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शनिवार, 12 जनवरी 2013

Let's go Goa आओ गोवा चले।

गोवा यात्रा-भाग-01
GOA-गोवा-गोवा-गोवा। गोवा जाने का भूत कई महीनों से सिर चढ़कर बोल रहा था इस साल गोवा जरुर जाना है इस कारण कई महीने पहले से ही यहाँ जाने के लिये पक्का विचार बनाया हुआ था। अब गोवा जाना हो और दिल्ली की ठन्ड से बचने का अवसर भी साथ हो तो इससे बेहतरीन बात और क्या हो सकती थी? गोवा जाने और वहाँ जाकर ठहरने के लिये कौन सा साधन सस्ता व उचित रहेगा, पहले इस बात पर विचार किया गया तो सब मिलाकर यह  पाया गया कि YHAI यूथ हास्टल ऐसोसिएसन इन्डिया के पैकेज के अन्तर्गत गोवा घूमने का अवसर सबसे उचित लग रहा था। जिसे बुक करने के लिये कमल को गोवा यात्रा अग्रिम बुकिंग के लिये दी जाने वाली राशि कई महीने पहले ही सम्पूर्ण राशि अग्रिम दे दी गयी थी। लेकिन जिस बात का ड़र था आखिरकार वही हुआ। मैंने गोवा को साईकिल पैकेज से देखने का सोचा हुआ था। जबकि कमल ने उसे बुक करने के लिये इतनी देर कर दी कि उसकी बुंकिग ही बन्द हो गयी। आखिरकार दिसम्बर माह की पहली तारीख को जाकर कमल ने गोवा यात्रा का दूसरा पैकेज बुक कर दिया, लेकिन यहाँ भी एक गड़बड हो गयी कि कमल ने जो पैकेज बुक किया था वह पैकेज साइकिलिंग का ना होकर ट्रेंकिग वाला था। ट्रेकिंग से अपुन को तो कोई समस्या नहीं थी। इससे एक बात पर असर पड रहा था कि साइकिल से हम उतने ही दिनों में ज्यादा गोवा देख सकते थे जबकि ट्रेकिंग करते समय उतना गोवा देखना मुमकिन नहीं था।
दिल्ली की बस का दोपहर में एक फ़ोटो।

बुधवार, 21 सितंबर 2011

पौंटा साहिब गुरुद्धारा से दिल्ली तक


देख लो हथनीकुण्ड बैराज जाने का मार्ग बोर्ड के मोड पर खडे होकर भीगे हुए कपडे दिखाये जा रहे है।

हमारी यह श्रीखण्ड महादेव यात्रा आज अन्तिम (समाप्ति) भाग 14 तक आ पहुँची है। 
अब तक हम दिल्ली (DELHI) से पिन्जौर गार्डन (PINJORE GARDEN, शिमला (SHIMLA), कुफ़री (KUFRI), नारकण्डा (NARKANDA), सैंज (SAINJ), जलोडी जोत (JALORI PAAS), रघुपुर किला (RAGHUPUR FORT), सरेउलसर झील (SAROLSAR LAKE), अन्नी (ANNI), रामपुर बुशहर (RAMPUR BUSHAHR), बागीपुल (BAGHIPUL), जॉव (JAON), सिंहगाड (SINHAGAD), थाचडू (THACHADU), काली घाटी (KALI GHATI, काली कुंड (KALI KUND), भीम डवार (BHEEM DWAR), पार्वती बाग (PARVATI BAGH), नैन सरोवर (NAIN SAROVAR), भीम शिला (BHEEM SHILA), एवं श्रीखण्ड महादेव दर्शन (SRIKHAND MAHADEV DARSHAN) करने के बाद वापसी में रामपुर (RAMPUR) से रोहडू (ROHRU), त्यूणी (TUNI), चकराता(CHAKRATA), टाईगर फ़ाल (TIGER FALL), कालसी (KALSI), सम्राट अशोक का शिलालेख (ASHOK SHILALEKH), विकास नगर (VIKAS NAGAR), हर्बटपुर (HERBERTPUR), आसन्न बैराज (AASAN BAIRAJ) यमुना पुल (YAMUNA RIVER BRIDGE) होते हुए यहाँ श्री पौंटा साहिब गुरुद्धारे (PAONTA SAHIB GURUDWARA) तक आ पहुँचे है। 
यहाँ से अब सिर्फ़ सहारनपुर (SAHRANPUR), शामली (SHAMLI), कांधला (KANDHLA), बडौत (BARAUT), बागपत (BAGHPAT), खेकडा (KHEKRA), लोनी (LONI), होते हुए दिल्ली (DELHI) तक जाना है। जो यहाँ से सिर्फ़ 235 किमी दूर है अगर अम्बाला से जायेंगे तो 305 किमी जाना होगा।   

पहाड समाप्त होते ही कुछ आगे जाने पर हथनीकुण्ड बैराज जाने का मार्ग भी आता है।

इस यात्रा को शुरु से देखने के लिये यहाँ चटका लगाये।


शनिवार, 16 जुलाई 2011

CIVIC CENTRE सिविक सेन्टर

दिल्ली नगर निगम का मुख्यालय "सिविक सेन्टर" मात्र नाम नहीं है, बल्कि एक पहचान है, जिस पर दिल्ली को इसकी शानौ-शौकत पर नाज है, ये दिल्ली की सबसे विशाल व ऊंची इमारत है। यह इमारत मात्र अठाईस मंजिल जमीन से ऊपर है, व तीन मंजिल जमीन के नीचे भी है, जिसमें जमीन के नीचे केवल पार्किंग है, 101 मी ऊँची इमारत है। यह इमारत नई दिल्ली रेलवे व मेट्रो स्टेशन के पास ही है। 


सडक से लिया गया फ़ोटो है।

ये कहना तो बेकार है कि ये कहाँ-कहाँ से दिखाई दे जाती है, अगर मौसम साफ़ है तो आप दिल्ली के लगभग सौ किलोमीटर लम्बे रिंग रोड पर, बनी किसी भी ऊंची बिल्डिंग से इसे देख सकते हो, ये इमारत पूरे पाँच साल में बन कर तैयार हुई है, और इसका बजट था, केवल 600 सौ करोड रुपये बनाने का, दिल्ली नगर निगम को तीन भागों में विभाजित करने का कार्य प्रगति पर है, उसके बाद देखते है, कि यह स्थल किसका कार्यालय बना रहता है।  इस इमारत पर दिल्ली सरकार की नजर लगी हुई है, और भविष्य में सम्भव भी है, कि यह दिल्ली सरकार के मुख्यालय में बदल जाये।

 इस ईमारत में छोटे-छोटे कमरे ना होकर, बडॆ-बडे विशाल हॉल है, जिनमें बैंक की तरह, कार्य करने के स्थल बनाये हुए है। पूरी इमारत ही पूर्णतय: वातानुकूलित है, चाहे लिफ़्ट हो या गैलरी, हर कही मौसम की मार से बचे रहते है। दिल्ली नगर निगम में कुल सवा लाख कर्मचारी कार्य करते है, जिस कारण यह विश्व का सबसे बडा नगर निगम भी है।


ये वाला भी,

सोमवार, 14 फ़रवरी 2011

दिल्ली का जंगल, Forest in Delhi


मैं ड्यूटी पर दोपहर में लंच करके बैठा ही था। कि सोचा चलो आज सामने वाले वन में घूम कर आते हैं। जबकि मैं यहां पर पांच साल से काम कर रहा हूं, लेकिन कभी यहां जाने का ख्याल ही मन में नहीं आया | मेरा कैमरा हाथ में देख कर मेरे साथी बोले "अरे भाई किधर चले" मैं बोला चलो आज कुछ दिखा कर लाता हूं। वे बोले पहले ये बताओ कि कितना समय व पैसा लगेगा मैंने कहा "कंजूस के साथ हो तो पैसा की चिन्ता काहे करते हो" तथा बात रही समय की तो सिर्फ़ एक घंटा लगेगा इतना सुनकर मेरे साथ तीन  साथी भी चल दिये। मैं उन्हे लेकर २०० मीटर दूर जंगल कम पार्क में ले गया। यह जंगल हिंदुराव अस्पताल के एकदम बराबर में हैं।

पहला फोटो हमारे कार्यालय का है।

यह फोटो हिंदुराव अस्पताल जाने वाली सडक का हैं।

ये आ गया जंगल का प्रवेश द्वार।

लो जी पडोस के जंगल के नजारे।

अरे यहां तो एक झील भी हैं।

ये लो जंगल है तो जंगली जानवर भी हैं।

पानी का स्रोत भी है।

चल भाई पेड पर चढ़ जा।

मैं बन्दर का फोटो खीचना चाहता था पर बन्दर खिचवाना  ही ना चाह रहा  था। मैं पीछे-पीछे बन्दर आगे-आगे।  मैं भी फोटो खीच कर ही माना ।

ये देखो 25 फुट का केक्टस हमने पहली बार देखा है |



  (फोटो सारे डिलीट हो गए थे ये मोबाइल से खीचे है, जब भी मौका मिला फिर खींच लाऊंगा )

                                            





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