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01- दिल्ली से पोवारी तक kinner Kailash trekking
अंधेरा होते-होते हम वन विभाग के उसी कमरे तक
पहुँच गये थे जहाँ कल वाली रात बितायी थी। आज पूरे दिन की खतरनाक लेकिन यादगार
ट्रेकिंग करने के उपराँत कल वाली जगह पहुँचना राहत की बात थी। यहाँ से सुबह ठीक 6 बजे चले थे आगे के जटिल मार्ग को देखते हुए हमने सोचा था
कि हमें रात गुफ़ा तक आने में ही हो जायेगी, लेकिन हम उम्मीद से ज्यादा चले। तेज
चलने के सिर्फ़ दो कारण मेरी समझ में आते है कि इस यात्रा में हम सिर्फ़ दो ही बन्दे
थे यदि ज्यादा होते तो शायद गुफ़ा पर ही रुकना पड़ सकता था। लेकिन पैदल चलते समय
राकेश की हिम्मत की जितनी सराहना की जाये कम है मैं अपनी बात नहीं कर रहा हूँ मैं
एक अलग खोपड़ी का प्राणी हूँ पता नहीं, परमात्मा ने मुझे क्या सोच समझ कर बनाया था।
बात हो रही थी राकेश की, मैंने राकेश की हिम्मत देख कर पूछ ही लिया कि राकेश भाई
यह बताओ अपनी दैनिक जिन्दगी में अपने आप को फ़िट रखने के लिये कुछ कसरत आदि करते हो
या नहीं। राकेश बोला जाट भाई मैं रोज सुबह 5 बजे बिस्तर छोड़
देता हूँ। कई किमी साईकिल चलाकर एक बड़े से पार्क में हल्की-फ़ुल्की कसरत करने जाता
हूँ।