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शुक्रवार, 21 अप्रैल 2017

Madmaheshwar trek- An Incomplete journey मध्यमहेश्वर की अधूरी यात्रा

बारिश का पानी या बर्फ इन खेतों में भरा हो तो असली सीढी दिखाई दे


दोस्तों, इस लेख की यात्रा दिनांक 11-05-2014 को की गयी थी। वैसे तो इस लेख को लिखने का कोई मन नहीं था क्योंकि यह मेरी पहली अधूरी यात्रा थी। अधूरी सूचना के आधार पर ही यह यात्रा करने की कोशिश की गयी थी। अधूरी सूचना वाली बात को ही इस लेख को लिखने का कारण मान कर, मैं यह लेख लिख रहा हूँ। आजकल सोशल मीडिया फेसबुक आदि पर कुछ लोग यात्राओं के बारे में सूचना देते रहते है कि आज इस जगह का मार्ग बन्द हो गया है या खुल गया है। आज इस धाम का कपाट खुल गया है। ऐसी ही एक सूचना को देख मैं घर से निकल पडा था। इस यात्रा में मेरे साथ क्या-क्या बीती वही सब कुछ इस लेख में समाहित करने की कोशिश की गयी है।
ऊखीमठ- मध्यमहेश्वर की अधूरी यात्रा की कहानी UKHIMATH & Madhyamaheswar an Incomplete journey.  

रविवार, 8 जनवरी 2017

Travel to Baratang via Jarawa tribal area पोर्ट ब्लेयर से जरावा आदिमानव क्षेत्र की यात्रा

ऐसी खूबसूरती पूरे अंडमान में बिखरी हुई है।


अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पोर्ट ब्लेयर टापू की दक्षिण दिशा में चिडिया टापू एक सुन्दर स्थान है। जिसे आपने इससे पहले वाले लेख में देखा। आज चलते है नंग धडंग रहने वाले जारवा इंसान की ओर जो आज भी आदिमानव युग की याद दिलाते है। आज की यात्रा जारवा आदिमानव की ओर चलते है। यह आदि मानव युग के आदम और हव्वा की तरह ही अपना जीवन जीते है। इस यात्रा को शुरु से पढना चाहते हो तो यहाँ चटका लगाये और आनन्द ले।
अंडमान निकोबार का JARAWA TRIBAL RESERVE जारवा आदिमानव जनजाति-
आज जो यात्रा होने वाली है वो अन्डमान के सबसे खतरनाक इलाके से होकर जायेगी। अंडमान में एक ऐसी आदिमानव प्रजाति रहती है जो आज भी नंग-धडंग होकर अपना जीवन बिताती है। इस मानव प्रजाति में क्या बच्चा, क्या बडा, क्या लडकी, क्या बुढ्ढी, क्या जवान सबके सब बिन कपडों के रहते है। बिन कपडों के मतलब, तन पर एक भी कपडा धारण नहीं करते है। यहाँ तक की चडडी/निक्कर आदि भी नहीं पहनते है। चलो देखते है, आज इस प्रजाति के दो चार प्राणी हमें दर्शन देंगे या नहीं? इस जनजाति को जारवा (Jarawa) जनजाति के नाम से पुकारा जाता है। ये जिस क्षेत्र में पाये जाते है उसे “JARAWA TRIBAL RESERVE” कहते है। वहाँ बिना अनुमति आम नागरिकों का जाना मना है। हम सरकारी बस से इस इलाके की यात्रा कर रहे है अंडमान की जारवा जनजाति इलाके को पार करने वाली लम्बी दूरी की सरकारी बस के टिकट पहचान पत्र के बिना नहीं दिये जाते है। इसलिये सरकारी बस में यात्रा करने वालों को यह इलाका पार करने के लिये अधिकारियों से पूर्व अनुमति लेनी की आवश्यकता भी नहीं होती है। यदि आप अपने या किराये के वाहन से यहाँ इस चैक पोस्ट से आगे जाओगे तो आपको फार्म पर अपनी पूरी जानकारी भरकर उसके साथ पहचान पत्र की प्रतिलिपि भी साथ लगानी पडेगी। तभी आपको इस इलाके से होकर आगे जाने दिया जा सकता है।
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