महाराष्ट्र लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
महाराष्ट्र लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शुक्रवार, 12 जुलाई 2013

Bombay/Mumbai Local Train Journey (Information) and Tennis court मुम्बई लोकल ट्रेन की सम्पूर्ण जानकारी

EAST COAST TO WEST COAST 35                                                                   SANDEEP PANWAR
बोम्बे/मुम्बई का गेटवे ऑफ़ इन्डिया व ताज होटल देखने के बाद वापसी में चर्चगेट स्टेशन पहुँचने के लिये हमने पैदल चलने की जगह टैक्सी से दो किमी की दूरी तय करने का फ़ैसला किया। स्टेशन पहुँचकर बोला संदीप भाई आज आपको एक ऐसी चीज खिलाता हूँ जो शायद आपने अभी तक नहीं खायी होगी। क्यों भाई! ऐसी क्या चीज है? जो मैंने आज 38 वर्ष का होने तक नहीं खायी है, वैसे भी मैं शाकाहारी भोजन, सादा जल, व फ़लों के लावा और किसी पदार्थ का सेवन तो करता नहीं हूँ इसलिये ऐसी बहुत सी खाने लायक वस्तुएँ है जो मैंने अभी तक नहीं खायी है। विशाल और मैं स्टेशन पर प्लेटफ़ार्म की ओर जा रहे थे कि तभी वहाँ एक दुकान पर विशाल बोला रुको, संदीप भाई! पहले रोल जैसी वो स्वादिष्ट वस्तु खाते है फ़िर ट्रेन के लिये चलेंगे। (continue)


गुरुवार, 11 जुलाई 2013

Gateway of India and Taj Hotel गेटवे ऑफ़ इन्डिया और ताज होटल

EAST COAST TO WEST COAST 34                                                                   SANDEEP PANWAR
छत्रपति शिवाजी रेलवे टर्मिनल से गेटवे जाने के लिये हमने एक बार टैक्सी का सहारा लिया। बोम्बे में छोटी दूरियाँ तय करने के लिये दो/तीन बन्दों को टैक्सी सबसे सस्ती व उत्तम सेवा प्रतीत होती है। वैसे बोम्बे में ऑटो भी चलते है लेकिन टैक्सी व ऑटो के किराये में बहुत ज्यादा अन्तर ना होने के कारण टैक्सी को ही वरीयता देनी चाहिए। हम कुछ ही देर में गेट वे आफ़ इन्डिया के पास वाले चौराहे पर जा पहुँचे। यहाँ पर कई साल पहले हुई पाकिस्तानी फ़रीकों की शांतिप्रिय घटना जिसे हम लोग आतंकवादी घटना कहते है, के कारण सुरक्षा व्यवस्था कुछ ज्यादा ही चौकस कर दी गयी है। गेट वे इन्डिया जाने के लिये अब हर किसी को पोलिस (पुलिस) जाँच से गुजरकर ही आगे जाना पड़ता है। हम भी अपनी जाँच कराकर ही आगे बढ़ पाये।


बुधवार, 10 जुलाई 2013

CST Chatrapati Shiwaji Terminas/Victoria VT छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (सीएसटी/वीटी)

EAST COAST TO WEST COAST 33                                                                   SANDEEP PANWAR
नरीमन पॉइन्ट से बोम्बे की बेस्ट वाली बस में सवार होकर हम बोम्बे का मुख्य रेलवे स्टेशन देखने चल दिये। यहाँ हमारी बस लम्बा चक्कर लगाकर जाने वाली थी जब बस परिचालक से हमने टिकट के लिये कहा तो उसने कहा कि यह बस बहुत घूमकर जायेगी। बस कन्ड़क्टर को दो टिकट के पैसे देकर टिकट ले लिये गये। किसी जगह घूमने के लिये वहाँ के कई चक्कर लगाये जाये इससे बेहतर और क्या हो सकता है? हमारी बस बोम्बे हाईकोर्ट के सामने से होकर निकल रही थी तो विशाल ने मुझे बताया कि यह बोम्बे हाईकोर्ट है। अगर विशाल ने मुझे नहीं बताया होता तो मैं तो यही समझता रहता कि यह कोई किला आदि जैसा कुछ इमारत है। देखने में ही हाई कोर्ट किले जैसी ही प्रतीत होती है।


मंगलवार, 9 जुलाई 2013

Girgao Chopati And and Nariman Point गिरगाँव चौपाटी से नरीमन पॉइन्ट तक यात्रा

EAST COAST TO WEST COAST-32                                                                   SANDEEP PANWAR
बस से उतरने के बाद हम दोनों गिरगाँव चौपाटी देखने के लिये सड़क पार करने लगे। यहाँ सड़क पर बहुत ज्यादा संख्या में पुलिस बल देखकर मन में शंका हुई कि दिल्ली की तरह यहाँ भी बम आदि का विस्फ़ोट तो नहीं हो गया है। दिल्ली की तरह बोम्बे में आतंकवादी घटना घटित होना दैनिक क्रिया जैसा प्रतीत होने लगता है। हमने जैसे ही सड़क पार की तो सामने ही नाना-नानी पार्क के नाम से एक छोटा सा पार्क दिखायी दिया। हम अभी दो बड़े-बड़े पार्क देखते हुए आये थे इसलिये इस छोटे से पार्क को बाहर सड़क से ही सरसरी तौर पर देखते हुए आगे बढ़ते चले गये। नाना-नानी पार्क से आगे बढ़ते ही चौपाटी दिखायी देने लगती है। वैसे बस से आते समय समुन्द्र किनारे काफ़ी दूर तक का साफ़ नजारा दिखायी देता रहता है। 


सोमवार, 8 जुलाई 2013

Kamla Nehra Park कमला नेहरु पार्क व मुम्बई की बस सेवा बेस्ट की सवारी

EAST COAST TO WEST COAST-31                                                                   SANDEEP PANWAR
जिस सड़क से होकर हम यहाँ तह आये थे। उसके ठीक सामने फ़िरोजशाह गार्ड़न है जो शायद मुम्बई का सबसे बड़ा गार्ड़न भी हो सकता है। फ़िरोजशाह मेहता गार्ड़न को ही हैंगिंग गार्ड़न भी कहा जाता है कल के लेख में आप उसे देख ही चुके है। आज कमला नेहरु पार्क देखते है कमला नेहरु पार्क भी मालाबार हिल पर ही बनाया गया है। यह पार्क भी काफ़ी बड़ा है। कमला नेहरु पार्क के नाम से भारत भर में अधिकतर बड़े नगरों में पार्क बने हुए मिल जायेंगे। कमला नेहरु पार्क की सबसे बड़ी पहचान यह है कि इसमें एक जूते के आकार का बड़ा सा दो मंजिला आकार का सीमेंटिड़ नमूना बनाया गया होता है। बताते है कि कोई औरत किसी समय एक बड़े जूते में रहा करती थी उसकी याद में जूते की आकृति ही कमला नेहरु पार्क की पहचान बना दी गयी है। इस पार्क के अन्दर तो खूबसूरत नजारे है ही लेकिन इसमें सबसे बड़ी बात यहाँ से समुन्द्र की ओर देखने पर जो हसीन नजारे दिखायी देते है उसकी कल्पना नहीं की जा सकती है।


रविवार, 7 जुलाई 2013

Mumbai-Hanging Garden/ Firoz Shah Mehta Garden मुम्बई का हैंगिंग गार्ड़न/ फ़िरोज शाह मेहता गार्ड़न

EAST COAST TO WEST COAST-30                                                                   SANDEEP PANWAR
बाबुलनाथ मन्दिर देखने के बाद हम वापिस सड़क पर आये यहाँ पर विशाल ने मुम्बई की मालाबार पहाड़ी पर बने शानदार हैंगिंग गार्ड़न जिसे फ़िरोज शाह मेहता पार्क भी कहते है, में जाने का मार्ग पता किया। हमें बताया गया कि यदि आप लोग पैदल चलने की हिम्मत रखते हो यहाँ से आधा किमी पैदल मार्ग से उस पार्क में पहुँच सकते हो। यदि पैदल नहीं चल सकते हो तो बस से पूरी मालाबार हिल को कई किमी घूम कर आना होगा। हमने पैदल वाले शार्टकट से उस पार्क तक पहुँचने की योजना पर अमल करना शुरु कर दिया। जैसे हमें बताया गया था हम वैसे ही पहाड़ी पर ऊपर जाती हुई पक्की सीढियाँ चढ़ते हुए ऊपर चलते गये। कुछ देर बाद यह सीढियाँ जहाँ समाप्त हुई वहाँ पर हमें वह पार्क दिखायी देने लगा जिसे देखने हम बस से आने वाले थे।


शनिवार, 6 जुलाई 2013

Mumbai- Babulnath Temple मुम्बई का बाबुलनाथ मन्दिर

EAST COAST TO WEST COAST-29                                                                   SANDEEP PANWAR
बोम्बे के कई प्रसिद्ध मन्दिर देखने के उपराँत, यहाँ का मशहूर मन्दिर बाबुलनाथ देखने की बारी भी आ गयी थी। महालक्ष्मी मन्दिर से यहाँ पहुँचने के हमने एक टैक्सी से  इनके बीच का फ़ासला तय किया। मन्दिर सड़क से काफ़ी हटकर व अन्दर जाकर है जबकि टैक्सी ने हमें सड़क पर ही उतार दिया था। सड़क किनारे पर ही बाबुलनाथ मन्दिर चौक के नाम से एक बोर्ड़ भी लगा हुआ है। मैंने सोचा कि मन्दिर यही-कही सामने ही है लेकिन जब आसपास कही भी मन्दिर दिखायी नहीं दिया तो मैंने विशाल से कहा, क्यों महाराज बाबुलनाथ को बाबुल ने कहाँ छुपाया हुआ है? विशाल बोला थोड़ा सब्र रखो, सामने वाली गली में ऊपर चढ़ने पर मन्दिर आ जायेगा।


शुक्रवार, 5 जुलाई 2013

Mumbai-Siddhi Vinayak Temple and Haji Ali Dargah बोम्बे का सिद्धी विनायक मन्दिर व हाजी अली की दरगाह/कब्र

EAST COAST TO WEST COAST-27                                                                   SANDEEP PANWAR
बोम्बे तो वैसे मैं पहले भी एक बार आ चुका था लेकिन उस समय बोम्बे के दादर स्टेशन के अन्दर से ही दूसरी ट्रेन में बैठकर हम नेरल के लिये चले गये थे। उस यात्रा में हमने भीमाशंकर का सीढ़ी घाट मार्ग से ट्रेक सफ़लता से किया था। जिसके बारे में मैंने आपको सम्पूर्ण विवरण पहले ही बता दिया है। आज रात बोम्बे के गोरेगाँव इलाके में एक फ़्लैट में निवास करने वाले विशाल राठौर के यहाँ रात्रि विश्राम करने की योजना पहले से ही बना ली गयी थी। जैसे ही मैं दर्शन जी के घर से चला था तो विशाल को सूचित कर दिया था जिससे यह लाभ हुआ कि स्टेशन से बाहर निकलते ही विशाल मेरा इन्तजार करता हुआ मिल गया। विशाल के साथ पूरे दिन माथेरान की छोटी रेल व अन्य स्थल की ट्रेकिंग की गयी थी। कल का दिन बोम्बे के नाम रहने वाला था।



मंगलवार, 2 जुलाई 2013

Matheran to Mumbai via Vasai Road माथेरान से वसई रोड़ होकर मुम्बई की यात्रा।

EAST COAST TO WEST COAST-26                                                                   SANDEEP PANWAR
माथेरान से नेरल तक जाने वाली ट्रेन स्टेशन पर ही खड़ी थी जब हमें टिकट नहीं मिले तो हमने पैदल ही तीन किमी की दूरी दस्तूरी नाका तक तय करनी आरम्भ कर दी। हमने रेलवे लाईन के किनारे ही पद यात्रा जारी रखी, कुछ देर बाद ट्रेन हमें पीछे छोड़कर आगे बढ़ गयी। पैदल मार्ग में लगातार ढलान थी जिस कारण हमें ज्यादा समस्या नहीं आ रही थी दिन भर से हम पैदल ही चल रहे थे इसलिये पैदल चलने का मन तो नहीं था, लेकिन क्या करते दूसरी ट्रेन भी दो घन्टे बाद जाती। एक तो ट्रेन दो घन्टे बाद जाती दूसरा नेरल पहुँचने में भी दो घन्टे का समय लगाती। इस तरह कुल मिलाकर चार घन्टे बाद नेरल पहुँचना होता।



Matheran- & Echo Point इको पॉइन्ट

EAST COAST TO WEST COAST-25                                                                   SANDEEP PANWAR
झील देखने के बाद इको पॉइन्ट देखेने के लिये चलते रहे। यहाँ पहुँचने के लिये थोड़ी सी चढ़ाई चढनी पड़ी। लेकिन उससे ज्यादा दिक्कत नहीं हुई। लगभग एक किमी चलने में ही इको पॉइन्ट भी आ गया। यहाँ आकर देखा कि जहाँ हम पहुँचे है वहाँ से सामने वाला पहाड़ सामने ही दिख रहा है लेकिन दोनों पहाड़ों के बीच में एक गहरी खाई है जिसे रस्सी से पार कराने के लिये रु वसूल किये जा रहे है खाई बहुत ही गहरी थी मुझे नहीं लगता कि दिन भर में 10 से ज्यादा लोग रस्सी के सहारे उस खाई को पार करते होंगे। यहाँ बिना खाई पार किये भी दूसरी ओर जाया जा सकता है लेकिन उसके लिये कम से कम दो किमी की दूरी तय करनी पड़ती है।


Matheran-Pisar Nath Temple and Charlotte Lake पिसरनाथ मन्दिर व सेरलोट झील

EAST COAST TO WEST COAST-24                                                                   SANDEEP PANWAR
वन ट्री हिल के बाद विशाल बहुत देर तक मुझे सुनाता रहा, मैंने उसकी बात एक कान से सुनी दूसरे से निकाल दी। वापिस उसी मुख्य पगड़न्ड़ी पर आ गये, जहाँ से माथेरान की अलग-अलग जगहों के लिये मार्ग अलग होते है। वन ट्री हिल की ओर आते समय पिसरनाथ मन्दिर का बोर्ड़ लगा देखा था। अब हम वापसी की ओर आते जा रहे थे। यहाँ आते समय उल्टे हाथ की ओर पिसर नाथ मन्दिर व सेरेलेट लेक/झील जाने वाली पगड़न्ड़ी पर काफ़ी दूर चलना पड़ा। जब झील किनारे पहुँच गये तो माथेरान की गर्मी से थोड़ी सी राहत मिलनी शुरु हुई। विशाल पेड़ की छाँव में बैठ गया जबकि मैं जरुरी काम से पहाड़ पर चला गया। मैंने वापिस आने के बाद देखा कि जंगल में मार्ग से हटकर बहुत सारा प्लास्टिक कचरा पड़ा हुआ था। वैसे तो पर्यावरण के नाम पर माथेरान आने वाले यात्रियों से शुल्क लेते है, लेकिन उसी पर्यावरण को बचाने के लिये सफ़ाई व्यवस्था पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है।


Matheran-Dangerious/Adventurer One Tree Hill Point and Belvedere point खतरनाक/रोमांचक वन ट्री हिल व बेलवेडेर पॉइन्ट

EAST COAST TO WEST COAST-23                                                                   SANDEEP PANWAR
यहाँ एक बिन्दु वन ट्री हिल के नाम से जाना जाता है इसका यह नाम इसलिये है कि इस पहाड़ी पर केवल एक ही पेड़ खड़ा हुआ है। जब हम इस पहाड़ी के सामने पहुँचे और वन ट्री हिल को देखा तो दिमाग में कुछ उथल-पुथल मच गयी कि क्यों ना इस पहाड़ी पर चढ़कर देखा जाये कि वहाँ से कैसा दिखता है? मैंने इस पहाड़ पर चढ़ने के इरादा विशाल के सामने प्रकट नहीं किया। विशाल थोड़ा कमजोर दिल का मानव है अगर मैं उसे कहता कि मैं उस पहाड़ पर जा रहा हूँ तो वह मुझे कतई आगे नहीं जाने देता। मैंने विशाल से कहा, "विशाल मैं इस पहाड़ी के नीचे तक जा रहा हूँ तुम वहाँ से मेरे फ़ोटो ले लेना। विशाल ऊपर खड़ा होकर मेरे फ़ोटो लेने के लिये तैयार हो गया। जब मैं नीचे पहुँचा तो मैंने ऊपर चढ़ने से पहले हालात का जायजा लिया, जब मुझे लगा कि ऊपर जाने में बहुत ज्यादा मेहनत नहीं करनी होगी सिर्फ़ एक जगह चट्टान को सावधानी से पकड़ते हुए शरीर को ऊपर खीचना है बाकि तो पगड़न्ड़ी जैसा माहौल लग रहा है। 

Matheran-Khandala and Alexender point माथेरान का खंड़ला व अलेक्जेनड़र पॉइन्ट

EAST COAST TO WEST COAST-22                                                                   SANDEEP PANWAR
माथेरान में प्रवेश करने के बाद मैंने विशाल से कहा कैमरे में कितनी बैटरी बची हुई है कैमरा देख विशाल बोला कि बैटरी तो लगभग समाप्त होने को ही है जितनी बैटरी हमने नेरल में चार्ज की थी उतनी तो ट्रेन में बैठकर फ़ोटो लेन में खर्च कर दी है। मेरे पास मोबाइल भी जिससे मैंने पूरी की पूरी गोवा यात्रा के फ़ोटो लिये थे। लेकिन कैमरे की बात ही अलग होती है। सबसे पहले हमें कैमरे को चार्ज करने का जुगाड़ करना था। इसका तरीका यह निकाला कि किसी रेस्टोरेन्ट/भोजनालय में खाने के चला जाये, वही कैमरे की बैटरी चार्जिंग पर लगा दी जाये। वहाँ पर बैटरी चार्ज होनी शुरु हो जाये तो ऐसी चीज बनवाकर खायी जाये जिसके बनने में ज्यादा से ज्यादा समय लगे। एक बार में एक प्लेट बनवायी जाये उसे बेहद ही आराम-आराम से खाया जाये। उसे खाकर पानी पियो और बैठे रहो, जब कोई टोके तो फ़िर से एक प्लेट बनवाने को बोल दिया जाये। इसमें कुल मिलाकर पौने घन्टा का समय मानकर हम चल रहे थे। 


सोमवार, 24 जून 2013

Neral to Matheran Journey by Toy Train नेरल से माथेरान तक ट्राय ट्रेन की सवारी

EAST COAST TO WEST COAST-21                                                                   SANDEEP PANWAR
नेरल स्टेशन पर पहले पहुँचने की जल्दबाजी में मैं और विशाल बिना प्लेटफ़ार्म वाली दिशा में कूद गये और सबसे पहले टिकट काऊँटर पर पहुँच गये। नेरल से माथेरान वाली पहाड़ी पर जाने वाली ट्राय ट्रेन के टिकट नेरल के प्लेटफ़ार्म पर एक कोने में बने काऊँटर पर ही मिलते है। नेरल से माथेरान के लिये वैसे तो कई ट्रेन है लेकिन सबसे पहली ट्रेन के चलने का समय सुबह 6:45 मिनट का बताया गया था जिस पहली ट्रेन से हम यहाँ पहुँचे थे उसके यहाँ पहुँचने का समय सुबह 6:25 का है। इसलिये हम टिकट की जल्दबाजी कर रहे थे कि कही टिकट की लम्बी लाईन लग गयी तो फ़िर अगली ट्रेन से जाना होगा। यहाँ इस ट्रेन में टिकट अग्रिम आरक्षित नहीं कराये जा सकते है। ऊटी (उदगमण्ड़लम) शिमला, व दार्जीलिंग वाली कुछ ट्रेनों में आरक्षण की व्यवस्था दी हुई है जिससे दूर से आने वाले यात्री पहले से ही अपने टिकट बुक करा कर ही आते है।

मंगलवार, 9 अप्रैल 2013

Daulatatabad Fort-Aurangabad city-Nashik-Delhi Journey दौलताबाद किले से औरंगाबाद नाशिक होते हुए दिल्ली तक यात्रा वर्णन।

भीमाशंकर-नाशिक-औरंगाबाद यात्रा-16                                                                    SANDEEP PANWAR

वापसी की कहानी भी कम मजेदार नहीं थी हम दोनों ने किला देखने के बाद वहाँ से नीचे उतरना शुरु किया। उतरने से पहले हमने वहाँ चारों कोनों में घूम-घूम कर अपनी तसल्ली कर ली थी कि इससे बढ़िया नजारा और कुछ है या नहीं। यहाँ टॉप से नीचे देखने पर किले की चारदीवारी बहुत पतली लाइन जैसी दिखायी दे रही थी। ऊपर से देखने पर किले की चारदीवारी की संख्या साफ़ दिखायी दे रही थी। नीचे खड़े होकर जो बाते हमारी समझ से बाहर थी वह सब कुछ ऊपर से समझ आ रहा था। हमने धीरे-धीरे वहाँ से नीचे उतरना आरम्भ किया। यहाँ शीर्ष से नीचे उतरने के लिये हमें एक लम्बे घुमावदार मार्ग से होकर ऊपर आना पड़ा था वापसी में भी उसी मार्ग का उपयोग करना पड़ा। इस मार्ग को देखकर मुझे राजस्थान के जोधपुर शहर में गढ़ की याद हो आयी वहाँ भी इसी प्रकार की जोरदार चढ़ाई बनायी गयी है। जोधपुर का मेहरानगढ़ दुर्ग इसके सामने बच्चा लगता है।

शीर्ष पर स्थित झरोखे से शहर

कुछ देर बाद हम अंधेरी सुरंग के मुहाने पर पहुँच चुके थे। यहाँ आकर हमने एक मन्दिर देखा। जिसके बारे में बताया गया कि यह यहाँ के मराठा राजाओं का बनाया हुआ है। गणॆश भगवान की मूर्ति यहाँ होने के कारण इसे गणेश मन्दिर कहा जाता है। गणेश जी को राम-राम कर हम वहाँ से आगे अंधेरी गुफ़ा में घुसने के लिये चल दिये। गुफ़ा में ऊपर आते समय काफ़ी सावधानी बरतते हुए आये थे लेकिन नीचे जाते समय उससे भी ज्यादा सावधान रहना पड़ा। ऊपर चढ़ते समय गिरने से सिर्फ़ घुटने फ़ुटने का अंदेशा रहता है, लेकिन नीचे उतरते समय सब कुछ, मतलब सब कुछ, फ़ुटने का ड़र बना रहता है। धीरे-धीरे हम अंधेरी पार कर नीचे उस पुल तक आ गये, जिसे यहाँ आने का एकमात्र मार्ग माना जाता है। अबकी बार हमने पुल के पास खड़े होकर वहाँ के हालात का जायजा अच्छी तरह से लिया था। लोहे वाले पुल के नीचे एक अन्य पत्थर की सीढियाँ वाला पुल दिखायी दे रहा था जिससे यह समझ आने लगा कि लोहे वाला पुल आजादी के बाद पर्य़टकों की सहायता के लिय बनाया गया होगा। पहले सीढियों वाले पुल पर नीचे उतरकर ऊपर चढ़ते समय हमलावर पर हमला करने में आसानी रहती थी।

परकोटे/महाकोट का नजारा

सोमवार, 8 अप्रैल 2013

Hill area in (Devagiri/ Daulatatabad Fort near Aurangabad city औरंगाबाद के निकट दौलताबाद/ देवागिरी किले/दुर्ग का पहाड़ी भाग।

भीमाशंकर-नाशिक-औरंगाबाद यात्रा-15                                                                    SANDEEP PANWAR

किले के मैदानी भाग में जहाँ चलने फ़िरने में समस्या नहीं आ रही थी उसके उल्ट यहाँ किले के पहाड़ी भाग की ओर चलते ही साँस फ़ूलने लगी। विशाल कहने लगा संदीप भाई सामने देखने पर लग रहा है कि किले का शीर्ष अभी एक किमी दूरी पर है। मैंने कहा हाँ भाई लगता तो ऐसे ही है बाकि चल के पता लगेगा। हम ऊपर पहाड़ी की ओर चढ़ने लगे। अभी आधा किमी दूरी ही पार नहीं की होगी कि एक बार फ़िर एक दरवाजे से टेढ़े-मेड़े होकर आगे बढ़्ना पड़ा। पहले दरवाजे के पास टेढ़े-मेड़े रास्ते इसलिये बनाये जाते थे ताकि बाहर से आने वाला हमलावर यहाँ आकर कमजोर पड़ जाये। क्योंकि हमलावर कितनी भी बड़ी संख्या में हो, ऐसे दरवाजे से तो उसको पंक्ति बद्ध होकर ही आगे बढ़ना होगा। यही पंक्ति ही कमजोर कड़ी होती थी। जिस पर थोड़े से सैनिक भी बहुत बड़ी सेना पर भारी पड जाते थे। यहाँ कुछ बन्दर/लंगूर बैठे हुए थे। लेकिन हम जैसे वनमानुष को देखकर उन्होंने जाते समय तो कुछ नहीं कहा, आते की बात आते समय बतायी जायेगी।

किले के चारों और ऐसी ही खाई है।

Plain area in (Devagiri/ Daulatatabad Fort near Aurangabad city औरंगाबाद के निकट दौलताबाद/ देवागिरी किले/दुर्ग का मैदानी भाग।

भीमाशंकर-नाशिक-औरंगाबाद यात्रा-14                                                                    SANDEEP PANWAR

दौलताबाद किले के भीतर जाने वाले मुख्य गलियारे के सामने जीप से उतर गये। यहाँ सड़क पार किले में जाने का मार्ग दिखायी दे रहा था। किले में जाने वाले मार्ग के दोनों ओर सूचना पट पर किले के बारे में कुछ जानकारी लिखी हुई थी। हमने वो जानकारी पढ़ने के बाद आगे चलना शुरु किया। मैंने इस लम्बे व ऊँचे किले को दो लेख में विभाजित किया है। पहल लेख में किले के मैदान वाले भाग के बारे में विवरण दिया गया है। दूसरे भाग में किले के पहाड़ी वाले भाग के बारे में बताया गया है। जैसा आपको फ़ोटो में दिखायी दे रहा है कि किले के बाहर ही पार्किंग बनायी गयी है। अपने वाहन से आने वालों के लिये किले से ज्यादा पैदल नहीं चलना पड़ता है। चलिये अब किले के अन्दर प्रवेश करते है। किले के बाहर से जो शानदार नजारा दिखाई दे रहा था, अन्दर जाकर असली व भव्य नजारा देखते है। अभी तक तो फ़ोटो में यह किला देखा था आज जाकर असलियत में यह किला देखना है। इस किले को ही पहले देवागिरी किला कहा जाता था।


चले अन्दर

शानदार पार्क

रविवार, 7 अप्रैल 2013

Ajanta-Ellora caves to Daultabad Fort अजन्ता ऐलौरा गुफ़ा से दौलताबाद किले तक।

भीमाशंकर-नाशिक-औरंगाबाद यात्रा-13                                                                    SANDEEP PANWAR


घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मन्दिर देखकर आगे चल दिये, यहाँ से बाहर आते ही हमें एक मकबरा जैसा भवन दिखाई दिया। चूंकि यह हमारे पैदल मार्ग के एकदम किनारे पर ही था इसलिये हमने इसे देखे बिना नहीं छोड़ा। इसके पास जाकर पता लगा कि यह मकबरा/समाधी महान मराठा योद्धा वीर छत्रपति शिवाजी के पिताजी शाह जी की है। जिस दिन हम वहाँ थे उससे कुछ दिन पहले से ही यह समाधी मरम्मत कार्य के लिये बन्द की हुई थी। यह देख कर थोड़ा सा आश्चर्य हुआ कि जहाँ यह समाधी बनी हुई है वहाँ पर पहली नजर में देखने पर ऐसा लगता है कि जैसे इस समाधी पर सालों से किसी संस्था का ध्यान नहीं दिया गया है। इस समाधी को बाहर से ही देख-दाख कर, हम दोनों पैदल ही आगे मुख्य सड़क की ओर बढ़ते रहे। सड़क पर पहुँचते ही हम उल्टे हाथ की ओर चलने लगे। सीधे हाथ की ओर से हम सुबह यहाँ आये थे।

  शिवाजी महाराज के बापू की समाधी।

शनिवार, 6 अप्रैल 2013

Grishneshwar Temple (Verul-Daultabad-Aurangabad) घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन (दौलताबाद-औरंगाबाद)

भीमाशंकर-नाशिक-औरंगाबाद यात्रा-12                                                                    SANDEEP PANWAR

रात में कैमरे व मोबाइल चार्ज कर लिये गये थे इसलिये अगले दिन इस बात की कोई समस्या नहीं थी कि किसी की बैट्री की टैं बोल जायेंगी। सुबह 5 बजे मोबाइल के अलार्म बजते ही हम दोनों उठकर औरंगाबाद जाने की तैयारी करने लगे। नहा-धोकर पौने 6 बजे हमने कमरा छोड़ दिया था। कमरा लेते समय कमरे वाली ने हमसे 100 रुपये फ़ालतू जमा कराये थे इसलिये सुबह उनको चाबी देते समय अपने 100 रुपये लेना हम नहीं भूले। हम अभी मुख्य सड़क पर आकर बस अड़ड़े की ओर चल दिये। मुश्किल से आधे किमी ही गये होंगे कि एक बस हमारी ओर आती हुई दिखायी दी। हमने हाथ का इशारा कर बस को रुकवा लिया। इस बस से हम नाशिक पहुँच गये। नाशिक पहुँचकर हम औरंगाबाद जाने वाली बस में बैठ गये। नाशिक से औरंगाबाद लगभग 150 किमी दूर है इसलिये हम आराम से अपनी सीट पर पसरे हुए थे। बस बीच-बीचे में वहाँ के कई शहरों से होकर चलती रही। हम अपनी सीट पर पड़े-पड़े उन्हे देखते रहे।



शुक्रवार, 5 अप्रैल 2013

Tyimbak- Trimbakeshwar 12 Jyotirlinga Shiva Temple त्रयम्बकेश्वर/त्र्यम्बकेश्वर 12 ज्योतिर्लिंग मन्दिर के दर्शन।

भीमाशंकर-नाशिक-औरंगाबाद यात्रा-11                                                                    SANDEEP PANWAR

पिछले भाग में आपने पढ़ा कि हम दोनों गोदावरी नदी का उदगम बिन्दु स्थल देखने के उपराँत पैदल टहलते हुए त्रयम्बक ज्योतिर्लिंग की ओर चले आये थे। जब हमने अपनी चप्पल जूता घर में जमा करा कर मन्दिर के प्रांगण में प्रवेश किया तो सबसे पहला झटका हमें वहाँ की भीड़ देखकर लगा। इसके बाद अगला झटका हमें दरवाजे पर खड़े मन्दिर के सेवकों की निष्पक्ष भावना देखकर हुआ। जब हमने वहाँ पर मन्दिर दर्शन के लिये भक्तों की लम्बी घुमावदार लाइन देखी और हम भौचक्के से वहाँ खड़े के खड़े रह गये तो हमें लम्बी लाईन के कारण अचम्भित खड़ा देख मन्दिर के सेवक बोले, “क्या आप बिना लाईन के जल्दी दर्शन करना चाहे हैं? हमने पूछा आप इस सेवा के बदले क्या फ़ीस लेते हो। तो उसने कहा था कि आपको 100 रुपये में हम बिना लाईन के मन्दिर दर्शन करा लायेंगे। हमने उनकी बात नकारते हुए उस लम्बी लाईन में लगना स्वीकार कर लाईन में लग गये।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...