल के ठीक सामने बना हुआ है। यहाँ पर नर्मदा मन्दिर से निकलने वाला जल वहाँ से निकलकर इस स्नान घाट में प्रवेश करता है। यहाँ जल जिस मार्ग से होकर आता है उसका आकार एक गाय के मुँह जैसा बनाया हुआ है। लेकिन जिस समय मैं यहाँ पर था उस गाय की मूर्ति के मुँह से पानी की एक बून्द भी नहीं निकल रही थी।



मैंने एक स्थानीय बन्दे से पूछा क्यों भाई यह पानी बन्द क्यों किया हुआ है? उसने कहा कि मेले के कारण पानी की निकासी बन्द की हुई है। मेले के दौरान इस पक्के स्नान घाट पर लाखों लोग स्नान करते है जिस कारण पानी बहुत गन्दा हो जाता है मेले के तुरन्त बाद सभी पक्के स्नान की सफ़ाई करनी होती है इसलिये पानी को कई दिन से रोक कर रखा जाता है। ताकि रोके हुए पानी से पक्के घाट की सफ़ाई की जा सके। मेरे मन में भी स्नान करने की इच्छा बलवत हो रही थी इसका मुख्य कारण वहाँ गर्मी लगना था। गर्मी से मुझे परेशानी हो रही थी लेकिन पानी अत्यधिक मटमैला हो चुका था। अमरकंटक क्षेत्र में कई स्नान कुन्ड़ है उनके नाम कबीर सरोवर व पुष्कर सरोवर है|

स्थानीय व आगन्तुक भक्त लोग तो ना जाने कैसे उस गन्दे पानी में घुसे हुए स्नान करने में लगे थे। लेकिन अपुन के बस की इस गन्दे पानी में स्नान करना नहीं था। मुझे सुबह से शरीर में हल्का-हल्का बुखार महसूस हो रहा था। इसलिये स्नान करना भी बहुत जरुरी था। लेकिन गन्दे पानी में बिल्कुल नहीं, चलो आगे चलते है अगर पानी कुछ साफ़ हुआ स्नान किया जायेगा। मैंने उस पक्के घाट को छोड़ दिया और आगे बढ़ चला। आगे जाने पर फ़िर से भिखारियों के झुन्ड़ के बीच से होकर आगे जाना पड़ा। मुझे माँगने वाले भिखारी और माँगने वाले पुजारी बहुत बुरे लगते है। इन्होंने भगवान के नाम को अपना धन्धा बनाया हुआ होता है। ऐसा नहीं कि सभी एक जैसे ही होते है कहते है कि पाँचों अंगुली तो हाथ की भी बराबर नहीं होती है लेकिन होती तो हाथ की है ना, कोई छोटी तो कोई बड़ी।

एक बार फ़िर से उसी मेले में आ घुसा जहाँ से दाढ़ी बनवाकर वापिस गया था। अबकी बार मेले को देखता हुआ आगे चलता रहा। एक हलवाई की दुकान पर गर्मागर्म पकौड़ी तलती हुई देखी तो जीभ ने रस टपका दिया कि नहीं सुबह थोड़ा सा पौहा ही तो खाया था चलो अब पकौड़ी भी खायी जाये। हाँ ना हाँ ना के चक्कर में मैं उस दुकान की मेज पर जा बैठा। उसने एक प्लेट लेकिन गर्मागर्म पकौड़ी लाकर मुझे सौंप दी। पकौड़ी इतनी ज्यादा गर्म थी कि उन्हे खाने के लिये कुछ देर प्रतीक्षा करनी पड गयी। आखिर थोड़ी देर में पकौड़ी खाने लायक ठन्ड़ी हुई तो खाने की शुरुआत कर दी। आज मुझे भले ही हल्का-हल्का बुखार हो रहा था लेकिन पकौड़ी खाने से बुखार का कोई सम्बन्ध नहीं था। पकौड़ी की प्लेट सफ़ाचट करने के बाद दुकान वाले को पैसे दिये बिना मैं वहाँ से चल दिया। मेरे चलते ही दुकान वाला बोला अरे भाई पकौड़ी के पैसे देने कौन आयेगा? मुझे अपनी भूल का पता लगा मैं अपने आप पर बहुत झुंझलाया। मैंने उसके पैसे उसे दिये और आगे बढ़ गया। नहाने के लिये स्नान घाट पर जाना जरुरी था।

आगे जाने पर कच्चा स्नान घाट दिखायी देने लगे। यहाँ पर पानी की विशाल अथाह मात्रा देखकर मेरे माथे पर बल पड़ गये, अभी पिछले लेख में भाई सचिन त्यागी ने पूछा था कि नर्मदा में आरम्भिक स्थल पर तो छोटा सा कुन्ड़ ही है फ़िर आगे चलकर यह विशाल नदी में कैसे बदल जाती है? नर्मदा नदी विंध्याचल और सतपुड़ा पर्वतश्रेणियों के मिलन बिन्दु अमरकंटक से भले ही निकलती हो लेकिन नर्मदा की कुल लम्बाई 1310 किमी बतायी जाती है।  इसकी ढेर सारी सहायक नदियाँ है जिस कारण आगे बढ़ने पर इसमें पानी की मात्रा बढ़ती चली जाती है इसकी सहायक नदियाँ है बजार, शेर, शक्कर, तवा, गंजाल और छोटा तवा आदि प्रमुख है। गंगा से भी ज्यादा पवित्र इस नदी को माना गया है। बताते है कि गंगा भी साल में एक बार अपने पाप धोने यहां आती है?

प्राचीन ग्रन्थों मॆं इसे रेवा कहा गया है। दुनिया के सबसे प्राचीन ग्रन्थ वेद के अलावा अन्य सभी ग्रन्थों में नर्मदा नदी के बारे कुछ ना कुछ विवरण मिल ही जाता है। भारत में यह लम्बाई के मामले में पाँचवे स्थान पर आती है भारत में सिर्फ़ तीन नदी ही ऐसी है जो पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है उनके नाम है नर्मदा, ताप्ती, और माही। भारत में सिर्फ़ 5 नदियों को पवित्र माना गया है जिनके नाम है गंगा, यमुना, गोदावरी, नर्मदा और कावेरी ये नदियाँ स्नान कर पाप धोने लायक मानी गयी है। जबकि भारत में वैसे तो सैकडों छोटी-बड़ी मुख्य व सहायक नदियाँ है जिनमें लोग प्रतिदिन स्नान करते ही रहते है। अब तक मैं भी दर्जनों नदियों में स्नान करने का लुत्फ़ उठा चुका हूँ। जब मैं छोटा था तो पाप धोने वाली बात मेरे मन में रहा करती थी लेकिन अब इतने साल घुमक्कड़ी करने के कारण पाप वाली बात कही पीछे नदियों के पानी में बहने से छूट चुकी है। कुछ दोस्त तो यह भी कहने लगे है कि संदीप भाई तुम्हारे पाप तो माइनस में चल रहे है। अरे फ़िर तो किसी एक आध का मर्ड़र कर देना चाहिए! ताकि सब बराबर हो जाये एक पलड़ा क्यों भारी रखा जाये?

कहते है नर्मदा ही ऐसी नदी है जो कुवारी है अर्थात इसकी शादी का लग्न अभी तक नहीं निकल पाया है। चलो देखते है कोई ढ़ग का नदा (नर्मदा का घरवाला) मिलेगा तो इसके हाथ भी पीले कर देंगे। पुस्तकों में पता लगा कि भगवान शिव के तपस्या में बैठे रहने के दौरान शिव को पसीना आया था जिससे नर्मदा नदी आरम्भ हुई थी। तभी भोलेनाथ ने इस नदी का नामकरण करते हुए कहा था देवी, तुमने मेरे दिल को प्रसन्न कर दिया। इसलिए तुम्हारा नाम आज से नर्मदा हुआ। नर्म का अर्थ है सुख और दा का अर्थ है देने वाली बताया गया है। इसका एक नाम रेवा भी बताया गया है, लेकिन नर्मदा नाम आम जन में सर्वमान्य है।

चलो कहानी को यही नर्मदा के तट पर छोड़ कर आगे बढ़ते है। जैसे ही मैं कच्चे स्नान घाट पर पहुँचा तो देखा कि वहाँ पर सैकड़ों की संख्या में लोग पानी में घुस कर स्नान करने मॆं लगे पड़े है। यहाँ भी पानी का बहाव एकदम बन्द पड़ा था वो तो शुक्र मानों नर्मदा की दर्जनों सहायक नदियों के पानी के कारण नर्मदा आगे चलकर विशाल नदी बन जाती है अगर इसी गन्दे पानी के भरोसे होती तो यह एक तालाब मात्र बनकर रह जाती। मेरा बुखार भी थोड़ा दबाब बनाने लगा था सोचा था कि स्नान हो जायेगा तो कुछ राहत मिलेगी। चलो स्नान आगे चलकर किया जायेगा, मुझे मिलने के लिये अमरकंटक से 150 किमी दूरी से एक दोस्त व उनकी श्रीमती जी बाइक पर आ रहे थे। इनसे मोबाइल पर सम्पर्क बना हुआ था उन्होंने बताया था कि कपिल धारा जल प्रपात स्नान के लिये ठीक रहेगा।

मैंने अमरकंटक के ठहरे हुए पानी में स्नान करने का विचार त्याग दिया था। अमरकंटक के मेले के दौरान वहाँ लगे मौत के कुएँ के पास से गुजरते समय मैंने सोचा कि इस मौत के कुँए के ऊपर चढ़कर आसपास का नजारा देखा जाये तो कैसा रहेगा? लेकिन उसपर चढ़ने से पहले उसके मालिक या पहरेदार से आज्ञा लेनी आवश्यक थी इसलिये सबसे पहले उस मौत के कुँए के मालिक को तलाश करना पड़ा। मैंने उससे कहा “मुझे कुएँ के ऊपर जाकर कुछ फ़ोटो लेने है अगर आप कहे तो क्या मैं ऊपर चला जाऊँ? चूंकि उस समय वहाँ भीड़-भाड़ के नाम पर कोई नहीं था अत: उसने कहा ठीक है चले जाओ लेकिन जल्दी नीचे आ जाना। मैं तो पहले ही बुखार से परेशान हो रहा था उस धूप में वहाँ कितनी देर टिके रहता! मैं लोहे के जीने से होकर ऊपर गया। वहाँ से मेले व नदी का नजारा बड़ा भव्य दिखायी दे रहा था। मैंने वहाँ कई मिनट ठहरने के दौरान चारों ओर के कई फ़ोटो लिये। एक बार अपने घर के पास लोनी बार्ड़र में मीनाक्षी सिनेमा हॉल के सामने लगे सर्कस में यही वाला मौत का कुँआ किसी एक सर्कस में देखा था उसमॆं सिर्फ़ मोटरसाईकिल दौड़ायी गयी थी जबकि यह कुँआ उससे काफ़ी बड़ा था इसमॆं कार भी दौड़ायी जाती है।

मौत के कुएँ को देखने के बाद मैंने अमरकंटक से बाहर आने के इरादे से तेजी से चलना आरम्भ कर दिया था। यहाँ के गुरुद्धारे के आगे से होता हुआ बस अड़ड़े की ओर बढ़ता रहा। आगे आने के बाद मेरी नजर एक लौहार/भूभलिया/पर गयी उसके साथ उसकी परिवार की औरते दे दना-दन लोहे को पीट पीट कर उसको किसी औजार की शक्ल में ढ़ालने जा रही थी। मैं कुछ देर तक खड़ा होकर उन औरतों को देखता रहा कि कितनी हिम्मत की झुझारु औरते है मैं उन्हे काफ़ी देर तक देखता रहा। उसके बाद सीधे उस चौराहे पर जाकर रुका जहाँ से सीधे हाथ बस अड़ड़ा जा सकते है। पीठ पीछे अमरकंटक से आया था। उल्टे हाथ वाला मार्ग छत्तीसगढ़ व यही मार्ग आगे सीधे चलकर कपिल मुनी धारा जलप्रपात के लिये चला जाता है। चलिये स्नान करने की बहुत जल्दी हो रही है पहले कपिल धारा चलते है जो लगभग 40 मीटर की ऊँचाई से गिरता हुआ जल प्रपात है। (अमरकंटक यात्रा अभी जारी है।) 


जबलपुर यात्रा के सभी लेख के लिंक नीचे दिये गये है।


अमरकंटक यात्रा के सभी लेख के लिंक नीचे दिये गये है।

18-अमरकंटक की एक निराली सुबह
19-अमरकंटक का हजारों वर्ष प्राचीन मन्दिर समूह
20-अमरकंटक नर्मदा नदी का उदगम स्थल
21-अमरकंटक के मेले व स्नान घाट की सम्पूर्ण झलक
22- अमरकंटक के कपिल मुनि जल प्रपात के दर्शन व स्नान के बाद एक प्रशंसक से मुलाकात
23- अमरकंटक (पेन्ड्रारोड़) से भुवनेशवर ट्रेन यात्रा में चोर ने मेरा बैग खंगाल ड़ाला।






गर्मागर्म पकौड़ी


मौत का कुँआ

मौत के कुँए में दौड़ने वाले वाहन





खाली पड़ा मेला बाजार



गुरुद्धारा

भूभलिया




भारत की प्रमुख नदियाँ

नर्मदा की पूरी कहानी


5 टिप्‍पणियां:

SACHIN TYAGI ने कहा…

जय माँ नर्मदा की।भाई सेहत का ख्याल रखा करो।नर्मदा नदी के बारे मे बताने के लिए आभार।

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

प्रदूषण से बचना चाहिए॥

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

प्रदूषण से बचाना चाहिए ऐसे स्थानों को।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

पर्यटन के साथ साथ रोचक जानकारी

Unknown ने कहा…

mai narmada parikrama k aas paas ho rahe atikraman or vyaparikaran k sakht khilaf hu, perh kut rahe hai, dukane bun rahi hai, paharh kaat rahi rahi sarkar or bahut kuch kharab ho raha hai, jo prakritik saundarya pehle thi vo ab nahi rahi...bahut kharab ho raha hai..

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