चिन्दी आने से पहले कई लेख चिन्दी के बारे में देखे हुए थे। मेरे पास एक बड़ा सा बक्सा है जिसमें भारत की तो शायद ही कोई जगह होगी जिसकी जानकारी मेरे पास नहीं होगी। दुनिया के ज्यादातर देशों की घुमक्कड़ी वाली जानकारी भी मेरे खजाने में मौजूद है। बताऊँगा कभी उसके बारे में एक दो लेख में, यदि मौका लगा तो। आज पहले चिन्दी से निपट लेते है। बस से उतरते ही सामने एक मन्दिर दिखाई दिया। सबसे पहले इसी मन्दिर पर अपना हमला हो गया। यहाँ भी वही निर्माण कार्य वाली बात प्रगति पर थी। इस मन्दिर में देखने लायक जो कुछ था उसका फ़ोटो हमने ले लिया था। यह मन्दिर चिन्दी माता मन्दिर के नाम से जाना जाता है। इस मन्दिर को देखते समय मन में विचार आ रहे थे कि हिन्दू धर्म में ही क्यों दे दना-दन भगवान पैदा कर दिये जा रहे है। इस मन्दिर की बनावट व नक्काशी अन्य सभी मन्दिरों की तरह लाजवाब बनायी गयी थी। अभी तो लकड़ी पर पालिश आदि भी नहीं हुई थी लकड़ी पर पालिश के बाद दिखने वाली चमक अलग ही दिखायी देती है। पहाड़ों में अब बर्फ़ भले ही हर जगह ना गिरती हो, लेकिन बारिश तो हर जगह हो सकती है, इसलिए घर हो या मन्दिर सभी की छत ढ़लावदार बनाई जाती है।
यह चिन्दी वाला मन्दिर है। |