UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-29 SANDEEP PANWAR

जगन्नाथ पुरी के मुख्य मन्दिर से पुरी का समुन्द्र तट जहाँ मैं पहुँचा था वह लगभग 3-4 किमी की दूरी पर है। मैंने एक रिक्शे वाले से बात की उसने 50 रुपये माँग लिये। एक ऑटो वाले को रोका उसने भी 50 रुपये कहे। पचास रुपये फ़्री में तो आते नहीं है मेरे पास समय की कोई कमी थी ही नही, इसलिये मैंने पैदल ही पुरी के समुन्द्र तट की ओर चलना आरम्भ किया। चिल्का से रिक्शा में आते समय जिस चौक पर मैं रिक्शा से उतरा था वह मुझे अच्छी तरह याद था। मैं सीधा उसी तरफ़ चल दिया। रथ यात्रा मार्ग काफ़ी चौड़ा है जिससे भीड़-भाड़ होने की गुंजाइस समाप्त हो जाती है। चौराहे तक आते हुए मैंने यहाँ के बाजार को अच्छी तरह देख ड़ाला था। एक जगह गन्ने का रस बेचा जा रहा था अपुन तो मीठे व आइसक्रीम के दीवाने जन्म से ही है अत: रस के दो गिलास ड़कारने के बाद आगे चलना शुरु किया। चौराहे तक पहुँचने तक सूर्य महाराज सिर पर विराजमान हो चुके थे। अब यहाँ से समुन्द्र तट की ओर जाने वाले कालेज नामक मार्ग पर चलना शुरु कर दिया।
