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शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2014

Colourful programme in Bikaner stadium बीकानेर स्टेडियम में रंगारंग कार्यक्रम

बीकानेर लडेरा गाँव व स्टेडियम यात्रा के सभी लिंक नीचे दिये गये है।
BIKANER LADERA CAMEL FESTIVAL-03
रात को बीकानेर के करणी सिंह स्टेडियम में लडेरा से सम्बंधित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम है। मैं और राकेश वहाँ जायेंगे तब राघवेन्द्र भाई से मुलाकात होगी। फ़ाटक खुल चुका है चलो पहले राकेश भाई के घर चलते है। घर से बाइक लेकर स्टेडियम जायेंगे। स्टेडियम के कार्यक्रम देखेंगे और वापिस आ जायेंगे। राकेश घर आकर बोला, जाट भाई मैं कल आपके साथ शायद वापिस नहीं जा पाऊँगा? मैं दो-चार दिन बाद जाऊँगा। राकेश के पिताजी गाँव में रहते है। हो सकता है राकेश उनके पास जाना चाहता हो। मेरे व अपना, वापसी का टिकट राकेश ने अपनी आईड़ी से ही बुक किया था। मैंने राकेश से कहा कि अगर तुम कल नहीं जाना चाहते तो मैं आज रात की ट्रेन से ही दिल्ली वापिस जाऊँगा।



बुधवार, 19 फ़रवरी 2014

Bikaner-Ladera Camel festival बीकानेर-लडेरा ऊंट महोत्सव स्थल

BIKANER LADERA CAMEL FESTIVAL-02
बीकानेर से गंगानगर जाने वाले हाईवे पर लगभग 30 किमी जाने पर, सीधे हाथ मुड़ने के बाद लडेरा गाँव की दूरी 15 किमी बाकि थी। इस मोड से 11 किमी आगे मालासर आता है। मालासर से लडेरा ऊँट उत्सव स्थल मात्र 4 किमी है। जब लडेरा की दूरी 0 किमी सामने आयी तो हम उलझन में पड़ गये कि ऊँट उत्सव कहाँ गायब हो गया? राकेश के बड़े भाई कार चला रहे थे। वह पहले भी लडेरा उत्सव देखने आये हुए है इसलिये भटकने की आवश्यकता नहीं थी। कार एक पेड़ की छाँव में रोक दी। राजस्थान में सर्दी के मौसम में भी दिन गर्म होते है जबकि राते ठन्ड़ी होती है। मैं अपनी जैकेट अभी तक पहने हुए था, लेकिन बाहर का गर्मागर्म मौसम देखकर ,मैंने अपनी जैकेट कार में ही छोड़ दी।


गुरुवार, 13 फ़रवरी 2014

Delhi to Bikaner (Ladera camel festival) दिल्ली से बीकानेर (लडेरा गाँव, ऊँट उत्सव)


BIKANER LADERA CAMEL FESTIVAL-01
आज दिनांक 14-01-2014 को बीकानेर के लडेरा गाँव में होने वाले ऊँट उत्सव देखने चलते है। दो साल पहले राजस्थान घूमने गया था। उस यात्रा में जोधपुर, जैसलमेर के साथ बीकानेर के कई स्थल देखे गये थे। उस यात्रा के दौरान कोई उत्सव आदि देखने को नहीं मिला था। बीते वर्ष बीकानेर के रहने वाले राकेश बिश्नोई से ब्लॉग के जरिये मुलाकात हुई, जो आज एक अच्छी खासी दोस्ती में बदल गयी है। वैसे तो मैं ज्यादा दोस्त नहीं बनाया करता, क्योंकि अपने जैसे मिजाज के इन्सान कम ही टकराते है, लेकिन वर्तमान में जितने भी है। सभी घुमक्कड़ है या घुमक्कड़ी को चाहने वाले है। जब राकेश मेरे साथ किन्नर कैलाश की खतरनाक ट्रेकिंग करने गया था तो उसी यात्रा में राकेश ने बताया था कि बीकानेर के पास लडेरा गाँव में रेत के टीलों पर ऊँट उत्सव होता है। 


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