UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-30 SANDEEP PANWAR
पुरी से दिल्ली की पुरुषोत्तम एक्सप्रेस ट्रेन रात के नौ बजे की थी इस तरह मेरे पास कई घन्टे खाली थे। सबसे पहले एक खाली प्लेटफ़ार्म देखकर उस पर मोबाइल चार्जिंग का ठिकाना तलाश किया। अब दो रात+एक दिन तक ट्रेन में ही रहना था इसलिये मोबाइल चार्ज करना बहुत जरुरी था। जहाँ मैं बैठा हुआ था उसके सामने ट्रेन से आया हुआ काफ़ी सारा सामान पड़ा हुआ था। घन्टे भर बाद उस सामान को उठाने वाले लड़के वहाँ पहुँच गये। रेलवे में अपना सामान भेजते समय लोग सोचते होंगे कि हमारा सामान सुरक्षित पहुँच जायेगा। मैंने यहाँ लोगों के सामान की दुर्दशा होते हुए देखी। सबसे पहले सामान ढ़ोने वालों ने कुछ पेटियाँ वहाँ से हटायी, ये लोग इतनी लापरवाही से सामान पटक रहे थे कि उनमें से दो पेटियाँ वही उधेड़ दी। उन पेटियों में मेडिकल चिकित्सक काम मॆं आने वाले इन्जेक्सन रखे थे। ऐसा ही वाक्या इन्होंने एक मन्दिर की घन्टा बजाने वाली मशीन के साथ किया। बीच में जब इन्हे खाली समय मिलता था तो मैंने एक बन्दे से कहा कि इतनी लापरवाही से लोगों का सामान क्यों पटकते हो? उसने टका सा जवाब दिया कि यह सामान भुवनेश्वर तक जाना है रेलवे वाले इसे हमें तंग करने के लिये पुरी उतरवाते है यहाँ से दुबारा दूसरी ट्रेन में भरकर भुवनेश्वर वाली गाड़ी में लादना पड़ता है। जब लोग सामान टूटने की शिकायत करेंगे तो उनका सामान यहाँ नहीं आयेगा।