भटवारी होते हुए हम रात में लाटा गाँव पहुँच गये थे। हमने यही रात्रि विश्राम भी किया। इसी गांव से केदारनाथ पैदल जाने वाले यात्री, गंगा नदी पर बने झूला पुल को पार करते हुए 15 किलोमीटर दूर कठिन चढाई पर बेलक नाम के छोटे से बुग्याल में पहुंच कर दोपहर में आराम करते है। हमने भी यह झूला पार कर बेलक के लिये प्रस्थान कर दिया था। कुछ दूर तक तो मार्ग ठीक-ठाक चढ़ाई वाला था, लेकिन उसके बाद जो चढ़ाई शुरु होती है, उसकी पूछो मत, सबकी हवा खराब थी, हर कोई पसीने से तर बतर हो गया था। रही सही कसर खून पीने वाली जौंक ने कर दी थी। जैसे ही जौंक वाला इलाका शुरु हुआ, वैसे ही सभी की चलने की गति अप्रत्याशित रुप से तेज हो गयी थी। किसी तरह बेलक तक पहुँचे थे। बेलक पहुँचने से पहले एक जगह खिचड़ी वाला भण्ड़ारा लगा हुआ था, पहले उस भण्ड़ारे जम कर खिचड़ी खायी गयी थी।
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गुरुवार, 14 फ़रवरी 2013
Ganga bridge Lata, Belak, Budhakedar, to bhairav chatti गंगा पुल से बेलक, बूढ़ा केदार होते हुए भैरव चट्टी तक।
गोमुख से केदारनाथ ट्रेकिंग/पद यात्रा-4
भटवारी होते हुए हम रात में लाटा गाँव पहुँच गये थे। हमने यही रात्रि विश्राम भी किया। इसी गांव से केदारनाथ पैदल जाने वाले यात्री, गंगा नदी पर बने झूला पुल को पार करते हुए 15 किलोमीटर दूर कठिन चढाई पर बेलक नाम के छोटे से बुग्याल में पहुंच कर दोपहर में आराम करते है। हमने भी यह झूला पार कर बेलक के लिये प्रस्थान कर दिया था। कुछ दूर तक तो मार्ग ठीक-ठाक चढ़ाई वाला था, लेकिन उसके बाद जो चढ़ाई शुरु होती है, उसकी पूछो मत, सबकी हवा खराब थी, हर कोई पसीने से तर बतर हो गया था। रही सही कसर खून पीने वाली जौंक ने कर दी थी। जैसे ही जौंक वाला इलाका शुरु हुआ, वैसे ही सभी की चलने की गति अप्रत्याशित रुप से तेज हो गयी थी। किसी तरह बेलक तक पहुँचे थे। बेलक पहुँचने से पहले एक जगह खिचड़ी वाला भण्ड़ारा लगा हुआ था, पहले उस भण्ड़ारे जम कर खिचड़ी खायी गयी थी।
भटवारी होते हुए हम रात में लाटा गाँव पहुँच गये थे। हमने यही रात्रि विश्राम भी किया। इसी गांव से केदारनाथ पैदल जाने वाले यात्री, गंगा नदी पर बने झूला पुल को पार करते हुए 15 किलोमीटर दूर कठिन चढाई पर बेलक नाम के छोटे से बुग्याल में पहुंच कर दोपहर में आराम करते है। हमने भी यह झूला पार कर बेलक के लिये प्रस्थान कर दिया था। कुछ दूर तक तो मार्ग ठीक-ठाक चढ़ाई वाला था, लेकिन उसके बाद जो चढ़ाई शुरु होती है, उसकी पूछो मत, सबकी हवा खराब थी, हर कोई पसीने से तर बतर हो गया था। रही सही कसर खून पीने वाली जौंक ने कर दी थी। जैसे ही जौंक वाला इलाका शुरु हुआ, वैसे ही सभी की चलने की गति अप्रत्याशित रुप से तेज हो गयी थी। किसी तरह बेलक तक पहुँचे थे। बेलक पहुँचने से पहले एक जगह खिचड़ी वाला भण्ड़ारा लगा हुआ था, पहले उस भण्ड़ारे जम कर खिचड़ी खायी गयी थी।
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