रामपुर में ये दूरी का बोर्ड एक दीवार पर बना हुआ था।
रामपुर में मजे से सारी रात पंखे के नीचे गुजारने के बाद आज बारी थी, घर की ओर जाने की दिल्ली से रामपुर तक आने के लिये शिमला होते हुए आना होता है, व वापसी भी शिमला होते हुए ही जाया जाता है, लेकिन मैं ठहरा कुछ अलग खोपडी का इंसान अरे जब वाहन अपना, चालक हम स्वयं तो फ़िर क्यों बसों की सवारियों की तरह लाचार होकर, उन मार्गों से ही वापस जाया जाये जहाँ से हम आये थे जबकि हमारे पास दूसरे विकल्प भी हो तो। तो जी मेरी इस मार्ग से जाने की राय तीनों ने मानी, वैसे दो तो बेचारे हमारे साथ मौज-मस्ती के लिये थे, मार्ग से उन्हे कोई लेना देना नही था। मार्ग कि चिंता तो दो को ही थी, वो भी कुछ खास नहीं थी। हमने यहाँ आने से पहले नक्शा खोल के भी देख लिया था।
रामपुर में ये पुल नदी के दोनों ओर शहर में आने जाने के लिये बना हुआ है।
शाम को तो सब नहाये थे ही फ़िर भी सब सुबह नहा धो कर तैयार हो गये थे। समय वही पुराना 7 बजने वाले थे, जब यहाँ से चले तो सामने ही एक दीवार पर दूरी दर्शाने वाला बोर्ड था। रामपुर काफ़ी बडा शहर है, अत: हमने यहाँ से ही अपनी बाइक में पेट्रोल लेना उचित समझा, तो जी हम चल दिये पेट्रोल पम्प की तलाश में, ये दो-तीन किलोमीटर का शहर पार हो गया पर हमें पम्प नहीं मिला, जब एक जीप वाले से पूछा कि भाई पेट्रोल पम्प कहाँ है? वो उल्लू की पूँछ पम्प तो बताने से रहा बल्कि हमारे लठ देखकर बोला कि पहले गन्ना खिलाओ तब बताऊँगा कि पेट्रोल पम्प कहाँ है, जब उसके मुँह के आगे लठ अडा दिये तो उसकी आँखे फ़टी की फ़टी रह गयी कि गन्ने लठ कैसे हो गये। खैर हमें जब पम्प नहीं मिला तो हम वापस शिमला की ओर चल दिये, रामपुर से 10 किलोमीटर पहले एक पम्प आता है। यहाँ से अपनी बाइक की टंकी फ़ुल करा कर आगे की यात्रा पर चल दिये।