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सोमवार, 11 अप्रैल 2011

बाइक से लाल किला से लेह-लद्दाख यात्रा भाग 5 Chang la- Pangong tso/lake

लेह बाइक यात्रा-
अभी तक आप मेरे साथ घूम चुके हो, दिल्ली से मनाली, रोहतांग दर्रा(13050), बार्रालाचा दर्रा(16500), सरचू, पाँग, तंगलंगला दर्रा(17582), उपशी, लेह, खर्दूंगला दर्रा(18380), अब बारी है, चाँगला दर्रा(17586)

आज पाँचवे दिन सुबह आराम से उठे, सब नहा धो, मेकप-सेकप कर, आज की मंजिल पेंन्गोंग सो (लद्दाखी लोग झील/लेक को सो के नाम से पुकारते है) की ओर चल दिये। उपशी से 15 किलोमीटर चलते ही, लेह से 35 किलोमीटर पहले, कारु नामक जगह आती है। यहाँ से दाये/सीधे हाथ की ओर एक रास्ता शक्ति नाम की जगह पहुँच जाता है, कारु से यहाँ तक ठीक-ठाक 15 फुट का मार्ग है, भीड के नाम पर कभी-कभार ही एक-आध इन्सान व गाडी नजर आ जाती थी।

तिडके का सड़क किनारे एक बोर्ड के सामने का फोटो,

मंगलवार, 5 अप्रैल 2011

बाइक से लाल किला से लेह-लद्दाख यात्रा भाग 4 Pang-Tanglang la pass-Upsi-Khardung la Pass, World highest motarable road

लेह बाइक यात्रा-
ट्रक ड्राइवर हमारी ही उम्र का एक मस्त इन्सान रहा। जिस अनाम जगह हम रुके थे, वहाँ से तंगलंग ला (दर्रा) नजर आ रहा था। टैंट वाले ने हमें बताया कि तंगलंग ला ऊंचाई में बारालाचा ला (पहाड़ी लोग दर्रे को ला भी कहते है) से भी ऊंचा है, किन्तु यहाँ बर्फ़ बारालाचा दर्रे के मुकाबले 10% भी नहीं है। ऐसा होने की वजह तंगलंगला दर्रा में चलने वाली तेज हवाये है, जिससे यहाँ बर्फ़ ज्यादा दिनों तक नहीं टिक पाती हैं। हम ऐसी जगह पर थे, जहाँ से हमें 20-25 किलोमीटर तक का मार्ग ऊपर जाता हुआ दिखाई दे रहा था। ट्रक वाले ने भी जमकर ट्रक भगाया, यहाँ से चलते ही जबरदस्त धूल मिली, क्योंकि रास्ते में कार्य चल रहा था। किसी तरह धूल पार की, तो आ गई चढाई, जिस पर आसानी से ट्रक का पीछा नहीं किया जा रहा था। ट्रक लगभग खाली ही था, ट्रक में मात्र दो टन आटा ही था। वो मोडों पर भी स्पीड में मोड रहा था, जिससे हमें डर लग रहा था, कि तभी एक मोड पर चार ट्रक लाइन में मैट्रो की तरह जाते हुए मिले, ये चारों वजन से लदे हुए थे, जिससे इनकी स्पीड भी कम थी। हमारी बाइक तो बराबर में से आगे निकल गयी, पर हमारे साथ वाला ट्रक पीछे रह गया। हमने इन्हें कहा, कि कोई जल्दी नहीं है, आराम से आओ।

सामने ही हम लोग रुके हुए थे, 

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