सीरिज गंगौत्री-गौमुख
4. TREKKING TO GANGOTRI-BHOJBASA-CHEEDBASA भाग 4 गंगौत्री-भोजबासा-चीडबासा तक ट्रेकिंग
भोजबासा में एक दुकान पर मैगी खाकर, हमारी पुलिस चौकडी फ़िर से गौमुख यात्रा के लिये आगे बढ चली। सामने ही गौमुख गलेशियर तक हमें एकदम सीधा दिखाई दे रहा था। यहाँ से आगे का ट्रेकिंग मार्ग ज्यादा कठिन नही है। भोजवासा से आगे चलते हुए हम एकदम सीधे घाटी में नहीं उतरे थे, क्योंकि घाटी में उतर कर दुबारा ऊपर चढना पडता जो उस थकावट में बहुत तकलीफ़ देय होता। इस कारण हमने थोडा सा लम्बा मगर आसान मार्ग अपनाया था जो पहाड के समानान्तर दिखाई दे रहा था। कोई एक किमी चलने के बाद इस मार्ग पर पर कच्ची पगडन्डी के स्थान पर पत्थरों का बना हुआ मार्ग आ जाता है यह मार्ग लगभग एक-डेढ किमी से ज्यादा का था। जिसपर पैदल चलने में बहुत परॆशानी आ रही थी। पत्थर मार्ग में बिछाये जरुर गये थे लेकिन उनमें कुछ भरा नहीं गया था जिससे उनके बीच में मेरा पैर कई बार अटक गया था। जिससे मुझे कई बार झटका सा लगा था। फ़िर भी ज्यादा परेशान हुए बिना, हम वह पथरीला मार्ग भी पार कर गये। पथरीले मार्ग के बाद कुछ दूर तक मार्ग बहुत ही आसान था।
जैसे ही आसान मार्ग समाप्त हुआ तो हमें पता लग गया कि अब आफ़त आने वाली है। देखने में तो मार्ग बहुत आसान था लेकिन वहाँ उल्टे हाथ वाला पहाड बहुत ही कच्चा था। कच्चे पहाड पर ढलान भी बेहद तीखी थी जिससे हर पल यह डर बना रहता था कि कहीं यह पहाड खिसक ही ना जाये। यह कच्चा पहाड मुश्किल से एक किमी ही था बल्कि उससे भी कम ही होगा, लेकिन यात्रा का यह छोटा सा टुकडा आज भी बेहद ही डरावना बीतता है। इस कच्चे पहाड पर पगडन्डी के एकदम किनारे पर कुतुबमीनार की तरह दिखने वाली मिट्टी व गोल-गोल पत्थर से बनी हुई कच्ची मीनारे थी, ये मीनारे देखने में जितनी हसीन लग रही थी उसके उलट यह उतनी ही डरावनी खूंखार साबित हो सकती थी। यहाँ वापसी में एक जगह बहुत बुरी तरह फ़ँस गये थे। जाते समय तो फ़िर भी हम आसानी से इसे पार कर गये थे लेकिन वापसी में इसने हमारी जान पर बना दी थी।
जैसे ही आसान मार्ग समाप्त हुआ तो हमें पता लग गया कि अब आफ़त आने वाली है। देखने में तो मार्ग बहुत आसान था लेकिन वहाँ उल्टे हाथ वाला पहाड बहुत ही कच्चा था। कच्चे पहाड पर ढलान भी बेहद तीखी थी जिससे हर पल यह डर बना रहता था कि कहीं यह पहाड खिसक ही ना जाये। यह कच्चा पहाड मुश्किल से एक किमी ही था बल्कि उससे भी कम ही होगा, लेकिन यात्रा का यह छोटा सा टुकडा आज भी बेहद ही डरावना बीतता है। इस कच्चे पहाड पर पगडन्डी के एकदम किनारे पर कुतुबमीनार की तरह दिखने वाली मिट्टी व गोल-गोल पत्थर से बनी हुई कच्ची मीनारे थी, ये मीनारे देखने में जितनी हसीन लग रही थी उसके उलट यह उतनी ही डरावनी खूंखार साबित हो सकती थी। यहाँ वापसी में एक जगह बहुत बुरी तरह फ़ँस गये थे। जाते समय तो फ़िर भी हम आसानी से इसे पार कर गये थे लेकिन वापसी में इसने हमारी जान पर बना दी थी।