सोमवार, 8 जुलाई 2013

Kamla Nehra Park कमला नेहरु पार्क व मुम्बई की बस सेवा बेस्ट की सवारी

EAST COAST TO WEST COAST-31                                                                   SANDEEP PANWAR
जिस सड़क से होकर हम यहाँ तह आये थे। उसके ठीक सामने फ़िरोजशाह गार्ड़न है जो शायद मुम्बई का सबसे बड़ा गार्ड़न भी हो सकता है। फ़िरोजशाह मेहता गार्ड़न को ही हैंगिंग गार्ड़न भी कहा जाता है कल के लेख में आप उसे देख ही चुके है। आज कमला नेहरु पार्क देखते है कमला नेहरु पार्क भी मालाबार हिल पर ही बनाया गया है। यह पार्क भी काफ़ी बड़ा है। कमला नेहरु पार्क के नाम से भारत भर में अधिकतर बड़े नगरों में पार्क बने हुए मिल जायेंगे। कमला नेहरु पार्क की सबसे बड़ी पहचान यह है कि इसमें एक जूते के आकार का बड़ा सा दो मंजिला आकार का सीमेंटिड़ नमूना बनाया गया होता है। बताते है कि कोई औरत किसी समय एक बड़े जूते में रहा करती थी उसकी याद में जूते की आकृति ही कमला नेहरु पार्क की पहचान बना दी गयी है। इस पार्क के अन्दर तो खूबसूरत नजारे है ही लेकिन इसमें सबसे बड़ी बात यहाँ से समुन्द्र की ओर देखने पर जो हसीन नजारे दिखायी देते है उसकी कल्पना नहीं की जा सकती है।


पहले हम कमला नेहरु पार्क के अन्दर काफ़ी देर टहलते रहे। अचानक हमारी नजर समुन्द्र की ओर गयी तो वहाँ का नजारा देख हम हक्के-बक्के रह गये। यहाँ से मुम्बई शहर का खूबसूरत नजारा दिखायी देता है इसके साथ चौपाटी बीच (गिरगाँव चौपाटी) का सम्पूर्ण नजारा ऐसा दिखता है जैसे हम किसी हवाई जहाज में उड़ान भर रहे हो और चौपाटी के ऊपर उड़ान पर हो। चौपाटी से नरीमन पॉइन्ट तक जाने वाला खूबसूरत मरीन ड्राइव मार्ग जिस पर जब दो-चार चक्कर ना लगाये जाये तो दिल ही नहीं भरता है। बम्बई आये और मरीन ड्राइव का पाँच किमी लम्बा चक्कर वाहन में या पैदल ना लगाया गया तो फ़िर मुम्बई का क्या भ्रमण किया? 

ऊपर मालाबार हिल से चौपाटी से नरीमन पॉइन्ट तक जाने वाला मरीन ड्राइव मार्ग किसी रानी के गले के नेक्लेस हार से कम सुन्दर नहीं लगता है। मैंने विशाल से कहा क्यों भाई हम लोग सामने दिखायी दे रहे उस सुन्दर नजारे के आसपास से होकर जाने वाले है या नहीं। शुक्र रहा कि विशाल ने हाँ कह दी, अगर उसने ना कही होती तो उसके साथ लड़कर भी उस नजारे को करीब से देखने अकेले निकल पड़ता। कमला नेहरु पार्क में देखने लायक जो कुछ था वो हमने देख लिया था। यहाँ पेड़-पौधे के बीच में दो-चार कपल छुपे हुए अपने प्यार की बाते करने में व्यस्त दिख रहे थे इसलिये हमने उन्हे तंग नहीं किया।

पार्क देखकर बाहर आये तो पार्क के ठीक बाहर बनी हुई दुकानों को देखकर विशाल बोला संदीप भाई जोर की भूख लगी है। पहले कुछ खाते है उसके बाद आगे बढ़ते है। ठीक है भाई चलो भूख तो मुझे भी लगी है सुबह से कई घन्टे हो गये है दे दना-दन घूमते हुए आगे बढ़ते जा रहे है। पेट में आज कुछ ड़ालना याद ही नहीं रहा। पहले पेट पूजा हो जाये उसके बाद काम दूजा होगा। हमने पहले तो एक भेल पूरी/पानी पूरी वाले को दो प्लेट बनाने को कहा। उसकी बनायी हुई पूरी बहुत स्वादिष्ट थी। विशाल ने एक अलग से बनवा ली और देखते ही देखते चट गया। 

पानी पूरी वाला बुजुर्ग स्थानीय नहीं लग रहा था जब उससे पूछा तो उसने कहा कि मैं पूर्वी उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूँ। हम लोग पश्चिम उत्तर प्रदेश के रहने वाले है। पूर्व और पश्चिम के लोगों के रहन-सहन व पहनावे आदि में इतना ज्यादा अन्तर है कि लगता ही नहीं कि दोनों इलाके एक ही प्रदेश के अन्तर्गत आते है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोग हमें बिहार से मिलते जुलते लगते है। क्योंकि उनकी बोलचाल का तरीका पहनावा, खान-पान आदि बहुत सी बाते बिहारी व्यवस्था से मेल खाती है। ऐसा नहीं है कि बिहार में पढे लिखे लोग नहीं है लेकिन जो है बहुत कम है। मैंने कही पढ़ा था कि बिहार से सबसे ज्यादा IAS हर साल चुने जाते है। फ़िर ऐसा क्या है जो बिहार इतना बदनाम है सारी करामात नेताओ कि है जो अपने फ़ायदे के लिये आम जनता को उल्लू बनाते आये है। सबसे बड़ी गलती जनता कि है जो इनके झांसे में फ़संती चली आ रही है।

पूरी पानी चट करने के बाद बड़ा-पाव जैसा कुछ खाने का विचार बना, जो पूरी वाले के बराबर वाली दुकान पर बनाया जा रहा था इसका नाम मिसल पाव या ऐसा ही कुछ था। इसमें सब्जी में नमकीन ड़ाल कर दी जाती है, जिसे पाव के साथ खाया जाता है। खाने में अच्छा लगता है। पहले एक प्लेट बोली गयी थी कि कही खायी ही ना जाये, लेकिन इसका स्वाद देखकर एक और प्लेट बनायी गयी। हम दोनों एक-एक प्लेट मिसल पाव चट कर गये। मिसल पाव से निपटने के बाद हमने वहाँ से गिरगाँव चौपाटी के लिये रुख कर दिया।

कमला नेहरु पार्क के ठीक सामने से ही बेस्ट की बस सेवा आरम्भ होती है जो बोम्बे के कई स्थानों पर लेकर जाती है यहाँ से चलने वाली लगभग हर बस गिरगाँव चौपाटी तक ढ़लान पर उतरती हुई जाती है। जैसे ही बस मालाबार हिल से नीचे समुन्द्र की ओर बढ़ती है तो जल्द ही महाराष्ट्र के राज्यपाल का निवास राजभवन जाने का मार्ग दर्शाने वाला बोर्ड़ दिखायी दिया। बसे राजभवन से पहले ही मुड़कर समुन्द्र की ओर गिरगाँव चौपाटी की ओर लौटने लगती है। जैसे ही हमारी बस समुन्द्र किनारे पहुँची तो विशाल बोला चलों संदीप भाई सीट से खड़े होकर दरवाजे तक पहुँचो क्योंकि गिरगाँव चौपाटी आने वाली है। चौपाटी देखकर मरीन ड्राइव से होते हुए चर्च गेट के पास नरीमन पॉइन्ट की ओर चले जायेंगे। (क्रमश:)
विशाखापटनम-श्रीशैल-नान्देड़-बोम्बे-माथेरान यात्रा के आंध्रप्रदेश इलाके की यात्रा के क्रमवार लिंक नीचे दिये गये है।
15. महाराष्ट्र के एक गाँव में शादी की तैयारियाँ।
16. महाराष्ट्र की ग्रामीण शादी का आँखों देखा वर्णन।
17. महाराष्ट्र के एक गाँव के खेत-खलिहान की यात्रा।
18. महाराष्ट्र के गाँव में संतरे के बाग की यात्रा।
19. नान्देड़ का श्रीसचखन्ड़ गुरुद्धारा
20. नान्देड़ से बोम्बे/नेरल तक की रेल यात्रा।
21. नेरल से माथेरान तक छोटी रेल (जिसे टॉय ट्रेन भी कहते है) की यात्रा।
22. माथेरान का खन्ड़ाला व एलेक्जेन्ड़र पॉइन्ट।
23. माथेरान की खतरनाक वन ट्री हिल पहाड़ी पर चढ़ने का रोमांच।
24. माथेरान का पिसरनाथ मन्दिर व सेरलेक झील।
25. माथेरान का इको पॉइन्ट व वापसी यात्रा।
26. माथेरान से बोम्बे वाया वसई रोड़ मुम्बई लोकल की भीड़भरी यात्रा।
विशाखापटनम-श्रीशैल-नान्देड़-बोम्बे-माथेरान यात्रा के बोम्बे शहर की यात्रा के क्रमवार लिंक नीचे दिये गये है।
27. सिद्धी विनायक मन्दिर व हाजी अली की कब्र/दरगाह
28. महालक्ष्मी मन्दिर व धकलेश्वर मन्दिर, पाताली हनुमान।
29. मुम्बई का बाबुलनाथ मन्दिर
30. मुम्बई का सुन्दरतम हैंगिग गार्ड़न जिसे फ़िरोजशाह पार्क भी कहते है।
31. कमला नेहरु पार्क व बोम्बे की बस सेवा बेस्ट की सवारी
32. गिरगाँव चौपाटी, मरीन ड्राइव व नरीमन पॉइन्ट बीच
33. बोम्बे का महल जैसा रेलवे का छत्रपति शिवाजी टर्मिनल
34. बोम्बे का गेटवे ऑफ़ इन्डिया व ताज होटल।
35. मुम्बई लोकल ट्रेन की पूरी जानकारी सहित यात्रा।
36. बोम्बे से दिल्ली तक की यात्रा का वर्णन

























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